संस्करण: 4 जुलाई- 2011

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नौटंकियों में माहिर है भाजपा

    हते हैं जहां से उम्मीद न हो वहां से कुछ मांगना नहीं चाहिए, लेकिन कभी-कभी जहां से उम्मीद न हो वहां से कुछ मांगना भी अच्छा होता है। जैसा कि इन दिनों मध्यप्रदेश के भाजपा अध्यक्ष कर रहे हैं। महंगाई से दुखी होकर उन्होंने राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु मांगी है। देश में इच्छामृत्यु की अनुमति देने का कोई प्रावधान नहीं है,इसलिए राजनीतिक नौटंकी करने में क्या हर्जा है।

  ? विवेकानंद


मुंडे मुंडे मतिर्भिन्ना  

  ब मुंडे की बारी है। मुझे लगता है कि भाजपा एक बेरी का पेड़ है, जिसके पास थोड़ी थोड़ी देर बाद कोई न कोई बच्चा आता है, पेड़ को हिलाता है व अपने हिस्से के बेर बटोर कर चल देता है। वसुन्धरा राजे ने पार्टी के पेड़ को हिलाया था और अपना विपक्षी नेता का पद सुरक्षित बनाये रखा, अभी अभी उमा दीदी हिला कर गयी थीं और यूपी की दीवान बना दी गयीं थीं, अब मुंडे की बारी थी। किसी फिल्म में एक डायलोग था- रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप लगते हैं। 

? वीरेन्द्र जैन


क्या हिन्दुत्व आतंक के मास्टरमाइंड

को बचाया जा रहा है ?

  भारत-पाकिस्तान के बीच वार्ता का नया दौर शुरू हो चुका है।   

  निश्चित ही वे सभी लोग इन समाचारों से प्रसन्न हो सकते हैं जो इन दोनों पड़ोसी मुल्कों में - जिनकी एक समृध्द साझी विरासत रही है -आपसी सामंजस्य कायम रखने की कोशिश में रहते हैं या कमसे कम इसके ख्वाहिशमन्द दिखते हैं

? सुभाष गाताड़े


सच्चर कमेटी की रिपोर्ट को बदनाम करना

मुसलमानों के खिलाफ साजिश है

 

   ल्पसंख्यकों के  बारे में कांग्रेस पार्टी की सोच एक बार फिर बहस के दायरे में आ गयी है।एक तरफ तो  कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह की लाइन है जो मुसलमानों से सम्बंधित किसी भी मसले पर जो कुछ भी कहते हैं वह आम तौर पर मुसलमानों के हित में होता है और दूसरी तरफ केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ,सलमान खुर्शीद हैं जो मुसलमानों के हित की बात करते समय यह ध्यान रखते हैं कि दिल्ली की काकटेल सर्किट के उनके बीजेपी वाले दोस्त नाराज न हो जाएँ।

? शेष नारायण सिंह


केवल लोकपाल से समाप्त नहीं होगा  

भ्रष्टाचार  

    दि प्रधानमंत्री और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को लोकपाल के दायरे में लाया जाता है तो इससे हमारे देश का संसदीय प्रजातंत्र कमजोर होगा। प्रधानमंत्री और पृथक व स्वतंत्र न्यायपालिका,विशेषकर सर्वोच्च न्यायालय,हमारे प्रजातंत्र की धुरी हैं। स्वतंत्रता के बाद के लगभग 60वर्षों का अनुभव हमें बताता है कि प्रधानमंत्री के पद पर जितने भी राजनीतिज्ञ आसीन हुए हैं.............

? एल.एस.हरदेनिया  


जमीनी हकीकतों पर पर्दा डाल रही हैं भाजपा-सरकारें

दूसरी सरकारों की खिल्लयां उड़ाना ही है उनका राजनैतिक चरित्र

 

  हां-जहां देश के विभिन्न राज्यों में भारतीय जनता पार्टी सत्ता पर काबिज हैं वहां के मौजूदा हालात दिन पर दिन बदतर होते दिखाई देने लगे हैं। यह पार्टी अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को भाषण देने की कला का प्रशिक्षण तो खूब दे रही है, ताकि वे अपने उद्बोधानों में आम जनता की भावनाओं पर ऐसा जादू डाल सके कि .......

? राजेन्द्र जोशी  


आदिवासियों के नाम पर 

किसका विकास

  ''मेरा बेटा संदीप विडीयोकान कम्पनी मे जनसम्पर्क अधिकारी है। आदिवासी होने के नाते उसे आदिवासियों की जमीन पावर प्लांट के लिए खरीदने का हक है। यदि किसी को आपत्ति है,तो वह शिकायत कर सकता है। मेरे बेटे ने कभी मंत्री पुत्र होने का फायदा नही उठाया है।''  

? अमिताभ पाण्डेय


धन बटोरते सन्त लोग

  त्य साईबाबा की मृत्यु के लगभग पौने दो माह बाद उनका निजी कमरा खोला गया। उनके कमरे से 96 किलो सोनो, 307 किलो चान्दी, बड़ी मात्रा में जवाहरात तथा 11.56 करोड़ रुपये नगद मिले। तीन-तीन मशीनें लगायी गयीं, तब कहीं जाकर नोटों की गिनती पूरी हो सकी। कहा गया है कि विदेशी मुद्रा की गिनती अभी नहीं हुई है। उनकी सम्पत्ति पहले ही अनुमानत: 40 हजार करोड़ की ऑंकी गयी थी।  

? अंजलि सिन्हा


भगवाकरण की भेंट चढ़ा 

कालाधन विरोधी आंदोलन

 

     गभग 4 माह पूर्व बाबा रामदेव ने इस देश की जनता को एक सपना दिखाया था कि भारत का 500 लाख करोड़ का काला धन विदेशों में जमा है,वे आंदोलन चला कर सरकार को विवश कर देंगे कि वह यह काला धन स्वदेश वापस लाये और जब यह काला धन वापस आ जायगा तो सरकार को कम से कम अगले 10वर्षों तक किसी प्रकार का टैक्स वसूलने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

? मोकर्रम खान


तकनीकि शिक्षण संस्थाओं से

छात्रों की बढ़ती अनदेखी?  

  प्रदेश में इन दिनों इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए दाखिले का कार्यक्रम प्रारम्भ हो चुका है। आनलाइन काउंसिलिंग के जरिए छात्र अपना पसंदीदा कालेज चुनने स्वतंत्र हैं। फिर भी  कालेज संचालकों में यह भय व्याप्त है कि कहीं उनका कालेज खाली न रह जाए। इसलिए वो छात्रों को आकर्षित करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहें है। कालेजों के एजेण्ट और कर्मचारी गांव गांव जा रहें हैं छात्रों से सम्पर्क कर अच्छा प्लेसमेण्ट,अच्छे अंकों से डिग्री कराने से लेकर फीस में छूट प्रलोभन दे रहें है।

? डॉ. सुनील शर्मा


बाजार के निशाने पर अब गाँव

 

         देश के गाँव इन दिनों कई तरह से बाजार के फोकस पर हैं। घरेलू उपयोग की वस्तुऐं बनाने वाली बड़ी-बड़ी कम्पनियाँ को अगर वहाँ अपनी बाजारु संभावनाऐं दिख रही हैं,तो बिल्कुल शहरी व्यवसाय माने जाने वाले बी.पी.ओ. क्षेत्र ने भी अब गॉवों की तरफ रुख कर लिया है। सरकार अगर देश के प्रत्येक गाँव में बैंक शाखाऐं खोलने की अपनी प्रतिबध्दता जाहिर कर चुकी है तो निजी क्षेत्र की दिग्गज कम्पनी हीरो समूह अब गॉवों में साप्ताहिक किश्त के कर्ज पर बाइसिकिल बेचने का ऐलान कर रही है,और उधर आई.टी.सेक्टर ने भी घोषणा की है............

? सुनील अमर



लाल आतंक का कारोबार

 

        ह जानकर आपको आश्चर्य होगा कि लाल आतंक यानी नक्सली भी अपना बजट ठीक उसी तरह तैयार करते हैं, जैसे केंद्र सरकार एवं राय सरकारें तैयार करती हैं। इस बजट का अहम हिस्सा मिलिट्री दस्तों पर व्यय होता है। इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, अनाज भंडारण आदि विषयों पर बड़ी मात्रा में खर्च होता है। नक्सलियों की कमाई मुख्य रूप से उन व्यापारियों से वसूली के जरिए होती है,जो नक्सली क्षेत्र में धंधा संचालित करते हैं। इतना ही नहीं इलाकों से गुजरने वाले बस-ट्रक भी मासिक रूप से निश्चित राशि का भुगतान करते हैं।

? महेश बाग़ी


4 जुलाई-2011

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