संस्करण: 15 दिसम्बर- 2014

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गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ बनाने की कवायद
सेक्युलर लोकतंत्र में पिछले दरवाजे से धर्मतंत्र कायम करने की कोशिश

       भगवदगीता - जिसे हिन्दुओं का पवित्र ग्रंथ कहा जाता है और जिसमें दरअसल अपने आत्मीयों के खिलाफ युद्ध करने को लेकर मन में दुविधा रखनेवाले अर्जुन को श्रीकष्ण द्वारा युद्ध लड़ने के लिए तैयार करता हुआ दिया गया उदबोधन शामिल है, - वह इन दिनों सूर्खियों में है। वजह देश की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज्य द्वारा किसी गीता महोत्सव में दिया गया वह वक्तव्य है जिसमें उन्होंने गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ बनाने की मांग कर डाली है।  

? वीरेन्द्र जैन


क्या सभी भारतीय रामजादे हैं?

        भारत में साम्राज्यवाद-विरोधी आंदोलन के दौरान, महात्मा गांधी देश के शीर्षतम नेता के रूप में उभरे और उन्हें राष्ट्रपिता का दर्जा दिया गया। गांधीजी के लिए राष्ट्रपिता शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले सुभाषचंद्र बोस ने सन् 1944 में अपने एक रेडियो भाषण में किया था। बाद में, बहुसंख्यक भारतीयों ने इस नामकरण को स्वीकार किया और अपनाया। कहने की आवश्यकता नहीं कि मुस्लिम और हिंदू सांप्रदायिक तत्वों ने गांधीजी को कभी राष्ट्रपिता नहीं माना। उन अधिकांश भारतीयों ने गांधीजी को राष्ट्रपिता के रूप में स्वीकार किया जो उनके नेतृत्व में चल रहे स्वाधीनता आंदोलन में भागीदार थे और जो देश के सभी लोगों को एक करने में गांधीजी की भूमिका से प्रभावित थे।

? राम पुनियानी


निरंजन ज्योति प्रकरण: भाषा की साम्प्रदायिकता के सवाल

     केन्द्र सरकार की मंत्री सुश्री निरंजन ज्योति द्वारा दिल्ली में दिये गये भाषण के शब्दों पर जो हंगामा पैदा हुआ, उसे सरकार के प्रचारकों और समर्थकों द्वारा इस तरह से पेश किया गया जैसे दुनिया के सबसे बड़े देश की सरकार चलाना बच्चों का खेल हो और किसी नादान बच्चे द्वारा की गयी गलती को वरिष्ठों द्वारा माफ कर देना चाहिए, क्योंकि उसने माफी मांग ली है। रोचक यह है कि इस मामले में देश के प्रधानमंत्री ने जिन्हें वरिष्ठजन कहा, उन्हें ही अन्य मामलों में पुराने पापियों की तरह चित्रित करते रहे हैं।

 ? वीरेन्द्र जैन


साजिश बनाम अंधविश्वासी आस

      बीजेपी सरकार बनने के बाद जिस तरह से धार्मिक आधार पर बयानबाजी और धर्मांतरण के कार्यक्रम चल रहे हैं वे कतई चैंकाने वाले नहीं हैं। चैंकाने वाली बात यह है कि इस साजिश को लोग समझ नहीं सके, और अब जबकि साजिश बेनकाब हो चुकी है तब सिवाए इंतजार के और कोई रास्ता नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि साजिशकर्ता समझ चुके हैं कि हम बेवकूफ हैं और जब अब तक साजिश को नहीं समझ सके तो आगे होने वाले उसके परिणामों को क्या समझेंगे? इसका प्रमाण सरकार ने संसद में तब दिया जब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ इस बात को स्वीकार कर रहा था कि हां हम धर्म परिवर्तन कराते हैं और सरकार विपक्ष की ओर से आरएसएस पर आरोप लगाए जाने का विरोध कर रही थी।

? विवेकानंद


सिर्फ एक सियासी खेल है धर्मांतरण

           गर देश की इतनी बड़ी आबादी में से लाख-दो लाख ईसाई या मुसलमान या फिर दोनों संप्रदाय के लोग अपना धर्म परिवर्तन करके हिंदू हो जाएं, तो उससे क्या हिंदू धर्म में कोई क्रांतिकारी परिवर्तन होने वाला है? जिस देश में साठ-सत्तर करोड़ से भी ज्यादा हिंदू रहते हों, उस देश में चंद लोगों के धर्म परिवर्तन कराने से धार्मिक क्रांति होने वाली नहीं है। इस बात को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके सहयोगी संगठनों को अच्छी तरह गांठ बांध लेनी चाहिए। आगरा में जिन ६० परिवारों ने पहले धर्म परिवर्तन किया और बाद में मुकरते हुए हिंदूत्ववादी संगठनों पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया, वह देश के माहौल को देखते हुए चिंताजनक है।

  ?  अशोक मिश्र


राजनैतिक प्रहसन में बदलती आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई

         ह राजनीति ही क्या जो सत्ता संघर्ष (युद्ध) में सब कुछ जायज़ न कर दे। पश्चिम बंगाल के लिए अगले वर्ष चुनाव होने हैं। केंद्र में सत्ता पर कब्ज़ा करने के बाद से भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं का उत्साह और आत्म विश्वास बढ़ा हुआ है। पश्चिम बंगाल में एक बड़ी रैली को सम्बोधित करते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने जहां एक तरफ ममता सरकार को उखाड़ फेंकने की बात कही, वहीं यह आरोप भी लगाया कि सारदा चिट फंड घोटाले के पैसों का उपयोग बर्दवान धमाके में किया गया है, बर्दवान धमाके में शामिल टीएमसी के नेताओं को बचाने के लिए एनआईए द्वारा की जा रही जांच में बाधा उत्पन्न की जा रही है।

 

? मसीहुद्दीन संजरी


छुआछूत का दानव अभी जिंदा है

      से भारतीय लोकतंत्र के विकास के लिहाज से शर्मनाक ही माना जाएगा कि संविधान द्वारा छुआ-छूत को समाप्त किए हुए भले ही 64 साल बीत हो गए हों, लेकिन भारतीय समाज में यह अब भी बड़े पैमाने पर जिंदा है। नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर)और अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मैरिलैंड द्वारा करीब 42हजार भारतीय घरों में किए गए सर्वे में यह तथ्य सामने आया है कि देष में हर चैथा व्याक्ति छुआछूत को किसी न किसी रूप में मानता है। सर्वे के मुताबिक मध्य प्रदेश के 53 फीसदी लोगों ने कहा है कि वे छुआछूत को मानते हैं। इस तरह छुआछूत को मानने वाले राज्यों में मध्य प्रदेश पूरे देश में शीर्ष पर है।

? राजीव कुमार यादव


मध्यप्रदेश में दलितों के साथ भेदभाव किया जाता है

     ध्यप्रदेश में पिछड़ी जातियों, विशेषकर दलितों और आदिवासियों के साथ बड़े पैमाने पर भेदभाव किया जा रहा है। इस भेदभाव से दलित सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। पिछड़ी जातियों, विशेषकर दलितों के संरक्षण के लिए काम करने वाली एक संस्था ने दलितों, विशेषकर दलित बच्चों के साथ होने वाले भेदभाव के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां एकत्रित की हैं। संस्था द्वारा एकत्रित जानकारियों के अनुसार समाज का ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जिसमें दलितों के साथ भेदभाव नहीं किया जाता हो। इन क्षेत्रों में शिक्षण संस्थाएं प्रमुख हैं।

 

? एल.एस.हरदेनिया


बलात्कार के संस्कारों की पड़ताल
 

        दिल्ली में टैक्सी से जा रही युवती के साथ उसी टैक्सी के ड्राइवर द्वारा कार में बलात्कार किये जाने की घटना के मीडिआ में आने से एक बार फिर देश शर्मसार है। पूरा देश इस घटना के बाद एक बार फिर उस "निर्भया" को स्मरण करने को विवश है जिसके बलिदान ने देश में पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक आक्रोश की लहर पैदा कर दी थी। देश की संसद में इसपर गंभीर चर्चाये हुयी और महिला उत्पीड़न के खिलाफ कठोर कानून बनाये गए। उन पर अमल भी हो रहा है। लेकिन प्रश्न यह है यह है कि कानून बनाने और उसका कठोरता से पालन करवाने पर भी ऐसी घटनाएं क्यों नहीं थम रही है? फिर भी बलात्कार क्यों हो रहे है?

? .पी.शर्मा


शिविरों में आपरेशन
स्वास्थ्य के अधिकार का सवाल कब हकीकत बनेगा ?

      भी छत्तीसगढ़ में शिविर में नसबन्दी आॅपरेशन के दौरान 13 महिलाओं की मौत का मामला ताजा ही था कि पंजाब के गुरूदासपुर में गुरूनानक मल्टीस्पेशालिटी अस्पताल में शिविर लगा कर किए गए मोतियाबिन्द के आपरेशन में कइयों के आंखों की रौशनी चली जाने की ख़बर आयी है। ऐसे 33पीडि़तों की बात प्रशासन ने मानी है,लेकिन अपुष्ट सूत्रों के मुताबिक साठ लोगों के आंखों की रौशनी चली गयी है। यह शिविर गैरसरकारी संस्था द्वारा लगाया गया था।

? अंजलि सिन्हा


गुमशुदा बच्चों का देश

        किसी भी देश ,समाज तथा परिवार के लिए बच्चे सबसे अमूल्य धरोहर होते है । बच्चों का बेहतर भविष्य बेहतर देश के निर्माण में सहायक होता है ।लेकिन अगर बच्चें ही परिवार ,सरकार और प्रसाशन की तरफ से उपेक्षित हो तो उस व्यवस्था को क्या कहा जाए आज भारत गुमशुदा ,लापता ,अपहृत बच्चों का देश बनता जा रहा है । 2013-14 में पूरे देश में लगभग 70000 बच्चे लापता हुए है जिनकों ढूँढने का कोई बड़ा सम्मिलित प्रयास अब तक नहीं किया गया है ।

? शशांक द्विवेदी


दमन नहीं, संवाद से सुलझेगी नक्सल समस्या

      भारत में नक्सलवाद का मौजूदा परिदृष्य दिन प्रति दिन अत्यन्त भयावह होता जा रहा है। छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने एक बार फिर से बड़ा हमला किया है। सोमवार को सुकमा जिले के चिंतागुफा क्षेत्र में सीआरपीएफ के गश्ती दल पर घात लगाकर किए गए नक्सली हमले में डिप्टी कमांडेंट और असिस्टेंट कमांडेंट समेत 14 जवान शहीद हो गए हैं और दर्जनों जवान शहीद घायल हुए हैं। नक्सली हिंसा की व्याधि छत्तीसगढ़ में तो लगता है कि लाइलाज हो चुकी है। बार-बार वही सुकमा और बार बार वही नक्सली हमला।

? सूर्यकान्त धस्माना


एम.पी.टी. एक्ट में संशोधन होगा महिलाओं के लिए घातक

        भारत में गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव हेतु न परिवार और समाज में पर्याप्त जागरूकता है और न सरकार सही मायनों में चिंतित जान पड़ती है। यहां आज भी बच्चे भगवान की देन माने जाते हैं और प्रायः दम्पतियों द्वारा गर्भाधान के पूर्व कोई मानसिक तैयारी नहीं की जाती और बाद में भी आवश्यक सावधानियां नहीं बरती जातीं। सरकारी योजनाओं का निर्माण भी भले ही स्त्री के हितों को ध्यान में रखकर किया गया हो, पर उनके क्रियान्वयन में यह हित-चिंतन कहीं दृष्टिगोचर नहीं होता। संभवतः इसीलिए भारत में मातृ मृत्यु दर के साथ-साथ नवजात शिशुओं के मृत्यु दर में निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है। और अब केन्द्र सरकार जिस तरह का बदलाव गर्भवती संबंधी नियमों में लाने जा रही है, उससे गर्भवती स्त्रियों का जीवन और भी खतरे में पड़ जाएगा।

? डा. गीता गुप्त


  15 दिसम्बर- 2014

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