संस्करण: 04  जून-2012

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आंदोलन की आड़ में

           स्वतंत्रता-स्वच्छंदता, स्वाभिमान-अभिमान व्यक्ति के अंत:करण में विद्यमानऐसे अनुभव हैं जो भावनाएं बदलते ही रूपांतरित हो जाते हैं,और जिनके मन पर बुध्दि का अंकुश नहीं होता वे इस अनुभव को ताड़ नहीं पाते। अंतत:ऐसे व्यक्ति के हाथ में हानि ही लगती है...कालांतर में ऐसे अनेकों उदाहरण मौजूद हैं। लेकिन कुछ कुटिल मस्तिष्क के मालिक होते हैं जो मूलत:स्वच्छंद और अभिमानी होते हैं किंतु मुखौटा स्वाभिमानी और स्वतंत्रता के अधिकार का पहने रहते हैं।

 

  ? विवेकानंद


मोदी के आने और आडवाणी के जाने का मतलब

        पिछले दिनों मुम्बई में हुयी भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में जिस तरह नरेंद्र मोदी को एक स्वर में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के बतौर पेश करने की कोशिश की गयी और आडवाणी और सुषमा स्वराज बैठक के बाद होने वाली रैली से गायब रहे,वह भाजपा और पूरे भारतीय राजनीति की एक महत्वपूर्ण घटना है। जिसके दूरगामी निहितार्थ हैं।

? राजीव कुमार यादव


एक घाट पर पानी पीते शेर की तरह

नरेन्द्र मोदी और गाय की तरह शिवराज

    त दिनों मुम्बई में आयोजित भाजपा का राष्ट्रीय सम्मेलन अपने राजनीतिक एजेंडे या किसी भावी राजनीतिक कार्यक्रम के लिए चर्चित नहीं हुआ अपितु वह गडकरी को दुबारा अध्यक्ष बनवाने के लिए पार्टी संविधान में किये गये परिवर्तन, नरेन्द्र मोदी द्वारा भागीदारी के लिए संजय जोशी को त्यागपत्र देने के लिए विवश करने व पूर्व में प्रधानमंत्री पद प्रत्याशी रहे लाल कृष्ण आडवाणी द्वारा रैली में भाग न लेने व सुषमा स्वराज द्वारा उनका साथ देने की खबरों के कारण चर्चा में रहा।

? वीरेन्द्र जैन


घृणा और प्रतिहिंसा के बल पर प्रधानमंत्री

बनने के आकांक्षी हैं नरेन्द्र मोदी

          प्रसिध्द कहावत है ''सूत न कपास, जुलाहों में लठा लठी'' यह कहावत भारतीय जनता पार्टी पर पूरी तरह लागू होती है। देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों के मद्देनजर अगले चुनाव में दूर दूर तक भाजपा द्वारा लोकसभा में बहुमत पाने की संभावना नजर नहीं आती। अपने बलबूते पर तो भाजपा बहुमत हासिल कर ही नहीं कर सकती अन्य पार्टियों के साथ मिलकर भी ऐसी संभावना नजर नहीं आती। फिर भी चारों तरफ यह शोर किया जा रहा है कि नरेन्द्र मोदी देश के अगले प्रधानमंत्री होंगे।

? एल.एस.हरदेनिया


आतंक का स्कूल

         राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी और पुणे में चलने वाले भोंसला मिलीट्री स्कूल के मैनेजमेंट कमेटी के महासचिव प्रकाश पाठक के अनुसार मध्य प्रदेश,गुजरात की भाजपा शासित सरकारें अपने यहां भी इस स्कूल की शाखाएं खोलना चाहती हैं। जो लोग भोंसला मिलिट्री स्कूल का इतिहास जानते हैं उनके लिये यह एक अशुभ खबर है। क्योंकि यह वही स्कूल है जिससे जुडे कई लोग नांदेड,मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस में हुये आतंकी विस्फोटों में शामिल पाये गये थे।  

 ? शाहनवाज आलम


ये दिल मांगे मोदी

                  मोदी आ जा, मोदी आ जा

                 बीजेपी को खा जा, खा जा

                  आरएसएस को भी खा जा, खा जा

                 चुनाव जीत के बन जा राजा

                 ऊंचे लोगों का आशिष लेकर,

? बद्री रैना


आखिर म.प्र. प्रशासन क्यों 'डरता' है माधुरी कृष्णास्वामी से ?

       क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ कुछ असुविधाजनक प्रश्न उठाने से किसी को 'विकास विरोधी' सम्बोधित किया जा सकता है ? या शातिर अपराधियों या असामाजिक तत्वों के खिलाफ जारी किए जानेवाले 'तडीपार' के आदेशों को सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है ? अगर हम मध्यप्रदेश में सत्तासीन जनाब शिवराजसिंह चौहान की हुकूमत के तर्जे अमल पर गौर करें तो इस सम्बन्ध में कुछ अहम सुराग़ मिल सकते हैं।

? सुभाष गाताड़े


अर्न्तकलह में उलझी भाजपा

      मुंबई में संपन्न भाजपा कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक ने पार्टी का अंतर्कलह उजागर कर दिया है। अनुशासन का दंभ भरने वाली इस पार्टी में अब संगठन व्यक्तिवाद के आगे पूरी तरह झुक गया है। देश को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से बहुत उम्मीदें थी,किंतु भाजपा उन पर ज़रा भी खरी नहीं उतरी। जनता यह आस लगाए बैठी थी कि सुरसा की तरह बढ़ती महंगाई पर भाजपा कोई बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान करेंगी, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से यह मुद्दा विचार के लिए भी नहीं उठाया गया। यहां तक कि हालियां पेट्रोल मूल्यवृध्दि पर भी पार्टी पूरी तरह ख़ामोश रही। राष्ट्रीय मुद्दों की बजाय नेताओं के अहं का टकराव और एक दूसरे को नीचा दिखाने की प्रवृत्ति खुल कर सामने आई।

? महेश बाग़ी


पेट्रोल मूल्य वृध्दि-

अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण की दिशा में सही कदम

        24 मई 2012 गुरूवार से देश के लोगों को अपने वाहनों में पेट्रोल भरवाने के लिये 7.5 रूपये अधिक खर्च करने पड़ रहे है। तेल कंपनियों ने अंतत:पेट्रोल की कीमतें बढ़ा दी है जिसकी संभावना पहले से ही थी और शायद तेल कंपनियाँ इसका लंबे समय से इंतजार भी कर रही थी। जैसी कि उम्मीद थी, विपक्ष ने यू.पी.ए. सरकार के  विरूध्द तत्काल शोर मचाना शुरू कर दिया। मुख्य रूप से मीडिया द्वारा यह कहते हुये सरकार के विरूध्द अभियान छेड़ दिया कि यह गरीब लोगों पर अत्याचार है तथा इसके पीछे के मुख्य तथ्यों को बड़ी चतुराई से दरकिनार कर दिया। यद्यपि पेट्रोल उपभोक्ताओं के हितों की चिन्ता उचित और स्वाभाविक है।

? गौरव पंडित


अनियंत्रित क्यों है बाजार!

    किसी वस्तु के बाजारी भाव को तय करने के कई कारक होते हैं। उत्पादन की अधिकता और मॉग में कमी के कारण वस्तु का दाम गिर जाता है। इसका एक तात्कालिक उदाहरण पेट्रोल और सोना है। सहालग का मौसम रहने तक मॉग की अधिकता के कारण सोना ऐतिहासिक ऊॅचाई पर चढ़ा रहा लेकिन बीते सप्ताह सहालग खत्म होते ही यह नीचे उतरना शुरु हो गया है क्योंकि सोने की खपत घट गयी है। पेट्रोल की आयातित कीमतें बढ़ रही हैं इसलिए मॅहगा हो रहा है। इस तरह के घटाव-बढ़ाव के अन्तर्राष्ट्रीय कारण भी होते हैं जो अपनी जगह हैं। बाजार अगर अर्थशास्त्र के सिध्दान्त के विपरीत व्यवहार करता है तो निश्चित ही उसके पीछे कोई प्रभावकारी ताकत होती है। 

 

? सुनील अमर


एक व्यंग्य

संदर्भ - कालाधन

काली दिवाल पर सफेद डिस्टेम्पर पोतने की कवायद

     दो भाई हैं। एक काला और एक गोरा। गोरा भाई गरीब, दुबला-पतला, कुपोषण का शिकार और रक्त अल्पता के रोग से ग्रसित। असमर्थता का शिकार बेचारा रह गया देश में। रहने लगा गरीब बस्ती में, मध्यम वर्ग के 30X50 के प्लाट के आवासगृह में, किसानों में, मेहनतकश लोगों के बीच में। उधार, दूसरा भाई संड-मुसुंड, ताकतवर, बलिष्ठ भुजाधारी एकदम काला स्याह डामर और कोयले के रंग को मात देता जाकर बस गया विदेशों में। अपने सगे बाप को छोड़कर भूलकर जा बैठा कतिपय देशों की गोद में चढ़ गया उनके कांधों पर। बड़ी अजीब कहानी है दो भाइयों के बीच के इंटरनल स्वभाव की।

? राजेन्द्र जोशी


संदर्भ : आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का फैसला

अल्पसंख्यक आरक्षण फिर विवादों में

    आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के हालिया फैसले से एक बार फिर मुल्क में अल्पसंख्यक आरक्षण का मामला चर्चा में आ गया है। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति पीवी संजीव कुमार की खंडपीठ ने अल्पसंख्यकों को केन्द्र की नौकरियों और केन्द्रीय शैक्षणिक संस्थानों में पिछड़े वर्ग के आरक्षण में साढ़े चार फीसद स्थान निर्धारित करने के सरकार के फैसले को गलत बतलाते हुए रद्द कर दिया। पिछड़ी जाति कल्याण संगठन के अध्यक्ष आरके कृष्णन्नैया की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि,यह आरक्षण धार्मिक आधार पर है। यह किसी अन्य तार्किक या अनुभवजन्य आंकड़ों पर आधारित नहीं। 

? जाहिद खान


विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून     

जलवायु परिवर्तन से बढ़ेगी गरीबी

     इंडियन इंस्टीट्यूट आफ ट्रापिकल मेट्रोलाजिकल के वैज्ञानिकों ने दिसम्बर 2006 के जर्नल आफ साइंस में प्रकाशित शोध पत्र में वर्ष 1951-2000 के बीच हमारे देश की मानसूनी वर्षा के स्वभाव में हो रहे परिवर्तन का अध्ययन प्रकाशित कराया था। इस शोध पत्र के अनुसार देश भर में असामान्य तरीके से हो रही बारिश का क्रम बढ़ा है जैसे कि 2005 में मुम्बई शहर में केवल एक दिन में ही 94.4 सेमी.बारिश हुई थी। बारिश के स्वभाव में परिवर्तन का यह क्रम सारे देश में परिवर्तन किया जा रहा है। अब देश के किसी हिस्से में एक दिन में ही पूरे मानसून की औसत बारिश की खबरें मिल जाती हैं और फिर मानसून का पूरा सत्र सूखा ही झेलना पड़ता है।

? डॉ. सुनील शर्मा


आखिर बीमार डॉक्टरों का

इलाज कौन करेगा

 

    पने लोकप्रिय धारावाहिक सत्यमेव जयते के माध्यम से आमिर खान ने एक ज्वलंत मुद्दे पर बहस छेड़ दी है। जी हाँ जिसे हम धरती का भगवान मानते हैं, वही चिकित्सक आज हमें लूट रहा है। वह एक मोहरा बन गया है दवा कंपनियों का। इसलिए वह विशेष कंपनी की दवा लिखता है,जिससे रोगी का स्वास्थ्य ठीक हो या न हो,पर उसका स्वास्थ्य अवश्य ठीक हो जाता है। दवा कंपनियों से विभिन्न रूपों में उपहार लेकर डॉक्टरों ने अपनी सेहत बुरी तरह से बिगाड़ ली है। उनका लालच इस रूप में समाज के सामने आया है,जिससे धरती के इस भगवान को हैवान कहने में भी अब संकोच नहीं होता। बिना बात के विभिन्न जाँच,ऑपरेशन आदि कर वे गरीबों को लूटते रहते हैं। 

 

? डॉ. महेश परिमल


  04जून2012

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