संस्करण: 07 फरवरी -2011

CLICK HERE TO DOWNLOAD HINDI FONT


'असीम' आतंक के प्रचारक

क्या अब हिन्दुत्व आतंक के असली मास्टरमाइंड सलाखों के पीछे पहुंचेंगे ?

  ''मेरा नाम स्वामी असीमानन्द है। मैं ही वह शख्स हूं जिसने समझौता एक्सप्रेस और अन्य स्थानों पर बम धमाके का आयोजन किया और इस काम के लिए लोगों को प्रेरित किया क्योंकि मैं बेहद गुस्से में था।' >सुभाष गाताड़े


भारत के लिए हल्ला बोलने का यही समय है


  राहुल गांधी का बयान कि आरएसएस भारत के लिए एक बड़ा खतरा है और दिग्विजय सिंह का यह इशारा कि आरएसएस आतंकवादी गतिविधियों में शामिल है, ने कांग्रेस ओर आरएसएस की राजनीतिक शाखा भाजपा के बीच मौखिक युध्द छेड़ दिया है। >असीफ मोज्जाम जमाई


क्या भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन किसी परिणाम तक पहुँचेगा ?

 

  पूरे देश में इस समय भ्रष्टाचार पर सबसे अधिक ध्यान केन्द्रित हो रहा है। इसका कारण केवल इतना ही नहीं है कि एक साथ ही कुछ बड़े मामले उजागर हो गये हैं, >वीरेन्द्र जैन


आदिवासियों के ''हिन्दूकरण'' का एक और प्रयास

 

  र्ष 2006 में गुजरात में आयोजित ''शबरी कुंभ'' की तर्ज पर मध्यप्रदेश के मंडला जिले में ''माँ नर्मदा सामाजिक कुंभ'' आयोजित हो रहा है। >एल. एस. हरदेनिया


अरब जगत में बदलाव की आहट

 

   रब जगत में बदलाव की आहट शुरू हो गई है। टयूनीशिया में राष्ट्रपति बेन अली के खिलाफ़ लोगों का गुस्सा फूटा और उन्हें देश छोड़ कर भागने को मजबूर होना पड़ा इसके बाद मिस्र में जनविद्रोह शुरू हो गया। >महेश बागी


मध्यप्रदेश का आंचलिक परिवेश परम्परागत व्यंजनों से समृध्द

  ध्यप्रदेश विविध आंचलिक संस्कृतियों का एक अनूठा संगम स्थल है। मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड, बघेलखंड जैसे बहुरंगी क्षेत्रों की बोलियां, रहन-सहन, खान-पान, रीति-रिवाजों और लोककलाओं के मनोरम परिवेश का एक अलग ही अंदाज यहां देखने को मिलता है। >राजेन्द्र जोशी


पारदर्शिता के लिए सूचना तकनीकी का उपयोग

 

  रकार आज जिन तीखें सवालों का सामना कर रही है उनमें से भ्रष्टाचार भी एक है और भ्रष्टाचार को समाप्त करने में मदद करने वाले उन सभी विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए जिससे इसे रोकने में मदद मिले। >मिथिलेश कुमार


सामाजिक बदलाव का शिकार बनते बच्चे

 

  दिल्ली में कराये गये एक सर्वेक्षण में यह चिंताजनक तथ्य सामने आया है कि स्कूल जाने वाले प्राथमिक कक्षा के बच्चों के बस्ते से उनका टिफिन गायब होता जा रहा है। >सुनील अमर


बढ़ती जनसंख्या, बिगड़ता पर्यावरण, हम कब सचेत होंगे?

 

  देश का पर्यावरण संतुलन बुरी तरह से बिगड़ गया है। जनसंख्या विस्फोट से हालत बद से बदतर होती जा रही है। पर्यावरण मंत्री ने इस ओर ध्यान देना शुरू किया है, >डॉ. महेश परिमल


मूर्ख बनाने से बनना अच्छा

 

  ज के भारत में से एक बड़े घोटालों की जो रफ्तार नज़र आ रही है, उसे देखते लगने लगा है, कि दूसरों को मूर्ख बनाकर अपनी समृध्दि बढ़ाना हमारा राष्ट्रीय चरित्र ही बन गया है। >डॉ. देव प्रकाश खन्ना


प्रश्न इच्छा-मृत्यु की वैधता-अवैधता का

  भारत में एक बार फिर इच्छा-मृत्यु की वैधता-अवैधता का प्रश्न उठ खड़ा हुआ है। दो साल पहले भी यह प्रश्न तब उपस्थित हुआ था जब कनार्टक के हल्दीपुर (शिमोगा) की अरुणा रामचन्द्र का प्रकरण उजागर करते हुए उसकी मित्र पिंकी विरानी ने उच्चतम न्यायालय में >डॉ. गीता गुप्त


07 फरवरी -2011

Designed by-PS Associates
Copyright 2007 PS Associates All Rights Reserved