संस्करण: 31दिसम्बर-2007

 घरेलू हिंसा को क्यों जायज मानें महिलाएँ

    मिथिलेश कुमार

    मैं आपसे एक साधारण सा सवाल पूछता हूं मान लें आप एक महिला हैं और आपके पति आपको बच्चों की ठीक से देखभाल न करने, खाना जला देने और पति से बहस करने पर आपकी पिटाई कर देते हैं। क्या आप इसे जायज मानते हैं? आपका जवाब क्या होगा? संभव है आप कहें कि यह तो सरासर अन्याय हैं और घरेलू हिंसा के दायरें में आता हैं लेकिन आपको इस बात पर आश्चर्य हो सकता है कि दुनिया भर की आधा से अधिक महिलाएं आपसे सहमत नहीं हैं और वे पति के हाथों इस तरह की पिटाई को सही ठहराती हैं। यह बात यूनिसेफ के एक सर्वेक्षण के नतीजों में बताई गई है।

संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय बाल आपात कोष :यूनिसेफ: ने महिलाओं की स्थिति पर कराए गए एक सर्वेक्षण के दौरान पाया कि दुनिया भर की करीब पचास फीसदी महिलाओं ने उपरोक्त परिस्थितियों में अपने पति की पिटाई को जायज बताया है। प्रोग्रेस फार चिल्ड्रेन नामक रिपोर्ट के इस सर्वे में 57 देशों की महिलाओं ने भाग लिया। तो क्या इससे यह कहा जा सकता हैं कि 'पति परमेश्वर' और 'जो पति कहे वो शिरोधार्थ कर ले' यह सिर्फ भारत की धाारणा नहीं है? पूरी दुनिया की महिलाएं आखिर कैसे इस तरह की अनुचित बातों को उचित ठहरा सकती है? सर्वे में बताया गया है कि 36 फीसदी महिलाओं ने पत्नी ध्दारा बच्चे की देखभाल न किए जाने पर पति के हाथों पिटाई को सही ठहराया है। इसी तरह 31 फीसदी महिलाओं ने पति को बताए बिना घर से बाहर जाने को पिटाई का कारण बता डाला है। आखिर क्या ये 21वीं सदी की महिलाएं है जो अपने सशक्तिकरण की बात करती हैं और अपनी आर्थिक संबल के लिए नौकरी करने अपने घर से दूर बस की सफर, ट्रेन की सफर करके जाती है।ये बडे मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी करने वाली महिलाएं है या दूर किसी गांव में स्वयं सहायता समूह के जरिए अपने को रोजगारपरक उद्यम से जोडने की जददोजहद में लगी महिलाएं है।

इस रिपोर्ट पर अगर भरोसा किया जाय तो संयुक्त राश्ट के वे सारे कार्यक्रम जो दुनियाभर में महिला सशक्तिकरण के नाम पर चलाए जा रहे है उन पर भी यह रिपोर्ट सवाल खडे करती है। आखिर इस मद में खर्च होने वाली राशि से किसका सशक्तिकरण हो रहा है? इस तरह की रिपोर्ट जारी कर आखिर यूनिसेफ अपने कौन से स्वार्थो की पूर्ति करना चाहता है? इस तरह की रिपोर्ट से महिलाओं की कौन सी छवि प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है?

इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर महिला सेक्स से इनकार कर दे तो भी यह उसके पति ध्दारा पिटाई का पर्याप्त कारण है। आखिर दुनिया भर में जिस दौर में महिलाओं को सर्वाधिक आजाद ख्याल का माना जा रहा है तब इस तरह की बातों को मानने के पीछे की तुक समझ से परे है। वे कौन सी 19 फीसदी महिलाए है जो सेक्स को पति की मर्जी की बात बताकर अपने अस्तित्व को नकार रही है। इनके सामाजिक, आर्थिक स्थितियों की विवेचना करने की जरूरत है। सर्वे में शामिल 15 से 39 वर्र्ष आयु वर्ग की महिलाओं के पास आखिर कौन सी मजबूरियां है कि वे अन्याय को न्याय कहने पर बाधय है। क्या दुनिया भर की औरतों की मानसिकता इस रिपोर्ट के जरिए समझी जा सकती है। आखिर इस सर्वे पर क्यों भरोसा किया जाय? क्या सिर्फ यह मान लेने से कि इन महिलाओं के पास ये सब सहने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, इसलिए यह सब सहन करने और इस तरह के जबाब देने को सही बताया जाना चाहिए?

 यूनिसेफ के सर्वे के इस रिपोर्ट के आने के ठीक कुछ समय पहले भारत में भी राश्टीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 3 में किए गए एक अधययन में भी इसी से मिलती जुलते नतीजे मिले थे। उसमे भी बताया गया था कि 40 फीसदी भारतीय महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं और करीब 54 फीसदी महिलाएं कुछ परिस्थितियों में इसे सही मानती है। सर्वेक्षण के आंकडों मे बताया गया कि 41 फीसदी महिलाएं सास ससुर की ठीक से देखभाल ठीक से न कर पाने को भी अपनी पिटाई को उचित कारण मानती हैं। इसमें यह भी निश्कर्श निकाला गया था कि 62 फीसदी भारतीय महिलाएं विवाह के शुरूआती दो वर्ष में ही शारीरिक या यौन उत्पीडन का शिकार होना पडता है। इस सर्वेक्षण में दिल्ली सहित 28 राज्यों की लगभग सवा लाख महिलाओं को शामिल किया गया था। 2005.06 में किए गए इस महान निष्कर्र्ष को 18 एजेंसियों ने मिलकर अंजाम दिया था।  यह सांख्यिकी और सर्वेक्षण् का ऐसा कमाल है जिसके जरिए आंकडों के खेल में इस तरह के नतीजे भी पाए जा सकते हैं। 

लेकिन आश्चर्य तो देखिए कि सर्वे के इस निष्कर्र्ष के समाचार के बाद एक अखबार ने जब अपने स्तर से 800 महिलाओं से यही सवाल पूछे तो लगभग सभी महिलाओं ने कहा कि पति के हाथों की पिटाई को जायज नही ठहराया जा सकता। अब आप ही सोचिए कि यूनिसेफ और राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के सर्वे आखिर क्या स्थिति बयान करना चाहते है। क्या इन आंकडो पर भरोसा किया जा सकता है? क्या इस तरह के सर्वे पर सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए?

मिथिलेश कुमार