संस्करण: 3 जून -2013

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बस्तर के शहीदों को  श्रध्दांजलि

       मैं नन्दकुमार पटेल जिन्हे हम सब प्यार से नन्दू कहते थे, से तब मिला था जब वे 1982 में अपने गाँव नन्देली के सरपंच थे। नन्देली गाँव रायगढ़ जिले के खरसिया विधानसभा क्षेत्र में आता है (जो अब छत्तीसगढ़ में है)। उस समय मैं मध्यप्रदेश में श्री अर्जुन सिंह जी के मंत्रीमण्डल में कृषि मंत्री था।  

? दिग्विजय सिंह


गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के शहीदों को सलाम

       त्तीसगढ़ नक्सली हमले में महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल उनके बेटे दिनेश पटेल और विधायक उदय मुदलियार के साथ अन्य साथियों की शहदात, कोई राजनीतिक षडयंत्र है या फिर वाकई यह नक्सली हमला है, यह तो जांच में साफ हो ही जाएगा, लेकिन राय सरकार ने जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति को सुरक्षा क्यों उपलब्ध नहीं कराई यह सवाल कभी डॉ रमन सिंह का पीछा नहीं छोड़ेगा? भले ही वह यह स्वीकार कर लें कि सुरक्षा में चूक हुई है। क्योंकि जो हुआ है उसे बदला नहीं जा सकता। कई परिवार अनाथ हो गए, लोगों में दहशत भरा यह संदेश गया कि जब इतने विशिष्ट व्यक्ति भी सुरक्षित नहीं हैं तो हमारी क्या बिसात, यह अक्षम्य चूक है।

? विवेकानंद


नक्सली समस्या के हल के लिये

सर्वसम्मत राष्ट्रीय रणनीति की आवश्यकता है

      स्तर में अभी हाल में घटी नृशंस हत्याओं ने पूरे देश को झकझोर दिया है। ऐसा होना स्वाभाविक भी था। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बार-बार कहते हैं कि माओवादियों/नक्सलियों की हिंसक गतिविधियां देश की आंतरिक सुरक्षा के लिये सबसे बड़ा खतरा है। वे यह बात कई दिनों से कह रहे हैं परन्तु उस खतरे का मुकाबला करने के लिये जितना कुछ करना जरूरी था, नहीं किया गया।

? एल.एस.हरदेनिया


मोदी इतने

दलितविरोधी क्यों हैं ?

      त्ता की राजनीति से दूर रहे एवं अम्बेडकरी आन्दोलन के साथ ताउम्र निष्ठावान रहे सोमनाथ पांडया का गुजर जाना कहीं ख़बर नहीं बन सका। सूबा गुजरात जहां दलितों का एक हिस्सा स्वयं हिन्दुत्व की नफरत की राजनीति से जुड़ कर जनाब मोदी की हुकूमत को नयी वैधता प्रदान कर रहा है,इस पृष्ठभूमि में हिन्दुत्व की राजनीति को ब्राहमणवाद की प्रतिक्रान्ति माननेवाले, सोमनाथभाई सरकार की आंखों में हमेशा किरकिरी बने रहे।

? सुभाष गाताड़े


मध्यप्रदेश में किसकी सरकार

         हने को मध्यप्रदेश में लोकतांत्रिक पध्दति से निर्वाचित सरकार है, किंतु बीते सालों में ऐसे एक नहीं, बल्कि कई मामले प्रकाश में आए हैं, जिनसे शासन-प्रशासन अस्तित्व पर ही सवालिया निशान लग गया है। चंद बडे उद्योग घरानों द्वारा की जा रही अनियमितताओं पर शासन-प्रशासन द्वारा कोई ध्यान न देने से लगता है कि यह सब सरकार की शह पर ही हो रहा है। प्रदेश में माफिया-राज स्थापित होने के पीछे भी इसी शह की भूमिका बताई जा रही है। यही वजह है कि माफिया खुलेआम मनमानी कर रहे हैं और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। 

 ?   महेश बाग़ी


राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान में घोटाला

                  केन्द्र सरकार द्वारा शिक्षा के प्रचार प्रसार के लिए चलाई जा रही अनेक योजनाएं मधयप्रदेश में घपले घोटाले से घिर गई हैं। केन्द्रीय बजट से संचालित इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों की है,वे भी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से अनियमितताओं को ही बढावा दे रहे हैं। केन्द्रीय बजट की योजनाओं में गडबडी करने वालों को त्वरित कार्यवाही कर सख्त सजा देने के बजाय जॉच के नाम पर बचाया जाने की परम्परा सी चल रही है। ये गडबडी शिक्षा के मन्दिरों में भी फैल गई हैं जहां स्कूल भवन,अतिरिक्त कक्ष के निर्माण में भ्रष्टाचार हो रहा है।   

? अमिताभ पाण्डेय


कहां है सरकार ?

ढूंढ़ते रह जाओगे।

      म आदमी इन दिनों कुछ ढूंढ़ने में व्यस्त है। सुबह हो या शाम, दिन हो या रात वह यहीं ढूंढ़ता फिर रहा है कि सरकार कहाँ हैं? एक प्रश्न उस आदमी को बहुत ज्यादा सताने लगा हैं कि आखिर सरकार जो कमी थी, जगह जगह दिखती थी, गांवखेड़ों से लेकर बड़े बड़े नगरों तक दिखती थी आखिर वह कहां चली गई। सुना है वह कहीं सिमट कर रह गई है अपनों के बीच कहीं दुबक कर छुप गई है। पहले तो उसका गांव-गांव में गली गली में आदर था, सम्मान था लोग उसका लिहाज करते थे यहां तक कि डरते भी थे।

? राजेन्द्र जोशी


सीरिया का गृहयुध्द

लेबनान में भी फैल सकता है

      मरीका सहित अन्य यूरोपीय देशों की सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद को सत्ता से बेदखल करने की कोशिश एक नए और खतरनाक दौर में पंहुच गयी है । 25 मई को हेजबोल्ला संगठन के मुखिया हसन नसरुल्ला ने ऐलान किया कि बशर अल-असद को राष्ट्रपति पद से हटाने की कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा । टेलिविजन पर दिया गया हसन नसरुल्ला का यह भाषण पूरे लेबनान में देखा गया जिसमें उन्होंने कहा कि ,'' यह हमारी लड़ाई है और हम इसमें फतेह्याब  होगें ।उन्होंने कहा कि अब युध्द एक नए दौर में पंहुच गया है ।''

? शेष नारायण सिंह


धीमा जहर बनते जा रहे हैं खाद्यान्न, फल व सब्जियाँ

        बाजार में मौजूद कोई भी कृषि उत्पाद आज ऐसा नहीं है जो हानिकारक कीटनाशकों से युक्त न हो। अनाज से लेकर फल और सब्जियाँ यहाँ तक कि फूल भी बिना जहरीले रसायनों के प्रयोग के नहीं हो रहे हैं। फसल का बचाव, सस्ता उपाय तथा अधिक उत्पादन, ये ऐसे कारक हैं जिनके कारण किसान और कृषि उत्पादों के दलाल हानिकारक रसायनों का अंधाधुंध प्रयोग कर रहे हैं। विभिन्न सरकारी एजेन्सियाँ बाजार में मौजूद तो हैं लेकिन वे न सिर्फ इस काम के लिए अक्षम हैं बल्कि उनमें आपसी तालमेल भी नहीं है। इसका नतीजा यह है कि आज आम नागरिक बाजार के रहमोकरम पर है। वह न सिर्फ मॅहगा खरीद रहा है बल्कि जहरीले रसायनों के प्रयोग के कारण तमाम बीमारियों से ग्रस्त होकर अस्पतालों के चक्कर भी लगा रहा है।

? सुनील अमर


खतरनाक है बोतलबंद पानी पर बढ़ती निर्भरता

       ब तक बोतलबंद पानी को पेयजल स्त्रोतों से सीधो पीने की तुलना में सेहत के लिए ज्यादा सुरक्षात्मक विकल्प माना जाता रहा था,किंतु नए अधययनों से पता चला है कि राजधानी दिल्ली में विभिन्न ब्राण्डों का जो बोतलबंद पानी बेचा जा रहा है,वह शरीर के लिए हानिकारक है। इसकी गुणवत्ता इसे शुध्द करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे रसायनों से हो रही है। भारतीय अध्ययनों के अलावा अंतरराष्टीय संस्थाओं ने इस सिलसिले में जो अध्ययन किए हैं,उनसे भी साफ हुआ है कि नल के मुकाबले बोतलबंद पानी ज्यादा प्रदूषित और नुकसानदेह है। इस पानी में खतरनाक बैक्टीरिया इसलिए पनपे हैं,क्योंकि नदी और भूजल ही दूषित हो गये है।  

 

? प्रमोद भार्गव


व्यापक है बहुस्तरीय विपणन कम्पनियों की ठगी का मामला ?

        हाल ही में केरल पुलिस द्वारा बहुस्तरीय मार्केटिंग कम्पनी एमवे इंडिया के अधिकारियों की गिरफ्तारी चर्चा में है।एमवे के अधिकारियों की गिरतारी केरल निवासी विशालाक्षी नामक महिला ने कंपनी द्वारा की गई धोखाधाड़ी के मामले में दायर मुकदमें के संदर्भ में की गई थी। एमवे इंडिया भारत में सीधो ग्राहकों को सामान बेचने वाली कम्पनी है। यह कम्पनी बहुस्तरीय मार्केटिंग के आधार पर काम करती है। इस कम्पनी के देश भर में लगभग 15 लाख प्रत्यक्ष वितरक है। इनमें में आधे ये अधिक ग्राहक हैं जो रियायती दाम पर सामान खरीदने की खातिर खुद ही वितरक बन गए। कम्पनी का कहना है कि डायरेक्ट सेलिंग के तहत वितरकों को कोई शुल्क नहीं देना पड़ता है और ग्राहकों तक सामान पहुॅचाने पर उन्हें कमीशन अलग से मिल जाता है।

? डॉ. सुनील शर्मा


दिखावे से दूर रहें

       सादा जीवन उच्च विचार, इस तरह के सूक्ति वाक्य अब केवल शालाओं एवं मंदिरों की दीवारों पर ही दिखाई देते हैं। बदलते जीवन मूल्यों के साथ सब कुछ तेजी से बदल रहा है। देखते ही देखते पानी अब बिकने लगा। पहले पानी पिलाना धार्म का काम होता था, अब पानी बेचना धांधा बन गया है। पहले गुरुकुल आश्रमों में विद्या दी जाती थी। गुरु-शिष्यों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध थे। अब शिक्षा विशुध्द रूप से व्यापार का एक हिस्सा हो गई है। धार्मिक कार्यक्रमों में भी आजकल व्यापार घुस आया है। इसी तरह से अब शादी समारोह केवल तीन घंटे का शो बनकर रह गया है। जिन्हें हम गरीब मानते-समझते हैं, उस परिवार में भी शादी आजकल जिस दिखावे के साथ होती है, उससे हर कोई आश्चर्य मे पड़ जाता है। धन उपार्जन के इतने अधिक संसाधन हो गए हैं कि पूछो ही मत।

 

? डॉ. महेश परिमल


  3 जून -2013

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