संस्करण: 9 अप्रेल- 2012

बाबाओं के फैलते जाल में जुड़ा एक और नाम

 

? सिध्दार्थ शंकर गौतम

               इन दिनों बुध्दू बक्से के कई प्रसारण चौनलों पर निर्मल बाबा का दरबार सजा हुआ हैद्य हाल ही में अचानक निर्मल बाबा के भक्तों की संख्या में बेतहाशा वृध्दि हुई है। अगर इंटरनेट पर ही बाबा जी की वेबसाइट की लोकप्रियता का आकलन किया जाए तो पता चलता है कि एक साल में इसे देखने वालों की संख्या में 400 प्रतिशत से भी अधिक की बढ़ोत्तारी हुई है। टीवी चैनलों पर उनके कार्यक्रम के दर्शकों की संख्या में भी भारी इजाफा हुआ है। हालांकि उनके समागम का प्रसारण देश विदेश के 35से भी अधिक चैनलों पर होता है जिन्हें खासी लोकप्रियता भी मिल रही है,लेकिन उनके बीच कोई ब्रेक या विज्ञापन नहीं होता। न्यूज 24पर पिछले हफ्ते उनके कार्यक्रम की लोकप्रियता 52प्रतिशत रही जो शायद चैनल के किसी भी बुलेटिन या शो को नहीं मिल पाई है। चैनलों को इन प्रसारणों के लिए मोटी कीमत भी मिल रही है जिसका नतीजा है कि उन्होंने अपने सिध्दांतों और कायदे-कानूनों को भी ताक पर रख दिया है। नेटवर्क 18 ने तो बाबा के समागम का प्रसारण अपने खबरिया चैनलों के साथ-साथ हिस्ट्री चैनल पर भी चलवा रखा है। खबर है कि इन सब के लिए नेटवर्क 18  की झोली में हर साल करोड़ रुपए से भी ज्यादा बाबा के 'आशीर्वाद' के तौर पर पहुंच रहे हैं। कमोवेश हरेक छोटे-बड़े चैनल को उसकी हैसियत और पहुंच के हिसाब से तकरीबन 25,000 से 2,50,000 रुपए के बीच प्रति एपिसोड तक।

               निर्मल दरबार लगाकर लोगों की हर समस्या का समाधान करने वाले निर्मल बाबा आज करोडपति हैं। अब जरा देखा जाए कि चढ़ावा नहीं लेने वाले निर्मल बाबा के पास इतनी बड़ी रकम आती कहां से है?निर्मल बाबा हर समस्या का आसान सा उपाय बताते हैं और टीवी पर भी 'कृपा' बरसाते हैं। काले पर्स में पैसा रखना और अलमारी में दस के नोट की एक गवी रखना उनके प्रारंभिक सुझावों में से है। इसके अलावा जिस 'निर्मल दरबार'का प्रसारण दिखाया जाता है उसमें आ जाने भर से सभी कष्ट दूर कर देने की 'गारंटी' भी दी जाती है। लेकिन वहां आने की कीमत 2000 रुपये प्रति व्यक्ति है जो महीनों पहले बैंक के जरिए जमा करना पड़ता है। दो साल से अधिक उम्र के बच्चे से भी प्रवेश शुल्क लिया जाता है। अगर एक समागम मे 20 हजार लोग (अमूमन इससे ज्यादा लोग मौजूद होते हैं) भी आते हैं तो उनके द्वारा जमा की गई राशि 4 करोड़ रुपये बैठती है। ये समागम हर दूसरे दिन होता है और अगर महीने में 15 ऐसे समागम भी होते हों, तो बाबा जी को कम से कम 60 करोड़ रुपये का प्रवेश शुल्क मिल चुका होता है। बाबा जी को सिर्फ समागम का किराया,सुरक्षा इंतजाम और ऑडियो विजुअल सिस्टम पर खर्च करना पड़ता है जो कि महज कुछ हजार रुपये होते हैं। समागम कुछ ही घंटो का होता है जिसमें बाबा जी अपनी बात कहते कम और सुनते ज्यादा हैं। महज कुछ घंटे आने और कृपा बरसाने के लिए करोड़ों रुपये कमा लेने वाले बाबा जी अपना कार्यक्रम अधिकतर दिल्ली में ही रखते हैं जहां सारी सुविधाएं कम खर्चे में आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं।

               इस मोटी कमाई में एक छोटा, लेकिन अहम हिस्सा उस मीडिया को भी जाता है जिसने बाबा जी को इतनी शोहरत दी है। हालांकि अब कुछ अनचाहे हिस्सेदार भी मिलने लगे हैं। पिछले महीने निर्मल बाबा को एक 'भक्त'के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पुलिस तक की मदद लेनी पड़ी। लुधियाना के रहने वाले इंद्रजीत आनंद ने अपने परिवार के साथ मिल कर जालसाजी से बाबा जी को भेजे जाने वाले पैसे में से 1.7करोड़ रुपये अपने और अपने परिवार के खाते में डलवा लिए। पुलिस ने बताया कि निर्मल बाबा ने बैंक को शिकायत दी थी। बैंक ने जांच की, जिसके बाद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। उनके भक्त अपनी समस्या सुलझाने के लिए सवाल तो करते ही हैं, उन पर पिछले दिनों बरसी कृपा का गुनगान भी करते है। टीवी चैनलों पर उनके भाव विह्वल होकर सुनाए गए अनुभवों का प्रसारण भी किया जाता है जिसमें उसके सभी कष्टों के निवारण का विवरण होता है। लोगों को कार्यक्रम का यही हिस्सा सबसे ज्यादा प्रभावित करता है दरबार में आने के लिए। निर्मल बाबा की बढ़ती लोकप्रियता ने उन्हें चर्चा में ला दिया है। टि्वटर पर उन्हें फॉलो करने वालों की संख्या करीब 4.हजार हो चुकी है। फेसबुक पर निर्मल बाबा के प्रशंसकों का पेज है, जिसे 3 लाख लोग पसंद करते हैं। इस पेज पर निर्मल बाबा के टीवी कार्यक्रमों का समय और उनकी तारीफ से जुड़ी टिप्पणियां हैं।

                 मात्र डेढ़-दो वर्षों में शोहरत एवं अर्थ की बुलंदियों को छूने वाले निर्मल बाबा वर्तमान में समागम के अलावा क्या करते हैं और अपने भक्तों से मिलने वाली करोड़ों रुपये की राशि से वे क्या कर रहे हैं, इसके बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। अगर प्रकृति ने उन्हें दैवीय शक्ति दी है, तो वे लोगों से पैसे लेकर क्यों उनका भला कर रहे हैं?भारत में बाबाओं को लेकर जितनी भी भ्रांतियां घर कर गई हैं उनसे बचने का उपाय निर्मल बाबा के नित सजते दरबार को देखकर तो संभव नहीं लगता। अपने इन निर्मल दरबारों की कमाई से बाबा सरकार को कितना टैक्स देते हैं यह भी फिलवक्त स्पष्ट नहीं है। मीडिया ने भी टीआरपी की जंग में ऐसे बाबाओं को आश्रय देना शुरू किया है जिसे देखकर सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि मीडिया की अधोगति क्या होगी? खैर, बाबाओं के इस फैलते जाल के लिए मात्र मीडिया ही दोषी नहीं हैद्य व्यावसायिकता की इस अंधी दौड़ में मीडिया को भी वही करना पड़ रहा है जो उसके अस्तित्व के लिए संभव है किन्तु पड़े-लिखे लोगों की भीड़ जिस तरह से इन बाबाओं के चक्कर लगाती नजर आती है उससे लगता है मानो हम आज भी उसी युग में जी रहे हों जहां कर्म से अधिक भाग्य को बलवान माना जाता था ।

                हमारे पवित्र ग्रन्थ गीता में खुद भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को ज्ञान देते हुए कहा था कि कर्म किए जा, फल की इच्छा मत कर फिर गीता ही क्यूँ, संसार के समस्त धर्मों के पवित्र ग्रंथों का सार यही है कि हम यथाशक्ति अपनी सामर्थानुसार कर्म करें, बाकी उसके अच्छे या बुरे परिमाण की चिंता न करें किसके जीवन में सुख-दु:ख नहीं आते? फिर जब हम अपने सुखों की प्राप्ति का जश्न बाबाओं के साथ नहीं मनाते तो दुखों के दूर होने का कारण उनसे क्यूँ पूछते हैं? फिर सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि दु:ख हमारे जीवन में आते हैं तो क्या इन तथाकथित बाबाओं को इनसे मुक्ति मिल पाती होगी? कदापि नहींद्य ये भी हमारी तरह पांच तत्वों के जीव हैं किन्तु इन्हें पूजकर हम इन्हें भगवान का दर्जा देते हैंद्य एक आम मनुष्य भगवान कभी नहीं बन सकता हैद्य इन तथाकथित बाबाओं को लेकर पूर्व के अनुभव तो यही कहते हैं कि हमारी अंध श्रध्दा का फायदा उठाकर इनका कद इतना बड़ा हो जाता है जिसकी आड़ में ये गलत काम करने से भी गुरेज नहीं करते तब शासन से लेकर प्रशासन तक इनके समक्ष निरीह नजर आता है हो सकता है मेरे ये तथ्य निर्मल बाबा के लिए गलत साबित हों फिर भी उनके द्वारा अर्जित कथित संपत्तिा का ब्यौरा झूठ नहीं बोल रहा पता नहीं देश की पढ़ी-लिखी जनता इस बात को कब समझेगी कि बाबाओं से उसका भला नहीं होने वाला?

? सिध्दार्थ शंकर गौतम