संस्करण: 07 अक्टूबर-2013

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पाकिस्तान और मोदी की नजर में

एक जैसी है भारत की देहाती महिलाएं

       पिछले दिनों कथित रूप से पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को देहाती औरत कहा। यह बात पाकिस्तान के ही एक पत्रकार ने कही है, इसलिए यह कितनी सच है और कितनी गलत, इस पर दावे से कुछ नहीं कहा जा सकता। फिर भी यदि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने ऐसा कहा है तो जाहिर है उनका उद्देश्य ठीक नहीं होगा। पाकिस्तान का उद्देश्य भारत के प्रति कैसा है यह विवाद या विचार का विषय नहीं है। हमारे देश का देहाती हो या शहरी, हिंदू हो या मुसलमान, कोई भी नागरिक पाकिस्तान की नजरों में कैसा होता है, यह आए दिन होने वाले धमाकों के रूप मारे जा रहे लोगों की लाशें देखकर समझा जा सकता है।    

? विवेकानंद


गांधी, पटेल बनाम मोदी

        नाब नरेन्द्र मोदी - अब बिल्कुल आफिशियली अर्थात सांस्कृतिक संगठन कहलानेवाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मुहर के बाद - अपने गुरू आडवाणी के 'मुन्तज़िर वजीरे आज़म' (प्राइम मिनिस्टर इन वेटिंग) की भूमिका में आ गए हैं, इन दिनों देश के अलग अलग हिस्सों में रैलियां करने में मुब्तिला हैं। अभी यह समय बताएगा कि क्या वे भी अपने गुरू की गति को ही प्राप्त हो जाएंगे और मुन्तजिर प्रधानमंत्री के तौर पर रिटायर होंगे या नहीं। वैसे रैलियों में एकत्रिात भीड़ को देख कर वह एवं उनके नए-पुराने मुरीद यही आकलन कर रहे हैं कि 2014को लाल किले की प्राचीर से जनाब मोदी ही मुल्क को अपना बौध्दिक सुनाएंगे। अगर उन्हें खुशफहमी है तो हमें क्या एतराज हो सकता है ?

? सुभाष गाताड़े


भारत की ख्याति, छप्पन इंच की छाती

भाईयों और बहनो,

देश महासंकट में है;

कांग्रेस इस देश को खोखला कर रही है-

अमीरों को लूटती है, गरीबों को देती है;

मैं पूछता हूॅ, यह कैसा अन्याय;

 ? बद्री रैना


आर एस एस क्या है?

      मैंने राजनीति में 1937 मे प्रवेश किया। उस समय मेरी उम्र बहुत कम थी, लेकिन चूकिं मैने मैट्रिक की परीक्षा जल्दी पास कर ली थी, इसलिए कालेज में भी मैने बहुत जल्दी प्रवेश किया। उस समय पूना में आर एस एस और सावरकरवादी लोग एक तरफ और राष्ट्रवादी और विभिन्न समाजवादी और वामपंथी दल दूसरी तरफ थे। मुझे याद है कि 1 मई 1937 को हम लोगों ने मई दिवस का जुलूस निकाला था। उस जुलूस पर आर एस एस के स्वयंसेवकों और सावरकरवादी लोगों ने हमला किया था और उसमें प्रसिध्द क्रान्तिकारी सेनापति बापट और हमारे नेता एस एम जोशी को भी चोटें आयी थी।

? मधु लिमये


गांधी की कसौटी पर संघ और भाजपा की राष्ट्रीयता

         हिन्दुस्तान में वर्ष 1925 के बाद से तीन विचारधाराएँ एक साथ चल रही है। पहली, गाँधीवादी विचारधारा, दूसरी साम्यवादी विचारधारा एवं तीसरी हिन्दू राष्ट्रवादी विचारधारा। गांधीवादी विचारधारा पूर्णत: गांधी के चरित्र, विचार एवं उनके द्वारा जिन्दगी में स्वयं अनुभूत किये गये अनुभवों पर आधारित सत्य एवं अहिंसा से ओतप्रोत है, वहीं साम्यवादी विचारधारा माक्र्स के सिध्दान्तों एवं लेनिन व माओ के सशस्त्र क्रान्ति के विचार से प्रभावित है।

 ?   हेमराज कल्पोनी


लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक ताकतों को

दिग्विजय सिंह के साथ लामबंद होना चाहिए

           भोपाल में आर एस एस कार्यकर्ताओं की सभा में शामिल होने वालों के लिए टोपी और बुर्के की खरीदारी का सबूत पेशकर एक बार दिग्विजय सिंह ने फिर नरेंद्र मोदी के सपनों की हवा निकालने के अपने अभियान को बल दे दिया है। उन्होंने मोदी की राजनीति के उस विरोधाभास को भी जबरदस्त तरीके से रेखांकित कर दिया है कि गुजरात में आयी भयानक बाढ़ के बावजूद नरेंद्र मोदी  प्रधानमंत्री पद की अपनी लालसा को कार्यरूप देने के लिए पूरे देश में दौड रहे हैं। गुजरात में बाढ़ की विभीषिका ऐसी है कि निष्पक्ष चौनलों के अलावा मोदी के समर्थक चौनलों को भी उस खबर को दिखाना पड़ रहा है लेकिन मोदी के पास समय नहीं है।  

? शेष नारायण सिंह


छीपावर में जिस तरह से मुसलमानों के घर जलाए गए, वैसा तो दुश्मन देश की सेना भी नहीं करती

      छीपावर के अनेक घर और झोपड़ों में जो ध्वंस का नंगा नाच हुआ है, उसे देखकर लगता है कि मधययुग की किसी सेना ने अपने दुश्मन राज्य पर हमला कर सब कुछ नष्ट कर दिया हो। हरदा जिले के इस छोटे गांव के अनेक मुसलमानों के घरों में एक आक्रामक हिंसक भीड़ ने योजनाबध्द तरीके से हमला किया। भीड़ मुसलमानों को भद्दी भद्दी गाली दे रही थी और उन्हें भारत छोड़ने का आदेश दे रही थी। भीड़ में शामिल लोग पेट्रोल से भरी बोतलें और कुप्पियां लिए हुए थे। घर के ऊपर पेट्रोल का छिड़काव करने के पहले भीड़ इन गरीब मुसलमानों के घर में घुसती थी, घर में रखी पेटियों का ताला तोड़ती थी, पेटियों में रखे गहने और नगदी निकाल लेती थी और इसके बाद पेट्रोल फेंक कर आग लगा देती थी।

?  एल.एस.हरदेनिया


राष्ट्रीय एकता परिषद का सोशल मीडिया पर गुस्सा

      त दिनों एक अरसे बाद आयोजित राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक का अपने उद्देश्यों में असफल होना चिंता का विषय है। ऐसी बैठकें किसी घटना के बाद राजनीतिक दलों, केन्द्र व राज्यों की सरकारों और कुछ चयनित बुध्दिजीवियों का सामूहिक स्यापा और कभी पूरा न होने वाले संकल्पों की औपचारिकता के बाद समाप्त हो जाती रही हैं। इस बार भी ऐसा ही हुआ है। ऐसा महसूस किया गया है कि वे सही विन्दु पर पहुँचना ही नहीं चाहते इसलिए औपचारिकता का निर्वाह भर कर के रह जाते हैं।  

 

? वीरेन्द्र जैन


तो मोर्चा इसलिए सम्भाला क्योंकि मर्द मुसीबत में हैं ?

        दंगा प्रभावित मुजफरनगर, शामली तथा मेरठ के इलाके में महिलाओं द्वारा पंचायत बुलाने के समाचार आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि वे चूल्हे चौके का काम छोड़ कर लाठी डंडा फरसा लेकर आक्रामक मुद्रा में हैं। आधा दर्जन से अधिक गांवों में महिला पंचायतें हो चुकी हैं और अब 84 गांवों की महापंचायत का ऐलान किया है महिलाओं ने। आन्दोलन की कमान बुजुर्ग महिलाओं ने सम्भाली है किन्तु इसमें हर उम्र की महिला शामिल हैं। यह आयोजन न दंगा भड़काने वाले अराजक तत्वों के खिलाफ है और न ही पीड़ित महिलाओं के न्याय के लिए है। यह उन राजनीतिक पार्टियों या नेताओं के खिलाफ भी नहीं है जो जानबूझ कर ऐसे तनाव पैदा करते हैं तथा अपनी राजनीति तथा वोट की रोटी सेंकते हैं।   

? अंजलि सिन्हा


लगा, आया ऊंट पहाड़ के नीचे !

'नमो' का प्रभाव रहा फीका-फीका भोपाल में

       ध्यप्रदेश की जनता और विशेषकर भोपाल वासियों को बड़ा इंतजार था 25 सितंबर का। बड़ी जिज्ञासा थी कि उस दिन 'नमो'संबोधन से प्रचारित गुजरात के मुख्यमंत्री आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी के आग उगलते मुखारबिन्द से कुछ ऐसे जुमले सुनने को मिलेंगे जिसे सुनकर यहां की जनता के मन में वे अपना स्थान बना लेंगे। लेकिन ऐसे लोग जो राजनीति के छल-छंद और कपट की नौटंकियों के पारखी होते हैं वे तनिक भी प्रभावित नहीं हो पाये।      

 

? राजेन्द्र जोशी


मध्य प्रदेश में बदस्तूर जारी है

शिक्षा का भगवाकरण

        मारे संविधान की उद्देशिका के अनुसार भारत एक समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य है। संविधान के अनुसार राजसत्ता का कोई अपना धर्म नहीं होगा। उसके विपरीत संविधान भारत के सभी नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय, विचार अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने का अधिकार प्रदान करता है।  

? जावेद अनीस


राहुल गॉधी, दागी जनप्रतिनिधि और

राइट टू रिजेक्ट

       स समय दो बातों पर काफी चर्चा है पहली तो दागी जनप्रतिनिधी संबंधी अध्यादेश पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गॉधी के विचार, दूसरा सुप्रीम कोर्ट द्वारा राइट टू रिजेक्ट को ईवीएम व्यवस्था में शामिल करने संबंधी निर्देश पर। उल्लेखनीय है कि शहरी बुद्विजीवियों और सामाजिक संगठनों द्वारा  काफी समय से देश की चुनावी प्रक्रिया में राइट टू रिकाल एवं राइट टू रिजेक्ट के प्रावधान शामिल करवाने पर मंथन किया जा रहा था, इस संबंध में पीपुल्स युनियन फार सिविल लिबर्टी(पीयूसीएल) द्वारा 2004 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका के संदर्भ में इलेक्ट्रानिक वोंटिग मशीन में राइट टू रिजेक्ट के लिए विकल्प देने का प्रावधान शामिल करने का आदेश दिया है।    

 

? डॉ. सुनील शर्मा


  07 अक्टूबर-2013

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