संस्करण: 03 दिसम्बर -2012

गर्दिश में होगा गंगनम भी

? डॉ. महेश परिमल

               स कोरियन वीडियो सांग में आखिर ऐसा क्या है कि जिसे 80 करोड़ लोग निहार चुके हैं। यदि हम इसे अर्थहीन उन्माद का नया पता कहें,तो गलत न होगा। इस सांग में संगीत का माधुर्य नहीं है,शब्दार्थ की संवेदना नहीं है और न ही नृत्य का करंट है, जो कुछ भी आप करना नहीं चाहते, वैसा करते हैं, तो वह है गंगनम स्टाइल। यू टयूब पर प्रशंसकों की संख्या के रिकार्ड स्थापित करने वाले 'गंगनम शैली'वाले नृत्य के प्रशंसकों की संख्या लगातार बढ़ रही है.और इस सूची में अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा, लंदन के मेयर, चीन के शीर्ष असंतुष्ट कलाकार एवं मडोना भी शामिल हो गए हैं। दक्षिण कोरिया के रैप गायक साई की ओर से घुड़सवारी की तरह की नृत्य की यह शैली महज चार महीने पहले यू-टयूब पर डाली गई थी और अब तक 80 करोड़ लोग इसके प्रशंसक बन चुके हैं. विश्व के कई बड़े नेताओं ने सार्वजनिक मंचों पर इस नृत्य का जिक्र किया है, जिनमें संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून और बराक ओबामा,ब्रिटनी स्पीयर्स, टॉम क्रूज, क्वेंटिन टेरेंटिनो और बराक ओबामा को टक्कर देने वाले रोमनी भी शामिल हैं।

                एकदम साधारण डांस, बेतरतीब कोरियन गीत की भाषा, अर्थ के नाम पर शून्य, इसके बाद भी आज गंगनम की धूम मची है। ठीक उसी तरह जैसे पिछले साल कोलावरी की मची थी। लेकिन गंगनम ने वाय दिस कोलावरी को भी पार कर दिया है। गंगनम आज पूरे विश्व में प्रख्यात हो गया है। बेहूदा डांस को एक नए अंदाज के साथ प्रस्तुत करने का नाम ही है गंगनम।  इस गीत के सर्जक का नाम है पार्क जे संग, संगीतकार के रूप में उन्होंने अपना तखल्लुस रखा है साय। 34 वर्षीय साय दक्षिण कोरिया के सुपरस्टॉर माने जाते हैं। हिप-हाप स्टाइल के डांस में कोरियन नृत्य शैली के स्टेप्स को जानबूझकर बेतरतीब तरीके से डांस कर उसे कोरियन नाम दिया हिप। यह कोरिया ही नहीं,पर चीन में भी काफी लोकप्रिय है। साय के इस सांग के साथ सबसे बड़ी बात यह है कि कोरिया के जानी दुश्मन उत्तार कोरिया में भी उसके पोस्टर घोषित रूप से लगाए जा सकते हैं। उत्तर कोरिया के युवा शासक किम जोंगे उल भी गंगनम पर झूम चुके हैं।

                परंपरा को तोड़-मरोड़कर साधारण संगीतप्रेमी को अजीब सा लगे, ऐसा हमेशा करते रहने वाले साय का पहला एलबम 2001में आया था। जिसका शीर्षक था 'साय फ्रॉम द सायको वर्ल्ड'। साय की विशेषता यह है कि वे टार्गेट आडियंस को सामने रखकर कुछ नया करने की सोचते हैं। उसके बाद उसकी फिल्म उतारते हैं। यही सायको हैं, जिन्होंने कोरिया के युवाओं के फास्ट ड्राइविंग के क्रेज, कॉलेज केम्पस के बाहर मारामारी करने को बहादुरी समझने के उन्माद का मजाक उड़ाया था। गीत के शब्दों में उन्होंने न जाने कितने ही कोरियन शब्दों का समावेश किया है। डांस में जब चाहे ठुमका मारा। इस तरह से तैयार हुआ उसका एलबम। साय ने जब पहली बार इसे प्रोडयूसर के सामने रखा, तो प्रोडयूसर कहने लगा कि यार ये एलबम जिसे बेचना है, तुम उन्हीं की खाल खींच रहे हो। फिर भी साय ने जिद नहीं छोड़ी। इसके बाद लेन-देन पर समझौता हुआ और एलबम बाहर आया। आज हालत यह है कि कोरिया की बात छोड़ो, अरबों डॉलर बजट की फिल्में बनाने वाले हॉलीवुड के आला दर्जे के स्टूडियो साय के इस चंद मिनट के वीडियो प्रोडयूस करने के लिए लाइन पर लगे हैं।

                गंगनम का नामकरण

                फूंक मारकर काटने की साय की यह स्टाइल उसके लेटेस्ट और ऑलटाइम हिट गंगनम स्टाइल में भी पूरी शिद्दत के साथ खिल उठी है। दक्षिण कोरिया के शहर सियोल के नदी पार धनाढय क्षेत्र है।  जैसे न्यूयार्क का मेनहट्टन, लॉस एंजिल्स में बेवर्ली हिल्स ऐसा ही समृध्द क्षेत्र दक्षिण कोरिया के फैशन एंड स्टाइल वर्ल्ड का हार्ट थ्रोज कहलाता है। गंगमन स्टाइल साय ने इस क्षेत्र के दंभ, फै शनपरस्ती, अमेरिकन-यूरोपियन लाइफ स्टाइल का अंधानुकरण आदि मामलों का भद्दा मजाक उड़ाया है। अपनी इस .ति को साय ने यदि रचनात्मक बनाया होता,तो भी वामपंथी विचारधारा को यह भला लगता और सर्जनात्मकता के आग्रहियों को उसके प्रतीक और कल्पना को खोजने का मसाला मिल जाता। परंतु साय ने इसमें कोई कल्पनाशीलता या कटाक्ष नहीं किया है,बेकार की ठोकमठोक ही की है। सफलता प्रापत करने का शार्टकट यह है कि सफलता को पीछे ठेलकर उसका अनुकरण करे। जिस तरह से कोलावेरी डी आगे बढ़ा,लोकप्रिय हुआ, उससे धनुष को कई बड़े ऑफर मिलने लगे। फिर सब कुछ टांय टाय फिस्स। यही हाल गंगनम का भी होगा। आज भले यह सर चढ़कर बोल रहा है, पर कल इसे भूलने  वाले इससे भी अधिक लोग होंगे। इसकी नकल बहुत ही आसान है। पीली पेंट के ऊपर बदामी कलर का शर्ट पहनो। नीचे आसमानी रंग की बनियान जैसी लोफर स्टाइल में में शर्ट के बटन खुले रखो। गीत के शब्दों को गोली मारो, डांस या स्टेप्स की ऐसी की तैसी कर दो, बस कुछ बेतरतीब करो, इससे सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है। गंगनम की विचारशून्यता पर बात करना उचित नहीं है। यह  अर्थहीन सांग है। यदि आज इस तरह के गीत लोकप्रिय हो रहे हैं, तो इसमें आज के युवाओं की पसंदगी को ध्यान से देखो। वे क्या पसंद कर रहे हैं। हर युग में इस तरह की पीढ़ी आती ही है। एक उबाल की तरह, जिसे युवा पीढ़ी अपना लेती है।

              भारतीय फिल्म संगीत में जिस तरह से ईना-मीना-डिका, याहू, कूक कूक कू जैसे गीत आए हैं। अश्लील और भद्दे गीतों पर गोविंदा-करिश्मा कपूर को नाचते देखा है। उनके गीतों पर लोगों को झूमते देखा भी है। अक्सर ऐसा होता है क वर्तमान पीढ़ी बीती पीढ़ी के के्रेज को वाहियात बताती आई है। परंतु उनका आज का के्रज क्या है, यह आने वाली पीढ़ी को अच्छा नहीं लगेगा। ये क्रम सनातन से चला आ रहा है। आगे भी चलता रहेगा। इसलिए गंगनम पर किसी तरह का गर्व न किया जाए। यह पानी का एक बुलबुला है, जो कुछ समय बाद अवश्य हो जाएगा। कई गीत हिट हुए, पर कितने याद हैं, आज की पीढ़ी को? कल कोलावरी था, आज गंगनम है, कल कोई ओर हो जाएगा। इसलिए गंगनम पर इतना न इतराया जाए, यह हमें यह सीख दे रहा है कि शाश्वत सत्य जो है, वही हमेशा रहेगा। हमारे देश में आराधयों की आरती,भांगड़ा, गरबा, बिहू, लावणी, नाचा आदि को आज तक किसी प्रकार का ग्रहण नहीं लगा है, वे आज भी अपने-अपने क्षेत्रों में लोकप्रिय हैं। बच्चा इन्हें अपने पेट से सीखकर आता है। इसे सिखाने की आवश्यकता नहीं होती। ठीक उसी तरह थोड़ी देर के लिए प्रभावित करने वाले सांग आते रहेंगे, इस पर चिंता की कोई बात नहीं, कोलावेरी की तरह ही गंगनम को भी लोग भूल जाएंगे। यह तय है।

? डॉ. महेश परिमल