संस्करण: 06  जनवरी - 2014

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मोदी के गुब्बारे में

झाड़ू की सींक

     पाँच राज्यों में हो चुके विधानसभा चुनावों के बाद देश लोकसभा चुनाव के लिए तैयार हो रहा है और दिल्ली विधानसभा के परिणामों में आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता ने बहुत सारे समीकरण उलट दिये हैं।

                2004 के आम चुनावों में भाजपा नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन की पराजय के बाद सत्ता से दूर हुयी भाजपा लगातार विक्षिप्तों जैसी हरकतें करती रही है और येन केन प्रकारेण सत्ता हथियाने के लिए अलोकतांत्रिक ढंग से हाथ पैर मारती रही है। 

? वीरेन्द्र जैन


दिखावे के दधीची...?

        पिछले दिनों कुछ ऐसा हुआ कि महर्षि दधीची याद आ गए। महर्षि दधीची ने एक दैत्य के वध के लिए देवराज इंद्र के मांगने पर अपनी अस्थियों का दान दे दिया था। आजकल कुछ लोग खुद को लोकतंत्र की रक्षा के लिए दधीची जैसा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि इसके पीछे उनका सत्ता लोभ छिपा नहीं रह गया,लेकिन उस जनता का क्या,जो तमाशे पर तालियां बजाकर खुश होती है और कभी-कभी किसी को भी कुछ भी बना देती है। इसे लोकतंत्र की खूबसूरती भी कह सकते हैं और एक को देखकर दूसरे को उसके जैसा दिखने या चलने की सनक भी। पर चूंकि हम जनता में जनार्दन को देखते हैं,जो कभी कुछ गलत कर ही नहीं सकता।

?

विवेकानंद


नरेन्द्र 'भाषणवीर' मोदी

झूठ बोले कौवा काटे !

     स से अधिक किताबों के लेखक अमेरिकी विद्वान लारेन्स मैटीन ने पिछले दिनों 'राजनीति में झूठ' विषय पर लिखते हुए एक संस्मरण साझा किया। अमेरिकी राष्ट्रपति रेगन के चुनाव अभियान का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा कि चुनावों के प्रचार में राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित हुए रेगन के भाषण की जबरदस्त आलोचना हुई थी क्योंकि उसमें तमाम मनगढंत बातें कहीं गयी थीं। इस गपबाजी को लेकर रेगन के सलाहकार से उन्होंने पूछा कि आप भाषण के इस पहलू को लेकर चिन्तित नहीं होते। उसका सीधा जवाब था कि तीन करोड़ लोगों ने उस 'सजीव प्रसारण' को देखा है।

 ? सुभाष गाताड़े


मोदी दंगों की नैतिक और राजनीतिक जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते

      रेन्द्र मोदी के इस बयान के बाद कि उन्हें गुजरात के दंगों ने उनकी आत्मा को झगझोर दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि उनके ऊपर हत्याओं का जो दोष लगा था उससे वे अंदर से चकनाचूर हो गए थे। इस संदर्भ में वह प्राचीन कहावत ''शैतान धर्म ग्रन्थों की बात कर रहा है'' याद आ रही है। मोदी ने 11 साल के बाद आत्मिक दु:ख की बात उस समय कही जब गुजरात की एक निचली अदालत ने उन्हें गुजरात के दंगों के संदर्भ में दोषमुक्त घोषित किया।

? एल.एस.हरदेनिया


नरेन्द्रभाई सच सिर्फ यह है कि सच, साबित नहीं किया जा सका है

              2002 में गुजरात के राज्य प्रायोजित हिंसा के दौरान गुलबर्ग सोसाइटी के 69 मृतकों के परिजनों को त्रासदीपूर्ण 11 साल का लंबा समय न्याय के लिए गुजारना पड़ा। इस बीच पीड़ितों ने कई उतार-चढ़ाव का सामना भी किया बावजूद एसआईटी रिपोर्ट की बिना पर 2013 के आखिर में आए अहमदाबाद अदालत के एक फैसले से फिर उनके हिस्से सिर्फ सिसकन और ऑंसुओं के सैलाब के अलावा कुछ विशेष नहीं आया।

 ?   अनुज शुक्ला


आप का उभार और

वाम दलों की चुनौती

           दिल्ली के चुनावों में अप्रत्याशित सफलता और चुनाव के बाद के समीकरणों के सहारे सत्ता तक पहुँचने के बाद आम आदमी पार्टी और उसके नेता अरविन्द केजरीवाल को लेकर चर्चाएँ  स्वाभाविक रूप से जारी हैं। भ्रष्टाचार के विरोध तथा जन लोकपाल के समर्थन में शुरु हुए आन्दोलन से लेकर राजनीतिक दल के रूप में मुख्यधारा की पार्टियों के एक विकल्प के रूप में उनके उभार ने आगामी लोकसभा चुनावों के समीकरणों को बुरी तरह से प्रभावित किया है।  

? अशोक कुमार पाण्डेय


क्या भाजपा और सपा भी सीखना चाहेंगें 'आप' से?

      माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी यानी माकपा प्रमुख प्रकाश करात ने राजनीतिक दलों को नवोदित पार्टी 'आप' से राजनीतिक आचार सीखने की सलाह दी है। उन्होंने आप की खुलकर तारीफ की है और कहा है कि शहरी मध्यम वर्ग को जागृत करने के आप के प्रयासों से सीखा जाना चाहिए। इससे काफी पहले कॉग्रेस सांसद राहुल गॉधी भी राजनीति में आप के प्रयोगों की सराहना कर चुके हैं। देश की चुनावी राजनीति में हुए आप के नये प्रयोग को प्राय: सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने प्रशंसा की निगाह से देखा है जबकि भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी ने आप की खिल्ली उड़ाई है।

?  सुनील अमर


खाप पंचायतों के नक्शेकदम पर चुनी गयी पंचायतें ?

     दि कहीं की चुनी गयी पंचायतें खाप पंचायतों की तरह फरमान जारी करने लगें तो उस पर तुरन्त संज्ञान लेना चाहिए। हाल में कुछ ऐसी ख़बरें देखने को मिलीं हैं जिसमें चुनी गयी पंचायतें समाज में प्रचलित प्रतिगामी तथा पितृसत्तात्मक मूल्यों का वाहक बनती दिखी हैं। बिहार के चंपारण जिले की सोमगढ़ पंचायत ने अपनी संस्कृति की रक्षा के नाम पर अविवाहित लड़कियों को मोबाइल फोन इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दिया तथा सलाह न माननेवाले परिवार को दण्डित करने का फरमान भी सुना दिया।

 

? अंजलि सिन्हा


न्यायिक क्षेत्र में बदलाव की उम्मीद

        च्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति और तबादले के लिए प्रस्तावित न्यायिक नियुक्ति आयोग को संवैधानिक दर्जा देने पर हाल ही में केबिनेट की मोहर लग गई। आयोग के संवैधानिक दर्जा मिलने के बाद पैनल के स्वरूप में छेड़छाड़ नहीं की जा सकेगी। इसमें बदलाव के लिए संविधान संशोधन करना होगा, जो कि आसान काम नहीं होगा। न्यायिक नियुक्ति आयोग विधेयक के संशोधनों का प्रस्ताव कैबिनेट द्वारा मंजूर किए जाने के बाद यह उम्मीद बंधना लाजिमी है कि विधेयक संसद के आगामी सत्र में जरूर पारित हो जाएगा। 

? जाहिद खान


बेटे की चाह में बेटी के दुश्मन

      पने सिधदांत, कार्य, व्यवहार के दम पर दुनियाभर लिए आदर्श बने राष्ट्रपिता महात्मा गॉधी ने कहा था कि जब तक बेटी के जन्म का स्वागत बेटे के जन्म की तरह नहीं किया जाता तब तक हमे यह मान लेना चाहिये कि भारत आंशिक अपंगता से पीडित है। गॉधी जी के यह विचार बेटी के महत्व को महिमामंडित करते हैं तो दूसरी ओर यह भी संकेत करते है कि हमारा समाज बेटियों के साथ न्याय नहीं कर रहा है। बेटियों के जन्म का उत्सव नहीं मना रहा है। इसके विपरीत बेटियों के जन्म का होते ही उत्सव का माहौल,खुशी के दृश्य घर परिवार में दिखाई देने लगते हैं।      

? अमिताभ पाण्डेय


महंगाई का बोझ कैसे कम हो ?

        देश की जनता महंगाई के बोझ तले लगातार पिसती जा रही है, लेकिन रिजर्व बैंक है कि आंकड़ों के मकड़जाल से बाहर ही नहीं निकलना चाहता। थोक व खुदरा वस्तुओं पर आधारित मुद्रास्फीति के लगातार बढ़ने के बावजूद रिजर्व बैंक का मौद्रिक नीति को यथावत रखना चौंकाने वाला है। देश की अर्थव्यवस्था लगातार हिचकोले खा रही है, लेकिन देश के वित्तमंत्री और रिजर्व बैंक के गवर्नर जनरल का बयानबाजी के अलावा कुछ करते नजर नहीं आना आम जनता में निराशा पैदा कर रहा है।

? नरेन्द्र देवांगन


नन्हें कदमों की लम्बी दूरियां

आनंद को हराने वाला कार्लसन आखिर कौन है?

      केवल 22 वर्ष की उम्र में अपना मायलापोर चेन्नई का घर छोड़कर शतरंज के टूर्नामेंट में खेलने के लिए लगातार घूमने वाले और सतत 5 वर्ष तक शतरंज की खेल में विश्व विजेता रहने वाले विश्वनाथ आनंद को हाल ही में नार्वे के मैग्नस कार्लसन ने चेन्नई में ही हरा दिया। कार्लसन आनंद से आधी उम्र के हैं। इतनी छोटी सी उम्र में इतनी बड़ी उपलब्धि प्राप्त करने वाले कार्लसन ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया है। ऑल इंडिया चेस फेडरेशन के प्रमुख भरत सिंह चौहान के अनुसार इस मैच को विश्व के करीब दो करोड़ लोगों ने टीवी और इंटरनेट के माध्यम से देखा।     

 

? डॉ.महेश परिमल


12 जनवरी राष्ट्रीय युवा दिवस पर विशेष

युवाओ! जागो, फिर एक बार...

        ज युवा पीढ़ी पर आरोप लगाया जाता है कि वह दिशाहीन, अंसयमित, भौतिकवादी और स्वार्थप्रेरित है। वह शिक्षा प्राप्त कर भौतिक उन्नति को अपने जीवन का एकमात्र लक्ष्य मानती है। इसीलिए समाज और देश में इतनी विसंगतियां पनप रही हैं कि न केवल हमारे सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्य संकट में हैं, वरन मानव जीवन भी असुरक्षित हो चला है। हमें इस आरोप की पड़ताल भारतीय सन्त महापुरुषों के विचारों के आलोक में करनी चाहिए, जिन्होंने अपने व्यक्तित्व एवं कृतित्व से हमारे समक्ष ऐसे आदर्श प्रस्तुत किये जो आज भी अनुकरणीय है।

? डॉ. गीता गुप्त


  06 जनवरी  -2014

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