संस्करण: 06 जून-2011

इस आव्हान को स्वीकारें, मंत्री जी

? वी. श्रीधर

               नई दूरसंचार नीति को निम्नलिखित 10 सूत्री एजेंडे का ध्यान रखना चाहिए, जिनमें से अधिकांश लंबे समय भुलाए हुए हैं

                चूंकि, नई दूरसंचार नीति, 2011 का मसौदा तैयार किया जा रहा है, विवादित स्पेक्ट्रम मुद्दों से अलग, हम इन भुला दिए गए अंशों की ओर मंत्री जी का ध्यान खींचते हैं-

 भारत ऐसे बहुत ही थोड़े देशों में से एक है, जहां अभी भी इंटरनेट टेलीफोनी पर प्रतिबंध हैं। यह बताता है कि क्यों किसी भी अन्य देश को एक स्काइप कॉल (Skype call) करने का दाम 2.3 सेंट्स है, जबकि भारत को 9.7 सेंट्स। हालांकि 2006 में बेसिक और सेल्युलर ऑपरेटरों द्वारा आबाधित इंटरनेट टेलीफोनी स्वीकार थी, इसे टेलीकॉम कंपनी के अपनी लाभकारी वॉयस सेर्विस को बचाने में स्वरुचि के कारण कभी बंद नहीं किया। ट्राई की 2008में देश भर में मोबाइल और लैंडलाइन नेटवकों को आबाधित इंटरनेट टेलीफोनी कॉल्स मुहैया करने के लिए इंटरनेट सर्विस प्रोवाइटर्स (आईएसपी) को अनुमति देने पर अनुशंसा टेलीकॉम कंपनियों द्वारा लॉबिंग करने को भीड़ जुटा रही है। यह समय नीति को टेक्नोलॉजी के पूरी तरह दोहन के लिए सक्षम बनाने और एक अवरोध जैसा व्यवहार नहीं करने का है।

 इससे पहले 2004 में, ट्राई लोकल लूप अनबंडलिंग (एलएलयू) पर अनुशंसाओं के साथ आया था, जो वायर लाइन एक्सेस प्रोवाइडर्स को अपने लेंडलाइन लोकल लूप अधोसंरचना को दूसरे अन्य सर्विस प्रोवाइडर्स और आईएसपी को लीज या किराए पर देनी की अनुमति देता है। फिर भी,मूल लैंडलाइन ऑपरेटर्स-बीएसएनएल और एमटीएनएल को बचाने की सरकार की मंशा के लिए धन्यवाद, इसे दिन के उजाले में कभी नहीं देखा गया। यह नीति लैंडलाइन ग्राहकी में लगातार गिरावट के परिणाम में महत्व और आवासीय व उद्योग दोनों उपयोगकताओं को ब्रॉडबैंड सर्विस की अधिकता देने को वायर युक्त लोकल लूप की संभावना की कल्पना करती है।

 यद्यपि करीब 25 फर्म्स के पास राष्ट्रीय लंबी दूरी और अंतरराष्ट्रीय लंबी दूरी के लाइसेंस हैं, प्रतिस्पर्धा का पूर्ण प्रभाव अंतोगत्वा कॅरियर एक्सेस कोड (सीएसी) के गैर कार्यान्वयन के कारण उपभोक्ता तक पहुंचा है। यह कोड पहली बार ट्राई द्वारा 2002में अनुशंसित था। यह कोड उपभोक्ता को यह अधिकार देता है कि वह कॉल-दर-कॉल आधार पर अपने कॅरियर को सीधे चुन सकता है,और एक्सेस सर्विस प्रोवाइडर द्वारा दबाव बनाने के अनुग्रह पर नहीं हो रहा है। हालांकि, अधिकारियों, यानी सरकारी ऑपरेटर्स, के सीमित तकनीकी क्षमता और सीएसी के उन्नयन में शामिल लागत का हवाला देते हुए, योजना ठंडे बस्ते में रख दी गई। बैबी बेल कंपनियों, जिन्होंने लंबी दूरी के बाजारों में प्रतिस्पर्धा की शुरूआत की, के भंडाफोड़ से एक साल पहले, 1983 में यूएस में फेडरल कमीशन (एफसीसी) द्वारा सीएसी कार्यान्वित था। हम क्या इंतजार कर रहे हैं?

 ट्राई द्वारा 2009 में मोबाइल वर्चूअल नेटवर्क ऑपरेटर (एमवीएनओ) लाइसेंस पर अनुशंसाएं जारी की गई थी। हालांकि मोबाइल वर्चूअल नेटवर्क ऑपरेटर्स के लिए पहले एक स्पेक्ट्रम बाधित वातावरण में कोई व्यावसायिक समस्या नहीं है, आज इसकी शुरुआत करने की बहुत ज्यादा जरूरत है। आला मोबाइल वर्चूअल नेटवर्क ऑपरेटर्स,आपरेटरों के ब्रांडबैंड नेटवर्कों को चलाकर जो मोबाइल हेल्थकेयर और मोबाइल एजुकेशन जैसे सेवाएं देते हैं,आधा से ज्यादा आबादी की स्थितियों को सशक्त रूप से सुधार सकतें हैं, जो फिलहाल इन सेवाओं का सीमित इस्तेमाल करते हैं।

 2जी सेल्युलर सेवा में प्रतिस्पर्धा और अधिकतर ऑपरेटरों की अखिल भारतीय उपस्थिति को धन्यवाद, जिन्होंने वॉयस रोमिंग शुल्क को उल्लेखनीय ढंग से कम कर दिया। नियामक ने 2007 में रोमिंग प्लान में किराया शुल्क (रेंटल चार्जेस)हटाने को कदम उठाए थे। हालांकि,3जी और ब्रांडबैंड वायरलेस एक्सेस (बीडब्ल्यूए)के लिए अखिल भारतीय लाइसेंस वाला कोई ऑपरेटर न होने से,वायरलेस डाटा सेवाओं के रोमिंग रेग्युलेशन और टैरिफ फिक्सेशन आवश्यक हैं। 'बिल के झटकों' से बचने और ब्रांडबैंड डाटा सेवाओं के अंगीकरण को प्रोत्साहन करने के लिए, हाल ही में यूरोपियन यूनियन में कार्यान्वित रोमिंग नीतियों जैसी नीतियों की आवश्यकता है।

 हाल ही में ब्लैक बेरी मेसिजिंग सेवाओं और नोकिया की पुश-मेल सेवाओं को प्रतिबंध करने के प्रस्तावों से, यह अस्पष्ट है कि भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियां पर्याप्त रूप से देश की सुरक्षा और उपयोगकताओं की निजता को संतुलित कर रही है। यह समय निश्चित तकनीकी प्रगति, उपयोगकर्ता जरूरतों और सुरक्षा नतीजों के महत्व को देखते हुए नई दूरसंचार नीति में मोबाइल सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान दिए जाने का है। ऑपरेटरों और सेवा प्रदाताओं की क्या उम्मीद है इस पर अस्पष्टता को दूर करने के लिए यूएस में कम्युनीकेशन एसिस्टेंस फॉर लॉ एन्फोर्समेंट एक्ट (सीएएलईए) के समान मानकों को तैयार किए जाने की आवश्यकता है।

 दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्र में मोबाइल सेवाओं के पहुंचने और उच्चतम दर पर टेली-घनत्व बढ़ने से, सार्वभौमिक सेवा दायित्व (यूएसओ) फंड, जो 10,000 करोड़ से अधिक है पर संतुलित है, पर पुनर्विचार की जरूरत है। एक स्वागत योग्य पहल में,यूएसओ फंड ग्रामीण वायर लाइन ब्रांडबैंड प्रावधानीकरण और ग्रामीण महिला स्वयं सहायता समूहों को मोबाइल आधारित रोजगार सेवाओं के क्षेत्रों में प्रायोगिक परियोजनाओं के लिए उपयोग किया जा रहा है। हालांकि, यह टुकड़ों में किया जा रहा है। 'आने वाले अरबों लोगों के लिए इंटरनेट'के महत्व को देखते हुए नई दूरसंचार नीति में एक व्यापक यूएसओ नीति के लिए जगह तलाशने की जरूरत है।

 सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने हाल ही में केबल टीवी डिजीटलीकरण और एनालॉग टीवी के लिए 15 मार्च 2011 निर्धारित तारीख के बारे में अनुशंसाओं को अनुमोदित किया,ठीक ऐसा ही चीन में है। हैड-एंड इन द स्काइ (एचआईटीएस) पूरे देश भर में डिजीटाइज टेलीविजन सामग्री के तेजी से चलने वाली प्रणालियों के रूप में देखा गया था। हालांकि, यह कहीं भी नहीं गई, मल्टी-सर्विस ऑपरेटरों द्वारा लॉबिंग करने के लिए धन्यवाद। नीति प्रस्तावों को उपर्युक्त निर्धारित तारीख के पहले देशभर को डिजीटलीकरण के बारे में प्रवृत्त करने को एचआईटीएस पर धयान केंद्रित करना चाहिए। उपर्युक्त के कारण डिजीटल डिविडेंड स्पेक्ट्रम का जारी करना और इसके उचित आवंटन व निर्धारण के लिए खाका नीति में स्पष्ट रूप से निर्धारित होने चाहिए।

 यद्यपि कन्वर्जेंस जगह लेता जा रहा है, देश में नियंत्रण, ज्यादा से ज्यादा, पृथक हो गया है। मल्टीपल सेक्टर-आधारित लाइसेंस देने से नियंत्रण कार्य उपभोक्ता के लिए तकनीकी प्रगति के फायदे बटोरना को मार्ग अवरोध जैसा है। 2003में शुरू हुआ एकीकृत एक्सेस सर्विस लाइसेंस रेग्युलेटरी कन्वर्जेंस की तरफ पहला और आखिरी कदम था। नई नीति को एक न्यूनतमवादिता अधोसंरचना और सेवा आधारित लाइसेंस देने के लिए खाका स्पष्ट रूप से बताना चाहिए, जैसा कि कम्युनिकेशन कन्वर्जेंस बिल, 2000 में कल्पना की गई थी।

 वर्तमान सरकार का ट्राई को और अधिक निगरानी अधिकार देने का कदम स्वागत योग्य है, लेकिन नियामक को अभी भी अनुपालन लागू करने को आर्थिक स्वायत्तता और अधिकार दिए जाने की जरूरी है। इसके अनुशंसाकर्ता की भूमिका में,नियामक अत्यधिक अप्रभावी है। 2जी में गड़बड़ वर्तमान नीति और संबंधित राजनीतिक अर्थव्यवस्था के मुद्दों ने एक स्वतंत्र सशक्त नियामक की आवश्यकता का संकेत दिया,जो नागरिकों के हित व टेलीकॉम इंडस्ट्री के स्वास्थ्य सुधार के लिए अपने दम पर काम कर सकता है।

? वी. श्रीधर

 (स्वामी कृष्णन के साथ सहलेखक। वी. श्रीधार और एस. कृष्णन सस्केन कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजीस के साथ हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)