संस्करण: 07 जनवरी-2012

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विरोध के लिए बस

बहाना चाहिए

       राष्ट्रीय विकास परिषद की सालाना बठकें अब आपसी तालमेल के बजाय केवल विपक्षी दलों की सरकारों की असहमति के लिए ही यादा जानी जाती हैं। जिस परिषद को केंद्र और रायों के बीच सर्वोच्च नीति निर्धारक मंच माना जाता है,उसकी बैठकों में मुख्यमंत्री सो जाते हैं,बेसबब नाराज होकर भाग जाते हैं और बाहर आकर केंद्र सरकार को कोसना शुरू कर देते हैं। गैर कांग्रेसी सरकारों का यह स्थाई भाव बनता जा रहा है। दुर्भाग्यपूण्र यह है कि ये मुख्यमंत्री यह भी नहीं सोचते कि जनता क्या सोचेगी?

?   विवेकानंद


बम रखनेवाले स्वामीजी, विस्फोटकों को ढोनेवाले मास्टरजी

कहां छिपे हैं हिन्दुत्व आतंक के असली संरक्षक

          मझौता ट्रेन और मालेगांव विस्फोट मामले के आरोपियों ने किया जम्मू में भी धामाका। ..मध्यप्रदेश से हाल ही में गिरतार राजेश चौधारी,धन सिंह और तेज राम से पूछताछ में यह अहम सुराग मिला है।.. आरोपियों ने एनआईए को बताया कि जम्मू में जनवरी 2004 में पीर मिथा स्थित अहले हदीस मस्जिद के बाहर ग्रेनेड धमाके में उनके समूह का हाथ था,जिसमें दो लोग मारे गए थे और 20 घायल हुए थे। कश्मीर पुलिस  ने घटना में तहरीक अल मुजाहीदीन के हाथ होने का दावा किया था। (जागरण, 28 दिसम्बर 2012)

? सुभाष गाताड़े


असली दोषी का सुधार

कौन करेगा?

      दिल्ली की बस में गैंग रेप की शिकार युवती की मृत्यु के बाद भड़की जनभावनाओं को देखते न्याय व्यवस्था द्वारा उस पर हमला करने वालों को जल्दी से जल्दी कानून सम्मत कठोरतम सजा देने का दायित्व बनता है। भले ही फाँसी की सजा से मृतक की वापिसी नहीं होती किंतु कठोर सजा से समाज में वह माहौल बनता है जिसके डर से दूसरा कोई वैसा अपराध करने से पहले कुछ क्षण सोचने को विवश हो सकता है। किसी एक मामले में दी गयी सजा उस पीड़ित को न्याय देने तक ही सीमित नहीं रहती अपितु वह सम्भावित अपराधों को रोकने का भी काम करती है।

? वीरेन्द्र जैन


दामिनी के आगे !

         ए साल के इन्तज़ार में बीते साल की रात इस बार अलग ढंग से बीती। राजधानी में कई जगहों पर लोग एकत्रित होकर नए साल का स्वागत मानो इस संकल्प के साथ कर रहे थे कि अब और अत्याचार नहीं। दिल्ली के कनाट प्लेस जैसी जगह जहां हर साल नववर्ष की पूर्वसंध्या पर तमाम लोग एकत्रित होकर जश्न मनाते हैं, वह भी तुलनात्मक रूप से खामोश रहा। यह अच्छी बात है कि एक आम लड़की ने सभी को सोचने के लिए और अपनी प्रतिबध्दता जताने के लिए प्रेरित किया है। वह लड़की जिसे हमने 'निर्भया', 'दामिनी', 'अमानत', 'ज्योति' ऐसे कई नामों से पुकारा - उसकी जीने की जीजीविषा सुस्त पड़ी तरूणाई को अन्दर तक झकझोर गयी।

? अंजलि सिन्हा


भाजपा सरकार से

जवाब मांगते सवाल

       ध्यप्रदेश में शासकीय योजनाओं की क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठने का सिलसिला तेज हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा जनकल्याणकारी योजनाओं को पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए भेजी गई बड़ी रकम भ्रष्टाचारियों की भेंट चढ़ गई है। केंद्रीय निधि से मध्यप्रदेश में जो योजनाएं संचालित की जा रही है उनमें पर्याप्त पैसा स्वीकृत कर दिए जाने के बाद भी न तो जनता को सुविधाएं समय पर मिल पा रही है और न ही केंद्रीय निधि का निश्चित समय अवधि में पूरा उपयोग हो पा रहा है। केंद्र की ओर से पर्याप्त धन राशि उपलब्ध करवा दिए जाने पर भी अनेक योजनाओं के लक्ष्य अब तक पूर्ण नहीं किए जा सके है।

 ?   अमिताभ पाण्डेय


भाजपा का सटीक प्रतिनिधित्व करते हैं कल्याण

                  त्तर प्रदेश में तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके श्री कल्याण सिंह तीसरी बार अपनी पितृ पार्टी भाजपा का हाथ थामने जा रहे हैं। इसी महीने मकर संक्रांति पर्व 14 जनवरी के बाद वे कभी भी तिबारा भाजपा में शामिल हो सकते हैं। इसकी तैयारी और घोषणाऐं हो चुकी हैं। इस प्रकार अब यह साफ हो गया है कि कल्याण और भाजपा एक दूसरे के लिए ही बने हैं और दोनों का चाल, चरित्र और चेहरा एक जैसा ही है। 80 वर्षीय श्री कल्याण सिंह पिछले कई महीने से भाजपा में वापसी के लिए बेचैन थे।  

? सुनील अमर


12 जनवरी को जन्मदिन पर विशेष

धर्म निरपेक्ष भेदभाव रहित भारत के संवाहक थे स्वामी विवेकानन्द

      थार्थ में स्वामी विवेकानन्द आधुनिक भारत के प्रथम निर्माता थे। आजादी के आंदोलन के दौरान जिस आधुनिक भारत की परिकल्पना की गयी थी उसकी नींव स्वामी विवेकानंद ने डाली थी। आधुनिक भारत की जो कल्पना आजादी के आंदोलन के दौरान की गयी थी उसे अमलीजामा पहिनाया संविधान सभा ने। संविधान सभा ने एक ऐसे भारत की नींव डाली जिसका मुख्य आधार सेक्यूलर या धर्मनिरपेक्ष था। विवेकानंद ने सेक्यूलर भारत की कल्पना बहुत ही स्पष्ट शब्दों में की थी। भारत में विभिन्न धर्मों के अनुयायी रहते हैं। इन धर्मों के समन्वय में ही भारत का भविष्य निहित है।

? एल.एस.हरदेनिया


निर्वाचन के छ: माह पूर्व तय हों उम्मीदवारों के नाम

प्रचार के लिए मिलना चाहिए पर्याप्त समय

      विभिन्न राजनैतिक पार्टियां लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के निर्वाचन के समय पहले उम्मीदवारों के नाम तय करने में अक्सर इतनी देर कर देती हैं कि निर्वाचन की तिथियां नजदीक आ जाती है और कुछ सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नाम तक घोषित नहीं कर पाती। कभी कभी तो ये हालात बन जाते हैं कि उम्मीदवारी का पर्चा दाखिल होने के बाद नाम वापिस लेने की तिथि के आखरी क्षणों में नाम तय हो पाता है। इस तरह की राजनैतिक परिस्थितियां भी उत्पन्न हो जाती हैं कि...

? राजेन्द्र जोशी


प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजना की चुनौतियां

        यूपीए सरकार की महत्वकांक्षी योजना 'डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर' यानी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजना नये साल की पहली जनवरी से देश के 20जिलों में एक साथ शुरू हो गई है। योजना के तहत सरकार ने हाल-फिलहाल 7समाज कल्याण योजनाओं की सब्सिडी का पैसा सीधे लाभार्थियों के खाते में भेजने का फैसला किया है। इन योजनाओं में अनुसूचित जाति,जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्र छात्राओं को मैट्रिक बाद की पढ़ाई के लिए दी जाने वाली छात्रवृति,इंदिरा गांधी मातृत्व सहायता योजना,अनुसूचित जाति के परिवारों को कन्याओं की बीमा सुरक्षा तथा सशर्त नकदी अंतरण धनलक्ष्मी योजना आदि शामिल हैं।

? जाहिद खान


मीडिया में कौन लोग छाए हैं

       मीडिया के मालिकाना हक पर तो दुनिया भर में चर्चाएं होती रही हैं। लेकिन मीडिया में होने वाली बहसों में भी एक मालिकाना हक दिखाई देता है और वह मीडिया पर एकाधिकार के विमर्श में दिखाई नहीं देता हैं। मीडिया के विभिन्न माध्यमों में होने वाली बहसों में कौन शामिल रहता है या किसका एकाधिकार है,  इसे समझने के लिए यहां तीन सर्वे की चर्चा जरूरी होगी। मीडिया स्टडीज ग्रुप ने एक सर्वे में पाया कि वर्ष 1975-76 में आपातकाल के समय सरकार ने अपनी नीतियों के प्रचार-प्रसार के लिए कुछ थोड़े से लोग जिसमें ज्यादातर पत्रकार थे, को इस्तेमाल किया। दूरदर्शन के विभिन्न केंद्रों के जरिये होने वाले प्रसारण में इन पत्रकारों को बुलाया जाता रहा गया।    

? विजय प्रताप


बलराज साहनी और मंटो ने इंसानी तहजीब को दिशा दी

        24 साल पहले कुछ राजनीतिक गुंडों ने दिल्ली के कलाकार, सफदर हाशमी को बहुत ही क्रूर तरीके से मारडाला था। सफदर हाशमी पर हमला उस दिन हुआ जब वे मजदूरों के एक इलाके में नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर रहे थे ।बाद में उनके साथियों ने राजनीतिक गुंडई को चुनौती दी और उसी जगह पर जाकर सफदर के अधूरे नाटक का मंचन किया । 1 जनवरी 1989 के दिन सफदर हाशमी पर जानलेवा हमला हुआ था। उनकी याद में  सफदर हाशमी मेमोरियल  ट्रस्ट बनाया  गया ।इसी ट्रस्ट का नाम सहमत है ।

? शेष नारायण सिंह


बच्चों पर जारी स्कूली क्रूरता ?

       ण्ड का कहर जारी है। एक निजी स्कूल में पहली कक्षा का छह वर्ष का छात्र गोलू कम से कम नौ बजे तक बिस्तर नहीं छोड़ना चाहता है। मगर गोलू को सुबह साढ़े छह बजे ही बिस्तर छोड़ना पड़ता है। क्योंकि उसे समय पर स्कूल पहॅचना है। उसके माता पिता को डर है कि कहीं गोलू पढ़ाई में पीछे न रह जाए। वैसे लेटलतीफी और अनुपस्थिति पर स्कूल को फाइन के रूप में अर्थदण्ड भी देना पड़ेगा। और इस भीषण ठण्ड में भी उसके स्कूल से कोई विशेष राहत नहीं है। पहली कक्षा के छात्र गोलू की कक्षा सुबह की पारी में लगती है।     

? डॉ. सुनील शर्मा


  07 जनवरी-2012

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