संस्करण: 05 मई-2014

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एक दामाद रंजन भी थे...

     लोकसभा चुनाव की आहट शुरू होने के साथ ऐसा लगा था कि इस बार चुनाव में ढेरों मुद्दे हैं, जिन पर सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच एक लोकतांत्रिक बहस होगी और जनता अपने विवेक से इस बहस का निष्कर्ष निकालेगी। जो पक्ष सही होगा, जिसके तर्क मजबूत और योजनाएं जनकल्याण के योग्य समझेगा उसे वोट देगा। लेकिन यह मिथक चुनाव की घोषणा होते ही टूट गया। आजकल तो सारे मुद्दों को छोड़कर दामाद राजनीति जोरों पर है।  

? विवेकानंद


प्रियंका गांधी के हमलों से बीजेपी में अफरातफरी

        बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ने पिछले छ: महीने से कांग्रेस पार्टी और खासकर सोनिया गांधी , राहुल गांधी और राबर्ट वाड्रा पर जबरदस्त जुबानी जंग छेड़ रखी है । राहुल गांधी और सोनिया गांधी आमतौर पर जबानी मुकाबले में उस  स्तर तक नहीं जाते जिस स्तर पर नरेंद्र मोदी जाते हैं  एकाधा बार जब राहुल गांधी ने कोई सख्त बात कह दी तो नरेंद्र मोदी कहते सुने गए कि राहुल गांधी अपनी सीमा में रहें , या यह कि बस कुछ दिन बाकी हैं , एक एक मिनट का हिसाब लूँगा। नरेंद्र मोदी इस तरह से बात कर रहे हैं जैसे 16 मई के बाद उनकी ही सरकार बन जायेगी। उनकी धमकियों  पर आमतौर पर राहुल गांधी को चुप होते देखा गया था। 

? शेष नारायण सिंह


रामदेव का बचाव पक्ष

     भाजपा और कांग्रेस में एक बड़ा फर्क यह भी है कि भाजपा अपने नेताओं, व सहयोगियों पर किसी भी तरह की अनैतिकता, अपराधा, अशालीनता और अनियमतता के आरोप लगने पर उसके बचाव में उतर आती है जिससे पूरी पार्टी ही दोषी हो जाती है जबकि कांग्रेस अपने बड़े से बड़े सदस्य के ऊपर लगे आरोप से दल की दूरी बना लेती है और उसकी गलतियों की सफाई व दण्ड उसे खुद ही वहन करना होता है। जब भी कोई किसी ऐसी बात की पक्षधारता करता है जो न केवल सार्वजनिक रूप से ही गलत हो अपितु वह खुद भी उसे गलत मान रहा हो तो उसे अपनी बात को जोर के शोर से ठेलना पड़ता है, असंगत कुतर्क करने पड़ते हैं, और विषय को भटकाना पड़ता है।

 ? वीरेन्द्र जैन


ढोंगी बाबा रामदेव का

कुलषित चरित्र उजागर!

      रामदेव नाम का ढोंगी बाबा असल में कितने घिनौने चरित्र का और कितनी घटिया रुग्ण मानसिकता का शिकार है। जो दूसरों का उपचार करने की बात करता है, उसका स्वयं का मस्तिष्क कितना विकृत हो चुका है। जिसे दलित समाज की बहन-बेटियों की इज्जत को तार-तार करने में शर्म नहीं आती, उसे इंसान कहना ही इंसान को गाली देना है। जो पुरुष एक औरत की इज्जत लूटता है तो उसको फांसी की सजा की मांग की जाती है।

? डॉ. पुरुषोत्ताम मीणा 'निरंकुश'


निरंकुता और निराावाद की अभिव्यक्ति है मोदी का 'दैवीय अधिकार'

              प्रसिध्द दार्शनिक हीगल ने कहा था कि राज्य पृथ्वी पर ईश्वर का रूप है। यह विचार निरंकुश शासन प्रणाली का आधार बना और इतिहास के बहुत सारे तानाशाहों ने अपने शासन का आधार 'ईश्वर की इच्छा' को बनाया। इसी संदर्भ में यदि इतिहास की धारा में थोड़ा और पीछे जाया जाए, तो हम देखते हैं कि भारत के मध्यकाल के दिल्ली सल्तनत काल में गयासुद्दीन बलवन ने भी अपने तानाशाही के अस्तित्व को स्थापित करने तथा इस्लामी शासन प्रणाली, जो एक तरीके से लोकतांत्रिक मूल्यों की तरफ बढ़ रही थी, को रोकने के लिए अपने राजत्व के सिध्दांत को प्रतिपादित किया।

 ?  अनिल यादव


भाजपा और सामाजिक

न्याय का सच

           सामाजिक न्याय का प्रश्न भारतीय सामाजिक संरचना और आर्थिक स्थितियों से गहरी तरह संबध्द है। भारत में मौजूद सैकड़ों साल पुरानी मनुवादी वर्ण व्यवस्था से यहाँ सभी अच्छी तरह परिचित हैं,और सामाजिक न्याय का सवाल हमारे स्वतंत्रता आंदोलन में भी अहम रहा है। इसी को देखते हुए संविधान में इसके लिए उपाय किये गए थे,लेकिन अभिलक्षित उद्देश्यों की पूर्ति न होने की वजह से मंडल कमीशन लागू किया गया।

? मोहम्मद आरिफ


गुजरात के कुछ क्षेत्रो में

मोदी का नाम लेना वर्जित है

      सारे देश में भले ही नरेन्द्र मोदी के नाम पर वोट मांगे जा रहे हों, सभी जगह यह नारा लग रहा हो कि ''अब की बार मोदी सरकार''। परंतु गुजरात के कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां मोदी के नाम पर वोट मांगने की हिम्मत कोई नहीं कर पा रहा है। यहां तक कि भारतीय जनता पार्टी और संघ परिवार से जुड़े प्रचारक भी धोखे से मोदी का नाम नहीं ले रहे हैं। यह इलाका गुजरात के किसी दूरदराज में स्थित नहीं है बल्कि अहमदाबाद शहर का ही एक हिस्सा है। इस इलाके को जुहापुरा कहा जाता है। यह पूरी तरह से एक मुस्लिम बस्ती है।

?  एल.एस.हरदेनिया


एक दलित का आत्मदाह और हमारा लोकतंत्र

     देश के लोकतांत्रिक इतिहास में अपनी तरह की शायद यह पहली घटना रही होगी जब एक दलित मतदाता द्वारा अपने मताधिकार का इस्तेमाल न कर पाने के कारण मतदान केन्द्र के बाहर ही आत्मदाह कर लिया गया। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के देवचरा गांव (नई बस्ती) निवासी हरी सिंह जाटव द्वारा कस्बे के मतदान केन्द्र पर जिस समय आत्मदाह किया गया उस वक्त वहां काफी मात्रा में पुलिस के जवान स्थानीय थाना प्रभारी, बीएलओ, पीठासीन अधिकारी और आईजी समेत कई प्रशासनिक अफसर मौजूद थे। लेकिन किसी ने भी उसे ऐसा करने से नही रोका। हरी सिंह जाटव मतदान केन्द्र के सामने आग का गोला बन दौड़ता रहा और मतदान केन्द्र पर मौजूद निर्दयी प्रशासनिक कर्मचारी मूक बने मौत का तमाशा देखते रहे।

 

? हरे राम मिश्र


गर्भपात के बढ़ते आंकड़ें औरत पर दबाव या आज़ादी का संकेत है ?

        र्भपात का अधिकार औरत का अपने शरीर पर अधिकार से जुड़ा मसला है और वह एक महत्वपूर्ण हक है। आज भी कई रूढिवादी देशों में यहां तक कि रोमन कैथोलिक सम्प्रदाय में महिला के पास ऐसा अधिकार नहीं है। लेकिन साथ साथ यह जायजा लेना भी जरूरी है कि गर्भपात के अधिकतर मामलों के कारण क्या हैं ? क्या जागरूकता की कमी जिसमें अनचाहा गर्भ ठहर जाये इसके इलाज के तौर पर इसका प्रयोग करना, बेटा की चाहत के कारण कन्या भू्रण का गर्भपात कराया जाना या जबरन बनाए गए यौन सम्बन्धों चाहे वह शादी के रिश्ते के भीतर हो या बाहर हों, इनके परिणामों से बचने के लिए इसका सहारा लेना, ऐसी ही वजहें देखी जा सकती हें।      

? अंजलि सिन्हा


संदर्भ : एक्सो-एटमोसफेरिक इंटरसेप्टिव मिसाइल का परीक्षण

देश की सुरक्षा व्यवस्था को मिली मजबूती

     भारतीय रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (इसरो) ने द्विस्तरीय बैलेस्टिक मिसाइल रक्षा तंत्र के विकास में शानदार कामयाबी हासिल करते हुए हाल ही में एक्सो-एटमोसफेरिक इंटरसेप्टिव मिसाइल का सफल परीक्षण किया। जिसकी मारक क्षमता करीब दो हजार किलोमीटर की दूरी तक है। देश में यह पहला मौका है जब 'पृथ्वी डिफेंस व्हिकल' (पीडीवी) की सहायता से मिसाइल द्वारा लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेदा गया। पृथ्वी डिफेंस वीइकल (पीडीवी) को मिली कामयाबी के बाद अब परमाणु बम से लैस किसी भी हमलावर मिसाइल को आसमान में 120 किलोमीटर से अधिक ऊंचाई पर नष्ट किया जा सकेगा और इस तरह मिसाइल में रखे परमाणु, जैविक या रासायनिक बम के विनाशकारी असर से धरती पर बसी जिंदगियों को बचाया जा सकेगा।

? जाहिद खान


2014 अलनीनो वर्ष होगा ?

        अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां और विशेषज्ञ जो संकेत पहले से दे रहे थे, अब उसकी पुष्टि भारतीय मौसम विभाग ने भी कर दी है। इस वर्ष मानसून सामान्य (50 वर्षों के औसत) से कम रहने का अनुमान है। जिस देश के अधिकांश इलाकों में खेती आज भी मानसून पर निर्भर हो, निस्संदेह उसके लिए ये खबर चिंता बढ़ाने वाली है। खासकर उस समय जब भारत पिछले कई वर्षों से खाद्य पदार्थों की महंगाई से जूझता चला आ रहा है। बारिश अच्छी ना होने का सीधा असर अनाज की पैदावार पर पड़ता है, जिससे खाद्यान्न के बाजार भाव भी प्रभावित होते हैं।

? नरेन्द्र देवांगन


रोकना ही होगी भोजन की बर्बादी

      वैदिक दर्शन में कहा गया है कि- खाओं मन भर, छोड़ों ना कण भर। लेकिन  इसके इसके उलट वर्तमान में चल रहे शादी ब्याह और धूमधाम  के सीजन का दर्शन है कि- खाओं कण भर और फेंकों टन भर। वास्तव में शादी, ब्याह और शुभ अवसरों पर होने वाले भोज अब अन्न की बर्बादी का सबब बनते जा रहें है।और इसके जिम्मेदार हम स्वयं है क्योंकि हमारी आदत है कि- खाना है एक या दो कौर लेकिन भर ली पूरी प्लेट, फिर एक दिन में एक ही कार्यक्रम थोड़े ही निपटाना है दूसरे भोज में भी तो जाना है।      

? डॉ. सुनील शर्मा



नालंदा से फिर बहेगी

ज्ञान की गंगा

        तिहासिक रुप से प्रसिध्द बौध्द शिक्षा केंद्र नालंदा विश्वविद्यालय से एक बार फिर ज्ञान की गंगा बहेगी। विश्वविद्यालय का निर्माण उसी स्थान पर हो रहा है जहां इस ऐतिहासिक अकादमिक स्थल के भग्नावशेष मौजूद हैं। संभवत: अगले सत्र से पठन-पाठन भी शुरु हो जाएगा। सुखद बात यह है कि पिछले दिनों पूर्वी एशियाई सम्मेलन के दौरान आस्ट्रेलिया, सिंगापुर, कंबोडिया, ब्रुनेई, न्यूजीलैंड, लाओ पीडीआर और म्यांमार इत्यादि देशों ने विश्वप्रसिध्द नालंदा विश्वविद्यालय को पुनर्स्थापित करने से जुड़ी परियोजना में मदद का भरोसा दिया।

? अरविंद जयतिलक


  05 मई-2014

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