संस्करण: 2 जून-2014

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धारा 370 : भाजपा और उसके मिथक

     हालियां में नवनिर्वाचित राज्य मंत्री जीतेन्द्र सिंह का धारा 370 को समाप्त करने को लेकर आए बयान को नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की मुलाकात को हमें जोड़कर देखना होगा। क्योंकि संघी 'राष्ट्रवाद' पाकिस्तान विरोध और जम्मू और कश्मीर को लेकर ही हमारे देश में 'फल-फूलता' है। क्योंकि इनके 'पूर्वज' श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कश्मीर संबन्धी धारा 370 के खिलाफ एक अभियान चलाकर 7 अगस्त 1952 में एक नारा दिया 'एक देश दो निशान, एक देश दो विधान, नहीं चलेगा'।   

? अनिल यादव


अब क्या मिसाल दूं...

        रेंद्र मोदी ने सत्ता में आते ही दो ऐसे काम किए, जिनको लेकर बीजेपी पूरे 10 सालों तक झंडा उठाए रही। पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा हुए हमलों के कारण बीजेपी लगातार यूपीए सरकार पर कमजोर होने का आरोप लगाती रही। पाकिस्तान उसे फूटी आंख नहीं सुहाता था। किसी पाकिस्तानी नेता को बुलाना तो दूर उससे बात करना भी बीजेपी को पसंद नहीं था। पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा धोखे से भारतीय सैनिकों के सिर काटने के बाद तो बीजेपी ने भारत की तत्कालीन सरकार को कायर ही करार दिया। कुछ उत्साही बीजेपी नेता तो युध्द तक की बात करने लगे थे। बहरहाल इन घटनाओं का विरोध होना ही चाहिए था। बीजेपी ने कुछ अलग तरीके से किया यह और बात है।

?

विवेकानंद


बदलाव की दिशा

     प्राकृतिक जल के प्रवाह को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचने के दो प्रमुख मार्ग होते हैं जिनमें से एक का नाम नदी होता है और दूसरे को नहर कहते हैं। नदी, उपलब्ध भूगोल में पानी द्वारा अपना मार्ग बनाने और लम्बे काल खण्ड में अवरोधों से निरंतर टकरा कर उसे सुगम बनाते रहने से बनती है, जबकि नहर को अपनी जरूरत के अनुसार निकाला जाता है और जल प्रवाह की दिशा को मनचाहा मोड़ दिया जाता है।

 ? वीरेन्द्र जैन


क्या भाजपा वाकई

एक राष्ट्रीय पार्टी है ?

      जादी के बाद गठित इस 16 वीं संसद के एक पहलू की तरफ लोगों का बहुत कम ध्यान गया है। पहली बात, इस बार की संसद में देश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय के सबसे कम सदस्य होंगे (सिर्फ 21) जबकि अब तक की संसद में इनकी संख्या 28 से 40 रहती आयी है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश - जिसे भारत की हृदयस्थली कहा जाता है, वहां से इस बार अल्पसंख्यक समुदाय से एक भी सदस्य जीत नहीं सका है।

? सुभाष गाताड़े


राममंदिर आदि मुद्दों को लेकर संघ परिवार द्वारा

नरेन्द्र मोदी पर दबाव बनाना शुरू

             क बहुत ही प्राचीन कहावत है कि हाथी के खाने के और दिखाने के दांत अलग होते हैं। यह कहावत पूरी तरह से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर लागू होती है। पूरे चुनाव प्रचार के दौरान संघ परिवार के किसी भी सदस्य ने न राममंदिर बनाने की बात कही, न तो जम्मू एवं कश्मीर से धारा 370 हटाने की मांग की और ना ही समान नागरिक संहिता लागू करने की चर्चा की। स्वयं मोदी ने अपने कुछ भाषणों में यह सुझाव दिया था कि इस बात पर चर्चा होनी चाहिए कि जम्मू एवं कश्मीर में धारा 370 लगी रहे या हटाई जाए। अब चूंकि चुनाव प्रचार समाप्त हो चुका है और नरेन्द्र मोदी जी ने सत्ता संभाल ली है तो इन सब मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से चर्चा प्रारंभ हो गई है।

 ?  एल.एस.हरदेनिया


मोदी से मोदीत्व के निर्माण की पटकथा

           2014 का चुनाव भाजपा ने नहीं मोदी, संघ और कार्पोरेट्स की तिकड़ी द्वारा लड़ा गया, इस तरह का खर्चीला और आक्रमक चुनाव प्रचार पहले कभी नहीं देखा गया था, एक तरफ तो मोदी के साथ व्यवसायी वर्ग की झोली थी तो दूसरी तरफ संघ परिवार का कैडर,जरूरत तत्कालीन सरकार के प्रति जनता में व्याप्त गुस्से को भुनाने और नए नवेले युवा वर्ग की आशाओं को पंख देने की थी।

? जावेद अनीस


आसान नहीं है गंगा की सफाई ?

      देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकास और सुधार संबंधी  उत्साहजनक चिंताओं की अनुगुंज दसों दिशाओं में है। इनमें से एक चिंता पुण्य-सलिला गंगा उध्दार से जुड़ी है। गंगा अपने उद्गम स्त्रोत गंगोत्री से ढाई हजार किमी की यात्रा करती हुई गंगासागर में समाती है। इस बीच करीब एक हजार छोटी-बड़ी नदियां गंगा में विलय हो जाती हैं। गोया,बनारस आते-आते गंगा इतनी मैली और प्रदूषित हो जाती है कि इसमें विचित्र तत्वों के घालमेल से ऐसे सूक्ष्मजीव पनप जाते हैं,जो मनुष्य के लिए जानलेवा हैं।

?  प्रमोद भार्गव


विश्व पर्यावरण दिवस -5जून             

घातक है-प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग ?

     गर हम कहें कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में सबसे ज्यादा भागीदारी प्लास्टिक की है, तो यह कहना गलत नहीं है। क्योंकि सुबह प्लास्टिक के ब्रश से शुरू हुई दिनचर्या प्लास्टिक के इर्दगिर्द ही घुमती रहती है। दूध,पानी खाने का सामान सब कुछ प्लास्टिक में ही पैक आता है। प्रश्न ये है कि प्लास्टिक का इतना उपयोग क्यों? वास्तव में प्लास्टिक में वो तमाम खुबियॉ होती है जो हमारे लिए इसे उपयोगी बनाता हैं।

 

? डॉ. सुनील शर्मा


पर्यावरण

        जैसे-जैसे यह दुनिया अन्योन्याश्रितता (interdependence) की ओर बढ़ रही है वैसे-वैसे हमारा भविष्य और मजबूत  तथा  जोखिम भरा भी होता जा रहा है। यह सही है कि हम सब लोग  इस दुनिया में मिलकर काम कर रहे हैं पर साथ ही साथ हम पर्यावरण के लिए खतरे भी पैदा कर रहे हैं। हमें खुद को आगे विकसित करते  हुए इन खतरों को पैदा होने से रोकना है और समाज को एक मानव संवेदी परिवार बनाकर चलना है।        

? शैलेन्द्र चौहान


प्रसव में जान गंवाती माताएं

      ह राहतकारी है कि देश में मातृ मृत्युदर में कमी आयी है। संयुक्त राष्ट्र की विश्व स्वास्थ्य संगठन की हालिया रिपोर्ट से उद्धाटित हुआ है कि वर्ष 1990 में गर्भधारण संबंधी जटिलताओं के कारण और प्रसव के दौरान तकरीबन 5,23,000 महिलाओं को जान गंवानी पड़ी जबकि 2013 में 2,89,000 महिलाओं की जान गयी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1990 में भारत में जहां प्रति एक लाख शिशु जन्म पर मातृ मृत्यु दर 569 थी, वह 2013 में घटकर 190 रह गयी है। इन आंकड़ों के मुताबिक दो दशकों में मातृ मृत्यु दर में 65 फीसद की गिरावट आयी है। लेकिन यह संतोषजनक स्थिति नहीं है। बल्कि यह आंकड़ें बताते हैं कि बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में देश आज भी बदतर स्थिति में ही है।

? अरविंद जयतिलक


शहरी प्रदूषण ही है अस्थमा का कारण

        भी कुछ दिनों पहले ही हमारे बहुत करीब से अस्थमा दिवस गुजरा। उस दिन बहुत से आयोजन हुए, जिसमें अस्थमा होने के कारण और उससे बचाव पर चर्चा की गई। यह एक परंपरा है, जिसे हम केवल दिवस मनाकर निभाते हैं। इस बीमारी के बारे में हम यह भूल जाते हैं कि अस्थमा को यदि किसी ने विकराल रूप में हमारे सामने खड़ा किया है, तो वह है स्वयं मानव। अस्थमा होने का मुख्य कारण प्रदूषण है। आज प्रदूषण को मानव ने कितना प्रदूषित किया है, यह किसी से छिपा नहीं है।  

? डॉ. महेश परिमल


  2 जून-2014

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