संस्करण: 06 फरवरी- 2012

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मुस्लिम सियासत के

संकेत

           चुनावी राजनीति के लिहाज से पिछले पांच साल उत्तर प्रदेश के मुसलमानों के लिये काफी महत्वपूर्ण रहे हैं। जिसके तहत उन्होंने उन तमाम रूढिवादी मानकों को तोड़ा जिसे केंद्र में रख कर उनका राजनीतिक विश्लेषण किया जाता रहा है। मसलन मुसलमानों में सम्भवत: मुस्लिम मजलिस जो डॉ जलील फरीदी के नेतृत्व में 1967 से 1975 तक खासी मजबूती के साथ उभरी थी, के बाद पहली बार मुसलमानों ने अपने एजेंडे के साथ राजनीतिक प्रयोग शुरू किया। हालांकि यह प्रयोग मुस्लिम मजलिस के प्रयोग से इसलिये भिन्न है कि जहां मजलिस के पीछे मुसलमानों को सत्ता में भागीदार बनाने का एजेंडा प्रमुख था वहीं इस दौरान वजूद में आयीं ...........

  ?  शाहनवाज आलम


घोषणा पत्रों पर अमल का

रास्ता भी पूछे आयोग

        लोकसेवकों की सेवा पश्चात राजनीतिक सक्रियता को लेकर अपनी चिंता से चुनाव आयोग ने सरकार को अवगत कराते हुए सुझाव दिया है कि सेवा निवृत्ति/मुक्ति और राजनीतिक सक्रियता के बीच एक निश्चित अंतराल का होना आवश्यक है जैसा कि सेवा पश्चात उनके निजी क्षेत्र में नौकरी करने को लेकर अभी एक वर्ष का प्रतिबंध लगा हुआ है। आयोग चाहता है कि लोकसेवक अगर नौकरी से निवृत्त हों तो एक निश्चित अवधि तक उनके राजनीति में जाने पर पाबंदी हो ताकि वे सेवाकाल के अपने प्रभाव का इस्तेमाल राजनीतिक दलों के साथ न कर सकें। आयोग का यह सुझाव उचित ही है। 

? सुनील अमर


बलात्कार पीड़ितों को

नौकरी देने की घोषणा नारी जाति का अपमान है

      माजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने यह घोषणा की है कि यदि उत्तर प्रदेश विधानसभा  चुनाव में विजय हासिल होती है और उनकी सरकार बनती है तो बलात्कार से पीड़ित महिलाओ को सरकारी नौकरी दी जाएगी। हमारी राय में यह घोषणा नारी जाति का अपमान है। नौकरी देने की घोषणा के स्थान पर यदि मुलायम सिंह यह घोषणा करते कि वे बलात्कार मुक्त समाज का निर्माण करने का प्रयास करेंगे तो सबसे अच्छा होता। बुनियादी रूप से बलात्कार एक कानून-व्यवस्था का मामला है। यदि शासन सख्त है और उसमें पुलिस की लगाम खीचने की ताकत है तो बलात्कार की समस्या पर पूरी तरह से नियंत्रण तो नहीं पाया जा सकेगा परंतु बलात्कार की वारदातों में कमी अवश्य आयेगी।

? एल.एस.हरदेनिया


राष्ट्रीय भूमिका की तलाश में हैं ममता

इधर बंगाल की दुर्दशा जारी है

          मता बनर्जी के प्रशंसक भी इस बात को मानते थे कि विपक्षी नेता के रूप में वे जितनी आत्मविश्वासी हैं, मुख्यमंत्री के रूप में वे उतनी ही अनियंत्रित और अगम्य होंगी। विपक्षी नेता के रूप में तो उनका वह व्यक्तित्व काम आया और सीपीएम को भी धराशाई करने में सफल हुआ, लेकिन जब उनके अपने हाथ में सत्ता आई है, तो उनके बारे में की गई भविष्यवाणी सही साबित हो रही है।

? आशीष विश्वास


सत्ता के संरक्षण में हो रहा

अवैध खनन

         बीजेपी शासित सूबों में सत्ता के संरक्षण में अवैध उत्खनन, जैसे उनकी पहचान बन गया है। कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड के बाद अब, मध्यप्रदेश भी अवैध खनन के मामले में इन सूबों से होड़ लेता दिखलाई दे रहा है। सूबे की विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने हाल ही में बीजेपी सरकार पर इल्जाम लगाया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के संरक्षण में पूरे मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है। जिसके चलते सरकार को करोड़ों रूपए के राजस्व का नुक्सान उठाना पड़ रहा है। अवैध उत्खनन के इल्जाम न सिर्फ मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों पर लगे हैं, बल्कि पड़ोसी सूबे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह का नाम भी खनिज घोटाले में आ रहा है।

 ? जाहिद खान


मध्यप्रदेश में कुपोषण से ज्यादा

मोटे कर्मचारियों की चिन्ता

           हिला उत्पीडन, अशिक्षा ,कुपोषण , अवैध खनन के मामले में अव्वल मध्यप्रदेश की सरकार को अब मोटे कर्मचारियों की चिन्ता हो गई हैं। जो सरकारी अधिकारी,कर्मचारी,मोटे हैं ,वे अब अपनी चर्बी कम करवा सकते हैं। मोटे से दुबले होने की प्रक्रिया में जो खर्च आयेगा उसको राज्य सरकार के खाते से भुगतान किया जायेगा। इस आशय का फैसला पिछले दिनों मध्यप्रदेश सरकार ने लिया है। अधिकारिक सूत्रों की मानें तो मोटे कर्मचारियों को अस्पताल में सर्जरी के माधयम से दुबला करने की प्रक्रिया पर प्रति कर्मचारी लगभग एक से डेढ लाख रूपये तक खर्च आयेगा। यह खर्च सरकार उठाने को तैयार है। 

? अमिताभ पाण्डेय


अहंकार की राजनीति में अहंकार

मैला हो रहा है राजनीति का आंचल

       पड़ों का मैल छुड़ाने के लिए तो दुनिया भर में मिल जाते हैं ढेर सारी क्वालिटी के सर्फ और धुलाई-सोप, किंतु हमारे देश में जिस तरह से राजनीति की चादर मैली होती जा रही है,उस चादर की धुलाई कैसी और काहे से हो ? इस प्रश्न का उत्तर हम कुछ इस तरह से ढूंढ रहे हैं जैसे 'अंधेरे कमरे में ढूंढ रहे हो काली बिल्ली'।

? राजेन्द्र जोशी


गणित की गुत्थियों में डूबने का अवसर

        

              क ऐसे वक्त में जब मुल्क में बहुत कम उम्र में गुजरे महान गणितज्ञ रामानुजम का 125 वां जन्मदिवस मनाया जा रहा हो और उन्हीं के सम्मान में वर्ष 2012 को राष्ट्रीय गणित वर्ष मनाने की योजना बनी हो, तब यह ख़बर अधिकतर लोगों को मायूस कर देगी जो बताती है कि भारत के बच्चे गणित में पिछड़ रहे हैं।

                        मालूम हो कि हाल में तरह तरह के सर्वेक्षण रिपोर्ट सामने आए हैं जिनके नतीजों में बताया गया है कि भारतीय बच्चों के गणित में परफार्मन्स की पड़ताल हुई है। एक रिपोर्ट ''आस्ट्रेलियन काउन्सिल फार एजुकेशनल रिसर्च'' ने गणित और विज्ञान में किशोरों की रूचि पर तैयार की है तो दूसरी रिपोर्ट भारत की एक गैरसरकारी संस्था ''प्रथम'' की तरफ से तैयार हुई है जो उनकी सातवीं सालाना रिपोर्ट में पेश की गयी है।

 

? अंजलि सिन्हा


संदर्भ - म.प्र. दुलर्भ प्राणियों की शिकार नीति

शिकार नीति का सरलीकरण

     य-प्रदेश सरकार खेती-किसानी के लिए मुसीबत बने कुछ दुर्लभ वन्य प्राणियों को शिकार करने की कानूनी इजाजत देने जा रही है। इन प्राणियों में जंगली सूअर और नील गाय (हिरण) शामिल हैं। हालांकि नील गाय के साथ ''गाय'' शब्द जुड़ा होने के कारण इसे मारने की इजाजत, गाय प्रेमी भाजपा सरकार नहीं दे रही है। इस हेतु सरकार ऐसी नीति बनाने का जोखिम उठा रही है, जिसके तहत शिकार का सरलीकरण किया जा सके और शिकार के सांमती शौकीनो को बकायदा लायसेंस देकर शिकार की छूट दे दी जाए। सरकार की इस मंशा की सर्वथा निंदा की जा रही है।

? प्रमोद भार्गव


12वीं पंचवर्षीय योजना -

कृषि क्षेत्र में बेहतरी की आस ?

    देश की अर्थव्यवस्था और उसका विकास सकल घरेलू उत्पाद के तीन घटकों-कृषि,सेवा और विनिर्माण पर निर्भर करता है। विकास दर में तेजी या मंदी इन तीनों क्षेत्रों से जूड़ी हुई है। विकास के इस त्रिअंगी पिरामिड में कभी सेवा क्षेत्र आगे चलता है,तो कभी विनिर्माण क्षेत्र,तो कभी कृषि क्षेत्र बाजी मार लेता है। लेकिन समग्र रूप में देखें तो कृषि क्षेत्र इन तीनों में सबसे भारी है। क्योंकि कार्पोरेट क्षेत्र और उद्योगों के तेज विस्तार के बावजूद हमारा देश आज भी कृषि  प्रधान है तथा इन क्षेत्रों का बेहतरी भी कृषि क्षेत्र से जूड़ी हुई हैं।

 

? डॉ. सुनील शर्मा


धोनी के एक रन से

ढाई लाख रुपए की कमाई

     क्या आपको पता है कि भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की वार्षिक आय कितनी है? शायद आप नहीं जानते,जानना भी नहीं चाहते। फिर भी आप जान ही लें, क्योंकि यही वे व्यक्ति हैं,जो एक तरफ अपना बल्ला घुमाते हैं, तो रन बटोरते हैं। दूसरी तरफ विज्ञापनों में काम करते हुए हर वर्ष 75 करोड़ रुपए कमाते हैं। पिछले साल यानी 2011 में उन्होंने जितने रन बनाए, उसका हिसाब किया जाए, तो प्रत्येक रन पर उन्हें 2.55 लाख रुपए मिले हैं। हमारे देश में ऐसे करोड़ों लोग हैं,जिनकी वार्षिक आय 2.55 लाख रुपए नहीं है। दूसरी ओर इतना धन तो धोनी एक रन बनाकर प्राप्त कर लेते हैं।

? डॉ. महेश परिमल


  6 फरवरी- 2012

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