संस्करण: 9 जून-2014

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यूपीए सरकार की नीतियां क्यों नहीं बदलते मोदी

     बीजेपी की सरकार आते ही और नरेद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही देश में खुशियों की बहार आ जाएगी। लोकसभा चुनाव से पहले और प्रचार के दौरान ऐसा दिखाने का जमकर प्रयास किया गया। लोगों ने इस पर भरोसा भी किया और बीजेपी को ऐतिहासिक जीत दिलाई। निश्चित रूप से इसमें मोदी की बड़ी या यूं कहें कि उनकी ही पूरी भूमिका है। महंगाई को लेकर जितना हो सका यूपीए सरकार को कोसा गया। कहा जाता था कि यूपीए सरकार की नीतियों के कारण ही महंगाई सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती जा रही है। अब बीजेपी की सरकार भी आ गई है और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री भी बन गए हैं लेकिन नीतियां वही हैं जो यूपीए सरकार ने लागू की थी। क्या माना जाए...?   

? विवेकानंद


इस बहुमत में निहित

चुनौतियां और देशहित

        पिछले दिनों हुये आम चुनाव और चुनावों के परिणामस्वरूप गठित सरकार से देश के विशाल बहुमत की उम्मीदें बहुत अधिक हैं क्योंकि अतिशय प्रचार के खाद पानी से जो सपने बोये गये हैं उनसे उम्मीदों की फसल बहुत लहलहा रही है। आम जनता को लगता है कि भाजपा और उसके सहयोगी दलों को मिला आशा से अधिक बहुमत आनन फानन में सारे वादे पूरे कर के दिखा देगा। इसके विपरीत सच यह है कि लोकतंत्र में सरकारों की सफलताएं न केवल चुनावों से मिले बहुमत अपितु जनता की सक्रिय भागीदारी से ही सम्भव हो पाती हैं। च

?

वीरेन्द्र जैन


मोदी और संघ परिवार का विकल्प क्या होगा

     माम पूर्वानुमानों को धता बताते हुए भाजपा को बहुमत मिला है, नि:संदेह इस बार के चुनाव परिणाम अपने साथ ऐसे बदलाव लेकर आया है जो भारत में नये युग के वाहक होंगें। स्वामी रामदेव के शब्दों में कहें तो यह ''व्यवस्था परिवर्तन'' है।

 ? जावेद अनीस


समाजवादी पार्टी के लिए आत्ममंथन का समय

      लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की करारी हार के कारणों की समीक्षा और आम जनता के बीच सपा सरकार की उपलब्धियां गिनाने के लिए पार्टी द्वारा पूरे उत्तर प्रदे में जिला स्तरीय बैठकों का आयोजन अभी हाल ही में किया गया। लेकिन ये समीक्षा बैठकें जिस तरह से न केवल बेनतीजा रहीं बल्कि बैठक के दौरान ही नेताओं-कार्यकर्ताओं द्वारा आपसी जूतमपैजार और आरोप-प्रत्यारोप से जिस अराजकता का परिचय दिया गया, वह यह साबित करता है कि समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता और नेता ालीनता और सभ्यता की लक्ष्मण रेखा को लांघ चुके हैं।

? हरेराम मिश्र


कम्पनियों के तर्ज पर चलते राजनीतिक दल

             ताजा सम्पन्न लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की आश्चर्यजनक सफलता ने अन्य राजनीतिक दलों तथा चुनाव विश्लेषकों को यह सोचने पर मजबूर किया कि बिना किसी खास मुद्दे के, अंधाधुंध पैसे तथा दक्ष व्यावसायिक प्रबन्धन से भी चुनावों को जीता जा सकता है। देश के लिए यह नए तरह का अनुभव था। इस प्रबन्धकीय कौशल के आगे देश की सबसे बड़ी-बूढ़ी और सर्वाधिक समय तक सत्ता में रहने वाली काँग्रेस पार्टी भी टिक नहीं सकी। भाजपा और कॉग्रेस के अलावा अन्य किसी दल की इतनी क्षमता ही नहीं है कि वह राष्ट्रीय स्तर पर इतना अकूत चंदा इकठ्ठा कर सके लेकिन एक चिंतनीय संभावना यह दिख रही है कि क्षेत्रीय कहे जाने वाले राजनीतिक दल भी लोकसभा चुनाव का यही प्रयोग विधानसभा चुनावों में आजमा सकते हैं।

 ?  सुनील अमर


म्यांमार के मुसलमान नारकीय जीवन बिता रहे हैं

           दुनिया के अनेक मुस्लिम मुल्कों में भाड़ी उथलपुथल मची हुई है। इस उथलपुथल के चलते, इन देशों में भारी खूनखराबा हो रहा है। निर्दोष व्यक्ति मारे जा रहे हैं।

             जहां एक ओर ऐसी स्थिति है वहीं कुछ देशों में, जहां मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं, वहां उन्हें तरह-तरह की ज्यादतियां और मुश्किलें सहना पड़ रही हैं। ऐसा ही एक देश म्यांमार अर्थात बर्मा है। 

? एल.एस.हरदेनिया


आत्ममुग्धता का सम्मोहन

अपना प्रोफाइल फोटो अपडेट किया क्या ?

      दिल्ली के एक नौजवान को कुछ खुराफाती व्यवहार से सोशल मीडिया में चर्चा बनने का आइडिया आया। उसने अपने कमरे में वीडियो कैमरा लगा कर पिता को अन्दर बुलाया और कहा कि उसकी गर्लफ्रेण्ड गर्भवती हुई है। पिता ने बेटे की धुनाई कर दी। बाद में बेटे ने योजना के मुताबिक उसे यूटयूब पर अपलोड कर दिया। लड़के का अन्दाज़ा एकदम सही निकला। वह क्लिप यूटयूब पर हिट हो गयी। एक हफ्ते के अन्दर आठ लाख से ज्यादा लोगों ने इस वीडियो को देखा तथा इसी समय दो हजार से अधिक लोगों ने 'लाइक' किया।

?  अंजलि सिन्हा


'वायदा' के खेल पर रोक की जरुरत

     केंद्र की नई सरकार और उसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने सबसे बड़ी और मुंहबाए खड़ी चुनौती 'मंहगाई' है। वैसे तो वैश्विक स्तर पर रुपए की मजबूती से सोना और व्यावसायिक गैस सिलेण्डरों के दाम घटे हैं, लेकिन आम आदमी को राहत तब मिलेगी जब खाद्य वस्तुओं के दाम घटें। ऐसी आम धारणा है कि इन वस्तुओं के दाम इसलिए बढ़ते रहते हैं, क्योंकि 'वायदा कारोबार' के बहाने कृषि उत्पादों पर बड़े पैमाने पर सट्टा खेला जाता है।

 

? प्रमोद भार्गव


औरत के खिलाफ यह अपराध कब खत्म होगा

        सोलह दिसंबर 2012 को दिल्ली में हुए सामूहिक बलात्कार कांड के बाद सरकार द्वारा यौन हिंसा संबंधी कानूनों को और सख्त करने के बाद उम्मीद बंधी थी कि देश में इस तरह की वहशियाना हरकतों पर कुछ लगाम लगेगी, लेकिन यह कानून भी अपराधियों में खौफ पैदा नहीं कर पा रहे हैं। शायद ही कोई ऐसा दिन जाता है, जब किसी महिला के साथ इस तरह की ज्यादती की खबर ना आती हो। मीडिया में पुराने मामले पर चर्चा खत्म नहीं होती, कि नया मामला सामने आ जाता है। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के कटरा सादतगंज गांव का है, जहां कुछ दरिंदों ने दो दलित नाबालिग लड़कियों से सामूहिक बलात्कार के बाद उनकी बर्बर हत्या कर दी।        

? जाहिद खान


विनाश का पर्याय बनती

सडकें

      विकास का प्रतीक मानी जाने वाली सडकें आज विनाश का पर्याय बनती जा रही है। ऐसा कोई भी दिन नहीं गुजरता जिस दिन देश के किसी भी भाग में सडक हादसा न हो और लोगों को जान से हाथ धोना न पडे। अधिकांशत: सडक दुर्घटनाओं का शिकार होने वाले व्यक्ति आम जन होते है। इसलिए वे अखबारों की सुर्खियां नहीं बन पाते और इसीलिए उन दुर्घटनाओं पर लोगों का ध्यान भी नहीं जाता। लेकिन नवनिर्वाचित केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे के निधन ने एक बार फिर देश में तेजी से बढ़ रहीं सड़क दुर्घटनाओं और सुरक्षित यातायात की ओर देश का धयान खींचा है।

? सुनील तिवारी


14 जून विश्व रक्तदान दिवस पर विशेष

रक्त-दान है सचमुच महादान

        क्त जीवन का आधार है। शरीर में रक्त की कमी से गंभीर बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं। एक अनुमान के अनुसार,प्रति वर्ष रक्ताल्पता के कारण केवल भारत में ही 15 लाख लोग मौत के मुंह में चले जाते हैं। हर तीसरे सेकेण्ड में यहां किसी न किसी को रक्त की आवश्यकता पड़ती है और अस्पतालों में भर्ती हर दस रोगी में से एक रक्त के अभाव से ग्रस्त होता है।  

? डॉ. गीता गुप्त


मानवता के लिए घातक है-गिध्दों का विलुप्त होना !

      प्रकृति ने मानव के द्वारा फैलाई गई गंदगी को साफ करने का कार्य तीन जीवों के हवाले किया है। और वो तीन जीव हैं- गिध्द, कौआ और कुत्ता! ये तीनों प्राणी अनवरत रूप कुदरती सफाईकर्मी की भुमिका का निर्वाह करते रहें है।जहॉ कुत्ता और कौआ मनुष्यों द्वारा फैलाई गई खाद्यान्न सामग्री को चट कर उसके सड़ने से फैलने वाले रोगों से बचाते हैं वहीं गिध्द मरने वाले पशुओं को खाकर वातावरण को दूषित होने से तो बचाते ही हैं,साथ ही प्राकुतिक रूप से भोजन चक्र में अह्म भुमिका भी निभाते है।

? डॉ. सुनील शर्मा


  9 जून-2014

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