संस्करण: 07  मई-2012

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अन्ना-बाबा का आंदोलन

पर उपदेश कुशल बहुतेरे

           रामचरित मानस के इस एक सूत्र वाक्य में अन्ना हजारे और बाबा रामदेव के 'कथित आंदोलनों' का सार छिपा हुआ है। समाजसेवी अन्ना हजारे और बाबा रामदेव जो आंदोलन चला रहा है,जनता को सीख दे रहे हैं उसमें अन्ना की टीम और बाबा स्वयं खरे नहीं उतरते। यह तो पहले से ही साफ है कि दोनों का आंदोलन भ्रष्टाचार के खिलाफ न होकर केंद्र सरकार के खिलाफ है, लेकिन अब थोड़ा से गहराई से सोचें तो दोनों में वर्चस्व और श्रेय लेने की जंग होती दिख रही है।

  

  ? विवेकानंद


दंगों का निर्माण

        हैदराबाद के सईदाबाद और मदन्नापेठ क्षेत्र में अप्रेल के प्रथम सप्ताह में हुई हिंसा स्थानीय मुसलमानों के विरूध्द की गई थी। इस हिंसा में अनेक घरों को क्षति पंहुचाई गई और कई लोग घायल हुये। घटना के शीघ्र पहले प्रवीण तोगड़िया ने क्षेत्र में भड़काऊ भाषण दिया था। दंगों के पहले यह खबर फैली कि कट्टरपंथी मुसलमानों ने जानबूझकर हनुमान मंदिर पर गाय का माँस और हरा रंग फैंका था। यह खबर हिंसा भड़काने के लिये पर्याप्त थी। पुलिस दोषियों को गिरफ्तार करने में सफल रही और घटना में शामिल लोग हिन्दू साम्प्रदायिक संगठनों के निकले।

? राम पुनियानी


भारतीय (बंगारू) जनता पार्टी

    मुल्क में हुकूमत संभाल रही पार्टी का सर्वसम्मति से चुना गया अध्यक्ष अगर अपने दतर में बैठ कर रक्षा सौदों में दलाली ले, हजारों सैनिकों की जान को जोखिम में डालने का जनद्रोही काम करे और इस काम के लिए उसे जेल की हवा खानी पड़े तो क्या पार्टी यह कह कर किनारा कर सकती है कि वह उस शख्स का 'निजी मामला' है और पार्टी पर उसकी कोई आंच नहीं आती है। अब जबकि भाजपा के पूर्वअध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण 'तहलका' स्टिंग आपरेशन में भ्रष्टाचार के दोषी करार दिए गए हैं और चार साल जेल की सज़ा पाने के बाद सलाखों के पीछे पहुंचा दिए गए हैं तब हतप्रभ भाजपा की तरफ से यही बात जोर से कही जा रही है।

? सुभाष गाताड़े


रेत की फिसलन

          हाँ नदी है, वहाँ रेत है। छोटा खनिज कहलाई जाने वाली रेत तेजी से बढ़ रहे निर्माण उद्योग की आवश्यकताएं पूरी करती है। इसमें कोई आश्चर्य नही है कि कई वरिष्ठ नौकरशाह और सत्तासीन राजनेता अवैध रेत उत्खनन से मोटी कमाई करने हेतु स्थानीय ठेकेदारों से साँठ-गाँठ कर लेते हैं। सरकारी खजाने को नुकसान होने के बावजूद उन गहरे बदनुमा धब्बों पर ध्यान नही दिया जाता जो रेत उत्खनन ने हमारे परिस्थिति तंत्र पर छोड़े हैं। रेत को सुरक्षित रखने और समाप्त होने से बचाने के लिये समाज के लोग नदियों के किनारे तथा न्यायालयों में लड़ाई लड़ते है।

? डाउन टू अर्थ से साभार


अफसरों की रक्षा में

अक्षम सरकार

         ध्यप्रदेश में इन दिनों अदने से लेकर आला अफसर तक सभी भयभीत हैं । कब किस अफसर पर जानलेवा हमला हो जाये ? कहा नहीं जा सकता । पिछले 6 महीने में एक दर्जन से ज्यादा अधिकारी अपमान, उपेक्षा, मारपीट के शिकार हो चुके है। असामाजिक तत्व, अवैध गतिविधियों में लिप्त लोग, रेत, गिटटी, मिटटी, मुरम निकालने के लिए कायदे कानून को किनारे कर देने वाले दबंग कानून व्यवस्था को खुले आम चुनौती देते घूम रहे हैं। दबंगों ने जहॉ चाहा वहॉ से खुदाई ,खनन, का खेल शुरू कर दिया । हाल यह है कि प्रदेश के 50 जिलों में से ज्यादातर जिलों में अवैधा खनन,जंगल कटाई,का काम बेरोकटोक चल रहा है।

 ? अमिताभ पाण्डेय


क्या यथार्थ में नरेन्द्र मोदी एक सफल प्रशासक हैं?

           हिटलर महान है। हिटलर के नेतृत्व में जर्मनी ने अभूतपूर्व उन्नति की है। हिटलर के समान महान नेता जर्मनी के इतिहास में भी कभी नहीं हुआ। यह विश्वास जर्मनी के सभी नागरिकों के मन में बैठा दिया गया था। इसका श्रेय जोसेफ गोयवेल्स को जाता है। गोयवेल्स हिटलर के प्रमुख सहायक थे जिन्हें उनकी छवि बनाने का उत्तरदायित्व सौंपा गया था। गोयवल्स का कहना था कि प्रेस एक ऐसा की-बोर्ड है जिसे सरकार जैसा चाहे वैसा उसे खेल सकता है।

? एल.एस.हरदेनिया


समाजवादी पार्टी और असामाजिक

तत्वों की राजनीति

       त्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार और अराजक तत्वों की गुंडागर्दी के बीच चोली-दामन का रिश्ता रहा है। जिसके चलते जहां 2007 में प्रदेश की जनता ने उसे सत्ता से बेदखल कर दिया था तो वहीं इस बार सत्ता में आने के बावजूद सपा मुखिया मुलायम सिंह और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने कार्यकर्ताओं को अनुशासन में रहने की चेतावनी कई बार दे चुके हैं। मुलायम सिंह ने तो अखिलेश के शपथ ग्रहण से पहले ही कह दिया था कि यदि सपा कार्यकर्ता उन्हें प्रधानमंत्री बनते देखना चाहते हैं तो पिछली बार की तरह अराजकता न करें। जाहिर है, पूर्ण बहुमत से सत्ता में आयी सपा अपने ही कार्यकर्ताओं की अराजकता और गुंडागर्दी से डरी हुयी है।

? शाहनवाज आलम


ममता बनर्जी की सनक और

देश का भविष्य

      श्री आर के लक्ष्मण दुनिया के ऐसे अनोखे कार्टूनिस्टों में से एक हैं जिन्होंने लगातार 60 सालों से अधिक एक अखबार के प्रथम पृष्ठ पर कार्टून बनाने का रिकार्ड कायम किया है। जब उनके इस काम के पचास साल पूरे हुए थे तब एक पत्रकार ने उनका साक्षात्कार लिया था। इस साक्षात्कार में अन्य प्रश्नों के अलावा जब उन्होंने राजनीतिज्ञों के साथ उनके अनुभवों के बारे में प्रश्न किये तब उनका कहना था कि हमारे काम में बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु बहुत मनहूस साबित हुए हैं। जब पत्रकार ने प्रश्न किया कि वो कैसे,तो उनका उत्तर था कि उन्होंने मुझे आज तक कार्टून बनाने का मौका नहीं दिया।

? वीरेन्द्र जैन


बारदाने पर सियासत

प्रबंधन की अदूरदर्शिता-अन्नदाता पर आई आफत

        ध्यप्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार तमाम ऐसे मुद्दों पर सियासत करने में सदैव तत्पर रहती है जिनकी आड़ में लोगों की भावनाओं का संबंध जुड़ा होता है। अपनी असफलताओं,कमजोरियों और अदूरदर्शितापू्र्ण हरकतों पर पर्दा डालकर केन्द्र सरकार को टारगेट बनाने में माहिर सत्ता के रणनीतिकार नारों में तो मध्यप्रदेश बनाने का मंत्र देते हैं किंतु असलियत यह है कि आमजनों को हकीकतों से सदैव दूर रखना चाहते हैं। एक नहीं अनेक ऐसे मुद्दे हैं जिसमें राज्य के अदूरदर्शितापूर्ण कार्यों का मध्यप्रदेशवासियों को खामियाजा भुगतना पड़ा है।

? राजेन्द्र जोशी


अनाज के सरकारी भंडारण के विकल्प

    देश में अनाज भंडारण की समस्या लगातार बनी हुई है। ऐसे समय में जब गेंहॅू की नयी फसल आ चुकी है और हमारे गोदाम पहले से ही भरे हुए हैं,यह सवाल उठना लाजिमी है। संसद की वाणिज्य सम्बन्धी स्थायी समिति ने भी भंडारण की विकट होती समस्या पर चिंता प्रकट करते हुए सुझाव दिया है कि क्यों न भंडारण का निजीकरण व विकेन्द्रीकरण कर दिया जाय। समिति का मानना है कि अनाज वितरण की विधि में सुधार करके भी भंडारण की समस्या को काफी हद तक सुलझाया जा सकता है। गौरतलब है कि देश में अनाज भंडारण की पर्याप्त सुविधा नहीं है जिसके कारण प्रतिवर्ष 58,000 करोड़ रुपये मूल्य से अधिक का अनाज खुले मे रखने से सड़कर नष्ट हो जाता है। इस सम्बन्ध में सर्वोच्च न्यायालय भी गत वर्ष सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए ऐसे अनाज को गरीबों में मुफ्त बाँट देने का निर्देश दे चुका है।

 

? सुनील अमर


कार्बन उत्सर्जन में कमी और विकास

     विकास क्रम में हमारा राही चीन लो कार्बन आधारित विकास को बढ़ावा देने में आगे आ रहा है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए चीन अपने शहरों के कार्बन उत्सर्जन में कटौती करने के लिए आगे आया है। इस संदर्भ में विश्वबैंक द्वारा जारी अपनी हालिया प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि चीन के कम कार्बन उत्सर्जन आधारित विकास कार्यक्रम में बड़े शहर अपनी उर्जा खपत में कटौती के जरिए कार्बन उत्सर्जन में कटौती का योगदान देंगें। उल्लेखनीय है कि चीन में शहरीकरण तेजी से हो रहा है तथा  अगले बीस सालों में लगभग 35 करोड़ आबादी शहरीकरण की सीमा में शामिल होगी।

? डॉ. सुनील शर्मा


....ताकि चिकित्सक मातृभूमि से पलायन न करें

    ज़ादी के 65 बरस बाद भी हमारे देश की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। ग्रामीण अंचलों की स्थिति सर्वाधिक चिन्ताजनक है जहां बच्चे, बूढ़े, जवान, स्त्रियां, सभी स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों से जूझ रहे हैं और सरकार उनका स्थायी समाधान तलाशने में विफल रही है। चिकित्सक गांवों में जाना नहीं चाहते। सरकार देश में सबको अनिवार्य स्वास्थ्य सेवाएं देना चाहती है किन्तु यह तभी संभव है जब पर्याप्त संख्या में चिकित्सक उपलब्ध हों। ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा-सेवा की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु सरकार ने तीन वर्ष के बैचलर ऑफ रूरल हेल्थ केयर कोर्स का प्रस्ताव भी किया है मगर इसे मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया की स्वीकृति नहीं मिली है और इसका विरोध भी जारी है। 

? डॉ. गीता गुप्त


  07 मई2012

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