संस्करण: 30  जुलाई-2012

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'देशभक्त' अपराधी, 'राष्ट्रवादी' आतंकी

आखिर लेफ्टनन्ट कर्नल पुरोहित के अपराधों का साफसुथराकरण क्यों किया जा रहा है ?

           क्या हिन्दुत्व आतंक की तमाम घटनाओं के मास्टरमाइंड लेटनेन्ट कर्नल पुरोहित को अपने तमाम जनद्रोही कारनामों से बचाने की कोशिश चल रही है ?हाल ही में अख़बारों में प्रकाशित चन्द रिपोर्टों के अंश पर गौर करें तो यही संकेत मिलता दिखता है। इन रिपोर्टों में यह कहा गया कि पुरोहित जिन आतंकी घटनाओं में मुब्तिला था, उसका मकसद अभिनव भारत जैसी आतंकी जमात में 'घुसपैठ' करना था, दबी जुबां से यह भी कहा जा रहा है कि उसने यह समूचा आपरेशन सैन्य जासूसी/मिलिटरी इंटिलिजेन्स के अपने वरिष्ठों की जानकारी में किया। 

  ? सुभाष गाताड़े


सनक में खेली हारी हुई बाजी

        राष्ट्रपति चुनाव के जो परिणाम आए हैं वे किसी भी सूरत में न तो चौंकाने वाले हैं न ही परेशान करने वाले। वीरभूम का सियासी योध्दा प्रणब मुखर्जी का राष्ट्रपति बनना तभी तय हो गया था जब समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह, बसपा सुप्रीमो मायावती और जदयू-शिवसेना ने भारतीय जनता पार्टी की सनक को तिलांजलि देकर प्रणब मुखर्जी के समर्थन का ऐलान किया था। फिर भी इस चुनाव की शुरूआती चर्चाएं होने से लेकर प्रचार और अब परिणाम के बाद कई वाकये हैं जो चौंकाते तो नहीं हैं किंतु क्षोभ पैदा जरूर करते हैं।  

? विवेकानंद


राष्ट्रपति पद के लिये

हिंदुत्ववादी प्रत्याशी का टोटा ?

   कुछ समय पूर्व एक बहस छिड़ी थी कि देश का प्रधान मंत्री हिंदुत्ववादी होना चाहिये।  इस बहस के सूत्रधार थे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ।उन्होंने प्रधान मंत्री पद के लिये सबसे योग्य हिंदुत्व वादी के रूप में भाई नरेंद्र मोदी का नाम प्रस्तावित किया ।उनके इस प्रस्ताव से एनडीए में बवाल मच गया ।एनडीए के सबसे सशक्त घटक जेडीयू ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया ।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्पष्ट कह दिया कि देश का प्रधान मंत्री धर्म निरपेक्ष छवि वाला होना चाहिये। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से मोदी को सांप्रदायिक बता कर उनकी दावेदारी पर वीटो लगा दिया।

? मोकर्रम खान


बाबा रामदेव की श्री दिग्विजय सिंह पर अशिष्ट टिप्पणी

पलायनवादी बाबा ने इसे सहानुभूति बताया

          योग-साधना और आध्यात्म के नाम पर धन कमाने की कला में माहिर बाबा रामदेव अक्सर कुछ न कुछ ऐसा बखेड़ा करते ही रहते हैं जिससे वे मीडिया की सुर्खियों में बने रहें। विदेशों की बैंकों में भारतीयों द्वारा जमा किए गये धन को भारत लाने का केन्द्र सरकार पर दबाव बनाने वाले बाबा ने देखते देखते दवाई बनाकर बेचने के धंधे में बेजा कमाई की है। हरिद्वार के आश्रम को जिन्होंने भी देखा है वे सहज ही अनुमान लगा सकते हैं कि बाबा सन्यासी के भेष में एक बहुत बड़े कारोबार के संचालक हैं।

? राजेन्द्र जोशी


आस्था के प्रतीकों के रहस्यपूर्ण अपमान

         विविध धर्मों और संस्कृतियों वाले हमारे विशाल देश में सद्भाव, सह-अस्तित्व और सहिष्णुता का वातावरण सदियों से रहा है। राज्यों के लिए होने वाले युध्दों में भी प्रत्येक सेना में हर जाति और सम्प्रदाय के सिपाही हुआ करते थे। साम्प्रदायिकता हमारे देशवासियों के मूल चरित्र में नहीं है इसलिए निहित स्वार्थों को झूठ पर झूठ बोल कर उसे पैदा करना पड़ता है। हर धर्म में सत्य बोलना प्रमुख सन्देश होता है फिर भी हर तरह की साम्प्रदायिकता को अपने धर्म के अनुयायियों को गलत बयानी करके उकसाना पड़ता है तब भोले-भाले सरल लोग उत्तोजित होकर भटकते हैं और हिंसा पर उतर आते हैं, जिसकी प्रतिक्रिया होती है और इस क्रिया प्रतिक्रिया की एक श्रंखला शुरू हो जाती है।

 ? वीरेन्द्र जैन


दलितों पर मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में अत्याचार का कहर जारी

                  मिर खान ने अपने ''सत्यमेव जयते'' कार्यक्रम में अनुसूचित जाति के लोगों की नारकीय स्थिति पर महत्वपूर्ण रोशनी डाली थी। उसके बाद वे प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से मिले। उन्होंने प्रधानमंत्री को उन लोगों की स्थिति से अवगत कराया जो आज भी सिर पर मैला ढोने को मजबूर हैं। वैसे जो कुछ आमिर खान ने दिखाया या बताया वह किसी से छिपा नहीं है। खान ने एक बार फिर इस सामाजिक कुष्ठ की तरफ ध्यान आकर्षित किया। समाज में अनुसूचित जाति के लोगों के साथ भारी भेदभाव होता है। उच्चजाति के लोग उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक मानते हैं।

? एल.एस.हरदेनिया


साम्प्रदायिक राजनीति का संघी तर्कशास्त्र

      पिछले दिनों मध्यप्रदेश के उद्योग मंत्री कैलाश विजयर्वीय ने महिलाओं पर बढ रहे यौन अत्याचारों के संदर्भ में यह कर कि इसके लिये महिलाओं द्वारा आपत्तिजनक पहनावा जिम्मेदार है,ने एक बार फिर हिंदुत्व के महिला विरोधी हिंसक प्रवित्ति को मंजरे आम कर दिया है। यहां गौरतलब है कि विजयवर्गीय पिछले दिनों गोवाहाटी में एक चौदह वर्षीय बच्ची के साथ सरेआम दर्जनों लोगों द्वारा किये गये छेडखानी के मामले पर बोल रहे थे। जिस पर सिर्फ आसाम ही नहीं पूरा देश शर्मिंदा हुआ।

? शाहनवाज आलम


व्यवस्थागत खामियों का परिणाम है हिंसा

      हालीवुड की रोबोटिक और मशीनीकृत फिल्मों की श्रृंखला की एक और नई फिल्म ने अमेरिका मैं एक और अमानवीय घटना को जन्म दे दिया। बेटमेन सीरीज की नई फिल्म  'डार्क नाईट राईजेस' का प्रीमियर जो अमेरिका के डेनवर मैं स्थित भीड़ भरे कोलोराडो सिनेमाघर मैं आयोजित था के दौरान एक 24 साल के युवक ने स्मोक बम फेंक कर अंधाधुंध फायरिंग की। जो चेहरे पर गैस मास्क लगाये था। उसके इस जघन्य कृत्य ने 12 लोगों की जान ले ली और 55 से ज्यादा लोगों को घायल कर दिया। हालांकि अमेरिका के लिए इस तरह की घटनाएँ अब नई नहीं रहीं और हर बार की तरह इस घटना ने भी अमेरिका मैं हथियारों पर नियंत्रण की बहस को फिर से गर्मा दिया है।

? राहुल शर्मा


चीन ने फिर से भारत को पीछे छोड़ा.......

किन्तु इस बार भ्रष्टाचार में।

        सुहृद पूंजीवाद से आशय एक ऐसी अर्थव्यवस्था से है जिसमें व्यवसाय की सफलता सरकारी तंत्र में बड़े पदों पर बैठे लोगों  के साथ व्यवसाई के रिश्तों पर निर्भर करती है। भारत में सुहृद पूॅजीवाद (Crony Capitalism) और पश्चिमी देशों में मात्र एक प्रतिशत बड़े लोगों के पास सत्ता/ताकत होने से नाराज,कुछ विश्लेषक तथाकथित बीजिंग सर्वसम्मति या चाइना मॉडल का पक्ष लेते हुये उसकी तारीफ करते हैं। किन्तु मुझे यह कहते हुये खेद है कि चीन में अन्य देशों की तुलना में अधिक सुहृद पूॅजीवाद है।

? स्वामीनाथन एस.अंकलेसरिया अय्यर


स्त्री सुरक्षा के मायने

       गुवाहाटी में नाबालिग लड़की के साथ बीस लोगों द्वारा की कई अश्लील छेड़खानी और मारपीट का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रतनपुर के पास खूंटाघाट घूमने आए एक प्रेमी जोड़े को चार हथियारबंद लोगों ने पकड़ा और प्रेमी के सामने प्रेमिका को निर्वस्त्र कर उससे परेड करवाने तथा अश्लील एमएमएस बनाकर उसे सैकड़ों लोगों को मुहैया कराने का मामला प्रकाश में आ गया है। अब यह एमएमएस मीडिया चौनलों की सुर्खियां बढ़ा रहा है। यूटयूब पर तो न जाने इसे कितने लोगों ने देखा होगा?

    

? राखी रघुवंशी


बादलों ने फेरा देश की उम्मीदों पर पानी

     स देश के लिए मानसून एक ऐसी अबूझ पहेली है, जिसे पार पाना संभव नहीं है। एक तो वह अपने आने की आमद देता है। यह भी सूचना देता है कि इस बार वह पूरी पृथ्वी को तरबतर कर देगा। फिर वह तय समय पर नहीं आता। भटक जाता है कहीं। उसके बाद आकर फिर कहीं चला जाता है। कई दिनों तक उसका अता-पता नहीं मिलता। मौसम विभाग केवल कयास लगाता रहता है। उसकी भविष्यवाणियां हमेशा गलत साबित होती है। जब वह आता है, तो ऐसा आता है कि बाढ़ की स्थिति पैदा कर देता है। दूसरी ओर सूखे की स्थिति उत्पन्न कर देता है। कहीं उसका आना कहर बरपाता है,तो कहीं उसका न आना भविष्य को ही दाँव पर लगा देता है।

? डॉ. महेश परिमल


विद्यालयों में दण्ड :

एक गम्भीर समस्या

    शिक्षा संस्थानों में बच्चों को दण्ड देना क़ानूनन प्रतिबंधित है। लेकिन राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने विद्यालयों में शारीरिक दण्ड संबंधी जो विस्तृत अध्ययन रपट प्रस्तुत की है तदनुसार पूरे देश में बच्चों के प्रति बढ़ती संवेदनहीनता की पुष्टि हुई है। केन्द्रीय विद्यालयों में 75.5 प्रतिशत छात्र और 72.6 प्रतिशत छात्राएं किसी न किसी प्रकार के मानसिक उत्पीड़न का शिकार हैं। राजकीय विद्यालयों में यह आंकड़ा क्रमश:81.1प्रतिशत और 79.7 प्रतिशत है। जबकि निजी शिक्षा संस्थानों में 83.6 प्रतिशत लड़के और 84.8 लड़कियाँ मानसिक यातनाएं झेलने के लिए विवश हैं।

? डॉ. गीता गुप्त


सोने का अण्डा देने वाली

मुर्गी का पेट मत काटो (पशु वध रोको)

     नुष्य और पशु एक दूसरे पर आश्रित और एक दूसरे के पूरक हैं। मनुष्य यदि एक पशु को पालता है तो वह पशु मनुष्य के पूरे परिवार को पालता है अनेकों सेवाऐं करता है।

                राजस्थान के गड़रियों के बारे में लोकोक्ति है कि वहां के लोग भेड़े पालते हैं। क्योंकि उनसे प्राप्त घी, दूध, ऊन आदि के व्यापार से ही इनका काम चलता है। भेड़ के दूध को तो विशेषज्ञों ने फेफड़े के वंशानुगत रोगियों तक के लिए लाभ प्राप्त है। अर्थात वास्तविकता यह है कि उनकी भेड़े ही इनको पालती हैं।

? डॉ. राजश्री रावत 'राज'


  30जुलाई2012

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