संस्करण: 7 अप्रेल-2014

CLICK HERE TO DOWNLOAD HINDI FONT


रफ्ता रफ्ता फासीवाद !

इन्सानियत हां, मोदी ना ना !!

     खिर 2014 के आसन्न चुनावों की आजाद भारत के इतिहास में आज इतनी अहमियत क्यों बनी हुई है? क्यों उसकी तुलना जर्मनी के 1933 के चुनावों से की जा रही है, जिसने हिटलर के आगमन का रास्ता सुगम किया था, यह विचारणीय प्रश्न है।        

? सुभाष गाताड़े


देश में सॉफ्ट फासिज्म की पदचाप सुनाई दे रही है

        भारत में नाजीवाद और फासीवाद पदचाप सुनाई दे रही है। निकट भविष्य में जो नाजीवाद या फासीवाद हमारे देश में आएगा वह उतना खूंखार और हिंसक नहीं होगा जितना कि हिटलर की जर्मनी और मुसोलनी के इटली में था। हिटलर भी प्रजातांत्रिक तरीके से सत्ता में आया था। सत्ता में आने के बाद उसने सभी प्रजातांत्रिक संस्थाओं को तहस-नहस कर दिया था और एक अत्यधिक क्रूर एवं हिंसक तानाशाह बन गया था। हमारे देश में भी हिटलर की तर्ज वाला फासिज्म आ सकता है। इस बात की संभावना प्रतिष्ठित दैनिक अखबार द टाईम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक लेख में व्यक्त की गई है।

?

एल.एस.हरदेनिया


हिटलर और मोदी:

साम्यताएं महज संयोग हैं क्या

     मानव का स्वभाव है कि वह किसी चीज को किसी परिप्रेक्ष्य में रखकर ही पहचान सकता है, उसे पूरी तरह समझ सकता है। अब तो सापेक्षता विज्ञान की भी स्वीकृत धारणा है। कोई चीज किसी संदर्भ में ही मोटी-पतली या अच्छी-बुरी होती है। अगर इसी बात को दूसरे शब्दों में कहा जाये तो तुलना और उदाहरण बुध्दि द्वारा विकसित बौध्दिक उपकरण हैं- इससे ही विकास की धारा का,इतिहास की दिशा का पता चलता है। वस्तुत: बिना दूरी लिए हम किसी भी वस्तु को पूर्ण रूप से नहीं देख सकते हैं और वर्तमान से दूरी लेने का एक ही तरीका है कि उसे अतीत से जोड़कर देखा जाए। 

 ? अनिल यादव


क्या एम.जे. अकबर द्वारा मोदी की हिटलर से तुलना भाजपा को रह-रहकर परेशान करेगी?

      ''विगत 10 वर्षों में कोई भी दूसरा राजनेता इतनी अधिक जांच से नही गुजरा जितने मोदी इनसे गुजरे है। उनकी जांच पुलिस,केन्द्र सरकार, सी.बी.आई., कोर्ट द्वारा नियुक्त संस्थाओं द्वारा की गई। और उन लोगों के द्वारा भी जिन्होने इस मुद्दे को पूरे समय उठाये रखा। मैं उन सब लोगों से कहना चाहूँगा कि वे गुजरात दंगों पर दी गई जस्टिस वी.आर. कृष्णा की रिपोर्ट पढ़े।''

? फर्स्ट पोस्ट.कॉम से साभार


संघ का सियासी चेहरा बेनकाब

              राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अब तक यही कहता रहा है कि वह एक सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन है, लेकिन पहली बार संघ ने अपने चेहरे से खुद ही नकाब उतार दिया। संघ नेता राममाधव ने स्वीकार किया कि भगवा संगठन राजनीति में पहले से अधिक सक्रिय है। राममाधव के मुंह से यद्यपि इस स्वीकारोक्ति कि आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि बीजेपी में संघ के लगातार दखल से यह पहले ही साफ हो चुका था।

 ?   विवेकानंद


राजनीतिक जगत में छवियों का खेल

           मुख्तार अब्बास नकवी ने साबिर अली की भाजपा में भर्ती से असंतुष्ट दिख कर सार्वजनिक रूप से कहा था कि अली आतंकी भटकल के दोस्त हैं और अब तो दाउद भी भाजपा में आ जायेंगे। वे इस पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हैं। इससे घबरा कर भाजपा ने बिना किसी तर्क वितर्क जाँच के साबिर अली को चौबीस घंटे के अन्दर बाहर का रास्ता दिखा दिया। दूसरी ओर जब अली ने माफी न माँगने की दशा में पत्नी के मुख से इस निष्कासन का विरोध करवाया और मानहानि के दावे समेत मुख्तार के घर के बाहर अनशन की धमकी दिलवायी तो उनका कहना था कि मेरी साबिर अली से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है पर उनकी छवि अच्छी नहीं है।

? वीरेन्द्र जैन


वाराणसी चुनाव हर हाल में जीत लेने के लिए जुटी

मोदी की सेना

      लोकसभा चुनाव 2014 अब वास्तविक दौर में पंहुच गया है। और किसी पार्टी ने प्रधानमंत्री पद का दावेदार घोषित नहीं किया है इसलिए इस पद के इकलौते दावेदार नरेंद्र मोदी पूरे देश में घूम रहे हैं और तरह तरह के आंकड़े दे रहे हैं , तरह तरह की बातें कह रहे हैं। उनमें से कुछ बातें सच भी हैं। लेकिन चुनाव सभाओं में कही गई बातों को आम तौर पर सच की कसौटी पर नहीं कसा जाता। पिछले छ: महीने से नरेंद्र मोदी की धुंआधार सभाओं का मकसद उनके पक्ष में लहर बनाना था जो नहीं बन पाई है।

?  शेष नारायण सिंह


घातक बनता मल्टीनेशनल का चुनावी चंदा

     भी हाल ही में, अधिवक्ता प्रशांत भूषण द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर की गयी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने केन्द्र सरकार और चुनाव आयोग को आदेश दिया है कि वे बहुराष्ट्रीय कंपनी वेदांता और उसकी सहायक कंपनियों से गैर कानूनी तरीके से करोड़ों रुपए चुनावी चंदा लेने के लिए भाजपा और कांग्रेस पर कार्यवायी करे। उच्च न्यायालय का यह आदेश दोनों राजनैतिक दलों द्वारा 'फॉरेन कंन्ट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट-1976' का उल्लंघन करने पर आया है, जिसमें किसी भी विदेशी स्त्रोत या संस्थान से चुनावी चंदा लेने की स्पष्ट मनाही है। 

? हरे राम मिश्र


शिक्षा अधिकार कानून के चार साल:

क्या खोया, क्या पाया

        र साल 1 अप्रैल को पूरी दुनिया मूर्ख दिवस मानती है, संयोग से चार साल पहले भारत सरकार ने देश के 6 से 14 साल के सभी बच्चों को शिक्षा का अधिकार देने के लिए के लिए इसी दिन को चुना और एक अप्रैल 2010 को ''शिक्षा का अधिकार कानून 2009'' पूरे देश में लागू किया गया।    

? जावेद अनीस


समय रहते सजग हो जाएं

     प्रकृति से छेड़छाड़ समूची मानवजाति के लिए खतरनाक हो सकती है, यह बात कई अध्ययनों से सामने निकलकर आ चुकी है। पर्यावरण परिवर्तन के अंतरसरकारी पैनल (आइपीसीसी) की ताजा रिपोर्ट ने एक बार फिर हमें चेतावनी दी है कि यदि हमने ग्रीन हाऊस गैसों के बढ़ते प्रदूषण को इसी तरह से नजरअंदाज किया, तो इसके गंभीर नतीजे पूरी दुनिया को भुगतने होंगे। रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल वार्मिंग यानी बढ़ते तापमान से लोगों के स्वास्थ, रहन-सहन, खान-पान और सुरक्षा को काफी खतरा बढ़ गया है। इसके असर से कोई भी नहीं बचा है। आने वाले सालों में ग्लोबल वार्मिंग के दुश्प्रभावों से पृथ्वी पर कोई अछूता नहीं रहेगा।

? जाहिद खान


हादसो से कमजोर होती सैन्य शक्ति

        भारतीय वायुसेना का आधुनिक मालवाहक जहाज हरक्युलिस सी-130 जे बीते शुक्रवार की दोपहर मध्यप्रदेश और राजस्थान सीमा से सटे रघुनाथपुर गांव के पास गिरकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में 4 पायलट के साथ-साथ एक अन्य की भी मौत हो गई। घटनाओं के पैमाने पर देखा जाए तो यह महज एक हादसा ही है, जो किसी तकनीकी खराबी अथवा किसी दूसरी वजह से हुआ है। लेकिन भारतीय सेनाओं के नजरिए और ट्रैक रिकार्ड पर देखा जाए तो यह दुर्घटना महज एक और हादसा नहीं है बल्कि उस बदहाली और बदइंतजामी का एक और अध्याय है, जिसके चलते दुनिया का यह आधुनिक विमान तो तबाह हुआ ही हमारे चार होनहार पायलट भी शहीद हो गए। यह कोई पहला मौका नहीं है।

? सुनील तिवारी


चल बसा सरिस्का का कसाई

      चुनाव के इस मौसम में पर्यावरणविदों के लिए एक खबर ने राहत दी है। अब यदि यह कहा जाए कि संसार चंद चल बसा, तो किसी को आश्चर्य नहीं होगा। पर जो संसार चंद को जानते हैं, वे यह भी अच्छी तरह से जानते हैं कि उससे बड़ा कसाई आज तक पैदा ही नहीं हुआ। वह तो सरिस्का का वीरप्पन था। उस पर 850 बाघों की हत्या का आरोप था। उसने 2004 में राजस्थान के सरिस्का अभयारण्य में बाघों की पूरी बस्ती का ही खात्मा कर दिया था।       

? डॉ. महेश परिमल


फंदे से दूर हुई फांसी

        पंजाब में उग्रवाद का सफाया करने में दो राजनीतिकों का अहम एवं अभिनंदनीय योगदान रहा है। एक पंजाब के मुख्यमंत्री रहे बेअंत सिंह,जिन्होनें अपने प्राणों की आहुति देकर उग्रवाद को नेस्तनाबूद किया। लेकिन विडंबना देखिए,उनके हत्यारे बलवंत सिंह राजोआना की फांसी अनर्गल तकनीकि कारणों से अटकी हुई है। दूसरे, जुझारू और आतंकवाद के खिलाफ निरंतर आग उगलने वाले युवक कांग्रेस के पूर्व अधयक्ष मनिंदर सिंह बिट्टी हैं,जिन्हें कुख्यात खालिस्तान आतंकी देविंदर सिंह पाल भुल्लर ने 1993 में एक बम बिस्पोट करके मारने की कोशिश की थी।

? प्रमोद भार्गव


  7 अप्रेल-2014

Designed by-PS Associates
Copyright 2007 PS Associates All Rights Reserved