गठबंधन सरकार और वजूद की चिंता

U प्रमोद भार्गव

भिन्न विचारधाराओं और मंतव्यों वाले राष्ट्रीय व क्षेत्रीय दलों को गठबंधन के रास्ते सत्ता पर काबिज होना तो आसान है लेकिन इस पर निष्कंटक चलते रहना कितना दुविधाजनक व दुखदायी है यह पीड़ा अब दलों का वजूद बचाए रखने की चिंता के रूप में नेताओं के मुख से फूटने लगी है। मनमोहन सिंह के बाद नई दिल्ली में संपन्न कांग्रेस के अधिवेशन में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को आखिर कहना पड़ा कि दूसरे दलों से गठबंधन की राजनीति करने का यह अर्थ कदापि नहीं है कि कांग्रेस अपना राजनैतिक अस्तित्व ही खो दे। लेकिन पार्टी नेताओं को यह बात कहते हुए यह ध्यान रखने की भी जरूरत है कि कोई भी दल गठबंधन की राजनीति के चलते अपना वजूद न तो किसी दल में विलय करना चाहता है और न ही उसे खो देना चाहता है। क्योंकि अपना स्वतंत्र और क्षेत्रीय अस्तित्व बनाए रखने में ही उनका अपना भविष्य सुरक्षित है।

खासतौर से कांग्रेस में  परमाणु करार को लेकर लाचारी और वजूद के संकट की स्थितियां निर्मित हुईं। नतीजतन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कहना पड़ा, अधूरे जनादेश के कारण मनमुताबिक कì