संस्करण: 30 दिसम्बर -2013

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भागवत कथा-

आडवाणी बनाम मोदी

     हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एक कहानी सुनाकर लालकृष्ण आडवाणी को पार्टी न छोड़ने की अपील की। भागवत की कहानी के मुताबिक, एक गांव में एक महिला गलती से हवन कुंड में थूक देती है लेकिन हवन कुंड की पवित्रता उसके थूक को सोने में तब्दील कर देती है। महिला का पति उस महिला को ये बात किसी को न बताने की नसीहत देता है लेकिन महिला ये बात सहेलियों को बता देती है और पूरे गांव में ये बात फैल जाती है। 

? विवेकानंद


स्टेच्यू आफ यूनिटी

वर्णमीडिया की प्रसन्नता के क्या मायने हैं ?

        जिस शख्स पर पूरे मुल्क का अधिकार था उसका अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे नरेन्द्र मोदी द्वारा अपहरण किया गया है, यह वही साम्प्रदायिक संगठन है जिसके खिलाफ सरदार पटेल ताउम्र लड़ते रहे ..भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी के तौर पर ताजपोशी के बाद सरदार पटेल की मूर्ति के निर्माण का एकमात्र मकसद यही है कि भारत की आजादी के आन्दोलन के अग्रणी के नाम पर 2014 के चुनावों में वोट बटोरे जा सकें। इसलिए यह एक विडम्बना ही दिखती है कि संघ प्रचारक द्वारा .........

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सुभाष गाताड़े


उ.प्र. के राहत शिविरों में रहने वाले मुसलमान नारकीय स्थिति में रह रहे हैं

     पिछले तीन महीने से उत्तरप्रदेश के दंगा पीड़ित मुसलमान शिविरों में नारकीय जीवन बिता रहे हैं। इन शिविरों में रह रहे अनेक बच्चों की मृत्यु हो चुकी है। चूँकि अब कड़ाके की ठंड प्रारंभ हो चुकी है जिससे इन शिविरों में रहने वाले मुसलमानों की पीड़ा में और इजाफा हो गया है। इन शिविरों की नारकीय स्थिति का विस्तृत विवरण इंटरनेशनल न्यूयार्क टाइम्स में भी प्रकाशित हुआ है। सबसे दु:ख की बात यह है कि यह सब उस प्रदेश में हो रहा है जिसमें एक ऐसी पार्टी का शासन है जो स्वयं को मुस्लिम हितैषी होने का दावा करती है। एक समय ऐसा था जब समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो को मौलाना मुलायम सिंह कहा जाता था।

 ? एल.एस.हरदेनिया


मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार में

मंत्रिमण्डल अयोग्य, मुख्यमंत्री योग्य

      क लोक कथा के अनुसार दूल्हा का एक हाथ टूटा हुआ है, सिर पर बाल नहीं हैं, सुनाई कम देता है, भेंगा है, रंग गहरा काला है पर फिर भी उसे सुन्दर बताया जा रहा है क्योंकि उसका गुणगान करने वाले बहुत वाक्पटु हैं। मध्य प्रदेश की भाजपा की सरकार के तीसरी बार चुने जाने पर ही ऐसा ही गुणगान किया जा रहा है।

? वीरेन्द्र जैन


पश्चाताप नही आत्मचिंतन करें कांग्रेस

              हाल ही में देश के पांच राज्यो में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजो में जीत की उम्मीद लगाये बैठी कांग्रेस पार्टी को मिजोरम को छोडकर शेष राज्यों मे करारी हार का सामना करना पडा है। देश की जनता आगामी लोक सभा चुनाव के परिणामो को भी विधान सभा चुनाव के परिणामों के तराजू से तोल रही है,लेकिन ऐसा उचित नही हैं। देश की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस आज भी देश के लगभग 8राज्यो में सत्ता में है। विधान सभा चुनावों में कांग्रेस द्वारा बिना रणनीति बनाये चुनाव लडा गया जिसके परिणाम स्वरूप कांग्रेस को चारो राज्यो में करारी हार का स्वाद चखना पडा ।

 ?   जे.पी.शर्मा


मुद्दई भी तुम्हीं, मुंसिफ भी तुम्ही

खतरनाक है मीडिया ट्रायल की प्रवृत्ति और सुर मिलाती समाज की मानसिकता

           बीता साल कई मामलों में पीछे के कई सालों से अलग रहा। उसने जहां कुछ अच्छे बदलाव का संकेत दिया, वहीं कुछ चिन्ता की लकीरें भी खींचीं। 2012 के 16 दिसम्बर की गैंगरेप वाली घटना के बाद देश भर में जो जनाक्रोश फूटा था,उसने पूरे समाज पर असर डाला। एक तरफ यौनहिंसा की पीड़िताओं ने शिकायत दर्ज कराने में भरोसा किया,कई सारे ऐसे मामले सामने आए जबकि अत्याचारी समाज में प्रभावशाली ओहदे पर था तो दूसरी तरफ ....  

? अंजलि सिन्हा


दलों व माध्यमों की पारदर्शिता से रुक सकेगी 'पेड न्यूज

      'पेड न्यूज' यानी पैसे लेकर माफिक समाचार प्रकाशित करने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त वी.एस. सम्पत ने गत दिनों तिरुवनंतपुरम् में चुनाव सुधारों पर आयोजित एक सेमिनार में कहा कि राजनीतिक दलों द्वारा पैसे देकर माफिक खबरों को छपवाने से चुनावी प्रक्रिया को व्यापक क्षति पहुॅचती है, इसलिए इसे चुनाव अपराध बनाना चाहिए ताकि इसमें शामिल सभी लोगों को परिणामों का सामना करना पड़े। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने इस सम्बन्ध में विधि मंत्रालय को एक प्रस्ताव भेजा है।

?  सुनील अमर


मध्यप्रदेश में पर्यावरण से

ज्यादा राजस्व की चिंता

     क्या किसी राज्य की सरकार को पर्यावरण की कीमत पर धान कमाने-बढाने की अनुमति दी जानी चाहिये ? पर्यावरण को होनेवाले नुकसान की चिंता किये बिना क्या केवल राजस्व/आय/ पर ही ध्यान केन्द्रित करना चाहिये ? क्या जल, जमीन, जीव-जंतु, को बिना नुकसान पहॅुचा कर ,बिगडते पर्यावरण की फिक्र छोडकर केवल कमाई को ही अपना मुख्य लक्ष्य बना लेना चाहिये ? यदि बेहिसाब कमाई की धुन में बिगडते पर्यावरण, बढते प्रदूषण के कारण उतराखण्ड की तरह मधयप्रदेश में भी कोई बडी प्राकृतिक आपदा आ गई तो फिर इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा ?

 

? अमिताभ पाण्डेय


लोकशक्ति का पर्याय है, लोकपाल

        जादी के बाद जनांदोलनों से सत्ता परिवर्तन हुए हैं। अनेक क्षेत्रीय दलों ने संघर्ष से अस्तित्व कायम करके केंद्र व राज्य सत्ताएं भी हासिल की हैं। परस्पर बुनियादी मतभेदों के बावजूद केंद्र व राज्यों में गठबंधन सरकारों का सिलसिला भी जारी है। लेकिन तमाम राष्टीय व क्षेत्रीय जन-आकांक्षाओं के बावजूद बेमेल सत्ताधारी न तो मूल्यपरक समाज निर्माण में कोई अहम् भूमिका का निर्वाह कर पाए और न ही भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देने में मौजूदा कानूनों में बदलाव लाने का जोखिम उठा पाए।

? प्रमोद भार्गव


संदर्भ : किशनगंगा पनबिजली परियोजना पर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत का फैसला

मध्यस्थता अदालत ने भी की, भारत के रुख की पुष्टि

      हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत में हाल ही में भारत को एक बड़ी कामयाबी मिली है। अदालत ने भारत-पाकिस्तान मध्यस्थता मामले में भारत को राहत प्रदान करते हुए पाकिस्तान की उन आपत्तिायों को पूरी तरह से खारिज कर दिया, जिसमें उसने भारत पर किशनगंगा नदी के बहाव को मोड़ने और दोनों देशों के बीच हुई सिंधु जल संधि 1960 के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए किशनगंगा पनबिजली परियोजना पर स्थगन की मांग की थी।      

 

? जाहिद खान


मधुमेह की दवा से ही फैलती है

मधुमेह की बीमारी

        हाल ही में एक अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ है कि मधुमेह की बीमारी के इलाज के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा जो दवाएं दी जाती हैं, उन्हीं दवाओं यह बीमारी और तेजी से फैलती है। यह डॉक्टरों द्वारा बताई गई बहुराष्ट्रीय कंपनियों की दवाओं का लगातार सेवन किया जाए,तो शरीर में शक्कर को हजम करने वाले इंसुलिन बनाने की जो प्राकृतिक क्षमता है,दवाओं से उसका नाश हो जाता है। इसके विपरीत यदि मरीज एलोपैथिक दवाओं को लेना बंद कर दे,तो धीरे-धीरे उसका शरीर मधुमेह की बीमारी से हमेशा के लिए मुक्त हो सकता है।निश्चित रूप से यह चौंकाने वाली बात है।

? डॉ. महेश परिमल


1 जनवरी नव वर्ष पर विशेष

केवल जश्न नहीं, देश को खुशहाल

बनाने का संकल्प करें

      क्कीसवीं सदी का संकट और संघर्षों से भरा तेरहवां बरस भी बीत गया। 2014 की नयी सुबह दस्तक दे रही है द्वार पर। इसका अभिनंदन करेंगे हम। एक बार फिर नये वर्ष के नये संकल्पों के सारथी बनेंगे। मगर कोई नया संकल्प करने से पहले एक बार मन के दर्पण में झांकें। पूछें अपने आप से, क्या पिछले संकल्प साकार हुए ? वर्ष 2013 राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं अन्य सभी दृष्टियों से बहुत सुखद नहीं रहा। राजनीतिक गतिविधियों ने बार-बार यही सिध्द किया कि.......     

 

? डॉ. गीता गुप्त


खाद्य सुरक्षा-

महिला सशक्तिकरण का अनूठा प्रयास

        भूखे भजन न होय गोपाला अर्थात भूखे पेट रहकर कोई प्रभु भक्ति में भी ध्यान नहीं लगा सकता है। भूख न तो किसी धर्म,सम्प्रदाय या जाति विशेष को लक्षित करती है न ही किसी क्षेत्र या लिंग को। भूख की आग विकास की सारी प्राथमिकताओं को खाक कर देती है और इसे शांत करता है-भोजन,अन्न।

? डॉ. सुनील शर्मा


  30 दिसम्बर -2013

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