संस्करण: 30 जून-2014

अमेरिका से आगे हम

?  अमिताभ पाण्डेय

        दुनियाभर के पर्यावरण प्रेमियों का यह जानकर आश्चर्य हो सकता है कि इन दिनों पर्यावरण और जुडे प्रमुख मुद्दों की सबसे ज्यादा चिंता भारतीय ही कर रहे हैं। अमेरिका ने भी इस तथ्य को स्वीकार किया है। यह तथ्य पर्यावरण से जुडे एक प्रमुख मुद्दे जलवायु परिवर्तन को लेकर किये गये अंर्तराष्टीय सर्वेक्षण में सामने आया है। यह सर्वेक्षण ब्राजील, जर्मनी, तुर्की, दक्षिण कोरिया, अमेरिका और भारत में किया गया। सर्वेक्षण का निष्कर्ष इस तथ्य को साबित करता है कि जलवायु परिवर्तन की चुर्नातियों से निपटने के प्रति संवेदनशीलता और प्रयास के मामले में भारत सबसे  आगे निकल रहा है। इस मामले पर अमेरिका के प्रयास भारत से पीछे ही हैं।

                जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भारत को आगे तथा अमेरिका सहित कुछ अन्य देशों को पीछे बताने वाला यह सर्वेक्षण अमेरिका की ही एक चर्चित पत्रिका ने करवाया। पत्रिका की ओर वैश्विक स्तर पर करवाये गये इस सर्वेक्षण में 6 देशों के 3 हजार 505 नागरिकों को समान संख्या में शामिल किया गया।

                हाल ही में 10 मई से 22 मई 2014 तक कराये गये यइस आनलाईन सर्वे में उर्जा और इसकी खपत को लेकर भारतीयों ने सर्वाधिक चिंता जताई। भारतवासी उर्जा संरक्षणऔर कार्बन उत्सर्जन घटाने की अपनी क्षमता को लेकर आशान्वित थे। सर्वे में 10 में स 9 भारतीयों ने कहा कि उनके लिए पर्यावरण और इसके संरक्षण के मुद्दे बहुत महत्र्वपूण हैं। सर्वे में शामिल सभी देश अलग अलग तरीकों से पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रयास करते हैं । जर्मन के लोग अपने कम्प्यूटर बंद करने में, ब्राजील के लोग लाईट बंद करने और अमेरिका के लोग रीसाईक्लिंग में आगे हैं लेकिन भारतीयों में उर्जा संरक्षण के प्रति सर्वाधिक व्यापक दष्टिकोण दिखा। 10में 8 भारतीयों ने कहा कि उर्जा खपत पर अकुंश लगाने क लिए वे व्यक्तिगत आदतों में भी सचेत हैं।

              सर्व के अनुसार इसमें शामिल देशों में कारपूल,सार्वजनिक परिवहन प्रयोग और वाहन चलने की अपेक्षा पैदल चलने के मामले में भारतीय सबसे ज्यादा आशावादी हैं। बिजली के उपकरणों का प्रयोग बंद करने के बाद साकेट से प्लग निकाल लेने के मामले में अन्य देशों कीतुलना में भारतीय सबसे आग हैं। भारतीय जलवायु मुद्दों की व्यापक जानकारी रखते हैं और इसकी चुनौतियों से लडने के मामले में काफी आशावादी हैं। लगभग 60 फीसदी भारतीयों के मुताबिक उनका मानना है कि साल 2050 तक दुनिया कार्बन उत्सर्जन में 80 फीसदी तक कमी ला सकती है।

             यहॉ यह बताना जरूरी होगा कि जलवायु परिवर्तन को लेकर भारत में पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाली प्रमुख संस्था द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीटयूट  टेरी  ने भी एक सर्वेक्षण किया । इस सर्वेक्षण का परिणाम बताता है कि भारत के शहरी लोगों में जलवायु परिवर्तन को लेकर लगातार जागरूकता आ रही है।  टेरी  ने भारत के 10 प्रमुख शहरों  में यह सर्वेक्षण किया। इसमें दिल्ली, मुम्बई,पुणे, गुवाहाटी, कानपुर, जमशेदपुर, कोयम्बटूर, इन्दौर महानगर भी शामिल हैं। सर्वेक्षण के दौरान 11 हजार 214 लोगों ने इस सम्बन्ध में चर्चा की गई। चर्चा शामिल 90 प्रतिशत लोगों ने माना कि प्रदूषण की वजह से जलवायु में परिवर्तन हो रहा है। 80 प्रतिशत लोगों ने औसत तापमान में बढोतरी की बात को स्वीकार किया। लोगों का मानना था कि शहर की हवा में प्रदूषण बढा है। यह प्रदूषण जलवायु परिवर्तन का एक प्रमुख कारण है।

       उल्लेखनीय है कि बढते प्रदूषण,बिगडते पर्यावरण के कारण देश दुनिया में पर्यावरण पर विपरीत प्रभाव पड रहा है। इससे जलवायु परिवर्तन भी प्रभावित हो रहा है। इसके दुष्परिणाम भी सामने आ रहे हैं। पर्यावरण बिगडने से जलवायु परिवर्तन की ऐसी प्रक्रिया शशुरू हुई है जिसके दुष्परिणाम बाढ, सूखा, भूकम्प, भूस्लखन, बढती गर्मी, अनियमित हो रहे मानसून सहित विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं में देखे जा रहे हैं।

            मानसून पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को लेकर हाल ही में आई एक रिपोर्ट कहती है कि जलवायु परिवर्तन धीरे धीरे मानसून के प्रवाह को कमजोर कर रहा है। इस रिपोर्ट को इंटरनेशनल पैनल क्लाईमेट चेंज   आई पी सी सी   ने तैयार किया है जिसके चैयरमेन अंर्तराष्टीय पर्यावरणविद् डा0आर के पचौरी हैं। रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन से मानसून के प्रवाह को खतरा है। मानसून के प्रवाह में बाधाएं पडेगीं । इसके कारण मौसमी घटनाएं बढेगीं जिनमें सूखा,बाढ,भारी वर्षा शामिल हैं।

             रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय क्षैत्र में अति रूप धारण करने वाली बारिश में प्रति दशक 10 मिमी की बढोतरी हो रही है। हालांकि वार्षिक नमी वाले दिनों की सामान्य बारिश में प्रति दशक 22 मिमी की बढोतरी हुई है। ये दोनां बढोतरी जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को प्रकट करती हैं।

? अमिताभ पाण्डेय