संस्करण: 04 फरवरी-2013

नक्सलवाद के बहाने भ्रष्टाचार पर पर्दा

? अमिताभ पाण्डेय

                    ''केन्द्र सरकार की राशि से मधयप्रदेश में संचालित हो रही कल्याणकारी योजनाएं पात्र हितग्राहियों से ज्यादा अधिकारियों, कर्मचारियों का कल्याण कर रही हैं।'' कॉग्रेस नेताओं का यह आरोप मीडिया में आ रही भ्रष्टाचार की सप्रमाण खबरों और जनसंगठनों द्वारा किये जा रहे विरोध प्रदर्शन के कारण सही साबित हो चुका है। इसके बावजूद भ्रष्ट अफसरों, कर्मचारियों के विरूद प्रभावी कार्यवाही न होने से भ्रष्टाचार की शिकायतों का ढेर और जनसंगठनों के विरोध प्रदर्शन का सिलसिला लगातार बढता चला जा रहा है। भ्रष्टाचार की बढती खबरों और विरोध प्रदर्शन को लेकर प्रशासन में बैचेनी बढ गई है।   प्रशासन में उच्च पदों पर बैठे अधिकारी भ्रष्टाचार पर अकुंश लगाने के बजाय भ्रष्टाचार उजागर करने वाले जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनसंगठनों को नक्सली बताने का प्रयास कर रहे हैं। भ्रष्टाचार को रोकने में नाकाम प्रशासन मजदूरों के हक ,अधिकार की लडाई लडने वालों, उनकी मजदूरी के त्वरित भुगतान की पैरवी करने वालों को नक्सलवादी साबित कर देना चाहता है। दरअसल भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने,भ्रष्ट तंत्र को सख्त कार्यवाही से बचाने के लिए प्रशासन का यह नया बहाना है जिसमें अपनी विफलता को नक्सलवाद के सिर पर डालने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन के आला अफसर उच्च अधिकारियों को झूठी रिपोर्ट भेजकर मजदूरों के हक अधिकार की लडाई लडने वालों को बदनाम कर देना चाहते है। ऐसे आला अफसरों का पूरा जोर इस बात पर है कि मजदूरो, आदिवासियों को उनके अपने हाल पर छोड दिया जाये । जो गरीबों के हक की बात करे उसे नक्सलवादी बताकर कानूनी के शिकंजे में फंसा दिया जाये।

               गरीब मजदूर,आदिवासियों के हक- अधिकार की लडाई लडनें वाले कुछ जनसंगठन और उनके प्रतिनिधियों के साथ मधयप्रदेश में ऐसा ही हो रहा है। उन्हें नक्लसवादी गतिवििधयों में लिप्त बताकर भ्रष्टाचार के विरोध की आवाज को दबाने की कोशिशें तेज हो गई है।

               भ्रष्टाचार को लेकर सर्वाधिक शिकायतें महात्मा गॉधी राष्ट्रीय रोजगार गारन्टी योजना में मिल रही हैं। केन्द्र सरकार की यह योजना मधयप्रदेश में भ्रष्टाचार की ऐसी नदी बन गई हैं जिसमें ज्यादातर जिलों के अफसर,कर्मचारी गले गले तक डूबकर कमाई कर रहे हैं। इस योजना का लाभ कागजों पर जितना मिलना दिखाया गया ,यदि हकीगत में यह संभव होता तो प्रदेश के सभी गरीब,मजदूरों की जिदंगी सुखी,सम्पन्न हो जाती। उनकी तमाम परेशानियों का अन्त हो जाता। अफसोस यह है कि योजना के अन्तर्गत गलत आंकडों के मायम से विकास की जो रंगीन तस्वीर पावर पाईन्ट प्रेजेन्टेशन में पेश की जा रही हैं वह सच्चाई से बहुत दूर है। महात्मा गॉधी राष्ट्रीय रोजगार गारन्टी योजना के विज्ञापन में जो मजदूर हॅसतें मुस्कराते दिखाई देते हैं सच मानिये ऐसी हॅसी किसी मजदूर के चेहरे पर दिखाई देना बडा मुश्किल है क्योंकि मजदूरों को उनकी मजदूरी का भुगतान समय पर नहीं हो पा रहा है। इस योजना के तहत मिली राशि को खर्च करने के लिए फाईलों में जो फर्जीवाडा किया गया ,वह यह बताता है कि सरकारी कर्मचारियों से लेकर वर्षो पहले मर चुके लोगों तक के नाम जाब कार्ड में लिखकर उनके नाम की रकम हडप कर ली गई । जाब कार्ड के जरिये मरे लोगों से मजदूरी करवाकर उसका भुगतान भी कर दिया गया।

                प्रसगंवश उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों मधयप्रदेश के बडवानी जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारन्टी योजना में हुए भ्रष्टाचार की चर्चा बड़वानी से लेकर भोपाल ,दिल्ली तक खूब हुई। बडवानी जिले के पूर्व मंत्री और युवा विधायक बाला बच्चन ने इस योजना में हुए भ्रष्टाचार को लेकर राज्य विाानसभा में तीखे सवाल किये । उनका आरोप है कि भाजपा सरकार योजना से जुडे भ्रष्ट अफसरों को बचाने के लिए विधानसभा में प्रश्नों के झूठे उत्तर दे रही है। सदन में सच्चे सवालों के झूठे जवाब दिये जा रहे हैं। जब बाला बच्चन दिल्ली , भोपाल में इस योजना में हुए भ्रष्टाचार की सप्रमाण शिकायते ं कर रहे थे उन्ही दिनों सामाजिक कार्यकर्ता माधुरी बहन ने बडी संख्या में आदिवासियों, मजदूरों को लेकर बडवानी में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। माधुरी बहन के मुताबिक इस योजना के अन्तर्गत बडवानी जिले में 350 करोड रूपये से अधिक  का भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने इस योजना के तहत काम करने वाले सभी मजदूरों की मजदूरी का तत्काल भुगतान करने और भ्रष्टाचार के दोषी अफसरों के विरूद कार्यवाही करने की मांग की। इसका परिणाम यह हुआ कि जिला प्रशासन माधुरी बहन और उनके सहयोगी मजदूर,आदिवासियों को नक्सली गतिवििधयों से जोड रहा है। बडवानी जिले के कलेक्टर ने विरोध प्रदर्शन करनेवालों के सम्बन नक्सलियों से होने की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी है। कलेक्टर माधुरी बहन के विरूद जिलाबदर की कार्यवाही भी कर चुके हैं। कलेक्टर द्वारा नक्सली गतिवििधयों के सम्बन में भेजी गई रिपोर्ट को बडवानी जिले के पुलिस आीक्षक सही नहीं मानते हैं। इन्दौर संभाग की पुलिस महानिरीक्षक भी साफ तौर पर यह कह चुकी हैं कि बडवानी जिले में नक्सली गतिवििधयों के संकेत नहीं है। पुलिस और खुफिया रिपोर्ट में नक्सलवाद से जुडी गतिवििध न होने के बाद भी अपने हक अधिकार के लिए लडने वालों,भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को नक्सली गतिवििधयों से जोडने के सरकारी प्रयास लगातार हो रहे हैं। इस बारे में बडवानी जिले के विधायक बाला बच्चन कहते है कि केन्द्र सरकार की राशि से चलाई जा रही विभिन्न योजनाएं आदिवासी इलाकों में पदस्थ अफसरों,कर्मचारियों के लिए भ्रष्टाचार का स्त्रोत बन गई हैं। उन्होंने कहा कि बडवानी जिले में नक्सली गतिवििधयों की झूठी रिपोर्ट कलेक्टर ने मुख्यमंत्री के इशारे पर भेजकर आदिवासी क्षेत्र को,आदिवासी समुदाय को बदनाम करने का प्रयास किया है। श्री बच्चन ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं में हो रहे भ्रष्टाचार के विरोध में वे 450 किलोमीटर लम्बी यात्रा निकाल चुके है।  यह यात्रा 15 दिनों तक चली और खेतिया श्शहर से श्शुरू होकर भोपाल में खत्म हुई थी। इसके बाद भी भ्रष्ट अफसरों पर प्रभावी कार्यवाही नहीं हो पाई। उलटे भ्रष्टाचार की लडाई लडने वालों को नक्सली बताने की कोशिश की जा रही है। भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने वालों को दबाने की यह सरकारी कोशिश सफल नहीं होने दी जायेगी।

                    यहॉ यह बताना भी जरूरी होगा कि हाल ही में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के अन्तर्गत सामाजिक अंकेक्षण (सोशल आडिट) पर जनसुनवाई का एक कार्यक्रम भोपाल में आयोजित किया गया था। इसमें सिवनी,ऱार, पन्ना सहित मधयप्रदेश के 10 जिलों के 40 गॉवों के मजदूरों के 28 से अधिक  मामलों की सुनवाई की गई। जनसुनवाई में मजदूरों ने इस योजना को लेकर जो समस्याएं सामने रखी उनसे यह तथ्य प्रमुखता से उभरकर सामने आया कि अधिकारी ,कर्मचारियों ने इ स महत्वाकंाक्षी योजना को अपनी कमाई का जरिया बना लिया है। मजदूरों को उनकी कडी मेहनत का भुगतान भी समय पर नहीं हो सका है।

              इस जनसुनवाई में बताया गया कि सिवनी जिले के लखनादौन विकासखण्ड के ग्राम आमई में जो लोग क्रमश: 8,6,2,5 वर्ष पहले मर चुके हैं, उनके नाम मजदूरों की सूची में शामिल कर भुगतान ले लिया गया। पन्ना जिले कगढी परिया पंचायत द्वारा इस योजना के तहत बनाये गये जाब कार्ड क्रमांक 001151 में सुरेश त्रिपाठी को मजदूर बताकर मजदूरी का भुगतान कर दिया गया। श्शासकीय आर पी उत्कृष्ट विघालय पन्ना में प्रायापक सुरेश जाब कार्ड में अपना नाम और मजदूरी किये जाने का उल्लेख देख कर हैरान हैं। इतना ही नहीं उनकी पत्नी अर्चना को भी मजदूर बताकर 100 दिन काम करने की मजदूरी का भुगतान कर दिया गया।

             जनसुनवाई के माधयम से भ्रष्टाचार के नये नये किस्से सुनने को मिले। सरकारी रिकार्ड में दलितों की जमीन पर कपिलधारा उप योजना में जो कुएॅ खोदना बताया गया, वे हकीगत में सवर्णो की जमीन पर बनाये गयें एक नदनंवन के निर्माण का भुगतान दो दो बार ले लिया गया। जनसुनवाई में जूरी के सदस्यों के रूप में मधयप्रदेश सामाजिक संपरीक्षा समिति के संचालय अभय पाण्डेय, राज्यसभा सदस्य अनिल दवे,राष्टीय सलाहकार परिषद के सदस्य आशीष मण्डल,भोजन का अधिकार अभियान के सलाहकार आयुक्त सचिन जैन, वरिष्ठ पत्रकार राकेश दीवान, सामाजिक कार्यकर्ता श्याम बोहरे,हंगर प्रोजेक्ट की शिबानी शर्मा,मधयप्रदेश मानव अधिकार आयोग के उप सचिव कुलदीप जैन ने सभी प्रकरणों पर विमर्श के उपरान्त समाधान के उपाय बताये। इस मौके पर मधयप्रदेश सामाजिक संपरीक्षा समिति के संचालक अभय पाण्डेय ने कहा कि महात्मा गॉधी राष्टीय रोजगार गारन्टी योजना के कानून अनुसार वर्ष में दो बार सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया मधयप्रदेश में भी प्रभावी हो गई हैं। अब सामाजिक अंकेक्षण के माधयम से निकलने वाले सभी प्रकरणों पर अवश्य कार्यवाही की जायेगी।                 
? अमिताभ पाण्डेय