संस्करण: 02 दिसम्बर -2013

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आतंकियों को फूल,

घृणा के सौदागरों के लिए सरोपा

       भारतीय जनता पार्टी के विधायकों - संगीत सोम और सुरेश राणा को पिछले दिनों आगरा की रैली में सम्मानित किया गया, उसी रैली में जिसमें भाजपा के 'प्रधानमंत्री' पद के उम्म्मीदवार नरेन्द्र मोदी पहुंचे थे। भाजपा के इस विधायकद्वय पर यह आरोप है कि उन्होंने मुज्फ्फरनगर दंगों को भड़काने में सक्रिय भूमिका अदा की, इसी के चलते इन दोनों को उत्तर प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की सख्त धाराओं के तहत जेल में डाला गया था।

? सुभाष गाताड़े


विजन न वजन सिर्फ बातों के वीर

        दिल्ली दौड़ में सरपट भाग रहे नरेंद्र मोदी, जो मुंह में आता है वह बोल रहे हैं। उनको यह भान ही नहीं है कि वे जो कर रहे हैं या जो कह रहे हैं उसके मायने क्या हैं? मोदी की तमाम बातों से यह साबित होता है कि या तो वे आम आदमी को बेवकूफ समझते हैं या फिर वे खुद ना समझ हैं। मोदी से हर मंच से यूपीए सरकार को कोसते हैं, कभी महंगाई के नाम पर तो कभी आतंक के नाम पर। नेहरू-गांधी परिवार की इजत उछाले बिना उनका कोई भाषण पूरा नहीं होता। मोदी की इस विधा को पूरी की पूरी बीजेपी उनका राजनीतिक कौशल मानती है।

?

विवेकानंद


जरूरी है सांप्रदायिकता के खिलाफ एक कड़ा कानून

     देश में बेतहाशा बढ़ती जा रही सांप्रदायिकता तथा लोकतंत्र पर उसके गंभीर खतरे से निपटने और, सांप्रदायिक तथा लक्षित हिंसा अधिनियम-2011 को केन्द्र की यूपीए सरकार से पारित कराने के लिए, एक जरूरी जनमत बनाने के उद्देष्य से 'इंसाफ सबके लिए' नामक एक दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन पिछले दिनों इलाहाबाद में हुआ। सांप्रदायिकता से निपटने और देश के सेक्यूलर सामाजिक तथा राजनैतिक ताने-बाने को बचाने के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में कई राज्यों के अनेक संगठनों, प्रगतिशील लेखकों और सेक्यूलर पत्रकारों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।

 ? हरेराम मिश्र


सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा विधेयक से कुछ लोगों को डर क्यों लगता है?

      दिनांक 23-24 नवंबर को इलाहाबाद में आयोजित एक विशाल सम्मेलन में यह तय किया गया कि इस बात के सघन प्रयास किए जायें कि शीघ्र प्रारंभ होने वाले संसद के अधिवेशन में साम्प्रदायिक और लक्षित हिंसा (न्याय और पुनर्वास तक पहुँच) विधेयक राज्यसभा में पेश हो जाएं। इस उद्देश्य से तुरंत एक राष्ट्रव्यापी अभियान प्रारंभ किया जाएगा। इस अभियान के दौरान सांसदों से मुलाकात की जाएगी, विभिन्न पार्टियों के मुखियाओं से भी संपर्क किया जाएगा। इसी तरह से यह प्रयास किया जाएगा कि मीडिया में इस बात का प्रचार हो कि यह विधेयक क्यों आवश्यक है?   

? एल.एस.हरदेनिया


इरान के साथ परमाणु समझौता पश्चिम एशिया की

शांति की तरफ एक अहम कदम है

        श्चिम एशिया के कुछ देशों की तरह इरान को भी काबू में करने की अमरीकी विदेशनीति की योजना को अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अलविदा कह दिया है और इरान के साथ परमाणु मसले पर जिनेवा में सुरक्षा परिषद के सभी स्थायी सदस्यों और जर्मनी के विदेश मंत्रियों के बीच एक समझौता हो गया है। रविवार आधी रात के बात सभी संबध्द पक्षों ने समझौते पर हस्ताक्षर कर दिया। अमरीका, फ्रांस,चीन रूस,ब्रिटेन और जर्मनी के साथ इरान केइस समझौते ने पश्चिम एशिया की राजनीति को एक नई राह पर डाल दिया है ।

 ?   शेष नारायण सिंह


पाँच राज्यों के विधान सभा चुनाव - युवा मतदाता क्या सोचेगा?

           पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव आगामी लोकसभा चुनावों के ठीक पहले होने जा रहे है इसलिए इनके विशेष महत्व से इंकार नहीं किया जा सकता। इन चुनावों की एक खास बात यह भी है कि इन राज्यों में जितने प्रतिशत मतों से हार जीत होती रही है उस अंतर से कहीं अधिक नये और युवा मतदाता जुड़ चुके हैं और जीत हार का गणित इन मतदाताओं के झुकाव पर निर्भर करेगा। दूसरी ओर उदासीन रहने वाले मतदाता को मतदान के लिए सक्रिय करने के अभियान इस बार जिस तीव्रता से चलाये जा रहे हैं वैसे भी पहले नहीं चलाये गये थे। ये चुनाव इस मामले में भी भिन्न हैं कि पहली बार मतदान मशीन में नोटा नन आफ दि एबोव, बटन का विकल्प दिया गया है, और कम बुरे के चुनाव की मजबूरी भी समाप्त हुयी है।  

? वीरेन्द्र जैन


महिलाओं के सशक्तिकरण में मददगार होगा महिला बैंक

      माज के कमजोर वर्ग की महिलाओं को कम ब्याज दर पर कर्ज देकर उन्हें आर्थिक तौर पर स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से सरकार ने देश में महिला बैंक शुरू करने का फैसला किया है। हाल ही में इस बैंक की पहली शाखा का महाराष्ट्र के मुंबई में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उद्धाटन किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री के साथ यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी और वित्त मंत्री पी. चिदंबरम भी मौजूद थे। एक हजार करोड़ रुपए के शुरूआती कोष के साथ शुरू किया गया यह बैंक, पूर्णतया महिलाओं द्वारा और महिलाओं के लिए संचालित बैंक है।

?  जाहिद खान


रेल में सुरक्षा कब सुनिश्चित होगी ?

दहशत में ट्रेन यात्रा

     नबाद के कार्मेल स्कूल की छात्रायें भविष्य में जब भी ट्रेन यात्रा करेंगी तो उन्हें 23 नवम्बर की ट्रेन यात्रा याद आएगी। इस दिन कार्मेल स्कूल की 90छात्राएं गंगा दामोदर एक्सप्रेस में यात्रा कर रही थीं तथा तीन अलग अलग बोगियों में उनका रिजर्वेशन था। उनके साथ उनकी शिक्षिका सोनाली सिंह थीं। रेलवे ग्रुप डी की परीक्षा देने जा रहे छात्रों के समूह ने छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार तथा छेड़खानी की तथा विरोध करने पर शिक्षिका को भी चोट पहुंचाया। छात्रों ने छात्राओं की आरक्षित सीटों पर कब्जा जमाया तथा छात्राएं दूसरी बोगी में जाने को मजबूर हुईं।

 

? अंजलि सिन्हा


मध्यप्रदेश के शहरी क्षेत्र में कुपोषण की स्थिति

        ध्य प्रदेश के चार शहर भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर व इंदौर तेजी से विकसित होते हुए मध्यप्रदेश के सबसे बड़े शहरी केन्द्र है। यदि शहरी जनसंख्या की वर्तमान वृध्दि दर जारी रहती है ऐसी स्थिति में वर्ष 2021तक 2.4 करोड़ हो जायेगी। तब मध्यप्रदेश की कुल जनसंख्या में शहरी जनसंख्या का हिस्सा 30प्रतिशत हो जायेगा जोकि इस शताब्दी के चौथे दशक तक 40प्रतिशत हो जायेगा। इसका मतलब यह है कि तब तक प्रदेश में 550नगर व शहर हो जायेंगें। म.प्र के ग्रामीण क्षेत्रों में तो मात्त्व और बाल स्वास्थ एवं पोषण की स्थिति जगजाहीर है पर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में भी स्थिति कोई खास अच्छी नही कही जा सकती।

? जावेद अनीस/राकेश चंदोरे


बच नहीं सकते हम महाप्रलय से

      रसों से अत्याचार सह रही प्रकृति ने अब अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू किया है। केदारनाथ की तबाही को हम प्रकृति की अंगडाई कह सकते हैं। अभी तो हमें भयंकर बाढ़, कँपकँपाती ठंड, झुलसाती गर्मी, तेज बारिश और भीषण अकाल के लिए तैयार होना होगा। समय-समय पर प्रकृति ने अपने होने का अहसास कराया है। आज हमारी धरती मां छटपटा रही है। मां की इस छटपटाहट को गुरुदास जी ने अपनी कविता में शब्द दिए हैं। वे कहते हैंरू- मैं पर्वतों के भार से पीड़ित नहीं हूं,  मेरी गोद में बिछी हुई वनस्पति, वृक्ष, जीव-जंतुओं के भार से भी पीड़ित नहीं हूं,नदी-नाले समुद्र के भार भी मेरे लिए बहुत छोटे हैं, मेरे ऊपर भार तो वे हैं, जो मेरे साथ छल-कपट कर रहे हैं, विश्वासघात कर रहे हैं, प्रकृति की गोद में खेल रहे हैं, यहां की हवाओं में सांस ले रहे हैं और उसी का विनाश कर रहे हैं।     

 

? डॉ. महेश परिमल


जहरीले कचरे से मुक्ति जरूरी

        दुनिया के भीषणतम घटनाओं में से एक भोपाल गैस त्रासदी के 29 वर्ष पूरे हो जाने के बाद भी गैस पीडीतों को पूरी तरह न्याय नहीं मिल पाया है। गैस पीडीतों के पुर्नवास और राहत के सरकारी दावे फाईलों में भले ही बेहतर नजर आयें लेकिन इनकी सच्चाई दुखद है। गैस पीडित और उनके परिवार बेरोजगारी,बीमारी के साथ अपना जीवन जीने पर मजबूर हैं। सरकार ने गैस पीडितों के लिए 715 करोड रूपये के मुआवजे की जो व्यवस्था की ,वह अपर्याप्त है। इस बेहद कम मुआवजे का वितरण भी सही तरीके से नहीं हो पाया है।

? अमिताभ पाण्डेय


  02 दिसम्बर -2013

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