संस्करण: 9 जनवरी- 2012

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अन्ना हजारे का

कांट्रेक्टो एपाइंटमेंट समाप्त

           ई महीनों तक समाचार पत्रों तथा इलेक्ट्रानिक मीडिया की सुर्खियों में छाये रहने के बाद आखिर अपने घर लौट गये, चुपचाप, बगैर किसी शोर शराबे के  दुर्र्भाग्यवश इस देश के लोग जिनमें रिक्शाचालक से ले कर प्रधान मंत्री पद का स्वप्न देखने वाले प्रथम पंक्ति के राजनेता तक अपनी बुध्दि पर कम तथा विकीलीक्स के खुलासों पर अधिक भरोसा करते हैं तो संभव है भविष्य में (जिसकी अवधि या समय सीमा अभी बताना संभव नहीं है) विकीलीक्स यह खुलासा करे कि बाबा रामदेव तथा अन्ना हजारे दोनों ही एपीसोड राजनेताओं द्वारा प्रायोजित किये गये थे    

  ?  मोकर्रम खान


अन्ना के निशाने पर कौन

कांग्रेस या भ्रष्टाचार

        न्ना हजारे ने लोकपाल बिल की मांग को लेकर न सिर्फ देश के लोगों को उद्वेलित किया बल्कि विदेशी मीडिया में भी छाए रहे। होना भी चाहिए था क्योंकि आज भ्रष्टाचार से भारत का प्रत्येक व्यक्ति न सिर्फ त्रस्त है वरन तंग भी आ चुका है। अन्ना ने आंदोलन किया, इस आंदोलन की आंच राजनैतिक दलों से होती हुई संसद तक पहुची। सरकार ने अपना बिल पेश किया, सदन के अंदर विरोध और समर्थन की जद्दोजहद हुई जो जो शहर, गांवों की गलियों में चर्चा के रूप में अभी भी चल रही है। बहरहाल इस सब के बावजूद अब यह तो लगभग तय हो गया है कि लोकपाल बिल पास होगा और हो सकता है कि वह सर्वमान्य रूप धारण कर ले।

? अनवर सिद्दीकी


सिविल सोसायटी का सच

      क मशहूर कहावत है कि काठ की हांडी एक बार ही चढ़ती है। टीम अन्ना ने इस कहावत को चरितार्थ कर दिया। वे भ्रष्टाचार  से लड़ना चाहते थे, पर तोप का मुंह सरकार पर कर दिया और कांग्रेस को कोसने लगे। जो लोग बड़े आंदोलन कर सरकार से लड़ चुके हैं, उन्हें पहले ही दिन लग गया कि टीम अन्ना रास्ते से भटक गई है। लोगों को यह अहसास होने लगा कि वे जिस व्यक्ति में गांधी की तलाश कर रहे हैं,उसके आसपास के लोग देश को ही सही दिशा नहीं देना चाहते,बल्कि अपनी दमित भावनाओं को पूरा करना चाहते हैं।

? महेश बाग़ी


जाति समुदायों के संगठनों की हैसियत

          द्यपि हमने अपने संविधान में रंग धर्म लिंग जाति भाषा क्षेत्र आदि के भेद भाव के बिना सभी नागरिकों को समान अधिकार का वादा किया हुआ है पर इसके साथ सामाजिक आर्थिक रूप से दलित व पिछड़ी जातियों को समान स्तर पर लाने की दृष्टि से कुछ ऐसे उपाय भी किये हैं जिससे वे समान धरातल पर खड़े हो सकें। इसके लिए न केवल शिक्षा आदि में कुछ विशेष प्रोत्साहन ही दिये हैं अपितु कई क्षेत्रों में आरक्षण देकर भी उन्हें समान स्तर देने का प्रयास किया है।

? वीरेन्द्र जैन


'हरेकृष्ण आन्दोलन' के नए मुरीद ! 

गीता विवाद को लेकर चन्द बातें

         सुदूर साइबेरिया के नगर टोम्स्क की अदालत में जारी एक कार्रवाई ने पिछले दिनों गजब का करिश्मा दिखाया। संसद जो निर्वतमान वर्ष में विभिन्न कारणों से बाधित होती रही है,वहां पक्ष विपक्ष के सांसद उपरोक्त कार्रवाई को लेकर अचानक एक दूसरे के सुर में सुर मिलाते दिखे। सदस्यों की उत्तेजना को देखते हुए विदेशमंत्री एस एम कृष्णा ने सदन को आश्वासन दिया कि सरकार वहां की घटनाओं पर नज़र रखे हुए है,यहां तक कि मामले की सफाई देने के लिए  दिल्ली में तैनात रूस के राजदूत ही नहीं बल्कि राजधानी मास्को में रूसी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता को उतरना पड़ा।

 ? सुभाष गाताड़े


संदर्भ : अल्पसंख्यकों को केन्द्रीय नौकरियों व शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण

सही दिशा में, देर से उठाया गया कदम  

           मारा मुल्क जब आजाद हुआ और संविधान निर्माण की प्रक्रिया चल रही थी, उस वक्त हमारे रहनुमाओं ने एक ऐसे समाज का ख्वाब देखा, जो सामाजिक भेद-भाव और गैर बराबरी से आजाद हो, जहां ऊंच-नीच का कोई फर्क न हो, किसी के साथ नाइंसाफी न हो। इन मसाएल से निपटने के लिए संविधान में बकायदा उपबंध किए गए। जाहिर है,हमारे संविधान में मौजूद उद्देश्यिका,मूल अधिकार और नीति निर्देशक तत्व इन्हीं विचारों से अनुप्राण्श्नित हैं। लेकिन अफसोसनाक है कि आजादी के 63 साल गुजर जाने के बावजूद हम सामाजिक अन्याय, भेद-भाव और असमानता जैसी बुराईयां खत्म नहीं कर पाए।

? जाहिद खान


माफी मांगने वाले पा रहे हैं

मीसाबंदी पेंशन

       ध्यप्रदेश की भाजपाई सरकार ने मीसाबंदियों को 15 हजार रूपये महीने की पेन्शन देने का फैसला किया। वैसे मीसाबंदियों को पेन्शन देने का फैसला पहले हो चुका था परंतु अभी हाल में पेन्शन की रकम में बढ़ौत्री कर उसे 15 हजार रू. महीने कर दिया है।  मीसाबंदियों की पेन्शन को लेकर शोरगुल न मचे इसलिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की पेन्शन में बढ़ौत्री का निर्णय पहले लिया गया। मीसाबंदियों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियो के बराबर पेन्शन देने के निर्णय की तीव्र आलोचना हो रही है। बहस न सिर्फ पेन्शन की रकम को लेकर छिड़ी है वरन् बहस का मुख्य मुद्दा यह भी है कि क्या मीसाबंदियों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की तरह हीरो माना जा सकता है।

? एल.एस.हरदेनिया


अवैध गतिविधियों में लिप्त 'पावरफुलों' पर कार्रवाई होगी

मुख्यमंत्री की धमकी का अब देखना है असर

        ध्यप्रदेश में पावरफुल लोगों को भी बख्शा नहीं जायगा अगर वे अवैध गतिविधियों में लिप्त हैं तो। यह धमकी हाल ही में प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री जी ने कलेक्टर्स के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग में दी। मुख्यमंत्री जी के इस नेक इरादे से प्रदेश की आम जनता इसलिए भी प्रसन्न है क्योंकि उसे लग रहा है कि अब उनके मुहल्ले के दादाओं की भी खैर नहीं रहेगी। पावरफुल शब्द इतना जबरदस्त मायने रखता है कि उसमें किसी भी क्षेत्र का पावरफुल व्यक्ति हो, चाहे वह सामाजिक क्षेत्र का हो, राजनैतिक या प्रशासनिक क्षेत्र का हो या व्यावसायिक क्षेत्र का ही क्यों न हो, लपेटे में आ ही जायगा।

 

? राजेन्द्र जोशी


म.प्र. गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम-

जिसमें नया कुछ नहीं 

     म.प्र. गौवंश वध प्रतिषेध(संशोधन) अधिनियम 2010 पर महामहिम की मुहर को प्रदेश की बीजेपी सरकार अपनी गौरक्षा नीति की जीत के रूप में प्रचारित कर रही है। लेकिन केवल इस अधिनियम के लागू होने से प्रदेश में लगातार बढ़ रहे अवैध गौवंश परिवहन के थमने की संभावना नजर नहीं आती है। क्योंकि इस अधिनियम में गौवंश के वधा और अवैध परिवहन मेंसिवाए सजा बढ़ाने के अतिरिक्त नया कुछ भी नहीं है। लगभग सारे प्रावधानों में यदि,परन्तु की गुजांइश बॉकीं है। जिससे आरोपियों को राहत के रास्ते खुलेंगें। जैसे कि धारा-2,(ङ,ख)में उल्लेखित परिवाहक अर्थात परिवहन में शामिल वाहन स्वामी या उसका सहायक इस यदि का फायदा उठाने से नहीं चूॅकेगें कि वो इस बात से अंजान थे।

? डॉ. सुनील शर्मा


पारदर्शी हो राजनीतिक दलों की
प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया

    त्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव घोषित होने से कई महीने पहले ही सत्तारुढ़ बहुजन समाज पार्टी तथा इसके कुछ दिनों बाद मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने अपने सभी प्रत्याशियों की घोषणा कर दी थी। ऐसा करने के पीछे इन दोनों राज्य स्तरीय पार्टियों का मंतव्य निश्चित ही अपने विरोधियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना ही रहा होगा लेकिन सच्चाई यह है कि ये दोनों पार्टियाँ अभी भी अपना प्रत्याशी चयन पूरा नहीं कर पाई हैं और रोज-ब-रोज इनकी सूची बदली जा रही है। राज्य में मौजूद दोनों राष्ट्रीय पार्टियॉ-कॉग्रेस और भारतीय जनता पार्टी तो खैर अभी तक पहली सूची को ही अंतिम रुप नहीं दे पाई हैं।

 

? सुनील अमर


(नववर्ष पर विशेष आलेख)

नवीनता को स्वीकार करने का साहस

     र्ष 2011 की विदाई हो चुकी है और हम नववर्ष 2012 में प्रवेश कर चुके हैं। नववर्ष अर्थात नवीनता लेकर आने वाला समय। इसका आशय सिर्फ केलेण्डर बदलने तक सीमित नही बल्कि संपूर्ण नवीनता को खुले दिल से स्वीकार करने तक व्यापक है। यह संपूर्ण नवीनता भौतिक नवीनता नही बल्कि वैचारिक नवीनता है जो भारत के सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, आधयात्मिक और बौध्दिक परिप्रेक्ष्य में वांछित है। परिवर्तन प्रकृति का नियम है और उसे स्वीकार करने को हम विवश है। यह सच है कि प्रत्येक विषाद परिवर्तन को जन्म देता है और परिवर्तन ही नवीनता का दूसरा नाम है।

? ओ. पी.शर्मा


खतरे के मोबाइल

    मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल को भारत में आधुनिक हो जाने के पर्याय के रूप में देखा जा रहा है। इस कारण मोबाइल के नवीनतम मॉडलों का उपयोग दिखावे के रूप में भी हो रहा है। लेकिन मोबाइल पर मनुष्य की निर्भरता और इससे फैलने वाला विकिरण कितना खतरनाक है,यह ताजा शोधों से पता चला है। इस बाबत अंतर मंत्रालयीन समिति ने इससे निकलने वाली विद्युत चुंबकीय विकिरण के असर को मानव शरीर के लिए घातक बताया है। इसीलिए अब भारत सरकार ने भी मोबाइल कंपनियों के लिए यह जरूरी कर दिया है कि वे हैंडसेट में विकिरण का स्तर देखने की सुविधा उपभोक्ता को दें।

 

? पारूल भार्गव


  9 जनवरी- 2012

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