संस्करण: 06 अगस्त-2012

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टीम अन्ना की सियासी महत्वकांक्षा

आखिर सतह पर आया सच

           पिछले दिनों जो हुआ वह सचमुच चौंकाने वाला था। जंतर-मंतर पर जहां सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की टीम के सदस्य अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसौदिया, किरण बेदी और प्रशांत भूषण अनशन में कुछ गिन-चुने लोगों को देखकर खीजते हुए अनर्गल प्रलाप कर रहे थे,वहीं एक निजी चैनल पर तर्ज-वितर्क के दौरान एक भाजपा नेता अन्ना हजारे जी को 'अन्ना बोला-वह बोलता है'जैसे शब्दों से नवाज रहे थे। देश में यह कोई अविस्मरणीय दुर्घटना नहीं थी, लेकिन इस लिहाज से उल्लेखनीय जरूर है कि एक कांग्रेस नेता ने जब अन्ना जी को 'तुम' जरूर संबोधित किया था तो उस पर इस तरह तोहमतें लगाई गई थीं माने उसने अन्ना हजारे जी को कोई गाली दे दी हो। 

  ? विवेकानंद


अगर अन्ना अपने शब्दों पर

सचमुच गम्भीर हैं तो......

        ह अविश्वास का समय है। किसी भी क्षेत्र के नेतृत्वकारी लोगों पर पूर्ण भरोसा करने वाले लोगों की संख्या दिनों दिन घटती जा रही है। गान्धी नेहरू के बाद शायद जयप्रकाश नारायण वह अंतिम व्यक्ति थे जिन पर देश के एक बड़े वर्ग ने भरोसा किया था। यही कारण है कि देश में परिवर्तन चाहने वाले लोगों को पुराने प्रतीकों से काम चलाना पड़ता है। सम्भवत: इसी समझ के कारण केजरीवाल-सिसोदिया ग्रुप ने अपने आन्दोलन की विश्वसनीयता के लिए एक गान्धीनुमा प्रतीक का चयन किया जिन्हें लोग अन्ना हजारे के नाम से जानते हैं।  

? वीरेन्द्र जैन


अगेन्स्ट द ऑड्स (विषमता के विरूध्द)

लेखक मार्कस एन्ड्रे मेलो, जुगुना गेथे, जेम्स मेनर

   ह व्यापक तौर पर माना जाता है कि जमीन और आसमान की तुलना नही की जा सकती और यह बात राजनीतिक संदर्भ में भी इतना ही महत्व रखती है। अगेंस्ट द ऑड्स (विषमता के विरूध्द) पुस्तक के तीन सहलेखकों ने कुछ ऐसा ही अनूठा कार्य किया है- उन्होने पूर्ण रूप से भिन्न तीन देशों और उनकी राजनीतिके व्यवस्थाओं को लिया है। उन्होने पूर्वी अफ्रीकी देश यूगाण्डा, एशिया में भारत के मध्यप्रदेश प्रान्त तथा दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील के विशिष्ट नेताओं पर केन्द्रित अध्ययन करके इस पुस्तक में प्रस्तुत किया है जो एक ओर एक दूसरे से पूर्णतया भिन्न है किन्तु यह सिध्द करता है कि जमीन और आसमान की तुलना की जा सकती है।

? डॉ. एम.एन. बुच


मोदी में महर्षि वाल्मीकि की आत्मा : 

भाजपा में खलबली

          बर है कि पिछले कई माह से पूरे राज्य में सद्भावना कार्यक्रम चला रहे गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांप्रदायिक हिंसा रोकने के लिये सुझाव दिये हैं। इससे यूपीए सरकार द्वारा प्रस्तांवित सांप्रदायिक हिंसा विरोधी बिल का पुरजोर विरोध कर रही भाजपा मेंखलबली मच गई है। भाजपा नेताओं ने मोदी को सलाह दी है वे जल्दबाजी दिखा रहे हैं, इतनी जल्दबाजी न दिखायें।  यह चेतावनी भी दी है कि उनके इस कृत्य  से मोदी को दिल्ली का ताज तो पता नहीं मिलेगा या नहीं किंतु गुजरात अवश्यं उनके हांथ से निकल जायगा ।बात असल यह है कि भाजपा नेता उन्हें  गुजरात का शेर कहते रहे हैं।

? मोकर्रम खान


सादिक जमाल, इशरत जहां, तुलसीराम प्रजापति के जिन्न!

उन रक्तरंजित हाथों की शिनाख्त कौन करेगा ?

         शेक्सपियर की एक चर्चित रचना मैकबेथ - जो राजा बनने के लिए किसी भी मुक़ाम तक जाने के लिए तैयार मैकबेथ एवं उसकी पत्नी के कारनामों पर केन्द्रित है, का एक दृश्य है जिसमें राजा बने मैकबेथ से अक्सर बैंको, जो कभी उसका सहयोगी था, मगर जिसकी उसने खुद हत्या करवाती है, का भूत अक्सर टकराता रहता है। फिलवक्त यह नहीं बताया जा सकता कि नरेन्द्र मोदी की हुकूमत के इन दस सालों में, जितनी फर्जी मुठभेड़े उनके करीबी कहे जानेवाले अफसरानों ने करवायी हैं, और हर बार यही कहते हुए इन मुठभेड़ों को शक्ल औचित्य प्रदान करने की कोशिश की है कि ...........

 ? सुभाष गाताड़े


अखिलेश चले मोदी की राह

                  गर उत्तर प्रदेश की चार महीने पुरानी अखिलेश यादव सरकार के कुछ निर्णयों पर गौर किया जाए तो एक बात स्पष्ट हो जाती है कि नये नेतृत्व और नई सोच का जो वादा चुनावपूर्ण समाजवादी पार्टी की तरफ से किया गया था वो एक मजाक ही साबित हुआ है। जिससे सत्ता एक ऐसी जडता का षिकार होती जा रही है जहां नये और आगे बढे हुये एजेंडों के बजाए बहुत कुछ उल्टी दिशा में होता दिख रहा है। जिसकी उम्मीद कम से कम 'नये नेतृत्व' से प्रदेश की जनता नहीं कर रही थी।

? शाहनवाज आलम


मध्यप्रदेश सरकार :

चिटफण्ड कंपनी ?

      ब्याज जीरो, शिवराज हीरो। काश ऐसा राजनेता एवं अर्थशास्त्री पूरी दुनियाँ का नैतृत्व करें तो भारत, यूरोप अमेरिका आदि सभी देशों की आर्थिक समस्यायें चुटकियों में ही हल हो जाये। सभी बैंक उपभोक्ताओं को जीरो प्रतिशत ब्याज पर होम लोन, कार लोन, कंज्यूमर लोन आदि देने लगे तो अर्थव्यवस्था दिन दूरी रात चौगुनी बढ़ने लगेगी। मैंने इस नारे पर गंभीरता से गहन विचार किया, मुझे लगा कि कहीं यह किसी चिटफंड कंपनी का बैनर तो नही है जो जिस लुभावने वादों से ग्राहकों को ठगने के लिये बाजार में उतरती है।

? हेमराज कल्पोनी

विधायक राजगढ़, म.प्र.


नरेन्द्र मोदी को

शेर कहने में क्या गलत है

      सा कोई दिन नहीं जाता जब नरेन्द्र मोदी अखबरों की सुर्खियों और समाचार चैनलों की मुख्य हैडलाईन में न हो। पिछले हते मोदी तीन अवसरों पर सुर्खियों में आये। पहला अवसर था गुजरात में संपन्न एक कार्यक्रम। इस कार्यक्रम में अनेक लोगों के अलावा कांग्रेस सांसद विजय दर्डा भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का आयोजन किसी जैन संगठन ने किया था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी। कार्यक्रम के दौरान ज्योंही नरेन्द्र मोदी आये विजय दर्डा के मुॅह से निकल पड़ा ''गुजरात का शेर'' आ गया। दर्डा की इस टिप्पणी से कांग्रेसी नाराज हो गये।

? एल.एस.हरदेनिया


कांग्रेस में सत्ता से ज्यादा महत्व है संगठन का,

राहुल गांधी ज्यादा जरूरी हैं संगठन के लिए

        कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री प्रणव मुखर्जी के राष्ट्रपति बन जाने के बाद इन दिनों कांग्रेस पार्टी में एक ही मुद्दा चर्चा में है, और वह हैं युवा नेतृत्व की अगुआई कर रहे अ.भा.कांग्रेस कमेटी के महासचिव श्री राहुल गांधी की भूमिका का। राहुल की भूमिका क्या हो ! उनका उपयोग सत्ता में किया जाय या संगठन में, देशभर में कांग्रेसियों के बीच कई तरह की प्रतिक्रियायें सुनने में आ रही हैं। कुछ सांसदों और मंत्रियों ने अपनी राय व्यक्त की है कि राहुल गांधी को सत्ता में किसी महत्वपूर्ण विभाग का मंत्री बनकर अपनी भूमिका निभाना चाहिए।

? राजेन्द्र जोशी


संदर्भ- सुप्रीम कोर्ट का बाघों के कोर एरिया में पर्यटकों के प्रतिबंध संबंधी आदेश।

बाघों के इलाके में पर्यटन

       र्वोच्च न्यायालय की रोक के चलते अब सैलानी राष्ट्रीय उद्योगों और अभयारण्यों में स्थित बाघों के प्राकृतिक आवास स्थलों के निकट नहीं घूम सकेंगे। न्यायालय ने सभी राज्यों को बाध्यकारी आदेश देते हुए कहा है कि बाघों के भीतर क्षेत्र (कोर एरिया) को 10 किलोमीटर के दायरे तक अधिसूचित किया जाए और यह क्षेत्र पूरी तरह पर्यटकों के लिए प्रतिबंधित रहे। यह आदेश न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार और इब्राहिम खलीफुल्लाह की खंडपीठ ने वन्यजीवन संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 38 (ch) के तहत दिया।

    

? प्रमोद भार्गव


बढ़ता ध्वनि प्रदूषण और प्रशासनिक उदासीनता

     ध्वनि प्रदूषण का स्तर और इससे होने वाली बीमारियों में लगातार बढ़ोत्तरी होती जा रही है। ऐसा नहीं है कि इसके निवारण के लिए देश में कानून व प्राविधानों की कमी है लेकिन उनका ठीक से क्रियान्वयन न हो पाना ही इस समस्या की जड़ है। दिल्ली के चर्चित रामलीला मैदान प्रकरण पर गत दिनों सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला करते हुए कहा कि रात में सो रहे निर्दोष व्यक्तियों पर लाठी चार्ज कर पुलिस ने उनके सोने के अधिकारों का हनन किया। अदालत ने इसके लिए पुलिस को दंडित भी किया है। दो साल पहले अक्टूबर 2010 में ऐसी ही एक याचिका पर फैसला सुनाते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि अवरोध मुक्त सड़कें नागरिकों का मौलिक अधिकार हैं और सड़कों पर रेहड़ी-ठेला लगाकर, घेरकर या अन्य किसी प्रकार से उन्हें अवरुध्द नहीं किया जा सकता।

? सुनील अमर


खाद्य संरक्षा के लिए वैश्विक मानक

कड़ाई से लागू हो

    खाद्य संरक्षा के मामले में वैश्विक स्तर पर एक अच्छी खबर है। जिसके अनुसार खाद्य सुरक्षा पर संयुक्त राष्ट्र की संस्था खाद्य एवं कृषि संगठन  एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन  द्वारा संयुक्त रूप से  संचालित  कोडेक्स कमीशन ने दुनिया भर के उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के खातिर नए नियमों की घोषणा की है। इन नियमों में बच्चों के लिए तरल दूधा में मेलामाइन की अधिकतम मात्रा को पुर्नपरिभाषित किया है। समुद्री खाद्य जैसे मछली, कटे फल जैसे तरबूज,सुखे मेवे जैसे अंजीर तथा सुपारी और मसालों के लिए भी खाद्य सुरक्षा के मानकों में शामिल किया है।

? डॉ. सुनील शर्मा


  06 अगस्त2012

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