संस्करण: 30 जनवरी- 2012

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संदर्भ : गुजरात लोकायुक्त नियुक्ति मुद्दे पर हाई कोर्ट का फैसला

 इस हार से भी मोदी सरकार ने नहीं लिया सबक

           गुजरात की मोदी सरकार को अदालत में एक बार फिर मुंह की खानी पड़ी है। गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्यपाल द्वारा सूबे में लोकायुक्त की नियुक्ति को सही ठहराते हुए सूबाई सरकार की अपील को ठुकरा दिया है। तीन जजों की पीठ ने एक के मुकाबले दो से सरकार की याचिका को निरस्त करते हुए जहां राज्यपाल द्वारा की गई लोकायुक्त की नियुक्ति को बरकरार रखा,वहीं इसे चुनौती देने वाली सूबाई सरकार की अपील को खारिज कर दिया। अदालत के फैसले से यह साफ हो गया है कि गुजरात में बीते साल हुई लोकायुक्त की नियुक्ति पूरी तरह से वैधानिक थी।

  ?  जाहिद खान


टीम अन्ना का आंदोलन

 किसके विरुध्द ?

        लेक्ट्रानिक मीडिया के सौजन्य से कई महीनों तक भारतीय राजनीति के आकाश में उड़ते रहे अन्ना हजारे तथा उनकी टीम का अघोषित कांट्रेक्ट पिछले माह समाप्त हो गया। महीनों की कड़ी मेहनत के बाद अन्ना हजारे को आराम की आवश्यकता थी इसलिये वे पहले संचेती हास्पिटल फिर अपने गृह रालेगण सिध्दी चले गये। अब आराम हो गया, अघोषित कांट्रेक्ट का दूसरा चरण संभाला जाय, तो एक महीने तक टी0वी0 स्क्रीन से गायब रहने के बाद अब फिर अन्ना और उनकी टीम के फोटो टी0वी0और समाचार पत्रों में दिखने लगे हैं।

? मोकर्रम खान


पाकिस्तान में लोकतंत्र की मजबूती से इस इलाके में शान्ति कायम होगी

      पाकिस्तानी अखबार डान के पहले पेज पर आज खबर छपी है कि पाकिस्तानी फौज के मुखिया, जनरल अशफाक परवेज कयानी और आई एस आई के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल शुजा पाशा ने मंगलवार को प्रधान मंत्री युसूफ रजा गीलानी के दफ्तर जाकर उनसे मुलाकात की । इस बैठक में राजकाज के बहुत सारी बातों के अलावा यह भी तय किया गया कि अफगानिस्तान में सरकार की नीतियों को लागू करने की दिशा में क्या कदम उठाये जाने हैं। प्रधानमंत्री ने विदेशमंत्री,हिना रब्बानी खार को अफगानिस्तान की यात्रा करने का निर्देश दिया। इस यात्रा का उद्देश्य  अमरीका-पाकिस्तान-अफगानिस्तान की शीर्ष बैठक के पहले माहौल ठीक करना भी बताया गया है।

? शेष नारायण सिंह


मौत के सौदागरों का बचाव कर रहे हैं

प्रदेश के मंत्री

          भाजपा-शासित मध्यप्रदेश में अजीबोगरीब घटनाएं होती रहती हैं। एक ओर भाजपा सरकार पूरे प्रदेश को हिन्दू राज्य बनाने पर आमादा है वहीं दूसरी ओर एक के बाद एक भ्रष्टाचार में लिप्त करोड़पति अदने सरकारी कर्मचारी सामने आ रहे हैं। प्रदेश में भ्रष्टाचार की गंगा में सभी डुबकी लगा रहे हैं।

? एल.एस.हरदेनिया


बीहड़ों से कैसे बचेगा मध्यप्रदेश ?

         ध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खेती को लाभ का धंधा बनाने के वादे करते हैं और उन्हीं की सरकार खेती की ज़मीन उद्योगों को दे रही है। एक ओर आबादी लगातार बढ़ रही है,वहीं दूसरी ओर खेती का रकबा लगातार कम होता जा रहा हैं, भू-संरक्षण के मामले में यह सरकार कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि चंबल क्षेत्र की उपजाऊ भूमि तेज़ी से बीहड़ों में तब्दील होती जा रही है। इस दिशा में सरकार ने अभी तक कोई विचार नहीं किया है। यदि यही लापरवाही आगे भी जारी रही तो समूचा चंबल क्षेत्र बीहड़ों में बदल जाएगा। वैसे भी यह क्षेत्र दस्युओं की शरणस्थली रही है,जहां पुलिस का पहुंच पाना मुश्किल होता है।

 ? महेश बाग़ी


यह है मध्यप्रदेश की बड़बोली सरकार का हाल  

पिछली माली साल के बजट के 27सौ करोड़ रु खर्च नहीं हुए

           विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों का अपनी ही मुखारबिन्द से ढिंढोरा पीटने वाली मध्यप्रदेश सरकार की हकीकत यह है कि वह अपने निर्धारित वार्षिक बजट की शत-प्रतिशत राशि भी खर्च नहीं कर पाती है। बात तो इतनी बड़ी-बड़ी की जाती है कि सुन-सुनकर आश्चर्य भी होने लगता है। जिस अनुपात में मंत्रियों के दौरों में,आम सभाओं में और विभिन्न समारोहों में विकास और निर्माण कार्यों की घोषणाएं निरंतर होती जा रही है उस अनुपात में वे जमीन पर नहीं उतर पा रही हैं। 

? राजेन्द्र जोशी


भाजपा : नेता हैं या पोरस के हाथी ?

       त्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव नजदीक आते ही भारतीय जनता पार्टी के अंतर्विरोध एक-एक कर यूँ सामने आने लगे हैं जैसे राजे-रजवाड़ों के समय में उनके अंत:पुर के षडयंत्र उद्धाटित हुआ करते थे। दिल्ली से लेकर राज्यों तक भाजपा की पिछले कुछ समय की गतिविधियों को देखने-समझने पर ऐसा लगता है जैसे इसका हर बड़ा नेता अपना मनोरथ पूरा करने के लिए बेहद जल्दबाजी में हो। इस पार्टी के प्रथम पंक्ति के तमाम नेता अगर प्रधानमंत्री बनने को उतावले हैं और रोज बयानबाजी करते फिर रहे हैं तो इसके प्रदेश स्तर के बड़े नेता मुख्यमंत्री बनने के लिए।

? सुनील अमर


अंडमान-निकोबार के जारवा आदिवासियों को नचाने का मामला

आदिवासियों की लाचारी को
भुनाने का गुनाह

        ब किसी भी समाज की दशा और दिशा अर्थतंत्र तय करने लगते हैं तो मापदण्ड तय करने के तरीके बदलने लग जाते हैं। यही कारण है हम जिन्हें सभ्य और आधुनिक समाज का हिस्सा मानते हैं,वे लोग प्राकृतिक अवस्था में रह रहे लोगों को इंसान मानने की बजाय जंगली जानवर ही मानते हैं। आधुनिक कहे जाने वाले समाज की यह एक ऐसी विडंबना है,जो सभ्यता के दायरे में कतई नहीं आती। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में रह रहे लुप्तप्राय जारवा प्रजाति की महिलाओं को स्वादिष्ट भोजन का लालच देकर सैलानियों के सामने नचाने के जो विडियो-दृश्य ब्रिटिश अखबार के हवाले से सामने आए हैं........

? प्रमोद भार्गव


कश्मीर घाटी में राजनैतिक वातावरण सुधरा है

केन्द्र को इस मौके का फायदा उठाना चाहिए

     म्मू और कश्मीर के मोर्चे पर शांति है। पर क्या यह तूफान के पहले वाली शांति है? शायद नहीं। इसका मुख्य कारण यह है कि पाकिस्तान में खुद अशांति का दौर चल रहा है। कश्मीर समस्या का सबसे बड़ा कारण पाकिस्तान है और वहां खुद अस्थिरता का दौर चल रहा है और सांवैधानिक संस्थाएं वहां आपस में टकरा रही हैं। पाकिस्तान की हालत पर नजर डालकर उसके कश्मीर पर पड़ने वाले प्रभाव का हम अंदाज लगा सकते हैं।

? बी.के.चम


आतंकवाद का संघी चेहरा-

गोडसे से प्रज्ञा तक 

    राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा की हिंदुत्ववादी राजनीति पर भारतीय और विदेशी लेखकों ने काफी काम किया है। लेकिन सुभाष गाताडे की 'गोडसेज चिल्ड्रेन- हिंदुत्वा टेरर इन इंडिया' इन सबसे कई मायनों में अलग है। ऐसा इसलिये कि अब तक हिंदुत्ववादी राजनीति के आलोचकों की बडी जमात भी उसे सिर्फ एक प्रतिक्रियावादी, अंधराष्ट्रवादी और ब्राह्मणवादी विचारों वाले संगठन के बतौर ही देखती रही है जो अल्पसंख्यक विरोधी हिंसा में शामिल रहते हैं। लेकिन मौजूदा समय में आतंकवाद की जो परिघटना सतह पर आई है उससे इन लेखकों ने हिंदुत्ववादी संगठनों को जोड कर देखने का संयोजित प्रयास नहीं किया है। इसकी कई वजहें हैं।

 

? शाहनवाज आलम


चिन्ताजनक हैं : होनहार युवा पीढ़ी के आत्मघाती क़दम

     किसी भी समाज और देश के लिए प्रतिभाशाली युवाओं द्वारा आत्मघाती कदम उठाना एक गम्भीर चिंता का विषय है। जनवरी 2012 में मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में घटित आत्महत्या की दो घटनाओं से उन अभिभावकों को सबक लेने की जरूरत है, जो अपनी सन्तान को उच्च शिक्षा हेतु किसी महानगर या परदेश भेजने के लिए उत्सुक रहते हैं।

? डॉ. गीता गुप्त


  30 जनवरी- 2012

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