संस्करण: 08 अगस्त- 2011

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मालेगांव से ओस्लो घृणा का मुख्यधाराकरण : समुदाय का आतंकवादीकरण

    '' बमबारी करके कोई हमें खामोश नहीं कर सकता, गोलियां चला कर कोई हमें मौन नहीं कर सकता। कल हम दुनिया को दिखा देंगे कि जब जब जरूरत होती है नार्वे का जनतंत्र मजबूत होकर उभरता है। अपने मूल्यों की हिफाजत में हमें कभी आनाकानी नहीं करनी चाहिए। हमें यह दिखाना चाहिए कि नार्वे का समाज ऐसे कठिन समयों का सही ढंग से मुकाबला करता है।''

  ? सुभाष गाताड़े


क्या येदुरप्पा की कुर्बानी से

भाजपा के पाप धुल जायेंगे 

     श्री येदुरप्पाजी के जीवनवृत्त पर निगाह डालने के बाद उनके प्रति पहले श्रध्दा और फिर सहानिभूति ही पैदा होती है। पिछले दिनों पूरी दुनिया ने देखा कि कैसे लोकायुक्त की रिपोर्ट में वे दोषी पाये गये और उनकी पार्टी ने शरीर में पैदा हो गये गेंगरीन के जग जाहिर होते ही रोगग्रस्त अंग की तरह उनको काट कर फेंक देना चाहा। उन्होंने अनुशासन बनाये हुए सार्वजनिक रूप से ऐसा कुछ नहीं कहा जिससे पार्टी की छवि और ज्यादा खराब होती हो पर ...........

? वीरेन्द्र जैन


कर्नाटक के लोकायुक्त के अनुसार

राज्य का एक जिला ऐसा है जहां भाजपा के मंत्री का गुंडाराज है 

      क्या इस बात की कल्पना की जा सकती है कि किसी सार्वभौमिक व पूरी तरह से स्वतंत्र देश की सीमा के अन्दर एक और स्वतंत्र देश का अस्तित्व हो सकता है। इस तरह का अजूबा,भारतीय जनता पार्टी द्वारा शासित कर्नाटक में पाया जाता है। इस पूर्ण स्वतंत्र राष्ट्र का अस्तित्व विरोधी दलों ने नहीं कर्नाटक के लोकायुक्त श्री संतोष हेगडे ने स्वीकारा है। श्री हेगडे देश के अत्यधिक साहसी और निष्पक्ष लोकायुक्तों में से एक हैं।  

? एल.एस.हरदेनिया


क्या चुनाव जीत लेना ही

ईमानदारी तथा लोकप्रियता का पैमाना है

    हाल ही में अन्ना हजारे की टीम ने यह दावा किया कि उनके द्वारा कराये गये सर्वे के अनुसार केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के चुनाव क्षेत्र चांदनी चौक में 85 प्रतिशत लोग जन लोकपाल के पक्ष में हैं, अप्रत्यक्ष मतलब था कि सिब्बल के समर्थन में केवल 15 प्रतिशत ही लोग हैंऐसे में कुछ लोग यह भी सोच सकते थे कि केवल 15 प्रतिशत जन समर्थन प्राप्त व्यक्ति केंद्र में मंत्री कैसे बना हुआ है कपिल सिब्बल प्रख्यात वकील हैं, लाखों रुपये रोज की प्रैक्टिस छोड़ कर राजनीति में आये हैं

? मोकर्रम खान


राजनीतिक दॉव-पेंच पर बलि चढ़ती जनता

    राजनीतिक दलों की आपसी तकरार में नुकसान जनता का ही होता है, यह एक सर्वविदित तथ्य है, लेकिन जब इस तकरार के दायरे में सरकारें आ जाती हैं तो यह नुकसान कहीं ज्यादा व्यापक और घातक हो जाता है। केन्द्र की कॉग्रेसनीत संप्रग सरकार और उत्तर प्रदेश की सत्तारुढ़ बसपा सरकार की आपसी खींचतान में बीते चार वर्षों से यही हो रहा है। दर्जनों ऐसी योजनाऐं हैं जिनकी शुरुआत या सफल क्रियान्वयन .............

? सुनील अमर


वाकई सबसे अलग दल है भाजपा

   भारतीय जनता पार्टी खुद को अन्य राजनीतिक दलों से अलग मानती है और यह सच भी है। कर्नाटक में हुए घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भाजपा सभी राजनीतिक दलों से अलग है। इस दल में अनुशासन की दुहाई तो दी जाती है,मगर उसका पालन नहीं किया जाता। कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से हटाए गए येदियुरप्पा इसके जीवंत प्रमाण हैं। एक समय था,जब आरोप लगते ही मंत्री-मुख्यमंत्री त्यागपत्र दे देते थे,मगर.........

? महेश बाग़ी


घटती जा रही है विदेश यात्राओं की कद्र

       ह समय अब गुजर चुका जब समाज में विदेश यात्राओं की कद्र होती थी। कोई भी उन दिनों किसी विदेश से यात्रा से लौटता था तो उनका मान बढ़ जाता था और व्यापक रूप से समाज उसके सम्मान में कार्यक्रम आयोजन करता था। अब तो समाज का ऐसा कोई वर्ग बचा नहीं है जिसका कोई न कोई प्रतिनिधि किसी  देश की यात्रा पर नहीं गया हो। गुज़रे काल में ये विदेश यात्राएं कारणवश ही हुआ करती थी और व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में निपुणता के लिये चयनित भी हुआ करते थे।

? राजेन्द्र जोशी


उच्चशिक्षा में प्रस्तावित सुधारों की कार्यरूप मे परिणिति आवश्यक

    देश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में आज लगभग 1.6करोड़ विद्यार्थी पढ़ रहें हैं। तथा वर्तमान के उच्च शिक्षा में 10 फीसदी नामांकन को वर्ष 2012 तक 15 फीसदी तक तथा वर्ष 2020 तक 30 फीसदी होने पर यह संख्या4.5   करोड़ होने की संभावना है। इस समय देश में उच्च शिक्षा पर करीब 46200 करोड़ रूपये खर्च होतें है,जिसके 2020 तक 2,32,500 करोड़ रूपये होने की संभावना है। इस राशि का दो तिहाई भाग निजी क्षेत्र से तथा एक तिहाई भाग सरकार से आता है। 

? डॉ. सुनील शर्मा


पानी पंजाब का, रोगी राजस्थान के

     दियाँ दिलों को जोड़ती हैं, नदियाँ दो संस्कृतियों का मेल कराती हैं, नदियाँ परस्पर भाईचारा बढ़ाती हैं, नदियाँ देश की जीवन रेखा होती हैं,इन तमाम जुमलों से हटकर यदि यह कहा जाए कि नदियाँ दूसरे राज्यों के लोगों को बीमारी बनाती हैं, उन्हें कैंसर की बीमारी देती हैं, लोगों को मौत के मुहाने तक पहुँचाती हैं, तो अतिशयोक्ति न होगी । आपका सोचना सही है कि नदियों के बारे में ऐसा कहना उचित नहीं है। पर सच यही है कि........

? डॉ. महेश परिमल


सीवर में होती मौतें और संवेदनहीन समाज

    मारे मुल्क के मुख्तलिफ हिस्सों से सीवर के अंदर दम घुटने से सफाईकर्मियों की मौत की खबरें, आए दिन की बात हो गई हैं। शायद ही कोई ऐसा दिन गुजरता होगा, जब कहीं कोई दर्दनाक हादसा न घटे। वरना, सीवर में मौत सफाईकर्मियों की किस्मत बनकर रह गई है। सफाईकर्मी जाम सीवर लाईन की सफाई-मरम्मत के लिए मैन होल में उतरते हैं और मौत उन्हें वहां अपने आगोश में ले लेती है। हर साल ऐसे अनेक लोग सीवर में जहरीली गैसों की चपेट में आकर घुट-घुटकर दम तोड़ देते हैं।

? जाहिद खान



स्त्री के लिए बाहर  

काम करने के मायने

     हिलायें घर के बाहर जाकर कमायें, पैसा अर्जित करने के साथ ही बाहर की दुनिया का अनुभव और ज्ञान हासिल करें , कार्य में कुशलता हासिल करने के अवसर मिले तथा घर के अन्दर बराबर की हैसियत वाली सदस्य बने यह प्रयास हर समाज में किसी न किसी स्तर पर हो रहा है। कुछ समाजों ने मुकाम पहले हासिल कर लिया है तो कुछ मंजिल तक पहुंचने वाले है और कुछ अभी काफी पीछे है। इस रास्ते में तरह-तरह कें राय और विचार भी आते है।

? अंजलि सिन्हा


15 अगस्त स्वाधीनता पर विशेष राष्ट्रीय पर्व और हमारी आशाएं

    स्वाधीनता दिवस की इस वर्षगांठ पर स्वर-साम्राज्ञी लता मंगेश का गाया गीत-'ऐ मेरे वतन के लोगों....' अनायास ही स्मरण हो आया है, जिसने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू तक की आंखें नम कर दी थी। सचमुच,कैसी विडंबना है। अपनी आजादी का जश्न मनाते समय ऐसे मर्मस्पर्शी गीत सुनकर आज हमारा हृदय द्रवित नहीं होता। हम अपने इतिहास को स्मरण कर 'स्वाधीनता' का विश्लेषण नहीं करते। 

? डॉ. गीता गुप्त


  8 अगस्त-2011

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