संस्करण: 03 सितम्बर-2012

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जनता की

अग्निपरीक्षा

           ब स्वार्थ पूरे नहीं होते या उनके पूर्ण होने में कोई बाधा आती है तो आदमी कितना बौखला जाता है, पिछले कुछ सालों में हमें इसके भरपूर उदाहरण देखने को मिले। यद्यपि जन साधारण के जीवन में ऐसे क्षण और इस तरह के भावों का प्रादुर्भाव अस्वाभाविक नहीं है,लेकिन सार्वजनिक जीवन जीने वाले और जनता की सेवा का दावा करने वाले विशिष्ट लोग जब इस प्रवृत्ति का शिकार होते हैं तो थोड़ा अटपटा लगता है।

? विवेकानंद


टीम अन्ना की अतार्किक मांगें और

आंदोलन की विफलता

        न्ना का आंदोलन अब समाप्त हो चुका है और टीम अन्ना अब भंग हो गई है। टीम अन्ना के लगातार अनशन करने और इस बार सरकार द्वारा उसके किसी भी सदस्य से बात नही करने  की रणनीति के कारण आंदोलन के नाम पर येन-केन प्रकारेण एकत्रित किये गये चन्द लोगों का भी टीम अन्ना से भरोसा उठ गया और उन्होने जन्तर-मन्तर से अपने घर जाने में ही अपना हित पाया। अन्ना की टोपी से प्रभावित लोगों को भी निराशा का सामना करना पड़ा जब अन्ना ने भ्रष्टाचार के विरूध्द लड़ने के लिये देश को एक राजनीतिक विकल्प देने और नया राजनीतिक दल गठित करने की घोषणा की।   

? हेमराज कल्पोनी

विधायक राजगढ़, म.प्र.


उत्तर प्रदेश का भविष्य और देश

   त्तर प्रदेश देश का सबसे महत्वपूर्ण प्रदेश है जिसको लम्बे समय तक देश को नेतृत्व देने का अवसर मिला है। इस प्रदेश में पिछली विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला था और इस बार समाजवादी पार्टी को बहुमत से सरकार बनाने का अवसर मिला है। पर यह परिवर्तन प्रदेश को किसी सही दिशा की ओर ले जाने वाला परिवर्तन नहीं बन पा रहा है। मायावती की सरकार तथाकथित 'सोशल इंजीनियरिंग'के कारण बनी थी जिसका सही मतलब यह था कि बहुजन समाज पार्टी के दलित वोट और सतीश चन्द्र मिश्रा के नेतृत्व में ब्राम्हणों के वोट एकजुट हो गये जिसमें कुछ मुस्लिम मत मिल जाने से पूर्ण बहुमत प्राप्त सरकार का गठन हो सका था।

? वीरेन्द्र जैन


आरोपों' का मकसद है-

सिर्फ हंगामा खड़ा करना'

          जो राजनैतिक दल और राजनीति का व्यक्ति अपने विपरीत राजनैतिक दलों और व्यक्तियों पर आरोपों की झड़ी लगा दे,समझ लो वह व्यक्ति और उसका दल राजनीति क्षेत्र में महान योध्दा है। वर्तमान राजनैतिक माहौल में आरोप प्रत्यारोप की कला में माहिर व्यक्ति ही राजनीति के क्षेत्र में टिक सकता है। जो लोग आरोप-प्रत्यारोपों का खेल नहीं जानते,वे सच मायने में अनफिट-राजनैतिक सिध्द हो जाते हैं। ऐसे व्यक्ति भी जो राजनीति की जमीन में अभी ऊंगे ही नहीं हैं आरोपों की बयानबाजियों के रास्ते से राजनीति के शिखर पर चढ़ने के लिए अपने दल के आरोपों की लाइन के अनुरूप आगे बढ़ते हुए देखे जाते हैं।

? राजेन्द्र जोशी


अमेरिका में भी है गैरकानूनी

अप्रवासियों की समस्या!

         भारत के समान अमरीका भी गैर कानूनी अप्रवासियों की समस्या का सामना कर रहा है परंतु अमरीका ने इस समस्या का एक अनोखा हल निकाल लिया है। अमरीका राष्ट्रपति ओबामा ने इन अप्रवासियों को राहत दिलाने के लिए एक कानून पारित करवाने की पहल की है। यह कानून जिसका नाम ड्रीम एक्ट रखा गया अमरीकी संसद (कांग्रेस) से पारित नहीं हो पाया। इसके बाद ओबामा ने राष्ट्रपति की हैसियत से अपने अधिकारों का उपयोग किया और अप्रवासियों को राहत देने की एक योजना बनाई। इस योजना के अन्तर्गत उन सभी अप्रवासियों को प्रर्थानपत्र देना था जिन्हें अमरीका छोड़ने का आदेश दिया जा चुका था।

 ?  एल.एस.हरदेनिया


मज़ाक बना सूचना का अधिकार

                  केन्द्र सरकार ने देश के नागरिकों, खासकर सामाजिक कार्यकर्ताओं को एक बड़ी सौगात दी है, वह है सूचना का अधिकार अधिनियम। यह अधिनियम वर्ष 2005में कानून बना और तब से लेकर अब तक इस कानून के तहत कई बड़े भ्रष्टाचार के मामले प्रकाश में आए और दिग्गजों को जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा। मध्यप्रदेश में भी इस कानून के तहत आला अफसरान और नेताओं की काली करतूते सामने आई। कुछ मामलों में तो राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई की, मगर अधिकांश मामले लोकायुक्त या आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरों को जांच के लिए सौंप दिए।

? महेश बाग़ी


लाहौर में भगतसिंह जयंति

      पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खराब होते हालात की ख़बरों के बीच वहां से आयी एक अलग ढंग की ख़बर की तरफ बहुत कम लोगों का ध्यान गया। दरअसल वहां अगस्त माह के तीसरे सप्ताह में विभिन्न राजनीतिक-सामाजिक संगठनों, सांस्कृतिक समूहों एव इन्साफपसन्द लोगों की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इस उपमहाद्वीप के उपनिवेशवाद विरोधी संघर्ष के महान नायक भगतसिंह के जनम दिन एवं शहादत दिवस को जोरदार ढंग से मनाया जाए और उसके लिए भगतसिंह यादगार कमेटी का भी निर्माण किया गया।

? सुभाष गाताड़े


मध्यप्रदेश की पुलिस सिंघम है

या दबंग ?

      हाल ही में इंदौर में एक युवक को कुछ गुंडों ने दिन दहाड़े, सरे राह चाकू से गोद डाला। युवक का अपराध यह था कि उसने उन गुंडों को अपनी बहन से छेड़खानी करने से मना किया था। मीडिया के अनुसार घटना के बाद लगभग 45मिनट का समय जिसमें उसकी जान बचाई जा सकती थी,पुलिस की कागजी कार्यवाही में बीत गया, परिणामस्वरूप,उस युवक की जीवन लीला समाप्त हो गई। कई निजी टीवी चौनलों ने इस समाचार का वीडियो दिखा दिखा कर मामले को गरमाने का भरसक प्रयास किया किंतु पुलिस के उच्चाधिकारियों जिनमें एक महिला भी शामिल हैं,ने अपने अधीनस्थों का जम कर बचाव किया।

? मोकर्रम खान


मंत्री से नहीं सुधरे सरकारी स्कूल

        रकारी स्कूलों की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए स्वदेशी और विदेशी धन से अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है। इसके बावजूद निजी स्कूलों की लगातार बढ़ती संख्या से यह जाहिर हो गया है कि तमाम आकर्षक योजनाओं के बाद भी सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था से लोग संतुष्ट नहीं है। भारी धनराशि खर्च करने और निजी स्कूलों की तुलना में शासकीय स्कूलों में शिक्षकों को अधिक वेतन भले दिये जाने पर भी यदि सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों से अच्छा नहीं बनाया जा सका तो इसके लिए निश्चित ही सरकारी तंत्र की व्यवस्था ही जिम्मेदार है।

? अमिताभ पाण्डेय


समाचारों के प्रस्तुतिकरण

पर प्रश्नचिह्न

       माचारों के संकलन और उनके प्रसारण में कितनी आजादी होनी चाहिए, यह विषय दुनिया भर में शुरु से ही अनिर्णीत रहा है। समाचार माध्यमों के जन्म के बाद से ऐसे अनेक अवसर दुनिया भर में आये हैं जब यह महसूस किया गया कि इन माध्यमों ने अपनी हदें लाँघी हैं और उसी के साथ-साथ ऐसी आवाजें भी उठीं कि इन्हें नियंत्रित किया जाना चाहिए। विश्व में ऐसे अनेक देश हैं जहाँ लोकतांत्रिक व्यवस्था होने के बावजूद प्रेस को नियंत्रित किया गया है। अपने देश में भी आपातकाल के अलावा कई बार ऐसे प्रयास हो चुके हैं लेकिन अंतत: यही उचित माना गया कि यह अति महत्त्वपूर्ण माध्यम स्व-नियंत्रित रहे और अपनी हदें भी खुद ही निर्धारित करे।

    

? सुनील अमर


महंगाई से गरीबी की बात कोरी गप्प?

        कुछ योजनाकारों की चिंता है कि तेज आर्थिक विकास दर के बाद भी देश में गरीबों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक गरीबी के दो विरोधाभाषी कारण होते हैं पहला मुद्रा का अभाव और दूसरा प्रसार अर्थात तरलता। पहला कारण बढ़ती गरीबी और कम आर्थिक विकास का परिचायक होता है। जबकि दूसरा प्रकार बढ़ती विकास दर और मॅहगाई के कारण लोगों की क्रय क्षमता में कमी के कारण नजर आता है। वास्तव में गरीबी खतरनाक होती है लेकिन दूसरे प्रकार की गरीबी की स्थिति में जल्दी काबू पाया जा सकता है और आम आदमी का जीवनस्तर सम्मानजनक स्थिति में लाये जाने संभावनाएॅ अच्छी होती है।

? डॉ. सुनील शर्मा


डिग्रीधारी निरक्षरों के बढ़ते खतरे

       किसी देश की युवा पीढ़ी के लिए यह कितनी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि वह उच्च शिक्षित हो और आत्मनिर्भरता के लिए चपरासी की नौकरी के लिये प्रतिस्पर्धा परीक्षा में भाग ले। व्यावसायिक परीक्षा मंडल मध्य प्रदेश भोपाल ने हाल ही में भृत्य पदो की भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित की है, इसमें एम.एस.सी, एम.कॉम, एम.ए., एम.बी.ए.और इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त आवेदको ने भी परीक्षा दी। जबकि इस नौकरी के लिए प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा की अनिर्वायता थी। जाहिर है हमारी शिक्षा पध्दति में खोट है और वह महज डिग्रीधारी निरक्षरों की संख्या बढ़ाने का काम कर रही है।

    

? प्रमोद भार्गव


सम्मान क्यों खो रहे शिक्षक ?

        मानव जीवन में माता-पिता से भी बढ़कर गुरू का स्थान होता है। गुरू ही शिष्य को अज्ञान के अंधाकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश में ले जाता है और उसका उचित मार्गदर्शन करता है। इसीलिए उसे देवतुल्य माना गया और कहा गया-'आचार्य देवो भव:।' लेकिन वर्तमान में देवतुल्य आचार्य कहां हैं और वह शिक्षा-पध्दति भी कहां है, जिसमें शिक्षकों का सम्मान समाज में सर्वोपरि था ? आज तो अनेक श्रेणियों में बंटे हुए विभिन्न प्रकार के शिक्षक हैं, जिनका कार्य सरकार द्वारा निर्धारित ढंग से विद्यार्थियों को शिक्षा देना है।

? डॉ. गीता गुप्त


  03 सितम्बर2012

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