संस्करण: 17दिसम्बर-2007

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आडवाणी के प्रधानमंत्री प्रत्याशी घोशित होने से जिन्ना जीत
इस बात को अभी बहुत दिन नहीं बीते जब श्री लालकृष्ण आडवाणी को भारतीय जनता पार्टी के अधयक्ष पद से अपमानित कर हटा दिया गया था। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ  नियंत्रित इस पार्टी में यह  >वीरेन्द्र जैन


            


     

आडवाणी तो वर्षो से उम्मीदवार हैं!
भारतीय जनता पार्टी और संघ परिवार के मोह में फंसे हमारे कई मीडियाकर्मी भाजपा और उसके नेताओं को मुफ्त में प्रचार देने का अवसर तलाशते रहते हैं। पार्टी भी इन नादान भोले मीडियाकर्मियों का अपने हित में खुलकर दोहन >विनय दीक्षित


प्राकृतिक संसाधनों की घटती उपलब्धत
देश में आज़ादी के बाद दूर-दृष्टि का बहाना लेते हुये जो विशाल जलाशय सिंचाई, विद्युत और पेयजल की सुविधा  के लिये हजारों एकड़ वन और सैकड़ों बस्तियों को उजाड़कर बनाये गये थे वे अब दम तोड़ रहे हैं। केन्द्रीय जल आयोग ने इन तालाबों में   >प्रमोद भार्गव


 

      

 


       

     


विकृत शिक्षा व्यवस्था और ज्ञान आयोग
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से ही भारतीय शिक्षण व्यवस्था बुध्दिजीवियों की आलोचना की शिकार होती रही है। हालांकि सरकारी स्तर पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार के कई प्रयास किए गए, किंतु उनका अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हुआ।इसके लिये >महेश बाग़ी


आज की धर्म गंगाएँ-चुनावों के निमित्त
आपके अपने गाँव, नगर, बस्ती या शहर में भी इन दिनों किसी न किसी चौक, मैदान, मंदिर या सार्वजनिक सभागार या कि भवन में एक न एक धार्मगंगा बहने लगी होगी। वह ज्ञान गंगा भी हो सकती है  >बालकवि बैरागी


            

              


    

     


क्या सुप्रीम कोर्ट का आदेष रोक पायेगा रैगिंग ? नवागत जूनियर छात्रों के साथ अभद्रता
सीनियर का दायित्व है कि वह परिवार और समाज में अपने से जूनियर व्यक्ति के हितों का संरक्षण करे। उसका यह भी कत्तव्य होता है कि वह >राजेन्द्र जोशी


आतंकवाद का साया कैसे हटे
आतंकवाद आज हमारे देश की राष्ट्रीय व्यथा बन गया है। इसके आतंक से सारा देश सकते में हैं। जहाँ भी, ज़रा मौका मिलता है, जेहादी उन्माद वाले आतंकी संगठन अपने एजेंटों के माधयम से, एक से एक गम्भीर विस्फोट करके लाशों पर लाशें गिरा रहे हैं। आतंकवाद से निर्देशित घटनाएँ  >डॉ. देवप्रकाश खन्ना


       

            

 


 

     


पुरुषों से ज्यादा महिलायें भोग रही हैं एड्स की पीड़ा
दुनिया की कोई भी विपत्ति हो उसका खामियाजा औरत को ही भुगतना पड़ता है। विपत्ति चाहे साम्प्रदायिक दंगे की हो या युध्द की भूकंप की या बाढ़ की। इसी तरह संक्रामक रोगों के दौरान महिलाएँ स्वयं तो उसका शिकार होती ही हैं,  >एल.एस.हरदेनिया


निरन्तर जारी रहे: एड्स नियंत्रण-अभियान
यह सर्वविदित है कि भारत में एड्स-पीड़ितों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। इसका शिकार कोई वर्ग विशेष नहीं है, अपितु वे सभी व्यक्ति इस घातक बीमारी की चपेट में आ रहे हैं, जो इसके बारे में वांछनीय  >डॉ. गीता गुप्त


        

        


   

 


'विकास या विनाश : लगातार बढ़ता प्रदूषण'
आख़िरकार बाली के सम्मेलन में भी अमेरिका ने साफ़ कर दिया कि वह कार्बन डॉय ऑक्साइड के उत्सर्जन में कटौती की किसी बात को स्वीकार करने तैयार नहीं हैं, इस तरह बाली सम्मेलन बीच में ही अधूरा प्रयास बन कर रह गया  >डॉ. सुनील शर्मा


दिल्ली में बालाएँ खाना नहीं शराब परोसेंगी
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में महिलाओं को रेस्तराओं में शराब परोसने की इजाजत दे दी है। इससे पूर्व दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा ऐसा ही फैसला दिया गया था जिसे सुप्रीम कोर्ट ने सही >दुलार बाबू ठाकुर


   


                     

                         


स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास
देश की प्रगति के सूचक क्या हों इसको लेकर बहस हो सकती है। कई लोगों के लिए चढ़ता शेयर बाज़ार हो सकता है तो किसी के लिए देश की आर्थिक विकास दर प्रगति का मापक यंत्र हो सकता है। लेकिन सच्चाई यह है कि सही >अखिलेश सोलंक


शिक्षा का संगठित हिंसाचार और निहत्थे होते मासूम
यदि इस सरकार और सरकारों की, जनप्रतिनिधियों, समाज सेवियों, शिक्षकों की संवेदनाएँ भरी न हो तो शायद इस पर कुछ बात हो सकती है कि होमवर्क के विकराल दैत्य के समक्ष  >जीवन सिंह ठाकुर


                  


                        

                        


अब हँसी बिकने लगी है-हँसी के बहाने चले हैं करोड़ों कमाने
बहुल पहले कहा जाता था-''हँसना स्वास्थ्य के लिए अच्छा है खुलकर हँसिए भई। हँसने के पैसे थोड़े ही लगते हैं'' परन्तु आजकल तो हँसने हँसाने के ही लोग करोड़ों कमा रहे हैं। आजकल तो लोग >डॉ. राजश्री रावत ''राज''


 
      17 fnlacj 2007
 

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