संस्करण: 08 सितम्बर- 2014

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मोहन भागवतजी हिन्दुओं से चाहते क्या हैं?

     ह सत्य है कि विश्व में सबसे अधिक हिन्दू भारत में रहते हैं और इस देश के लगभग 82 प्रतिशत लोग अपने आपको हिन्दू समझते हैं। वैसे हमारे किसी भी शास्त्र में शब्द हिन्दू उपयोग में लाया गया हो वह मेरी जानकारी में नहीं है। भारत के पश्चिम में अरब सागर के दूसरे किनारे अरब देश बसे हैं और वाणिज्यिक कारणों से वहां के लोगों और भारतीय लोगों में समुद्र के माध्यम से संपर्क सदियों पुराना है।     

? एम.एन.बुच


बीजेपी की अंग्रेज नीति

        स्वाधीनता संग्राम में जब भारतवासियों ने जाति-पाति और धर्म संप्रदाय के भेद भुलाकर एक साथ अंग्रेजों से लोहा लिया तो फिरंगियों ने सबसे पहले उनकी एकता भंग करने के लिए हिंदू-मुस्लिमों में भेद का सहारा लिया। अंग्रेजों का यह फूट का फार्मूला यद्यपि दीर्घकाल तक काम नहीं आया लेकिन भारत पर अपनी सत्ता जमाए रखने के लिए अंग्रेजों का यह हथियार तत्कालीन वक्त में कारगर साबित हुआ। 

?

विवेकानंद


प्यार के तालिबानों का वक्त़

     साल पहले कर्नाटक के तटीय इलाकों एवं केरल के कुछ हिस्सों में अन्तधर्मीय विवाहों के खिलाफ शुरू की गयी मुहिम धीरे धीरे देश के बाकी हिस्सों में पहुंच जाएगी,यहां तक कि देश की सत्ताधारी पार्टी साम्प्रदायिक आधारों पर समाज में नए ध्रुवीकरण के कार्यक्रम के तौर पर उसका इस्तेमाल करेगी,इसका शायद ही किसी को गुमान रहा होगा। मालूम हो संघ की शाखाओं में पले बढ़े प्रमोद मुतालिक के नेतृत्व में बनी श्रीराम सेने द्वारा जब लव जिहाद के नाम पर अल्पसंख्यक युवाओं को निशाना बनाने की और उसके पीछे इस्लामिस्ट ताकतों की साजिश होने की बात चलायी गयी थी,

 ? सुभाष गाताडे


इस्लाम की भारतीय समझ

      ध्यप्रदेश का होने के नाते घुमक्कड़ी के शौक के चलते मैं इस बार मार्च में मुम्बई और कर्नाटक की यात्रा पर था लेकिन अगस्त में फिर घूमने निकलने से पहले तीन जगहों के नाम जहन में आए। पचमढ़ी, उदयपुर-नाथद्वारा और अजमेर-पुष्कर। हिन्दू होने के नाते पुष्कर तो हमें जाना ही था और पत्नी कविता भी इसके लिए तैयार थी, लेकिन अजमेर क्यों? क्योंकि वहाँ महान् सूफी संत हजरत ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की पवित्र दरगाह के हमें दर्शन करने थे।

? अखलाक अहमद उस्मानी


भारतीय राजनीति की दिशाहीनता

           म दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश होने का दावा करते हैं, और संख्या की दृष्टि से यह सच भी है। किंतु हमारा लोकतंत्र गत 62 वर्षों से चुनावी प्रक्रिया से गुजरने के बाद भी अभी पूरी तरह परिपक्व नहीं हुआ है और विविधिताओं से भरे हुये हम दुनिया के दूसरे अनेक देशों के लोकतंत्र से भिन्न हैं, क्योंकि चेतना के स्तर पर भी हम वैसे एक समान नहीं हैं जैसे समान नागरिक अधिकारों के साथ हमें अपनी सरकार चुनने का अधिकार मिला हुआ है ।

 

 ?  वीरेन्द्र जैन


उत्तरप्रदेश जल रहा है और मोदी मौन है

         देश पर कब्जा करने के बाद नरेन्द्र मोदी के निशाने पर उत्तरप्रदेश है। यह कहा जाता है कि जो उत्तरप्रदेश पर कब्जा कर लेता है उसका लंबे समय तक प्रधानमंत्री के पद पर कब्जा रहता है। जब तक उत्तरप्रदेश में कांग्रेस की सरकार रही जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री के पद पर बने रहे। इसी प्रकार इंदिरा गांधी भी लंबे समय तक प्रधानमंत्री बनी रहीं और एक-दो सालों को छोड़कर उनके प्रधानमंत्री रहते हुए भी उत्तरप्रदेश में कांग्रेस का शासन रहा। शायद नरेन्द्र मोदी इतिहास से यह सबक सीखकर, उत्तरप्रदेश पर कब्जा करने की तैयारी कर चुके हैं।

? एल.एस.हरदेनिया


आईएम का अस्तित्व राजनैतिक अनिवार्यता

      क्टूबर 2013 में नरेन्द्र मोदी की पटना में आयोजित चुनावी रैली के दौरान हुए बम धमाकों में बिहार पुलिस द्वारा मास्टर माइंड बताए गए तहसीन अख्तर को एनआईए द्वारा हाल ही में क्लीन चिट दे दी गई। इंडियन मुजाहिदीन के टाॅप कमांडर के बतौर प्रचारित तहसीन अख्तर मुंबई और अहमदाबाद समेत देश के कई बम धमाकों में अभियुक्त है। बिहार पुलिस के दावे के मुताबिक पुलिस ने विस्फोट के तत्काल बाद पटना स्टेशन से इम्तियाज नामक एक व्यक्ति को हिरासत में लिया था और फिर उसे कुछ फोटोग्राफ दिखाए गए थे।

?  हरे राम मिश्र


यह संकट तो एक शुरुआत है

     रियाणा के मानेसर स्थित मारूती कारखाने में सवा दो साल पहले हुए हिंसक संघर्ष में जहां एक मैनेजर की मौत हो गई थी वहीं बड़े पैमाने पर कंपनी के अंदर तोड़-फोड़ और आगजनी भी हुई थी। इस पूरे मामले में जेल में बंद 148 मजदूरों को आज तक जमानत भी नही मिल पाई है। इन मजदूरों पर हत्या, हत्या के प्रयास तथा आपराधिक ड़यंत्र जैसे मामले दर्ज हैं।

? रीना मिश्रा


तनावमुक्त हो बच्चों का बचपन

        ब किसी प्रकार की चिन्ता या तनाव की बात हो तो बड़े लोग ही चिन्तित होने वालों में देखे जाते हैं जिन्हें नौकरी चाकरी, व्यवसाय, आर्थिक तंगी, घर परिवार आदि तमाम वजहों से चिन्ताएं घेरे रहती हैं। आम तौर पर समझा यही जाता है कि बच्चे इन सभी चिन्ताओं से मुक्त होते है। यदि कभी उनकी समस्याओं की बात होगी तो स्कूल की पढ़ाई तथा होमवर्क के दबावों की बात करेंगे।   

? अंजलि सिन्हा


खाते खुल जाने से क्रांति नहीं हो सकती

      प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत एक ही दिन में डेढ़ करोड़ खाते खुल गए। इसे एक क्रांति का नाम दिया जा रहा है। पर क्या एक विकासशील देश के लिए यह शर्म की बात नहीं है कि उस देश में अभी तक साढ़े सात करोड़ लोगों के बैंक खाते ही नहीं हैं। वैसे यह सच है कि करोड़ों बैंक खाते खुल जाने से रातों-रात गरीबी दूर होने वाली नहीं है। कोई चमत्कार नहीं होने वाला। वैसे भी हमारे देश में बैंकों की कमी नहीं है, पर उनकी शाखाओं की अवश्य बेहद कमी है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बैंकों की शाखाएं नहीं पहुंच पाई हैं।

? डॉ.महेश परिमल


उ. प्र.: किसानों पर सूखा और सरकार का कोप

        त्तर प्रदेश सूखे की चपेट में है। सदियों से बरसात का मुहावरा बन चुके दो महीने- सावन और भादों भी बिना बरसे निकल गए! अब अगर बरसात होती भी है तो उसका कोई बहुत सार्थक असर धान की फसल पर नहीं आएगा क्योंकि अधिकांश फसल प्रारम्भिक स्तर पर ही सूख चुकी है। आसमान की तरफ टकटकी लगाए किसानों की आंखे पथरा गई हैं लेकिन बरसात का कोई भी लक्षण नहीं। वैसे तो मौसम विभाग ने आगाह कर दिया था कि इस साल बरसात कम होगी लेकिन इतनी कम होगी, इसका अनुमान शायद मौसम विभाग को भी न रहा हो। उसने तो 90 प्रतिशत बरसात होने की भविष्यवाणी की थी।                   

? सुनील अमर


श्राद्ध के लिए ढूंढ़ते रह जाओगे कागा

      ऊंची-ऊंची इमारतों की छत पर लगे टी.वी.एंटीना के कोने पर अब कौए नहीं बैठते। उनकी कांव-कांव का शोर अब कानों को नहीं बेधता। एक समय था जब कौए सभी जगह आसानी से दिखाई दे जाते थे, किंतु आज इनकी तेजी से घटती संख्या के कारण ही अब इनकी गणना एक दुर्लभ पक्षी के रूप में की जा रही है। इसे प्रकृति की मार कहें या पर्यावरण में आया बदलाव कि आज कौए की आधी से अधिक प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं।

? नरेन्द्र देवांगन


दागियों के सम्बन्ध में न्यायालय की नसीहत

        सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को सलाह दी है कि वे ऐसे जनप्रतिनिधियों को मंत्री ना बनाएं, जिनके खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हों। साथ में न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी सांसद या विधायक को कैबिनेट में शामिल करना या नहीं करना प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री का संवैधानिक विशेषाधिकार है, लिहाजा कोर्ट किसी की नियुक्ति को खारिज करने के संबंध में कोई आदेशात्मक निर्देश नहीं दे सकता।                   

? शशिमान शुक्ला


हिन्दी दिवस-14 सितंबर

जनजन की भाषा बनती हिन्दी

      भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू का कथन है कि- मुझे एक लंबे समय से यकीन रहा है और आज भी है कि भारत की आम जनता की वास्तिविक उन्नति और जन-जागरण अंग्रेजी के जरिये नहीं हो सकता है,आम जनता के बीच संपर्क की भाषा अंग्रेजी नहीं हो सकती है। इसलिए यह जरूरी है कि हम हिन्दी के बारे में विचार करें। पं नेहरू का दृष्टिकोण हमेशा हिन्दी के प्रति स्पष्ट रहा और हिन्दी को उन्होंने आम आदमी की प्रगति का सोपान माना, उन्होंने अखिल भारतीय भाषा के रूप में सदैव हिन्दी की पैरोकारी की और कहा कि-अखिल भारतीय भाषा कोई हो सकती है तो वह सिर्फ हिन्दी या हिन्दुस्तानी कुछ भी कह लीजिए हो सकती है।

? डॉ.  सुनील शर्मा


  08 सितम्बर- 2014

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