संस्करण: 08 अगस्त- 2011

क्या चुनाव जीत लेना ही

ईमानदारी तथा लोकप्रियता का पैमाना है

? मोकर्रम खान

              हाल ही में अन्ना हजारे की टीम ने यह दावा किया कि उनके द्वारा कराये गये सर्वे के अनुसार केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के चुनाव क्षेत्र चांदनी चौक में 85 प्रतिशत लोग जन लोकपाल के पक्ष में हैं, अप्रत्यक्ष मतलब था कि सिब्बल के समर्थन में केवल 15 प्रतिशत ही लोग हैंऐसे में कुछ लोग यह भी सोच सकते थे कि केवल 15 प्रतिशत जन समर्थन प्राप्त व्यक्ति केंद्र में मंत्री कैसे बना हुआ है कपिल सिब्बल प्रख्यात वकील हैं, लाखों रुपये रोज की प्रैक्टिस छोड़ कर राजनीति में आये हैं, इतना बड़ा आरोप कैसे सहन कर लेते फिर अन्ना हजारे जैसा व्यक्ति जिसका राजनीति में दूर दूर तक दखल नहीं है,ने एक केंद्रीय मंत्री को ललकारने की जुर्रत कैसे की,इसलिये अन्ना को जबाब देना आवश्यक था सो जबाब देने के लिये आगे आये मनीष तिवारी,उन्होंने कहा कि अगर अन्ना हजारे समझते हैं कि उन्हें इतना अधिक जन समर्थन प्राप्त है तो वे चुनाव लड़ कर देख लें,सत्य समझ में आ जायेगा अन्ना की तरफ से अरविंद केजरीवाल ने उत्तर दिया कि प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह को चुनाव लड़ने की सलाह दी जायवास्तव में यह घटनाक्रम राजनीति के हम्माम में ईमानदारों को जबरन धकेल कर उनके चीरहरण का एक प्रयास है ताकि हम्माम में सब नंगे हैं वाली कहावत को चरितार्थ किया जा सके अन्ना हजारे की ईमानदारी पर अभी तक सरकारी जांच एजेंसियों ने भी सीधे उंगली नहीं उठाई है यही हाल प्रधान मंत्री डा0 मनमोहन सिंह का है, भले ही उनके चारों तरफ भ्रष्टाचार के आरोपियों की फौज खड़ी दिखाई दे रही है किंतु उनकी व्यक्तिगत ईमानदारी पर उंगली उठाने का साहस उनके विरोधी भी नहीं कर पा रहे हैं  ईमानदारी और राजनीति का बिलकुल 36 का आंकड़ा है इसलिये ईमानदार व्यक्ति राजनीति से दूर ही रहते हैंअन्ना हजारे कई सालों से भ्रष्टाचार के विरुध्द संघर्ष कर रहे हैं किंतु भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम को मिल रहे अपार जनसमर्थन के बावजूद उन्होंने पार्षद तक का चुनाव लड़ने की हिमाकत नहीं की डा0 मनमोहन सिंह देश के इतिहास तथा संभवत भविष्य के भी, एकमात्र प्रधान मंत्री हैं जिन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ने का साहस नहीं दिखाया  राज्य सभा के रास्ते संसद में पहुंच कर प्रधान मंत्री का दायित्व निभा रहे हैं संभवत इसलिये कि अपनी शराफत के कारण चुनावी समर में कूद कर कीचड़ उछालो प्रतियोगिता में भाग लेना उनके लिये संभव नहीं है  यूपीए अधयक्ष सोनिया गांधी तथा कांग्रेस पार्टी भी इतने भोले चेहरे को मैदान में उतारने का रिस्क नहीं उठाना चाहतीं 

               यदि यह मान लिया जाय कि चुनाव जीत कर सांसद, मंत्री या प्रधानमंत्री बनना ही ईमानदारी तथा लोकप्रियता का पैमाना है तो सबसे पहले गांधी जी की राष्ट्रपिता की पदवी पर सवाल खड़ा हो जायगा अगर चुनाव जीत कर सत्ता के मजे लूटना बहुत अच्छी बात होती तो गांधी जी भी चुनाव लड़ लेते किंतु स्वतंत्रता संग्राम के महानायक ने प्रधान मंत्री या राष्ट्रपति बनने के बजाय राष्ट्रपिता कहलाने को तरजीह दी इस राष्ट्रपिता को एक सिरफिरे ने गोली मार दी तो क्या गांधी जी को अलोकप्रिय मान लिया जायगा यह भी कटु सत्य है कि वर्तमान में गांधी जी के आदर्शों पर चल कर चुनाव नहीं जीता जा सकता क्योंकि चुनाव में धन बल, बाहुबल तथा राजनीतिक तिकड़म की सबसे अहम भूमिका होती है जो ईमानदार आदमी के बस की बात नहीं है इसलिये न तो अन्ना हजारे चुनाव लड़ने की हिम्मत कर सकते हैं और न ही प्रधानमंत्री डा0मनमोहन सिंह एक कठोर सत्य यह भी है कि भले ही अन्ना हजारे और मनमोहन सिंह जैसे ईमानदार व्यक्ति लोकप्रियता के बावजूद चुनाव लड़ने की हिम्मत न जुटा पायें किंतु कई हार्ड कोर क्रिमिनल्स धन तथा बाहुबल की सहायता से डंके की चोट पर चुनाव जीतते हैं, कई तो जेल में बंद रह कर भी चुनाव जीत जाते हैं और कई अपनी पत्नियों को खड़ा कर उन्हें निर्वाचित करा लेते हैं उत्तर प्रदेश,बिहार, महाराष्ट्र तथा अन्य राज्यों में कई ऐसे विधायक तथा सांसद मौजूद हैं जिनके विरुध्द सैकड़ों आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं तो क्या उन्हें अन्ना हजारे और डा0 मनमोहन सिंह से बेहतर व्यक्ति मान लिया जाय

               तीन वर्ष पूर्व राज ठाकरे के गुंडों ने उत्तर भारतीयों पर खुले आम जुल्म ढाये, उन्हें मुंबई छोड कर अपने घर वापस जाने को विवश कर दिया परिणामस्वरूप लोग ट्रेनों में भेड़ बकरियों की तरह ठुंस कर भागे,एक महिला को ट्रेन के जनरल कोच के टायलेट में प्रसव हो गया महाराष्ट्र में 1947के देश विभाजन के ट्रेलर का लाइव टेलीकास्ट हुआ, परंतु इस टेलीकास्ट के सूत्रधारों का बाल भी बांका नहीं हुआ उल्टे महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के लोग चुनाव लड़ कर विधायक बन गये अन्ना हजारे के पास न तो गुंडों की सेना है,न ही धन बल और न ही राजनीतिक उठापटक की क्षमता. क्या इसका मतलब यह हुआ कि राज ठाकरे अन्ना हजारे से ज्यादा ईमानदार तथा लोकप्रिय हैं


? मोकर्रम खान