संस्करण: 04 फरवरी-2013

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हिन्दुत्व ब्रिगेड के आतंक के प्रयोग

       राष्ट्रीय जांच एजेंसी - जिसका गठन आतंकवाद की घटनाओं की विशेष जांच करने के लिए किया गया है - उसने हाल में एक ऐसा खुलासा किया है जिस पर अिक चर्चा नहीं हो सकी है। एक तो उसने कई उदाहरण पेश किए हैं जिसमें बताया गया है कि किस तरह दक्षिणपंथी अतिवादियों ने अपनी आतंकी गतिविियों की योजना बनाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालयों का इस्तेमाल किया था। उसके मुताबिक मई 2006में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता इन्द्रेश कुमार ने हिन्दुत्व आतंकी मोडयूल के सरगना सुनिल जोशी से संघ के नागपुर कार्यालय में ही मुलाकात की थी।

?   सुभाष गाताड़े


बिलकुल सहन न करें, प्लीज

       यपुर में हाल ही में संपन्न हुये कांग्रेस के चिन्तन शिविर में केन्द्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिन्दे की भगवा आतंकवाद पर टिप्पणी ने भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस ख़ेमों में वैसा ही कोलाहल मचा दिया जैसा कि उम्मीद की जा रही थी। हिन्दुत्व आतंक देश के लिये चिन्ता का कारण जरूर होना चाहिये किन्तु हिन्दू आतंक नही। साफ तौर पर, किसी भी ार्मिक समुदाय को उस समुदाय के कुछ लोगों की व्यक्तिगत आतंकी गतिविाियों के कारण समग्र रूप से आतंकवाद के लिये जिम्मेदार नही ठहराया जा सकता।

? सीताराम येचुरी

(लेखक सीपीएम पोलितब्यूरो के सदस्य तथा राज्यसभा के सांसद है। लेख में व्यक्त विचार लेखक के व्यक्तिगत है।)


क्या अडवाणीजी ने संघ से बदला ले लिया है?

       जिस किसी ने भी टीवी के समाचारों में राजनाथ सिंह के पद ग्रहण का दश्य देखा होगा तो उसने विगत महीनों से श्री लाल केंष्ण अडवाणी के उदास निराशचेहरे के विपरीत एक प्रफुल्लवदन अडवाणी का साक्षात्कार किया होगा। मोहन भागवत की कठपुतली नितिन गडकरी से मुक्ति मिलने के बाद उनके मुख से खुशी फूटी पड़ रही थी। कहा जाता है कि उन्होंने गडकरी के मामले पर वीटो कर दिया था तथा संघ से बाहर के यशवंत सिन्हा को चुनाव के लिए आगे करने में उन्हीं की भूमिका थी,जिन्हें संघ किसी भी तरह से कोई स्थान नहीं देना चाहता। संघ के पुराने स्वयं सेवक अडवाणी न केवल संघ के वरिष्ठतम लोगों में से हैं अपितु उसकी राजनीतिक शाखा भाजपा के शासन काल में देश के उपप्रानमंत्री पद तक पहुँच कर 'प्रानमंत्री के सारे काम सम्हालने' वाली हैसियत भी रख चुके हैं।

? वीरेन्द्र जैन


बीजेपी और सियासी गुंडागर्दी

         किसी व्यक्ति को यदि यह अहसास होता है कि उसके खिलाफ साजिशन कोई कार्रवाई की जा रही है, तो इसके लिए देश में न्यायपालिका है, जहां वह व्यक्ति इसे सिध्द कर सकता है और खुद को बेदाग साबित कर सकता है। भारत में यही कानून है और संवैधानिक व्यवस्था भी है। लेकिन हर बात पर लोकतंत्र और राष्ट्रवाद की दुहाई देने वाली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी इस व्यवस्था से इत्तेफाक नहीं रखते। इसलिए उन्होंने दोबारा पार्टी अध्यक्ष पद न मिलने के बाद नागपुर पहुंचकर सीधे-सीधे आयकर विभाग के अफसरों को देख लेने की धमकी दे दी।  

? विवेकानंद


पहली बार आरएसएस ने

भाजपा के सामने घुटने टेके

       हली बार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को भारतीय जनता पार्टी के समक्ष घुटने टेकने पड़े। अभी तक भारतीय जनता पार्टी और उसके पूर्व भारतीय जनसंघ को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के राजनीतिक शाखा समझा जाता रहा है। 1950 में जब यह तय हो चुका कि 1952 में देश का पहला आम चुनाव होगा और सतता उस दल के हाथ में रहेगी जो चुनाव में विजय हासिल करेगा। इस घटनाक्रम के चलते राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने यह फैसला किया कि उसे भ्राजनीति में आवेश करना चाहिए पर सीधे नहीं अआत्यक्ष रूप से। इस रणनीति के तहत् भारतीय जनसंघ की स्थापना की गई। उसके आथम अध्यक्ष डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी बनाये गये। 

 ?   एल.एस.हरदेनिया


बाजारवाद ने छीन ली सांस्कृतिक पहचान

खत्म हो गई आंचलिक मेलों की रौन

                  वैश्विकरण और बाजारवाद के इस दौर में जहां व्यावसायिकता को बढ़ावा मिला है, वहीं हमारी सांस्कृतिक परम्पराओं और हमारी आंचलिक सभ्यताओं का पतन होता जा रहा है। रीति-रिवाजों, बोलचाल, रहन-सहन और विविा सामाजिक और सांस्कृतिक पहचानों के बीच भारत की विश्व में एक गौरवशाली परम्परायें रहती आई है। भारत के लोगों की जीवनशैली और यहां जन्में महापुरुषों के विचारों और विश्वशांति के संदेशों के कारण ही भारत विश्वगुरु के रूप में अपने आपको स्थापित करने में सफल हो पाया है। 

? राजेन्द्र जोशी


क्या डेमोक्रेसी फेल हो गयी है महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर हथियारीकरण

      दिल्ली के उपराज्यपाल श्री तेजिन्दर खन्ना - केन्द्रीय सरकार के प्रतिनिध होने के नाते जिनके मातहत दिल्ली की पुलिस व्यवस्था होती है - द्वारा महिलाओं की सुरक्षा के मद्देनजर हाल में जो सुझाव दिया गया है उससे लगता है कि उनका अपनी राज्यव्यवस्था से भरोसा उठ गया है या फिर वे उसे उसकी जिम्मेदारी से मुक्त करना चाहते हैं। ज्ञात हो कि उन्होंने हाल में दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि बन्दूक जैसे हथियारों के लाइसेन्स के लिए रजिस्टे्रशन करानेवालों से लिखित में शपथपत्र लिया जाए कि वे इस लाइसेन्सध ारी हथियार से सिर्फ अपनी सुरक्षा नहीं बल्कि महिलाओं की सुरक्षा का दायित्व भी निभाएंगे।

? अंजलि सिन्हा


पूरी न्यायिक व्यवस्था को

फास्ट ट्रैक की जरूरत

      न्यायिक सुधारों की बात करते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने न्याय की धीमी गति की ओर धयानाकर्षित किया। इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिये मामलों का तेजी से निपटारा किए जाने की बात कही जा रही है। कई राज्यों ने फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की पहल शुरू की है। एक आंकड़े के मुताबिक इस समय निचली अदालतों और उच्च न्यायलयो में करीब 33 क़रोड़ और सुप्रीम कोर्ट के पास करीब 66 हजार मुकदमे लंबित हैं।

? विजय प्रताप


स्त्री-पुरुष समानता की कीमत क्या होगी ?

        दो घटनाओं से बात शुरु करना चाहूँगा। दोनों 40 साल से ज्यादा ही पुरानी हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाँवों में कहीं-कहीं एक बेहद गरीब जाति निवास करती है,जिसे वहॉ की स्थानीय बोली में वनराजा या वनमंशा कहा जाता है। ये कद-काठी, चाल-ढ़ाल, रहन-सहन तथा बोली आदि में आदिवासी सरीखे होते हैं,आबादी से काफी दूर बाग या इसी तरह के स्थान पर झोपड़ी डालकर रहते हैं,दोना-पत्तल बनाना इनका पुश्तैनी काम है। इसी वनराजा समुदाय की एक 35-40 वर्षीया स्त्री अपने पति के साथ एक दिन गॉव के एक संभ्रांत व्यक्ति के यहॉ आई और कहा कि ''बाबू, हम दोनों की 'खपड़कुच्ची' करवा दो।'' बाबू भी खपड़कुच्ची का मतलब नहीं जानते थे, सो उसी से पूछा कि यह क्या होता है?

? सुनील अमर


संदर्भ : जस्टिस जेएस वर्मा की रिपोर्ट

रिपोर्ट आई, अब अमलदारी का इंतजार

       बीते साल राजधानी  दिल्ली में पैरामेडिकल छात्रा के साथ हुई सामूहिक बलात्कार की घटना की पूरे देश में जबर्दस्त प्रतिक्रिया हुई और हजारों नाराज लोग सड़कों पर उतर आए। महिलाओं के खिलाफ हिंसा और अपराध रोकने के लिए कानूनों में बदलाव की मांग तेज हुई। दोषियों को मौत की सजा या उन्हें नपुंसक बनाने तक की मांगें उठीं। जनता के गुस्से और उनकी मांग का सम्मान करते हुए केन्द्र सरकार ने 23दिसंबर को न्यायमूर्ति जेएस वर्मा की अगुआई में तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी। समिति का उद्देश्य,महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानपूर्ण माहौल मुहैया कराने में सरकार की विफलता का समाधान पेश करना और यौन उत्पीड़न संबांधी कानूनों में बदलाव के लिए सरकार को नए सुझाव पेश करना था।    

? जाहिद खान


भावनाओं में बहकर

निर्णय न लें कमल हासन

        तंकवाद पर बनी कमल हासन की फिल्म विश्वरूपम पर विवादों का साया गहरा गया है। विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब इस हफ्ते हैदराबाद के एक व्यवसायी ने आांध्र प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर कर 95 करोड़ की लागत से बनी इस फिल्म पर रोक लगाने की मांग की थी। फिल्म को 25 जनवरी को ही प्रदर्शित किया जाना था लेकिन फिल्म में मुस्लिम समुदाय को नकारात्मक तरीके से पेश करने की शिकायत के बाद तमिलनाडु सरकार ने इसके प्रदर्शन पर दो सप्ताह तक की रोक लगा दी थी। हासन द्वारा इस प्रतिबंध के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश के वेंकटरमण ने शनिवार को फिल्म देखी थी और फैसला सोमवार को सुनाने को कहा था।

? अनुष्का त्रिपाठी


आम आदमी तक पहॅुचे

आधार से फायदे की बात

       केन्द्र सरकार के मास्टर स्ट्रोक यानि आधार कार्ड के जरिए भुगतान व्यवस्था से देश में प्रतिवर्ष एक लाख करोड़ रूपये बर्बादी पर रोक संभव है। यह ऑकलन किसी राजनैतिक व्यक्ति या दल का नहीं है बल्कि यह बात नेशनल इंस्टीटयूट आफ पब्लिक फायनेंस एण्ड पालिसी जैसे विश्वस्तरीय संस्थान द्वारा अपने हाल ही में जारी रिपोर्ट के जरिए उजागर की है।प्रश्न यह है कि यह एक लाख करोड़ रूपये राशि किसकी है?और इसे कौन डकार रहा है? तो इस संस्थान द्वारा जारी रिपोर्ट  से ज्ञात होता है देश गरीब आदमी, बच्चों वृद्वों और किसानों के हिस्से की  यह राशि है और इसे बिचौलिए और दलाल डकार रहें है।    

? डॉ सुनील शर्मा


नक्सलवाद के बहाने भ्रष्टाचार पर पर्दा

        ''केन्द्र सरकार की राशि से मधयप्रदेश में संचालित हो रही कल्याणकारी योजनाएं पात्र हितग्राहियों से ज्यादा अधिकारियों, कर्मचारियों का कल्याण कर रही हैं।'' कॉग्रेस नेताओं का यह आरोप मीडिया में आ रही भ्रष्टाचार की सप्रमाण खबरों और जनसंगठनों द्वारा किये जा रहे विरोध प्रदर्शन के कारण सही साबित हो चुका है। इसके बावजूद भ्रष्ट अफसरों, कर्मचारियों के विरूद प्रभावी कार्यवाही न होने से भ्रष्टाचार की शिकायतों का ढेर और जनसंगठनों के विरोध प्रदर्शन का सिलसिला लगातार बढता चला जा रहा है।

? अमिताभ पाण्डेय


  04 फरवरी-2013

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