संस्करण: 2 सितम्बर-2013

CLICK HERE TO DOWNLOAD HINDI FONT


यूपी को गुजरात बनाने की तैयारी ?

       त्ता में वापसी का प्रयास हर विपक्ष करता है, यह उसका अधिकार भी है और लोकतंत्र का तकाजा भी है। पर इसकी एक स्वस्थ परंपरा है, इसके विरुध्द जाकर जो सत्ता में वापसी का प्रयास करते हैं, वे न केवल लोकतंत्र की पवित्रता को नष्ट करते हैं बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर से आम आदमी के भरोसे को भी चोट पहुंचाते हैं। लेकिन आज कल विपक्षी दलों ने सत्ता में वापसी के लिए स्वस्थ लोकतंत्र में वर्जित सारे छलछंदों को अंगीकार कर लिया है। इतना ही नहीं स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि यदि देश में आग लगाकर, नफरत का जहर फैलाकर भी सत्ता पाई जा सकती है तो उसका भी प्रयास किया जाए।    

? विवेकानंद


मोदी चलें लंदन

        बुरी ख़बरें गोया अच्छी ख़बरों का पीछा करती रहती हैं।

              जनाब नरेन्द्र मोदी एवं उनके नए पुराने प्रशंसक इन दिनों यही सोच रहे होंगे। और यह इस सबके बावजूद कि कार्पोरेट मीडिया - एक विश्लेषक की निगाह में - उन पर गोया 'फिदा' है और वह ऐसी किसी भी ख़बर को अधिक रेखांकित ही नहीं करता जो मोदी की प्रोजेक्टेड छवि से मेल नहीं खाती हो।

? सुभाष गाताड़े


संघ परिवार द्वारा भगवान राम के दोहन का एक और प्रयास टांय-टांय फिस्स

      संघ परिवार द्वारा एक बार फिर भगवान राम का दोहन प्रारंभ हो गया है। लगता है कि यह दोहन 2014 के लोकसभा चुनावों तक जारी रहेगा। पूर्व के समान इस बार भी राम के दोहन का उत्तरदायित्व विश्व हिन्दू परिषद को सौंपा गया है। विश्व हिन्दू परिषद ने इस बार 84कोसी यात्रा का नाटक खेलना प्रारंभ किया है। विश्व हिन्दू परिषद ने यह घोषित किया था कि वह 84कोसी परिक्रमा आयोजन करेगी। इस कार्य के लिये देश के विभिन्न भागों से परिषद के कार्यकर्ता एवं परिषद से जुड़े साधु-संतों को बुलाया गया था। परिक्रमा का मुख्य छिपा उद्देश्य आम लोगों को संघ परिवार के प्रति आकर्षित करना था। वैसे परिषद द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम और पूर्व में आयोजित अन्य कार्यक्रमों में भारी अंतर है।

 ? एल.एस.हरदेनिया


ठोकर और अक्ल

      ज पच्चीस अगस्त है, आफ़ताब भाई, मैं और अज्जू चौक की ओर जा रहे हैं। अभी-अभी गोपाल भाई की चाय की दुकान से, ठलुआपंथी करते हुए चाय की चुस्कियाँ लेकर उठा हूँ और अख़बार के पन्ने उमेठते हुए अपने शहर के चौक की मस्जिद पर अपने रोज़ के ठिकाने की ओर जा रहा हूँ। पुराने जनसंघी 'शर्मा जी' की वि.हि.प. और भा.ज.पा. को लानत-मलानत अभी कुछ देर पहले बन्द हुई है। बच्चन बाबू घर की ओर मुड़ गए हैं। शहर के खलिहर दुकानदार चोंच-लडौव्वल में मस्त हैं। कल शाम आलू 25 रूपए किलो और मिर्च 20 रूपए का 100 ग्राम बिक चुका है, सुना है आज कुछ रेट गिरे हैं।

? धीरज के. सोनी


आरएसएस का खेल

निराश और हताश आरएसएस ने मध्यावधि चुनाव के लिए जोड़तोड़ शुरू कर दी है। उसे उम्मीद है कि इस चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलेगा और वह हिन्दुत्व एजेन्डे को लागू करेगी।

         सुब्रमण्यम स्वामी का यह लेख ''फ्रंटलाईन' पत्रिका के जनवरी 22-फरवरी 04, 2000 के अंक में प्रकाशित हुआ था। सुब्रमण्यम स्वामी ने अपने जनता पार्टी का हाल में भाजपा में विलय कर दिया है। इस लेख को 'हम समवेत' में इसी संदर्भ में पुनर्प्रकाशित किया जा रहा है।

               भारत में इन दिनों फासीवाद दबे पांव दाखिल हो रहा है। इसके पहले भारत के इतिहास में कभी भी किसी अदृश्य ताकत ने इस तरह शनै:-शनै:अपने पांव नहीं पसारे। 

 ?   सुब्रमण्यम स्वामी

(डा. सुब्रमण्यम स्वामी पूर्व केन्द्रीय विधि मंत्री एवं जनता पार्टी के अधयक्ष हैं।)


क्या श्री दिग्विजय सिंह हिन्दू विरोधी है ?

           ध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह की राष्ट्रीय राजनीति में सक्रियता एवं भाजपा, संघ, अलगाववादी, साम्प्रदायिक, आंतकवादी संगठनों पर जोर शोर से जारी हमलों से इन कट्टरपंथी ताकतों की जमीन हिल रही है। इन अनेक साम्प्रदायिक ताकतों द्वारा दिग्विजय सिंह को हिन्दू विरोधी कहकर बदनाम करने का सुनियोजित अभियान चलाया जा रहा है।  

? विजय कुमार जैन


शर्म इनको मगर नहीं आती

      हा जाता है कि हमारे देश में अधिकांश आत्महत्याएं सामाजिक सम्मान के घटने या घटने के भय से की जाती हैं। यह सामाजिक सम्मान हमारी मूलभूत आवश्यकताओं के समानांतर अनिवार्यता की सूची में आता है। जो लोग अपने स्वार्थों के समक्ष सामाजिक सम्मान का ध्यान नहीं रखते उन्हें बेशर्म कहा जाता है। एक कहावत में ऐसे लोगों की निन्दा यह कह कर की गयी है- सौ सौ जूते खांय तमाशा घुस के देखेंगे।

?  वीरेन्द्र जैन


आम धरणाओं का खंडन करता है कुछ आई.ए.एस. अधिकारियों का साहित्य लेखन

      नेक ऐसे मामले होते है जिन पर समाज के आम लोगों के बीच में अलग-अलग अपने अपने सोच के आधार पर धारणायें जन्म लेती रहती हैं। समाज के विभिन्न वर्गों और यहां तक कि प्रबुध्द माने जाने वाले कतिपय लोगों में भी सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के प्रति अपनी सोच के स्तर पर धारणायें बन जाया करती हैं जो निरर्थक होती है। समाज में कार्यों और अपने पेशों के कारण व्यक्ति की पहचान चर्चित रहती है। चाहे वह राजनीति का क्षेत्र हो, संस्कृति या शिक्षा का क्षेत्र हो, उद्योंग या व्यवसाय का क्षेत्र हो, प्रशासन कृषि का क्षेत्र ही क्यों न हो, इन सब क्षेत्रों में व्यक्ति की अपनी प्रतिभा, उसके गुण, उसके आचरण और उसके चरित्र के आधार पर छवि निर्मित होती है।

 

? राजेन्द्र जोशी


मप्र में 'अपनों' पर असीम आसक्ति

        ध्यप्रदेश की शिवराज सरकार तीसरी बार सत्ता पर काबिज होने के लिए नित नए शिगूफे छोड़ रही है। विभिन्न वर्गों की पंचायतें आयोजित कर घोषणाओं का अंबार लगाया जा रहा है,बगैर यह देखे कि पूर्व में आयोजित पंचायतों में की गई घोषणाओं पर अमल हुआ है कि नहीं। यही सरकार अपनों को उपकृत करने के लिए तमाम नियम कायदों को ताक में रखकर मनमर्जी कर रही है। इतना ही नहीं, सरकार में बैठे नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों की संस्थाओं को भी सरकार बेजा लाभ पहुंचा रही है। यही सरकार मंत्रिपरिषद में लिए गए फैसलों को लागू करने में भी नाकाम रही है।  

? महेश बाग़ी


सामूहिक बलात्कार से जनित गुस्सा और चन्द सवाल

       मुंबई सामूहिक बलात्कार कांड के पांचवें आरोपी को दिल्ली से गिरफ्तार करने के साथ ही अब इसमें शामिल सभी आरोपियों को पकड़ लिया गया है। पुलिस ने कहा है कि सात दिन के अन्दर आरोपपत्र दाखिल करने का प्रयास किया जाएगा। ज्ञात हो कि एक महिला फोटो पत्रकार के साथ बीते गुरूवार की शाम 6बजे परेल इलाके के शक्ति मिल परिसर 5युवकों ने बलात्कार किया जब वह अपने पेशेगत काम से अपने सहयोगी के साथ वहां गयी थी। इन आततायियों ने पहले उस सहकर्मी को बांध दिया,उसकी पिटाई की और फिर उस युवती को अपनी हवस का शिकार बनाया।     

 

? अंजलि सिन्हा


म.प्र. में घोटालों और

फर्जीवाड़े की पर्याव उच्च शिक्षा

        म.प्र. में मुन्ना भाईयों के सहारे पीएमटी की वैतरिणी पार कराने का खेल उजागर होने के बाद,प्रदेश में बीडीएस यानि दंत चिकित्सा स्नातक की परीक्षा बगैर पढ़ाई के पास कराने का खेल भी सबके सामने आने के आया है। उल्लेखनीय है कि पैसों की दम पर अयोग्यों को डाक्टर बनाने का काम म.प्र. में काफी लम्बे समय से चल रहा था। जिससे बड़ी संख्या में अपात्र लोग अब डाक्टर बनकर बाजार में खड़े हो गए है।  

? डॉ. सुनील शर्मा


हे काय झाले, माझा मुम्बई ला?

       सा लगता है कि रेप के मामले में अब मुम्बई दिल्ली से स्पर्धा करने लगा है। वैसे देखा जाए, दुष्कृत्य देश के किसी भी कोने में हो, इससे लोगों को कोई बहुत अधिक फर्क पड़ता नहीं है। छोटे शहरों को तो और भी कोई फर्क नहीं पड़ता। उनके लिए यह तो आम अपराध की ही तरह है। सबसे गंभीर बात यह है कि इस प्रकार की घटनाएं लगातार हो रही हैं, पर इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। ताकि इस तरह के अपराधों में कमी आए। अपराधियों में किसी भी तरह से कानून का खौफ तो दिखाई ही नहीं दे रहा है।    

 

? डॉ. महेश परिमल


हरा-भूरा शाल ओढे ये बुजुर्ग हमारे

        रा-भूरा शाल ओढ़े ये अनेक बडे पेड़ हमारे वृध्द वरिष्ठ नागरिकों की भाँति ही हमारे सब के आदर व सम्मान के पात्र हैं। धरती के इन जीवन्त वरिष्ठों ने अपनी और हमारी अनेक जड़ व चेतन पीढ़ियों को बढ़ते व फलते-फूलते देखा है, उन्हें पाला व पोसा है । ज्योंहि हम इन बूढ़े वरिष्ठो-पेड़ों के नीचे मानों उनकी शरण में जाते हैं तो हमें ये पेड़ ठण्डक का एहसास कराके बताते हैं कि हम युवा और जीवन्त हैं । यह भी अजीब अनुभव होता है कि पेड़ जितना अधिक वृध्द होता है, उसके नीचे जाकर अपने आप को हम उतना ही अधिक युवा अनुभव करते हैं।

? डॉ. देवप्रकाश खन्ना


5 सितम्बर शिक्षक दिवस पर विशेष

'शिक्षक दिवस' के 51 वर्ष !

       किसी भी देश काल में शिक्षक का महत्व कम नहीं होता। संसार के सभी धर्मों में व्यक्ति के जीवनोत्थान में शिक्षक की भूमिका को सर्वोपरि स्थान दिया गया है। रूस के महान साहित्यकार चेखव से मिलने गोर्की उनके गांव कुचूककोई गये। गोर्की ने बातचीत के दौरान चेखव से पूछा-'आप समाज के विभिन्न वर्गों में किसे अधिक महत्व देते हैं ?' चेखव ने उत्तर दिया-'शिक्षक को।' उन्होंने कहा-'बच्चों तथा युवा पीढ़ी को अच्छे संस्कार देकर आदर्श नागरिक बनाने का दायित्व शिक्षकों पर होता है।    

 

? डॉ. गीता गुप्त


  2 सितम्बर-2013

Designed by-PS Associates
Copyright 2007 PS Associates All Rights Reserved