संस्करण: 8 जुलाई -2013

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फिर एक बार खून के छीटें मोदी हुकूमत पर

आखिर 'काली दाढ़ी' और 'सफेद दाढी' के रहस्य पर परदा कब खुलेगा ?

       भारत का वह कौनसा राज्य है, जिसका पूर्व डीआईजी कई मुठभेड़ों में अपनी संलिप्तता के चलते जेलों में बन्द है और जिसकी राजधानी का जाइन्ट पुलिस कमीशनर मुठभेड में अपनी संलिप्तता के चलते गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार चल रहा है और जिसका पूर्व गृहराज्यमंत्री मुठभेड की साजिश रचने के आरोप में कई माह जेल में काट चुका है ?  

? सुभाष गाताड़े


गुजरात मुठभेड़:

एक खतरनाक सांठगांठ

       हमदाबाद: 15 जून 2004 की सुबह उसी प्रकार हत्याएं हुई जैसी पहले हमेशा हुई थी। पुलिस ने अपनी एफ.आई.आर. में कहा कि उन्होने एक कार का पीछा किया जिसमें चार आतंकी थे और उन सभी को मार गिराया। मारे गये लोगों में महाराष्ट्र के मुंब्रा की एक 19 वर्षीय लड़की इशरत जहाँ, पुणे का जावेद शेख जो इशरत के साथ यात्रा कर रहा था, जीशान जोहर जिसे गुजरात पुलिस की एफ.आई.आर. में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गुजरांवाला का रहने वाला बताया गया है और अमजद अली थे।

? श्रीनिवासन जैन  

(एनडीटीवी से साभार)


पाप की हंडिया

अब बीच चौराहे पर फूटने को है

          शरतजहाँ व तीन अन्य का एनकाउंटर एक फर्जी मुठभेड़। सादिक जमाल का एनकाउंटर एक फर्जी मुठभेड़। सोहराबुद्दीन और उसकी पत्नी कौसर बी का एनकाउंटर एक फर्जी मुठभेड़। तुलसीराम प्रजापति का एनकाउंटर एक फर्जी मुठभेड़। मार्च 2002में पूरे गुजरात में मुसलमानों का नरसंहार योजनाबध्द। मानो कि गुजरात की मोदी सरकार में हुए सभी एनकाउंटर फर्जी और मुसल्मानों का नरसंहार सम्पूर्ण तौर पर राज्य आयोजित आतंकवाद। इसके बावजूद इस मान्यताप्राप्त आतंकवादी नरेंद्र मोदी को भाजपा ने न केवल अपने चुनाव अभियान का प्रचार प्रमुख बनाया बल्कि मुसल्मानों को रिझाने की जिम्मेदारी भी इसी भेडिये को सौंपी गई जिसके नुकीले दांतों से आज भी  मानव रक्त टपकता हुआ लगता है।

 ? आजम शहाब


निर्णायक क्षण

      ''कार्पोरेट मीडिया द्वारा यह चिल्लाना कि मोदी को अगला प्रधानमंत्री बनाने के लिये देश तैयार चुका है, लोगों को इस पर क्षण भर के लिये विचार करना चाहिये।''

              गुजरात में 2002 के दंगों के दाग से सने नरेन्द्र मोदी अब मुख्य भूमिका में है। भारत का कार्पोरेट मीडिया इस प्रकार काम कर रहा है जैसे गाँवों, तालुकाओं, तहसीलों, जिला मुख्यालयों, राज्यों की राजधानियों, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रहने वाले खामोश लोगो का कोई अस्तित्व ही नही है।

? डॉ. मोहम्मद मंजूर आलम


कांग्रेस में 50 फीसदी महिला प्रतिनिधित्व

राहुल गांधी की क्रांतिकारी पहल

         राजनीतिक क्षेत्र में युवाओं और महिलाओं की भागीदार बढ़ाने के उद्देश्य से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने एक क्रांतिकारी पहल की है। कांग्रेस उपाध्यक्ष पार्टी में महिलाओं का प्रतिनधित्व 50प्रतिशत तक बढ़ाने और चुनाव के दौरान टिकट वितरण में भी 50फीसदी कोटा महिलाओं के लिए तय होने की बात कहकर चुनावी साल में सियासी दलों को बेचैन कर दिया है। बिना किसी तामझाम और पूर्व चर्चा के राहुल गांधी द्वारा चलाए गए इस तीर की बहुत आवाज तो नहीं हुई,लेकिन इसने कई सियासी सूरमाओं के जेहन में चोट कर दी है।  

 ?   विवेकानंद


राष्ट्रीय दल की मान्यता और संकीर्ण चरित्र

                  से देश की विडम्बना ही कहा जायेगा कि भारतीय जनता पार्टी जैसा दल आज एक राष्ट्रीय दल ही नहीं अपितु जोड़ तोड़ के सहारे मुख्य विपक्षी दल भी बना हुआ है, जिसके साथ यह आशंका निहित रहती है कि सत्तारूढ दल की अलोकप्रियता की स्थिति में वह केन्द्र में सरकार बनाने के लिए किसी गठबन्धन का नेतृत्व कर सकता है। वैसे यह एक सुखद संयोग ही है कि कभी इस दल को स्वतंत्र रूप से केन्द्र की सरकार चलाने का मौका नहीं मिला, और न ही भविष्य में ऐसी कोई सम्भावनाएं हैं।  

? वीरेन्द्र जैन


आरएसएस के विचारों को बिना त्यागे भाजपा की

मुस्लिम परस्ती ढोंग है

      स समय भारतीय जनता पार्टी में एक नई व्यूह रचना प्रारंभ हो गई है। इस व्यूह रचना का प्रमुख उद्देश्य मुसलमानों को भारतीय जनता पार्टी से जोड़ना है। भारतीय जनता पार्टी में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर मुसलमानों को अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने यह घोषणा की है कि वह शीघ्र ही मुसलमानों के विकास के लिए एक विजन पेपर तैयार करेगी। इस बीच एक ऐसी घटना हुई है जिसकी साधारणत: कल्पना नहीं की जा सकती थी। यह घटना घटी गुजरात की राजधानी गांधी नगर में। गांधी नगर में देश के विभिन्न स्थानों से आये 200 युवक एक आयोजन में भाग ले रहे थे। 

? एल.एस.हरदेनिया


उत्तराखंड : त्रासदी के कैसे कैसे लाभार्थी

      त्तराखंड में आई भीषण तबाही में हजारों व्यक्तियों ने अपने प्राण गंवाये, हजारों अपने परिजनों से बिछड़ गये। असंख्य व्यक्ति अपनों की अनंत खोज में अभीभी लगे हुये हैं। सेना ने अद्वितीय कार्य किया। अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों को बाहर निकाला। कहीं रस्सी के सहारे तो कभी अपने शरीर को सड़क की तरह इस्तेमाल करने देकर। जो लोग बच कर वापस अपने घर पहुंच गये हैं, वे अभी भी उस सदमें से उबर नहीं पाये हैं। परंतु कुछ नेताओं को न तो त्रासदी से कुछ लेना देना है न ही पीडितों से,उन्हें हर जगह केवल राजनीतिक लाभ ढूंढना है।

? मोकर्रम खान


पांच दशक पूर्व

दादी भी गई थी बद्रीनाथ-केदारनाथ

        हा जाता है कि तीर्थयात्रा करने का मन में विचार तभी आता है जब व्यक्ति अपने गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियों से पूरी तरह से मुक्त हो जाता है। हमारी संस्कृति में ऐसे अनेक उदाहरण देखने को मिलते हैं जब परिवार के बड़े बुजुर्ग अपने पारिवारिक कर्तव्यों से निवृत्त होकर बड़े ही आत्मसंतोष और भक्तिभाव से तीर्थयात्रा पर निकलते थे। हालांकि तीर्थयात्रा के लिए जीवन में विभाजित विभिन्न आश्रमों के बंधन का कहीं कोई उल्लेख नहीं है। बाल अवस्था हो, गृहस्थाश्रम हो वानप्रस्थ हो सन्यास आश्रम ही क्यों न हो तीर्थयात्रा करने की भावना किसी भी काल में हो सकती है।

? राजेन्द्र जोशी


प्रश्नपत्र में झलकते जेण्डर पूर्वाग्रह या वस्तुस्थिति का बयान

क्या सिर्फ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को दोषी ठहराना उचित है ?

       हाल में सम्पन्न हुई यू जी सी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) द्वारा संचालित 'नेट' परीक्षा विभिन्न कारणों से विवादों में रही। दिल्ली एवं रांची में जहां परीक्षा केन्द्रों की सूचना देने में बरती गयी गड़बड़ी के चलते कई छात्रा परीक्षा देने से वंचित रहे, वहीं इस परीक्षा में समाजशास्त्र विषय में पूछे गए आब्जेक्टिव/वस्तुनिष्ठ किस्म के सवालों को लेकर भी विवाद चला। प्रश्नपत्र में पूछे गए कुछ सवालों की 'सेक्सिस्ट अर्थात यौनपूर्वाग्रहों से प्रेरित' के तौर पर आलोचना की गयी।   

 

? अंजलि सिन्हा


कैसे मिटे गरीबी व असमानता

अमीरों की सेवा में हैं दुनिया के श्रेष्ठ दिमाग!

        नेशनल सैम्पल सर्वे आर्गेनाइजेशन यानी राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संस्थान की ताजा रपट बताती है कि देश में गरीबी ज्यों की त्यों बरकरार है और गरीब लोग गॉवों में रु. 17 तथा शहरों में रु. 23 प्रतिदिन में लोग जीवन यापन करने को मजबूर हैं। संयोग देखिए कि इसी के कुछ दिन पूर्व जाने माने तकनीकी विशेषज्ञ और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सलाहकार सैम पित्रोदा ने अमेरिका-भारत उर्जा साझेदारी के चौथे शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया में सर्वश्रेष्ठ दिमाग अमीरों की सेवा में लगे हुए हैं और यही कारण है कि गरीबी और असमानता दुनिया भर में बढ़ रही है लेकिन इसे उचित तवज्जो नहीं मिल रही है।

? सुनील अमर

तीन करोड़ से ज्यादा बच्चे और स्वास्थ्य

का वो दो तिहाई हिस्सा

      च्चों के स्वास्थ्य अधिकार एवं पर्यावरण की बेहतरी के मद्देनजर शाला स्तरीय स्वच्छता एवं साफ-सफाई की बात को शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाये जाने की जरूरत, वैश्विक स्तर पर लगातार रेखांकित की जा रही है । चूँकि साफ-सफाई की आदतें व स्वच्छ पर्यावरण सीखने की प्रवृत्तिायों को उभारता है अत: स्कूलों में स्वच्छता व साफ-सफाई पर बच्चोँ को जागरूक करना बड़े ही महत्व का विषय है। बुनियादी तौर पर इसके राजनैतिक ही नहीं बल्कि तमाम सामाजिक मायने भी हैं।

? राहुल शर्मा


म.प्र. में उच्चशिक्षा की गुणवत्ता के खोखले दावें ?

        म.प्र. में पढ़े लिखे बेरोजगार बढ़ रहें हैं। बेरोजगारों में इंजीनियरिंग,फार्मेसी और कम्प्यूटर में डिग्रीधारी युवा भी पढ़ाई पर भारी भरकम खर्च कर या तो बेरोजगार है या फिर कुठिंत हो अल्प वेतन काम कर रहें है। तकनीकि और व्यावसायिक उपाधि प्राप्त युवाओं बेरोजगारी की मुख्य वजह इनमें दक्षता और गुणवत्ता का अभाव होना है। और इन युवाओं में दक्षता की कमी की वजह है इन्हें शिक्षित करने वाले संस्थानों का गुणवत्ताहीन होना। उल्लेखनीय है कि म.प्र. में इस समय तकनीकि और व्यावसायिक के साथ साथ परम्परागत उपाधि पाठयक्रम चलाने वाली संस्थाओं की संख्या में काफी वृद्वि हुई है।

? डॉ. सुनील शर्मा


सिर्फ रंग-बिरंगी थाली ही नहीं है पोषणयुक्त भोजन का मतलब

       पोषणयुक्त भोजन क्या होता है? इस सवाल के जवाब के लिए अक्सर एक बेहद लोकप्रिय जुमले का प्रयोग किया जाता है। कहा जाता है कि अगर आपकी भोजन की थाली रंग-बिरंगी है, तो वह पोषणयुक्त भोजन है। यानी थाली में दाल, चावल, रोटी, हरी सब्जी, सलाद आदि चीजें होनी जरूरी है। एक हद तक यह बात सही भी है, लेकिन कुपोषण से निपटने के लिए यह कोई पहला या अंतिम सत्य नहीं है। आइये समझते हैं कि मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं।   

 

? रीतेश पुरोहित


धार्मिक आस्था न बने

विकास में बाधक

        क अध्ययन से ज्ञात हुआ है कि कई लोकतांत्रिक देशों के नागरिकों की धार्मिक आस्था अब खत्म होने की कगार पर है। लेकिन भारत जैसे देश में धार्मिक आस्था रोम-रोम में बसी है और लोग कर्म से अधिक धर्म में आस्था रखते हैं। वे अपनी उन्नति-अवनति, सफलता-विफलता, शादी-ब्याह, पद प्रतिष्ठा सब कुछ भाग्य और ईश्वर से जोड़कर देखते हैं। हालांकि अब तेज़ी से हो रहे परिवर्तन और विकास के कारण युवाओं में धार्मिक आस्था कम देखी जा रही है परन्तु धार्मिक आयोजनों और धार्मिक स्थलों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है। बल्कि अवैध धर्मस्थलों की संख्या बढ़ती जा रही है।

? डॉ. गीता गुप्त


  8 जुलाई -2013

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