संस्करण: 9 जनवरी- 2012

अवैध गतिविधियों में लिप्त 'पावरफुलं' पर कार्रवाई होगी

मुख्यमंत्री की धमकी का अब देखना है असर

 

? राजेन्द्र जोशी

                 मध्यप्रदेश में पावरफुल लोगों को भी बख्शा नहीं जायगा अगर वे अवैध गतिविधियों में लिप्त हैं तो। यह धमकी हाल ही में प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री जी ने कलेक्टर्स के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग में दी। मुख्यमंत्री जी के इस नेक इरादे से प्रदेश की आम जनता इसलिए भी प्रसन्न है क्योंकि उसे लग रहा है कि अब उनके मुहल्ले के दादाओं की भी खैर नहीं रहेगी। पावरफुल शब्द इतना जबरदस्त मायने रखता है कि उसमें किसी भी क्षेत्र का पावरफुल व्यक्ति हो, चाहे वह सामाजिक क्षेत्र का हो, राजनैतिक या प्रशासनिक क्षेत्र का हो या व्यावसायिक क्षेत्र का ही क्यों न हो, लपेटे में आ ही जायगा। अब देखना है अवैध गतिविधियों में संलग्न लोगों पर मुख्यमंत्री की धौंस का क्या हो और कितना असर पड़ता है।

               माननीय मुख्यमंत्री जी की 'पावरफुल' शब्द की क्या परिभाषा है यह तो वे ही बता सकते है-किंतु कलेक्टरों को जिनके खिलाफ कार्यवाही करने के निर्देश दिए गये हैं वह उनके खिलाफ है जो अवैध गतिविधियों में लिप्त हैं। वैसे आम जनता की सोच में पावरफुल की परिभाषा कई रूपों में है। आम जनता उसे पावरफुल ही तो मानती है जो चौराहे पर लालबत्ती को ठेंगा दिखाकरचौराहा पार कर जाता है और बिना हेलमेट लगाये हेलमेट लगाने के कानून की धज्जियां उड़ाकर बाइक पर तीन सवारी बैठाकर तेजी से हार्न बजाते हुए सर्र से निकल जाता है। बेचारा ट्रॉफिक का सिपाही कार्यवाही करने का मन होते हुए भी मन मसोसकर चुपचाप खड़ा देखता रह जाता है।

               दफ्तरों में सर्वाधिक पावरफुल वह बाबू भी मान जाता है जो बार-बार तबादला होने पर उसे रूकवा लेता है। कई पावरफुल बाबूजी तो ऐसे भी देखे गये हैं जो वर्षों से एक ही पद पर एक ही तरह का काम करते-करते सेवा निवृत्ति के कगार तक पहुंच गये हैं। इससे भी बड़ा पावरफुल तो वह माना जा रहा है जो चालीस साल तक शासन की सेवा करने के बाद सेवानिवृत्ति पश्चात फिर से नियुक्ति पा जाता है। पूरे के पूरे राजधानी के दफ्तर पावरफूल बाबूजियों की मिल्कियत बन गये हैं। तबादला की हांडी तो उन्हीं निरीह, सीधे-सादे और सिफारिश-रहित कर्मचारियों के मत्थे पर ही फूटती है जो जिला तहसील के छोटे-छोटे दफ्तरों में पदस्थ हैं।

               ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा पावरफुल का होने का सेहरा उन्हीं के सिर पर बंधता है जिसके पास खेती किसानी भरपूर होती है, खूब पैसा है और जो पटेल या जमीदार है। अब तो गांव-गांव में इतने ज्यादा राजनैतिक पद हो गये हैं कि उन पदों पर आसीन पंच,सरपंच, समिति-सदस्य या अन्य कमेटियों के माननीय सदस्यगण भी पावरफुल होने की श्रेणी में आ गये हैं। पावरफुलों की कई श्रेणियां हैं। इन श्रेणियों में विभाजित विभिन्न व्यक्तियों का जिस तरह से उत्पात बढ़ता जा रहा है,वह भी कम नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में धनबल वालों का कुछ ज्यादा ही पावर देखा जा रहा है। अपने धनबल पर, राजनैतिक पदों पर भी वे ही काबिज हो जाया करते हैं जो धन लुटाना जानते हैं। ऐसे ही लोग पंचायत, सहकारी संस्थाओं और विभिन्न स्तर की समितियों के चुनावों में अपने धनबली होने की दम पर उम्मीदवारी हासिल कर लेते हैं और वोटों को खरीदकर जीत जाया करते हैं। पूरा का पूरा ग्रामीण क्षेत्र का प्रजातंत्र ऐसे ही धुरंधरों से भरा पड़ा है। इनमें बाहुबलियों की बढ़ती तादाद भी कम पावरफुल नहीं होती। भाई-भतीजावाद का पावर राजनीति का एक गौरव बन गया है। जो जितने बड़े नेता का रिश्तेदार वह उतना बड़ा पावरफुल। वह युग बीत गया जब ''गोधन, गजधन, बाजीधन और रतन धन खान जब आवे संतोष धन सब धन धूरि समान''। हुआ करता था।

                अब यह उक्ति बदल गई है। अब तो जिसके पास गोधन, गजधन,बाजीधन, रतनघन और नेताघन जितना ज्यादा है वह ही पूजनीय है, महान है। इनके अलावा व्यवसाय क्षेत्र भी पावरफुलां से पटा पड़ा है। खूब मुनाफा कमाना, संग्रह करना,वस्तुओं में मिलावट करना और नकली माल बेचने वाला व्यवसायी भी कम पावरफुल व्यक्ति नहीं होता है। आखिर क्यों न हो,वो ही तो अपनी विद्या से राजनीति को अपनी मुट्ठी में बंद रखता है। वर्तमान दौर में राज्य संचालन की बागडोर ऐसे व्यवसायिक केन्द्रों के हाथों में होती है। प्रशासनिक क्षेत्र को तो शासन ने वैसे ही खूब पावरफुल बना रखा है। इस क्षेत्र की तो बात ही अलग है। अब माननीय मुख्यमंत्री जी पावरफुल की परिभाषा तय करें और कार्यवाही करे। प्रदेश की जनता बेसब्री से ऐसे पावरफुलों के खिलाफ कार्यवाही की प्रतीक्षा कर रही है। देखा जाय तो जितने भी समाज में पावरफुल है वे मंत्रिमंडलों में या विभिन्न राजनैतिक उच्च पदों पर पहले ही पदस्थ हो चुके हैं।

 
? राजेन्द्र जोशी