संस्करण: 05  सितम्बर- 2011

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राजनीतिक दलों के सदस्यों की

आचार संहिता होनी चाहिए

            त दो दशकों के दौरान चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों और उनके परिवारीजनों के लिए कुछ उद्धोषणाओं को अनिवार्य करके बहुत अच्छा काम किया है जो हमारे लोकतंत्र की मूल भावनाओं को कार्यांवित करने की दिशा में मददगार हो रहा है। चुनाव आयोग ने उम्मीदवारों को निर्वाचन फार्म भरते समय अपनी व अपने परिवार की कुल सम्पत्ति और देयताओं का विवरण देना तथा उन पर लम्बित आपराधिक प्रकरणों की जानकारी देना अनिवार्य किया है।

  ? वीरेन्द्र जैन


ओछी राजनीति को चढ़ाइए फांसी पर

     भारत चूँकि विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक राष्ट्र है और कुछ अपवादों को परे रख मनन किया जाए तो मृत्युदंड की सजाय जिसकी प्रासंगिगता पर अधिकाँश लोकतांत्रिक राष्ट्रों में बहस हो रही है भारत में भी इसपर सार्थक बहस की जरुरत है लोकतंत्र का तकाजा भी यह है कि हम खुले दिमाग से मृत्युदंड के औचित्य पर बहस करें मगर जैसा कि होता आया है हमारे यहाँ हर संवेदनशील मुद्दे को धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र विशेष इत्यादि से जोड़ उस पर राजनीति की जाती है मृत्युदंड के मुद्दे पर भी राजनीति होने लगी है

? सिध्दार्थ शंकर गौतम


राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग :

  पैरिस सिध्दान्तों के उल्लंघन के मायने

      मानवाधिकार संस्थाओं के पैरिस सिध्दान्त क्या हैं ? भारत के न्यायप्रिय लोगों के लिए यह जानना जरूरी हो गया है जबसे संयुक्त राष्ट्रसंघ के मानवाधिकार उच्चायुक्त द्वारा अपने पांच पेजी पत्र में इस बात को स्पष्ट किया गया है कि 1993के कानून द्वारा गठित राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग  कई स्तरों पर पैरिस सिध्दान्तों का उल्लंघन करता दिखता है।

? सुभाष गाताड़े


भ्रष्टाचार के संरक्षण की पहल

    क ओर जहां पूरे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ़ अलग जगाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के संरक्षण की पहल की जा रही है। हालांकि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विभिन्न मंचों से भ्रष्टाचार को मिटाने की बातें करते हैं, किंतु उन्हीं की सरकार भ्रष्टों को बचाने में लगी है। हाल ही में दो ऐसे मामले प्रकाश में आए, जिनसे राज्य सरकार कटघरे में खड़ी नज़र आ रही है।

? महेश बाग़ी


अब राज्यपाल से टकराये नरेन्द्र मोदी...

    गुजरात पुन: समाचार पत्रों की सुर्खियों में है। इस बार दो प्रमुख मुद्दो को लेकर गुजरात चर्चा में है। उनमें एक का संबंध गुजरात में लोकायुक्त की नियुक्ति से है और दूसरे का वहां के पूर्व गृहमंत्री हरेन पंड़या की हत्या के आरोपियों को उच्च न्यायालय द्वारा हत्या के आरोप से बरी करने से।

 

? एल.एस.हरदेनिया


भीड़तंत्र में संवैधानिक

लोकतंत्र हुआ गुम

     भारत में लोकतंत्र की स्थापना से जनता को अपने अधिकारों के पालन के लिए भरपूर संरक्षण प्राप्त है किंतु जब भीड़तंत्र हावी हो जाता है तो लोकतंत्र की मर्यादाएं भी क्षीण होने लगती है। हम वर्तमान दौर में एक अजीब से वातावरण के बीच से गुजर रहे हैं जहां 'सर्वजन हिताय' की मूल भावना पर कुठाराघात हो ही रहा है, साथ ही एक सुस्थापित सामाजिक व्यवस्था में भी बिखराव पैदा करने जैसी हरकतें भी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।

 

? राजेन्द्र जोशी


प्रतिनिधि को खारिज

करने का अधिकार

       नशन तोड़ने के साथ अन्ना हजारे ने चुनाव सुधारों को लेकर संघर्ष छेड़ने की बात कही है। उनकी मंशा निर्वाचन प्रणाणी में व्यापक फेरबदल की है। अन्ना के अनुसार मतदाता को मतपत्र पर दर्ज उम्मीदवारों को खारिज करने का हक मिलना चाहिए। यदि दस प्रत्याशी मतपत्र में दर्ज हैं तो ग्यारहवां अथवा अंतिम खाना प्रत्याशी को नकारने का भी शामिल होना चाहिए। मतदाता को जब लगेगा कि चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों में से कोई भी उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने वाला नहीं है तो वह नापंसदगी को तरजीह देगा।

? प्रमोद भार्गव


सांसद और मानहानि

    न्ना हजारे अनशन प्रकरण में उनके मंच से भाशण देने वाले कुछ लोगों के प्रति संसद के कुछ सदस्य खासे खफ़ा हैं। वक्ताओं ने कथित तौर पर उन्हें अनपढ़ और गँवार जैसे शब्दों से सम्बोधित किया था। कई संसद सदस्यों ने इन वक्ताओं के विरुध्द विशेषाधिकार हनन का नोटिस भी सदन में दिया है। सदस्यों ने इसे सदन की अवमानना मानते हुए प्रकरण विशेषाधिकार समिति को सौंप देने की मॉग की है। इनका कहना है कि सांसदों के अपमानित होने से संसद की गरिमा को भी क्षति पहुॅचती है।

? सुनील अमर


तकनीकि से संभव भ्रष्टाचार निदान एवं बचाव

     केन्द्र सरकार ने जनभावनाओं के सम्मान में प्रस्तावित लोकपाल विधेयक पर सिविल सोसायटी के प्रस्तावित सुझावों को शामिल करना स्वीकार कर,संसद में इस आशय का प्रस्ताव भी पारित करवा लिया। अब उम्मीद है कि जल्दी ही यह बिल कार्यरूप में परिणित होगा ।

 

? डॉ. सुनील शर्मा


कौन हरेगा विघ्नहर्ता का विघ्न?

    विघ्नहर्ता गणेश जी पधार चुके हैं। वे आ गए, अब वे हमें कष्टों से मुक्ति दिलाएँगे। हम भी उन्हें मनाने के लिए अपने घर पर उनकी मूर्ति की स्थापना कर ली है। सुबह-शाम आरती होती है। लगातार कई दिनों तक उत्सव का माहौल होगा। बाजारों में भीड़ बढ़ गई है। लोग गणेश जी को मनाने के लिए तरह-तरह के भोग लगा रहे हैं। बच्चों की तो पूछो ही नहीं,उनके लिए तो यह उत्सव वास्तव में उत्सव ही होगा। क्योंकि इस समय स्कूल जाने के साथ-साथ गणेश जी के कामों की भी जिम्मेदारी निभानी होती है।

 

? डॉ. महेश परिमल



14 सितम्बर हिन्दी दिवस पर विशेष

हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा कब बनेगी ?

     ह कैसी विडम्बना है कि प्रति वर्ष 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस मनाकर हम याद करते हैं कि स्वतंत्र भारत के संविधान में हिन्दी राष्ट्रभाषा घोषित की गई है परन्तु अद्यपर्यन्त वह व्यवहार में उक्त सम्मान की अधिकारिणी नहीं बन सकी है। हमारे राजनेताओं को इस बात पर तनिक भी संकोच नहीं होता कि स्वतंत्रता के 64 बरस बाद भी हिन्दी हाशिए पर है और द्वितीय राजभाषा के रूप में संविधान में प्रतिष्ठित अंग्रेजी भाषा अब इस देश पर एकछत्र राज कर रही है।

? डॉ. गीता गुप्त



संदर्भ : सिर पर मैला ढोना

कब मिटेगा यह कलंक

    मारा मुल्क जब आजाद हुआ तो पूरे समाज में ऊंच-नीच पर आधारित जातिवादी व्यवस्था लागू थी। ऊंची-नीची जातियों के बीच आपस में घोर असमानता,भेद-भाव और छुआछूत मौजूद थी। जाहिर है,इस भेदभाव और छुआछूत को समाज में जड़ से मिटाना सरकार का पहला काम था। सरकार ने यह काम किया भी। दलितों के प्रति अस्पृश्यता और छुआछूत रोकने के लिए सरकार ने अपनी ओर से कई कानून बनाए। दलितों का जीवन स्तर सुधारे और वे मुख्यधारा में आएं,इसके लिए सरकारों ने उन्हें शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण के अलावा अनेकानेक योजनाएं बनाईं।

 

? जाहिद खान



  05सितम्बर-2011

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