संस्करण: 30 जून-2014

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व्यापमं घोटाला-

एक तार्किक अंत की प्रतीक्षा

     मैं मध्य प्रदेश में हुये व्यापम घोटाले का मुद्दा काफी समय से उठाता आ रहा हूँ किन्तु मध्य प्रदेश शासन के जनसंपर्क विभाग ने उसे दबाने के लिये भारी धानराशि खर्च की और लगभग एक सप्ताह पूर्व तक इस विषयक समाचार को सफलतापूर्वक दबाये रखा।

           

? दिग्विजय सिंह


दागी सांसदों के प्रकरणों में

समयबध्द फैसलों का दबाव

        ह विडम्बना है कि एक ओर न्याय पालिका को सभी सर्वोच्च सम्मान देने की बात करते हैं और दूसरी ओर उसी न्याय व्यवस्था को दोषपूर्ण भी मानते हैं। खेद है कि जिस विधायिका को न्याय व्यवस्था में निहित दोषों को दूर करने के लिए सुधारात्मक कानून बनाने या बदलने चाहिये उसके भी बहुत सारे सदस्य न्यायपालिका के दोषों से लाभान्वित होकर वांछित बदलाव के प्रति उदासीन रहते हैं।

?

वीरेन्द्र जैन


इतिहास का मोदीकाल

     'जापान ने अमेरिका पर नाभिकीय बम गिराए थे', 'महात्मा गांधी की हत्या 30 अक्तूबर 1948 में हुई', 'मुल्क के बंटवारे के बाद एक नया देश अस्तित्व में आया जिसे इस्लामिक इस्लामाबाद कहते है',  'दक्षिण के लोगों को मदरासी कहते है' 'पूर्वी भारत के अधिकांश लोग बम्बू एवं लकड़ी के बने घरों में रहते है'। किसी स्कूली बच्चे की नोटबुक में लिखे प्रतीत होने वाले उपरोक्त उध्दरण उन पाठयपुस्तकों से हैं जिन्हें कई सालों से गुजरात के स्कूलों में पढ़ाया जा रहा है।

 ? सुभाष गाताड़े


खतरनाक है रक्षा क्षेत्र में एफडीआई

      चुनाव प्रचार के दौरान देश की आवाम के बीच 'अच्छे' दिन लाने का वादा करने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने, सत्ता संभालते ही अर्थव्यवस्था को 'पटरी' पर लाने तथा रक्षा उपकरणों के निर्माण में तेजी के नाम पर, रक्षा क्षेत्र में सौ प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी पूंजी निवेश (एफडीआई) की मंजूरी जैसे ही दी, कर्मचारी संगठनों में हड़कंप मच गया। सरकार के इस फैसले के बाद, देश में रक्षा उपकरण बनाने वाली कई घरेलू सरकारी एवं निजी कंपनियों के सामने न केवल अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया, बल्कि उसके लाखों कर्मचारियों की रोजी रोटी पर भी गंभीर खतरा मंडराने लगा।

? रीना मिश्रा


मसीहा ने मार डाला

            केंद्र की सत्ता में जनता ने बदलाव क्यों किया? इसे लेकर अनेकों जवाब लोगों के पास हैं। कांग्रेस नेताओं ने भी इसे स्वीकार किया है कि महंगाई पराजय का एक बहुत बड़ा कारण रही। सरकार के दौरान हुई वित्तीय गड़बड़ियां भी इसके लिए जिम्मेदार रहीं। बीजेपी ने इन मुद्दों को चुनाव में जोर-शोर से उठाया और सच कहें तो भुनाया। कैग की रिपोर्टों में आए नुकसान को घोटाले का नाम देकर यूपीए सरकार को कठघरे में खड़ा किया। हालांकि इन तमाम गड़बड़ियों में अभी यह साबित होना शेष है कि सरकार को जो नुकसान हुआ है, उसके बदले में संबंधित मंत्री को कोई लाभ हुआ या नहीं। या फिर सिर्फ नीतियां ही गलत थीं।

 ?  विवेकानंद


मोदी ने कहा था देश को लूटूंगा नहीं, फिर भी लूट प्रारंभ

           पने चुनाव प्रचार के दौरान नरेन्द्र मोदी ने जिन मुख्य मुद्दों को लेकर कांग्रेस के खिलाफ प्रचार किया था उनमें बढ़ती हुई मंहगाई और भ्रष्टाचार प्रमुख थे। परंतु पिछले कुछ दिनों में जो निर्णय नरेन्द्र मोदी की सरकार ने किए हैं उनसे लगता है कि मंहगाई आसमान छू लेगी। नरेन्द्र मोदी ने अपने एक भाषण में कहा था कि मैं देश को लूटने के लिए प्रधानमंत्री नहीं बन रहा हूँ, मैं बदला लेने के लिए भी प्रधानमंत्री नहीं बन रहा हूं, मैं बदलाव करने के लिए प्रधानमंत्री बन रहा हूं। 

? एल.एस.हरदेनिया


पॉलिसी सिस्टम को

नियंत्रित कर रहा है काला धन

      'टैक्स हेवेन' के रूप में कुख्यात स्विस बैंकों में अमीर भारतीयों द्वारा अवैध रूप से जमा किए गए धन की असलियत का पता लगाने के लिए मोदी सरकार द्वारा हाल ही में 'एसआईटी' के गठन की घोशणा की गई। इस घोशणा के बाद उद्योग संगठन 'एसोचैम' द्वारा काली कमाई को देश में वापस लाने के लिए केन्द्र सरकार को छह महीने तक 'माफी स्कीम' लागू करने का सुझाव हाल ही में दिया गया। सुझाव के मुताबिक इस दौरान घोशषित की जाने वाली राशि पर चालीस फीसदी कर लगाया जाए और उस धन का दस प्रतिशत बुनियादी विकास में खर्च किया जाए।

?  हरे राम मिश्र


सामाजिक न्याय बनाम हिन्दुत्व की राजनीति

     सोलहवीं लोकसभा का चुनाव भाजपा की जीत के साथ कई और संदेश लेकर आया है। खास करके सामाजिक न्याय की राजनीति के लिए। कोई भी विचारधारा सिर्फ एक संगठन में बंधाकर नहीं रहती है, बल्कि वह अपने आसपास परत-दर-परत पैठ बना लेती है और दक्षिणपंथी विचारधारा ने इस चुनाव में यही किया। सामाजिक न्याय के नाम पर उभरी उत्तर प्रदेश और बिहार की पार्टियों को करारा झटका लगा है।

 

? अनिल यादव


जल से मरते जीव

        र्मियों के समय नदी और तालाबों में अक्सर अचानक मछलियों के मरने की खबरें मिलती है। ये मछलियॉ लाखों की संख्या में एक साथ अचानक मर जाती हैं, कारण होता है- जल में घुलित आक्सीजन की मात्रा में कमी और जिसकी वजह से जीवनदायी जल मृत्युदाता बन जाता है। जल में घुलित आक्सीजन की मात्रा में कमी से न केवल मछलियॉ मर रही हैं बल्कि कई अन्य जलीय जीवों के अस्तित्व पर संकट पैदा हो गया है।       

? डॉ. सुनील शर्मा


अमेरिका से आगे हम

      दुनियाभर के पर्यावरण प्रेमियों का यह जानकर आश्चर्य हो सकता है कि इन दिनों पर्यावरण और जुडे प्रमुख मुद्दों की सबसे ज्यादा चिंता भारतीय ही कर रहे हैं। अमेरिका ने भी इस तथ्य को स्वीकार किया है। यह तथ्य पर्यावरण से जुडे एक प्रमुख मुद्दे जलवायु परिवर्तन को लेकर किये गये अंर्तराष्टीय सर्वेक्षण में सामने आया है। यह सर्वेक्षण ब्राजील, जर्मनी, तुर्की, दक्षिण कोरिया, अमेरिका और भारत में किया गया।

? अमिताभ पाण्डेय


बरसात के पानी को सहेजना होगा

        पूरे देश को सामने रखकर देखें तो हमारे यहां पानी की कोई कमी नहीं है। कहीं कम और कहीं ज्यादा मानसून खूब पानी बरसाता है पर हमारी सरकारें उसे सहेज कर नहीं रख पातीं। न बांधों में जमा रख पाती हैं और ना ही धरती के भीतर डालकर जलस्तर को बढ़ाने का काम कर पाती हैं। वे तो पानी को बहने का आसान रास्ता देने के लिए नालियां बनाती हैं। इसका नतीजा देश में डार्कजोन बढ़ते जाते हैं। गांव तो गांव शहर तक पीने के पानी को तरसते हैं। मजबूरी में लोगों को दस से पंद्रह रूपए लीटर का पानी पीना पड़ता है। आखिर कब तक चलेगा यह सिलसिला?

? नरेन्द्र देवांगन


बहुत कठिन है डगर राष्ट्र-भाषा की

      सोलहवीं लोकसभा के चुनाव में भारतीय राजनीतिक धरातल पर हिन्दी की स्वीकार्यता स्पष्ट रूप से दिखाई दी। पी. चिदम्बरम जैसे राजनेता हिन्दी ज्ञान के अभाववश हिन्दी प्रदेश से चुनाव मैदान में खड़े होने का साहस नहीं जुटा पाये। नयी सरकार के गठन के बाद भव्य शपथ-ग्रहण समारोह में जब अधिकतर सांसदों ने हिन्दी में शपथ ली, विदेशी अतिथियों से प्रधानमंत्री ने हिन्दी में संवाद किया तो मुझ जैसे तमाम हिन्दी सेवियों के मन में यह उम्मीद जागी कि शायद अब हिन्दी के दिन बहुरेंगे।

? डॉ. गीता गुप्त


  30 जून-2014

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