संस्करण: 6 मई -2013

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बाबा रामदेव और उमा भारती

भारतीय राजनीति में भगवाभेषी भटकती आत्माएं

       हिन्दू समाज में मान्यता है कि जब इच्छाएं अतृप्त रह जाती हैं तो आत्माएं इसी लोक में भटकती रहती हैं और उन्हें मुक्ति नहीं मिलती। इन दिनों हमारे देश की राजनीति में हिन्दू राजनीति केन्द्रित दो आत्माएं भगवा भेष धारण कर सत्ता की प्यास में ऐसी ही भटक रही हैं जिनका कोई ठिकाना नहीं कि वे कब किसके साथ हो जायें और क्या कहने लगें। दोनों के पास ही इतने संसाधन हैं जो हर बिकाऊ जिंस को खरीद सकते हैं पर उन्हें अपने सपनों के लिए पंखों की तलाश है जो उन्हें बाजार में नहीं मिल रहे।

?  वीरेन्द्र जैन


बोलने से पहले,

अपने अतीत में झांके भाजप

       चीनी सेना की घुसपैठ और पाकिस्तानी जेल में भारतीय कैदी सरबजीत सिंह पर हमले को लेकर प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने जिस तरह का रवैया अख्तियार किया है,वह समझ से परे है। यद्यपि भारतीय सीमाओं की रक्षा और दुनिया के किसी भी देश में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा का दायित्व भारत सरकार का ही है और उसे हर कीमत पर निभाना भी चाहिए,लेकिन इन दोनों मामलों को लेकर भाजपा के नेता जिस तरह से सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे हैं, उससे तमाम तरह के सवाल उन्हीं की ओर मुंह बाए खडे हो जाते हैं। मसलन भाजपा नेता यूपीए सरकार की विदेश नीति पर सवाल खड़े कर रहे हें,सरकार के इकबाल पर सवाल खड़े कर रहे हैं, लेकिन ...

? विवेकानंद


भाजपा के हठ के कारण संसद का एक

और सत्र हंगामे की बलि चढ़ा

      दुनिया के सबसे बड़े प्रजातंत्र की सबसे बड़ी ताकतवर प्रतिनिधि संस्था लोकसभा का एक और अधिवेशन हो हल्ले,बहिष्कार की बलि चढ़ गया है। इस बार फिर लोकसभा के मुख्य विरोधी दल भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पूरी ताकत लगाकर सदन की कार्यवाही नहीं चलने दी। भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि जब तक प्रधानमंत्री और एक,दो मंत्री ओर इस्तीफा नहीं देंगे हम लोकसभा की कार्यवाही नहीं चलने देंगे। प्रतिपक्ष का यह रवैया अत्यधिक गैर-जिम्मेदाराना है।

? एल.एस.हरदेनिया


भाजपा के मिशन 2013 पर ग्रहण

      भूल गए शायद

              खेतों में जो किरचे बोए थे तुमने

              अब तुम अपना चेहरा

             कहां छुपाओगे?

               मालवा के मशहूर कवि सुभाष दशोत्तर की ये पंक्तियां शिवराज सरकार के कामकाज और उनकी भावी महत्वाकांक्षाओं पर एकदम खरी उतरती हैं। भाजपा को विश्वास है कि शिवराज सिंह के नेतृत्व में पार्टी एक बार फिर सत्ता सुंदरी का उपभोग करेगी, लेकिन इसमें संदेह की इतनी सुइयां खड़ी हो गई हैं कि खुद भाजपाई इस पर विश्वास नहीं कर रहे हैं।

? महेश बाग़ी


संस्कृति में झलकती अभद्रता

         पिछले कुछ समय से राजनीतिज्ञों तथा प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दिए गए अभद्र बयान सूर्खियों में रहे हैं। यह भी देखने को मिला कि उनकी पार्टी या विभागों ने खुल कर उनका साथ नहीं दिया या वह ऐसा करने की हिम्मत जुटा नहीं पायी।

 

 ?   अंजलि सिन्हा


बलात्कार उत्सव में

खूंखार कैदियों से न्याय की आस

                  पिछले वर्ष दिल्ली के दामिनी सामूहिक बलात्कार कांड के बाद लोगों का गुस्सा ऐसा फूटा कि राजनेताओं के कान खड़े हो गये।आनन फानन में बलात्कार विरोधी नया कानून लागू कर दिया गया। वैसे देश में कानूनों की कमी नहीं है,कमी है तो केवल उनका पालन कराने के लिये दृढ़ इच्छा शक्ति की। फिर भी जनाक्रोश शांत करने के लिये एक नया कानून बना दिया गया। लोगों ने सोचा इस कानून के आने से बलात्कारियों तथा भ्रष्टक पुलिस अधिकारियों कर्मचारियों में थोड़ा डर पैदा होगा तथा बलात्कार की घटनायें रुक जायेंगी।  

? मोकर्रम खान


अखबार बेच रहा है नौ बरस का बालक

राहुल ने कहा-बंद करो, यह काम, स्कूल जाओ !

      र्व शिक्षा अभियान की खुले आम धज्जियां उड़ रही हैं। गरीब से गरीब माता-पिता की संतान पढ़े-लिखे शिक्षित बने और फिर अपने पांव पर पर खड़े होकर माता-पिता का भी भरण-पोषण करें, इस उद्देश्य को लेकर सरकारें प्रतिवर्ष स्कूलों में दाखिले के वक्त इस बात पर ज़ोर देती हैं कि कोई भी बच्चा पढ़ाई से वंचित नहीं रह पाये। शिक्षा के मामले में हमारे यहां शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति में काफी भिन्नता रहती आई है किंतु सरकारों द्वारा चलाये जा रहे 'सबको शिक्षा' अभियान ने अपने उद्देश्यों में इस बात को प्राथमिकता दी है कि शिक्षा के अधिकार से शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के किसी भी असहाय, निर्धन परिवार का बच्चा स्कूल जाने से वंचित नहीं रह जाये।

? राजेन्द्र जोशी


उत्तरी इराक की भारी तेलसम्पदा

स्वतन्त्र कुर्दिस्तान को जन्म दे सकती है

      मरीका या इराक कभी नहीं चाहेगा कि उत्तरी इराक का इलाका एक अलग देश बन जाय लेकिन आज जो हालात हैं उन पर अगर एक नजर डालें तो कुछ वर्षों के अंदर ही एक स्वतन्त्र कुर्दिस्तान की संभावना नजर आने लगती है । इराक के उत्तरी हिस्से में तीन राज्य ऐसे हैं जिनको कुर्द राज्य कहा जाता है । इन्हीं तीन राज्यों की जो प्रांतीय सरकार है वह के आर जी यानी कुर्दिश रीजनल गवर्नमेंट के नाम से जानी जाती है। इस मुकाम तक पंहुचने में इराकी कुर्दों को बहुत धीरज और बहुत परेशानियों से गुजरना पड़ा है ।

? शेष नारायण सिंह


बाल विवाह बढ़ाती सरकार

        भारत में बाल विवाह एक बडी सामाजिक बुराई है। यह बात प्रदेश ही नहीं देश विदेश में भी लोग बखूबी जानते हैं। इस बडी सामाजिक बुराई का अन्त करने के लिए हमारी संवैधानिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण प्रावधान किये गये हैं। नियम कानून बनाये गयें। ये नियम कानून पूरे भारत में,मध्यप्रदेश में भी समान रूप से लागू हैं। देश के अन्य राज्यों की भांति मध्यप्रदेश में भी बाल विवाह कानूनी तौर पर प्रतिबंधित है। कॉग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री रहते हुए बाल विवाह को सख्ती से रोकने की इच्छाशक्ति को क्रियान्वित कर दिखाया।   

? अमिताभ पाण्डेय


घर में छिपे दानव की खोज जरुरी

       रंगाबाद जिले के खंडाला गांव के लोगों ने अपने टीवी सेट फूंक दिए हैं। गांव के 30 घरों के लोगों ने टीवी जलाने का फैसला सिर्फ इसलिए किया क्योंकि उनका मानना था कि इससे अश्लीलता फैल रही है। गांव के लोगों का कहना है कि टीआरपी बढ़ाने के नाम पर सीरियलों और विज्ञापनों में अश्लील दृश्य दिखाए जा रहे हैं। इन दिनों परिवार के साथ बैठकर टीवी देखना मुश्किल ही हो गया था। बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे थे। गांव के नासिर खान का कहना है कि इन दिनों आईपीएल मैचों के दौरान बेहद कम कपड़ों में चीयर लीडर्स दिखती हैं। आखिरकार गांव के बुजुर्गों ने टीवी जलाने का फैसला किया।

 

? डॉ. महेश परिमल


किसानों को न्यूनतम आय गारण्टी मिले

        कुछ समय पूर्व गृह मंत्रालय ने अपने ऑकड़ों में बतलाया था कि देश के 42 फीसदी किसान तत्काल ही कृषि को छोड़ने तैयार है। अभी हाल ही में जारी जनगणना विभाग के ऑकड़ों के मुताबिक 2001 से 2011 के बीच 85 लाख लोगों ने खेती करना छोड़ दिया है।इस दौरान कृषि मजदूरों की संख्या में 3.5 फीसदी यानि लगभग 3.77 करोड़ की वृद्वि हुई है।इससे प्रतीत होता है कि खेती किसानी छोड़ने वाले किसानों में से अधिकतर कृषि क्षेत्र में ही मजदूर बन गए है।

? डॉ. सुनील शर्मा


12 मई 'मदर्स डे' पर विशेष

भारत में हर दिन मां का....

       श्चिमी देशों की तर्ज़ पर भारत में मातृत्व को समर्पित एक दिवसीय पर्व की पैरोकार कम से कम मैं तो नहीं हूं। पर जिस तरह देश में समाज में नैतिक मूल्य नष्ट होते जा रहे हैं, संबंधों की पवित्रता धूमिल होती जा रही है, नाते-रिश्ते अपनी अहमियत खोते जा रहे हैं, उससे लगता है कि तेज़ी से ग्लोबल हो रहे भारत में अब हमें एक दिवस विशेष (अन्तराष्ट्रीय पर्व) के बहाने अपनी संस्कृति की नब्ज टटोलनी ही होगी।

 

? डॉ. गीता गुप्त


  6 मई -2013

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