संस्करण: 30जून-2008

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तेल के खेल में उलझी दुनिया

दुनिया के तमाम देश तेलों के अंतरराष्ट्रीय मूल्य में आई तेज़ी से जूझ रहे हैं। इस पर नियंत्रण पाने के उपाय ढूंढने निकले भारत के वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने देर से ही सही, नब्ज़ पर हाथ रखा है। तेल उत्पादक देशों में >महेश बाग़

      


मंहगाई मंदी और बेरोजगारी

मंहगाई, मंदी और बेरोजगारी का अंर्तसंबंधा बड़ा पुराना है। बाजार में आई मंहगाई अर्थव्यवस्था को मंदी की ओर ढकेल कर बेरोजगारों की संख्या में बढ़ोत्तरी करती है। उपभोक्ता वस्तुओं, निर्माण सामाग्री और वाहन आदि >डॉ. सुनील शर्मा


आतंकवाद का नया चेहरा
28मई को नेपाल की राजधानी काठमाण्डू में हुए दो बम विस्फोट, जनवरी माह में तमिलनाडु के तेनकासी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय पर हुए बम हमले, महाराष्ट्र के ठाणे तथा वाशी में पिछलेदिनों एक नाटक के प्रदर्शन के >सुभाष गाताड़े


  

संबंधों में प्रगाढ़ता से पूर्व चीन को समझें
सिक्किम के उत्तरी हिस्से पर चीन के दावा ठोकने से विवाद व अविश्वास भारत का फिर बढ़ा। विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी के हालिया अंजनी कुमार झा


महिला आरक्षण विधेयक यह पहला कदम है अंतिम नहीं
देश को चलाने वाले सदनों में महिलाओं को तैतीस प्रतिशत आरक्षण देने का बिल दस-बारह साल तक लटकाने के बाद अंतत: सदन की बैठक के अंतिम दिन सदन के पटल पर वैसे ही रख दिया गया जैसे कि बहुत साहस करने क >वीरेन्द्र जैन

       


राशन पर राजनीति हमदर्दी की नौटंकी में उपभोक्ताओं की फज़ीयतैं
 सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीबी की रेखा के नीचे जीवन गुजार रहे लोगों को खाद्यान्न वितरण करने की अपनी नैतिक जिम्मेदारी का राज्य सरकारें किस तरह लापरवाही से निर्वहन >राजेन्द्र जोशी


खस्ताहाल विश्वविद्यालयों की सर्जरी जरूर
मध्यप्रदेश में विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों की हालत खस्ता है। इस कटु तथ्य को उन लोगों ने स्वीकार किया जो विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों का संचालन करते हैं। इस स्वीकारोक्ति का अवसर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने प्रदान किया। विश्वविद्यालयों व कॉलेजों > एल .एस. हरदेनिया

              


आतंकवाद से कैसे निपटें
 आतंकवाद आज हमारे देश की राष्ट्रीय व्यथा बन गया है। इसके प्रभाव देश में है। जहां भी, ज़रा मौका मिलता है, जेहादी उन्माद वाले आतंकी संगठन अपने एजेंटों के माध्यम से मानव बमों से, रिमोट से, गम्भीर विस्फोट करके लाशों पर >डॉ. देवप्रकाश खन्ना


देश की रक्षा कौन करेगा ?
यह शायद भारत की आज़ादी के छ: दशक बाद पहला अवसर है जब सार्वजनिक रूप से जल, थल, नभ-तीनों सेनाओं में अधिकारियों की कमी का मामला प्रकाश में आया है। बहुत कम अन्तराल में बार-बार यह मामला सुर्खियों में है। >डॉ. गीता गुप्त

     


संचार क्रांति की देन-ई कामर्स और ई-बैंकिंग
वर्तमान युग में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास के फलस्वरूप हम घर बैठे ही अपने देश ही नहीं वरन् विश्व के किसी कोने तक संपर्क स्थापित कर सकते हैं संदेश भेज सकते हैं >डॉ. राजश्री रावत 'राज'


अब शुध्द वायु भी बिकने लगी ?
इस देश में सब कुछ बिकता है, बोलो खरीदोगे? आपने न जाने क्या-क्या खरीदा होगा, पर शायद शुध्द हवा कभी नहीं खरीदी होगी, पर अब आप हवा भी खरीदेंगे,यह तय है,क्योंकि इसे बेचने का धंधा >डॉ. महेश परिमल

    


30जून2008

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