चीन शीघ्र ही क्वांरों का देश बन जाएगा
एल.एस.हरदेनिया

अगले कुछ वर्षों में चीन क्वारों और अविवाहितों का देश बन जाएगा। इस समय चीन में प्रत्येक सौ कन्याओं के विरुद्ध 120 लड़के जन्म ले रहे हैं। एक मोटे अनुमान के अनुसार अगले 15 वर्षों में चीन में तीन करोड़ ऐसे युवक हो जाएंगे जिन्हें देश में वधु प्राप्त नहीं हो पाएगी।

सदियों से भारत के समान चीन में भी लड़कियों से ज्यादा लड़कों को पसंद किया जाता रहा है। इसका कारण ग्रामीण क्षेत्रों में यह विश्वास है कि पुत्र अपने मां-बाप की बेहतर देखभाल करते हैं। इसके साथ ही जमीन-जायजाद के भी वे स्वाभाविक उत्तराधिकारी हैं।

चीन में भ्रूण हत्या आज से नहीं बरसों से चालू है। 1948 की क्रांति के बाद कम्यूनिस्ट पार्टी ने भ्रूण हत्या का कलंक पूरी तरह समाप्त कर दिया था। इस कारण 1980 के आते-आते चीन में स्त्री-पुरुष अनुपात संतुलित हो गया था तथा स्त्रियों और पुरुषों की संख्या लगभग बराबर हो गई थी।

इसी बीच चीन के शासकों ने एक परिवार पर एक संतान की नीति लागू की। चीन में कुछ अपवादों को छोड़कर एक परिवार पर एक संतान की नीति अभी भी लागू है। इस नीति के चलते जनसंख्या में पुन: असंतुलन हो गया है। जब से यह नीति लागू हुई है सभी दम्पत्ति तकनीक का सहारा लेकर यह पता लगा लेते हैं कि गर्भस्थ शिशु लड़का है या लड़की। यदि गर्भ में लड़की होती है तो उसकी भ्रूण हत्या कर दी जाती है। साधारणत: परिवारों में अब लड़कों को ही जन्मनें की इंजाजत दी जाती है। एक अमरीकी विशेषज्ञ के अनुसार सन् 2030 तक चीन का समाज अमेरिका के समान ही संपन्न हो जाएगा। यद्यपि चीन अमेरिका के समान संपन्न राष्ट्र नहीं बन पाएगा।

वधुओं की बढ़ती कमी के कारण चीन में अनेक प्रकार के अपराध पनप रहे हैं। उनमें सबसे मुख्य बढ़ता अपराध वेश्यावृत्ति का है। इस समय चीन के अनेक पड़ोसी देशों से लड़कियां चीन में लाई जा रही हैं। इन लड़कियों के कारण वेश्यावृत्ति इन क्षेत्रों में एक बड़े व्यापार का रुप लेती जा रही है।

बढ़ती हुई पुरुषों की संख्या से चीन में और अन्य प्रकार के अपराध विकसित हो सकते हैं। इन युवकों का उपयोग अनेक समाज विरोधी संगठन भी कर सकते हैं। ये युवक चीन में एक संगठित आक्रोश का कारण भी बन सकते हैं।

इस समय चीन कई गंभीर समस्याओं का सामना कर रहा है। चीन के लोग अपने श्रमिक व भूमि अधिकारों को लेकर उत्तेंजित हैं। इन मुद्दों को लेकर आक्रोश भरी आवाजें उठ रही हैं। इस तरह की विरोध की घटनाओं में 500 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वृद्धि का यह प्रतिशत 1994 से 2005 के बीच की अवधि का है। कुछ कंपनियां इन युवकों का अपनी गैर कानूनी गतिविधियों के लिए उपयोग कर रही हैं। इससे चीनी समाज में हिंसक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल रहा है।

चीन इन गंभीर समस्या को समझने लगा है और उससे निजात पाने के उपाय भी अपना रहा है। पूर्व में चीन का शासकीय मीडिया इस बात को कतई स्वीकार नहीं करता था कि उनके देश में कुछ भी गड़बड़ है। परंतु अब इस तरह की कमियों की चर्चा सार्वजनिक रुप से की जाने लगी है। अभी हाल में सरकारी जनसंख्या और परिवार आयोग ने यह स्वीकार किया कि चीन के युवकों को पत्नी पाने में कठिनाईयां हो रही हैं। चीन में स्त्री-पुरुष की आबादी में असंतुलन है। आयोग ने यह भी स्वीकार किया कि यह स्थिति चीन में सामाजिक असंतोष का कारण भी बन सकती है। इस स्थिति के मद्देनंजर चीन में यह गंभीर चिंतन चल रहा है कि क्या एक संतान की नीति में कुछ ढील दी जाए। यदि ऐसा किया जाता है तो इससे चीन की आबादी में पुन: संतुलन आ सकता है।

यदि चीन अपने इन क्वारे युवकों की समस्याओं की ओर ध्यान नहीं देता तो उसे एक विद्रोह जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। चीन इन मुद्दों पर पूर्व में भी विद्रोह का सामना कर चुका हैं। 19 वीं सदी के मध्य में चीन में इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में आक्रोश फैल गया था। उस समय चीन में बच्चियों की भ्रूण हत्या बड़े पैमाने पर हो रही थी। इससे बच्चियों की संख्या में भारी कमी आ गई। भारी संख्या में युवक क्वारे रहने लगे। इससे उनमें असंतोष उत्पन्न हुआ। ये युवक हथियारबंद होकर अपराध करने लगे। तत्कालीन राजशाही ने इस विद्रोह को दबाने की कोशिश की, परन्तु विद्रोह को पूरी तरह दबाने से दस वर्ष का समय लग गया। इससे चीन की स्थिति में कांफी अस्थिरता आ गई थी। परंत अंतत: इस विद्रोह से राजशाही की पकड़ कमजोर हो गई और उसके हाथ से सत्ता खिसक गई। आशा है वर्तमान शासक इतिहास के इस दौर से सबक सीखेंगे।

न सिंर्फ चीन बल्कि सबक तो भारत के शासकों को भी सीखना चाहिए। भारत में भी लड़कियों की आबादी में कमी आती जा रही है। पुत्र की चाहत इस कमी का प्रमुख कारण है। आए दिन आंकडे आ रहे हैं जिनसे यह स्पष्ट होता है कि समय के साथ यह समस्या गंभीर रुप धारण करती जा रही है। हरियाणा जैसे राज्य में इस अनुपात में भारी गिरावट आ गई है। पिछले कुछ माहों में समाचार पत्रों में ऐसी खबरें छपी हैं कि हरियाणा के युवक केरल से वधुयें ला रहे हैं। यदि इस स्थिति को शीघ्र नियंत्रित नहीं किया गया तो हमारी स्थिति भी चीन के समान हो जाएगी।

एल.एस.हरदेनिया