संस्करण: 05 अगस्त-2013

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भाजपा की चाटुकारिता

       भारतीय जनता पार्टी के नेताओं द्वारा अमेरिका में अपने खोखले विचारों के प्रचार और गलत जानकारियाँ देने के अभियान के बारे में जानकर अच्छा लगा। न्यूयार्क के टीवी एशिया सभागार में आयोजित समारोह में भाजपा अध्यक्ष ने भाग लिया जिसका सीधा प्रसारण पूरे अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों में किया गया। इस समारोह में भारत से भाजपा के नेता और उनके साथियों ने केंद्र में सत्ता प्राप्त करने के लिये कांग्रेस विरोधी गठबंधन बनाने के अपने लक्ष्य को स्पष्ट कर दिया है।  

? जुनेद काजी

(लेखक इंडियन नेशनल ओवरसीज कांग्रेस (संयुक्त राज्य अमेरिका) के अध्यक्ष है।)


मोदी की हवा तो

अभी से निकल गई

        ध्यावधि चुनाव की सियास बयानबाजी शुरू क्या हुई तमाम टीवी चैनल और सर्वे एजेंसियां यह पड़ताल करने में जुट गईं कि यदि अभी चुनाव हुए तो क्या होगा? जीत का सेहरा किस के सिर बंधेगा और शिकस्त की शर्म किसके खाते में आएगी। तमाम ओर से खबरें चलने लगीं कि कॉमनवेल्थ, आदर्श, 2जी  और कोल घोटाले के कारण पिछले दो ढाई साल से यूपीए सरकार के विरोध में जो माहौल बना है उससे शिकस्त की शर्म कांग्रेस के खाते में ही आएगी। भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के अनेकों दावेदारों में से एक गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके चापलूस समर्थक इस हवाबाजी से इतने खुश हुए कि सच और झूठ में भेद करना ही भूल गए।

? विवेकानंद


सरदार पटेल के बाद गांधी जी के अपहरण का प्रयास

      रदार पटेल गृह मंत्री के रूप में कुशल एवं सख्त प्रशासक थे इसलिये उन्हें लौह पुरुष कहा जाने लगा।सरदार पटेल ने स्वाधीनता के बाद भारत में फैली सभी छोटी छोटी रियासतों का देश में विलय कर दिया।कुछ राजा महाराजाओं तथा नवाबों ने अपनी सत्ता छिनते देख कर इस विलय का विरोध किया किंतु सरदार पटेल ने उनकी परवाह नहीं की और कठोरता का परिचय देते हुये विलय की प्रक्रिया पूरी की।इन रियासतों के मुखिया कई हिंदू राजा भी थे और कई मुसलमान नवाब भी।सरदार पटेल ने सभी के साथ एक समान व्यिवहार किया और मजबूत राष्ट्र के निर्माण के लिये सभी रियासतों का विलय कर दिया।उन्होंने चुन चुन कर मुस्लिम नवाबों के साथ कठोरता तथा हिंदू राजाओं के साथ नरमी नहीं बरती, सभी को एक ही तराजू में तौला।

 ? मोकर्रम खान


मोदीमय होती भाजपा की बदलती

भाषा और प्रतीक

      जैसे जैसे भाजपा मोदीमय होती जा रही है वैसे वैसे उसके छोटे बड़े नेता वाणी का संयम खोते हुए ऊल जुलूल बोलने लगे हैं। उल्लेखनीय है कि भरतीय संस्कृति का मुखौटा पहिने भाजपा एक लम्बे समय तक चतुराईपूण्र भाषा व प्रतीकों के माध्यम से साम्प्रदायिकता के कुटिल प्रयोग करती रही है,तब अनेक चालाक भाषा शास्त्री उसकी योजनाएं बनाते थे। ऐसा करते समय वे भले ही दादा कौणकेनुमा बहुअर्थी बातों का प्रयोग करते रहे हों किंतु उनकी भाषा में वक्त जरूरत के लिए एक शिष्ट अर्थ भी होता था।

? वीरेन्द्र जैन


आंकड़े कहते हैं मोदी का विकास पुरूष होने का दावा खोखला है

         नोबेल पुरूस्कार से सम्मानित, अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अर्थशास्त्री डॉ. अर्मत्य सेन ने कहा है कि नरेन्द्र मोदी मुझे प्रधानमंत्री के रूप में स्वीकार नहीं हैं। अपने रवैये के समर्थन में उनने यह कहा है भारत एक सेक्यूलर देश है। भारत का प्रधानमंत्री ऐसा व्यक्ति कदापि नहीं हो सकता, जो देश की आबादी के एक हिस्से के मन में भय पैदा करे। इसके अतिरिक्त उनने यह भी कहा है कि सामाजिक क्षेत्र में भी गुजरात का रिकार्ड उत्साहजनक नहीं है। गुजरात में शिक्षा का स्तर कमजोर है, लाइफ एक्सपेन्ट्सी कम है, लिंग अनुपात भी कम है और लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल में भी भारी कमी है।

 ?   एल.एस.हरदेनिया


700 साल में पहली बार रुकी

विट्ठल यात्रा, क्यों?

दिग्विजय सिंह की पंढरपुर यात्रा के जरिये आस्था, परंपरा और प्रतिमानों में आ रहे अवरोधों की जांच

           पंढरपुर (सोलापुर, महाराष्ट्र ), देवशयनी आषाढ़ी एकादशी , 19 जुलाई . भीमा नदी यहाँ अर्धचंद्राकार होकर चंद्रभागा हो जाती है। विट्ठल मंदिर के चारों ओर अद्भुत समां है। श्रध्दालुओं , वारकरियों का तांता। विट्ठल और रखुमाई ( कृष्ण-रुक्मिणी , विष्णु-लक्ष्मी ) के जयकारे गूँज रहे हैं । संत तुकाराम महाराज की देहू, पुणे से पालखी आयी है।  

? ओमप्रकाश सिंह


प्रधानमंत्री अपने-अपने

'क' को बनायेंगे प्रधानमंत्री, 'ख' ने शुरू की लाबिंग

'ग' भी मैदान में, समर्थकों ने उछाला 'घ' का नाम

      देश में ऐसी अनेक राजनैतिक पार्टियां है जो निर्वाचन आयोग से तो मान्यता प्राप्त हैं किंतु वे इतनी बड़ी पार्टियां नहीं है कि वे अपने बलबूते पर इस देश को एक प्रधानमंत्री दे सके। अब तो ये हालात भी हो गये हैं कि बड़े से बड़ा कोई एक राष्ट्रीय दल भी इस स्थिति में नज़र नहीं आ रहा है कि वह बिना छोटे-मोटे दलों के सहयोग से अपनी सत्ता बना सके। भारतीय प्रजातंत्र के संचालन की नियति अब तो गठबंधन के आधार पर हो गई है। राजनैतिक दलों की यह विशेषता निश्चित ही स्वागत योग्य है कि सत्ता पर काबिज़ होने के लिए विभिन्न विचारधाराओं वाले राजनैतिक दल एक होकर 'मिक्स वेजिटेबिल' की प्लेट जैसा स्वाद देने लगे हैं। 

? राजेन्द्र जोशी


सहारा समूह पर कब होगी कड़ी कार्यवाही

      निवेशकों को उनका पैसा लौटाने के एक मामले की सुनवाई करते हुए हमारे देष की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सहारा समूह की दो बड़ी कंपनियों-सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कारपोरेशन और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कारपोरेशन को अपनी अवमानना का नोटिस जारी किया है। अदालत ने यह नोटिस सेबी की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किए। न्यायमूर्ति केएस राधाकष्णन और न्यायमूर्ति जेएस खेहर की खंडपीठ ने सहारा समूह से स्पष्ट किया कि इस मामले में कंपनियों को अब और समय नहीं दिया जाएगा और वे अदालत की कार्यवाही पर किसी प्रकार के स्थगन की अर्जी न दें। यानी अदालती आदेश की लगातार नाफरमानी के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह के प्रति कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।

? जाहिद खान


इन्दौर हो या भोपाल

मध्यान्ह भोजन का बुरा हाल

        केन्द्र सरकार द्वारा देश के 12.6 लाख से ज्यादा स्कूलों में 12 करोड से अधिक बच्चों को खाना खिलाये जाने की मध्यान्ह भोजन योजना मध्यप्रदेश में चितांजनक स्थिती से गुजर रही है। केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से वर्ष 2012-13 के सितम्बर माह तक की अवधि में इस योजना का जो सर्वेक्षण करवाया गया वह बताता है कि देश के 144 से ज्यादा राज्यों में निर्धारित मानक के अनुसार काम नहीं हो रहा है। 

? अमिताभ पाण्डेय


बेबी फूड के मायाजाल में आज की माताएं

       ज देश में कुपोषण से मासूमों की मौतें हो रही हैं। विश्व में कुपोषण से जितनी मौतें हो रही हैं, उसका 40 प्रतिशत हिस्सा केवल भारत के पाले में आता है। टीवी पर लगातार विज्ञापनों के बाद भी मासूमों की मौत जारी है। इस दिशा में जिस तरह के जागरुकता की आवश्यकता है, उतनी अभी तक आम नागरिकों में नहीं पहुंच पाई है। दूसरी ओर आज की आधुनिक माताएं बेबी फूड के जाल में ऐसे उलझ गई हैं कि अपने ही बच्चे को दूध पिलाना उसे अच्छा नहीं लगता। यह एक मासूम को उसके अधिकार से वंचित करने का एक षडयंत्र है, जिसका शिकार आज की माताएं हो रही हैं। आज से शुरू हो रहे स्तन पान सप्ताह को देखते हुए यह विचारणीय है कि आखिर कब तक हम मासूमों को छलते रहेंगे। बहुराष्ट्रीय कंपनियों का जाल हमें इस तरह से भ्रमित कर रहा है कि हम चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। यह विकट स्थिति है। हमें इस मायाजाल से बचकर निकलना ही होगा।    

 

? डॉ. महेश परिमल


बाघ के लिए त्रासदी बना इंसान

        केंद्र सरकार बाघों के संरक्षण के लिए दो दशक पूर्व से प्रोजेक्ट टाइगर चला रही है। किंतु प्रोजेक्ट टाइगर यूं सफ ल नही कहा जा सकता है क्योंकि राजस्थान का सारिस्का नेशनल पार्क बाघों से खाली हो गया है। पन्ना टाइगर रिजर्व एवं मध्य प्रदेश के रणथम्भौर नेशनल पार्क के बाघों की दशा दयनीय हो चली है। उत्तर प्रदेश के दुधवा नेशनल पार्क में बाघों की संख्या आंकड़ेबाजी की भेट चढ़ी हुई है। इसके बाद भी देश के वन एवं पर्यावरण रायमंत्री जयराम रमेश ने विगत माह घोषणा की थी कि देश में 1411 से बढ़कर बाघों की संख्या 1700 से ऊपर हो गई है। आंकड़े भले ही देश में बाघों की संख्या बढ़ा रहे हों किंतु हकीकत एकदम से विपरीत है।

? राखी रघुवंशी


  05 अगस्त-2013

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