संस्करण: 2 अप्रेल- 2012

CLICK HERE TO DOWNLOAD HINDI FONT


संघ-भाजपा :

चरित्र निर्माण की मुश्किले

           रित्रनिर्माण का ककहरा आए दिन रटनेवाले संघ परिवार जनों के लिए इधर बीच प्रकाशित कुछ तस्वीरें लम्बे समय तक याद रहेंगी।

                एक तस्वीर में सूबा मध्यप्रदेश के भाजपा अध्यक्ष जनाब प्रभात झा जिला बदर अपराधी शाकिब डेंजर के साथ खड़े दिख रहे हैं,यह वही डेंजर है जिसके खिलाफ टीला जमालपुरा थाने में हत्या सहित 25मामले दर्ज है तथा जिसे पिछले दिनों भोपाल की आरटीआई कार्यकर्ती शहला मसूद की हत्या करने के आरोप में पकड़ा गया है ;इस घटना के चन्द रोज पहले जनाब झा किसी अन्य असामाजिकतव के साथ दिखे थे,जो फोटो कई अख़बारों में प्रकाशित हुई थी।

  ? सुभाष गाताड़े


गरीबों को शिक्षा से

वंचित करने की कला

        र्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर एक बार फिर विवादों में हैं। जयपुर में आदर्श विद्या सोसाइटी द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में उन्होंने सरकारी स्कूलों को बंद करके उनके निजीकरण की मांग की है। इसके पीछे उनका तर्क है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे नक्सलवादी बनते हैं जबकि निजी स्कूलों के विद्यार्थी अनुशासित और अच्छे संस्कारों वाले होते हैं। गौरतलब है कि श्री श्री रविशंकर इससे पहले भी संघ परिवार के सांप्रदायिक एजेण्डे से अपनी सहमति के कारण विवादित होते रहे हैं।

? शाहनवाज आलम


मध्यावधि के इंतजार में

राजनीतिक बगला भगत

      ताकत आती है तो हौसले बुलंद हो जाते हैं और फिर इंसान कई बार नफे-नुकसान का आकलन किए बगैर कुछ गंभीर कदम उठा जाता है, जिसका नुकसान न केवल उसे बल्कि दूसरों को भी भुगतना पड़ता है। और कई बार तो मामला लम्हों ने खता की थी सदियों ने सजा पाई तक पहुंच जाता है। यह काम कई बार निजी कामनाओं, वासनाओं और बदले की भावना के कारण भी हो जाता है।

? विवेकानंद


जेल अधिकारी के पास दौलत के खजाने : एक विचारणीय प्रश्न

          ध्य प्रदेश में शायद ही कोई सप्ताह ऐसा जाता हो जब किसी अफसर, इंस्पेक्टर, क्लर्क, चपरासी, ठेकेदार, व्यापारी, नेताओं के दलाल आदि के यहाँ आयकर या लोकायुक्त का छापा न पड़ता हो या और उस छापे में अकूत धन सम्पत्ति आदि न बरामद होती हो। बरामद की गयी ये अनुपातहीन सम्पत्ति रिश्वत, कमीशन, आदि के द्वारा अर्जित की जाती है जो या तो अदालत दर अदालत लम्बे चले मुकदमों के बाद वापिस उसी व्यक्ति के पास पहुँच जाती है,या मामूली जुर्माने आदि लगा कर मामले को रफा दफा कर दिया जाता है। प्रदेश की जेलें अभी तक दण्डित भ्रष्टाचारियों को कैद रखने के लिए तरस रही हैं। वह सम्पत्ति कैसे कैसे और किस किस के गलत काम कर कर के अर्जित की गयी होती है उसकी कोई पूछ परख नहीं की जाती ताकि भविष्य में उसके रोकने की व्यवस्थाएं की जा सकें।

? वीरेन्द्र जैन


माओवाद के विरुध्द

निर्णायक युध्द का समय

         डिशा में सत्तारूढ़ बीजद सरकार के विधायक झीना हिकाका को माओवादियों द्वारा बंधक बनाने की घटना ने माओवादियों के बुलंद हौसले और सरकार की कमजोरी को तो उजागर किया ही है,साथ ही राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार के मध्य चले आ रहे टकराव को भी सार्वजनिक कर दिया हैद्य इससे पहले दो हफ्ते पूर्व माओवादियों ने ओडिशा से ही दो इतावली पर्यटकों को बंधक बना कर सरकार और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींचा था। संबंधित मामले में राज्य सरकार वार्ता की प्रक्रिया का अनुमोदन कर ही रही थी कि अब जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि के माओवादियों द्वारा बंधक बनाए जाने की घटना ने हमारे सूचना तंत्र तथा सुरक्षा व्यवस्था के खोखलेपन को प्रदर्शित किया है।

 ? सिध्दार्थ शंकर गौतम


मध्यावधि-एक भ्रम और दिवास्वप्न है,

न सूत न कपास-जुलाहों में लट्ठम लट्ठी

           राजनैतिक गलियारों में इस वक्त मधयावधि चुनाव का ऐसा डर फैलाया जा रहा है कि देश में किसी भी वक्त लोकसभा के निर्वाचन घोषित हो जायेंगे। देखा जाय तो जिन राजनैतिक दलों और उनके लीडरों के द्वारा मधयावधि चुनाव का हौवा खड़ा किया जा रहा है वे राजनैतिक दल और उनके नेता केन्द्रिय सत्ता पर काबिज होने का दिवास्वप्न देखने लगे हैं। लगता है कतिपय राजनैतिक दलों और क्षेत्रीय पार्टियों ने राज्यों की सत्ता पर जिस तरह से बढ़त बढ़ाकर अपना कब्जा जमा लिया है उन्हें लगने लगा है लोकसभा के निर्वाचन में भी वे जनाधार को अपने पक्ष में करने में कामयाब हो जायेंगे। भारत का मतदाता अब इतना तो समझने लगा है कि राज्य की सत्ताओं और केन्द्र की सत्ता के कार्यों और उत्तरदायित्वों में समानता नहीं है। 

? राजेन्द्र जोशी


ट्रेन में असुरक्षा

       पिछले कुछ समय रेल मंत्रालय काफी चर्चा में है। पिछले दिनों दिनेश त्रिवेदी से यह मन्त्रालय छीन कर तृणमूल के ही मुकुल राय को थमाया गया है। यात्री भाड़े में वृध्दि को लेकर बताया जाता है कि 'दीदी'ने यह कदम उठाया है। 'दीदी'से जनता खुश हुई होंगी कि उन्होंने उनका खयाल किया। अब महिलाएं भी अच्छी-खासी संख्या में सफर करने लगी हैं लिहाजा उन्हें भी इसका निश्चित लाभ मिलेगा। लेकिन ट्रेनों में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध पर ना तो 'दीदी' का ध्यान गया न दिनेशजी ने इसपर कोई विशेष पहल कर दिखायी थी, न मुकुल राय ने अबतक इस मामले में कोई खास बन्दोबस्त का वायदा किया है।

? अंजलि सिन्हा


योग्यता-परख में एकरुपता क्यों नहीं        

      क ही संस्थान में पढ़े व परीक्षा देकर निकले छात्रों को अलग-अलग सरकारी नौकरियों के लिए कभी योग्यता प्रदायी परीक्षा की मेरिट तो कभी एक दूसरी परीक्षा से गुजरना पड़ता है। मसलन, स्नातक की योग्यता रखने वाले तमाम लोगों को यदि कई सरकारी नौकरियाँ उनके प्राप्तांकों की मेरिट के आधार पर मिल जाती है तो इसी योग्यता वाली कई सरकारी नौकरियों के लिए उन्हें पुन:एक परीक्षा देनी पड़ती है जिसमें प्राप्त अंकों से उनकी मेरिट का निर्धारण किया जाता है और इस प्रकार उनकी स्नातक परीक्षा के प्राप्तांकों की कोई अहमियत नहीं रह जाती। योग्यता-परख का यह दोहरा मानदंड अगली कक्षाओं में प्रवेश के लिए भी अपनाया जाता है और इस प्रकार यह परीक्षाओं में नकल की प्रवृत्ति बढ़ाने में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।

 

? सुनील अमर


संदर्भ : हिन्दू विवाह अधिनियम में संशोधन

हिन्दुओं में भी तलाक होगा आसान, मगर...

        भी तक तो हिन्दुओं में विवाह-विच्छेद की प्रक्रिया ख़ासी जटिल रही है। लेकिन हाल ही में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने हिन्दू विवाह कानून में जिस तरह के संशोधन को स्वीकृति दे दी है,उससे हिन्दुओं में भी विवाह संबंध को तोड़ना आसान हो जाएगा। स्मरणीय है कि उक्त संशोधन विधेयक वर्ष 2010में राज्यसभा में प्रस्तुत किया गया था। फिर इसे संसद की कानून एवं कार्मिक मामलों की स्थायी समिति के पास भेजा गया। जयन्ती नटराजन की अध्यक्षता वाली इस समिति की सिफ़ारिशों के आधार पर विधेयक का मसौदा दुबारा तैयार किया गया। जिसे दो वर्ष बाद अब जाकर मंत्रिमंडल ने स्वीकृति दी है और संसद में पारित होने के बाद यह क़ानून का रूप ले सकेगा।

? डॉ. गीता गुप्त


रक्षा सौदे में

घूस की पहल

    दि थल सेनाध्यक्ष के बयान की तफ्तीश भूत की आशंकाओं और भविष्य की संभावनाओं के परिप्रेक्ष्य में नहीं की जाती तो मामला 'सूत न कपास,फिर भी लट्ठम-लट्ठा'कहावत को चरितार्थ करने का पर्याय भर रह जाएगा। जैसा कि लोकसभा और राज्यसभा में पक्ष-विपक्ष की हंगामी तकरार में देखने को मिला। क्योंकि इस मामले में चूक तो तभी हो चुकी थी जब वीके सिंह को 600घटिया वाहनों के बदले में 14करोड़ रिश्वत की पेशकश की गई थी। इस चूक में दो बातें साफ हुई हैं। एक तो यह कि रक्षा सौदों में लगे दलालों की हैसियत इतनी बड़ी है कि सेना प्रमुख जैसे व्यक्ति भौचक्के रहकर विवेकशून्य हो जाएं।

 

? प्रमोद भार्गव


किसानों के साथ छलावा है, फसल बीमा योजना

     मारे मुल्क में किसानों की हालत सुधारने या उन्हें राहत देने के मकसद से सरकारी स्तर पर कई पहल हुई हैं। एक दशक पहले शुरू हुई राष्ट्रीय फसल बीमा योजना ऐसी ही एक पहल है। इस योजना का सीधा-सीधा मकसद फसल नष्ट होने की स्थिति में क्षतिपूर्ति करना और किसान को मदद पहुंचाना है। अपने घोषित मकसद की वजह से जाहिर है, यह योजना काफी लोक लुभावनी दिखलाई देती है। लेकिन हकीकत इसके उलट है। बीमा कंपनियों ने बड़ी ही चालाकी से इसकी ऐसी शर्तें तय की हैं कि हर्जाने का दावा मान्य होने पर,कंपनियों को बहुत मामूली भुगतान देना पड़े। यही नहीं,मुआवजा भी तब मिलता है,जब तालुका या प्रखंड स्तर पर फसल बर्बाद हुई हो।

? जाहिद खान


गरीब कौन: पुर्नविचार की जरूरत? 

    मारी धरती रत्नप्रसविनी है। इसे हम सभी जानते हैं। किंतु कुछ लोग इसे और भी अधिक अच्छी तरह से जानते हैं,इसलिए इसके गर्भ से लगातार खनिजों का दोहन कर न केवल रुतबेदार बल्कि बलशाली भी होने लगे हैं। कर्नाटक के रेवी बंधुओं के बाद अब मध्यप्रदेश भी माफियाओं की चपेट में आ गया है। रेवी बंधुओं ने 80लाख टन खनिज की चोरी कर सरकार को करीब 2,800करोड़ की कमाई की। उधर मध्यप्रदेश में रेत माफिया एवं खनिज माफिया ने कितने वर्षों में कितने की कमाई की,इसका आकलन नहीं किया जा सका है। पर सच तो यह है कि ये माफिया इतने अधिक बलशाली हैं कि विरोधी स्वर को तुरंत खामोश कर देते हैं। उन्हें प्रदेश के नेताओं का वरदहस्त प्राप्त है।

 

? डॉ. सुनील शर्मा


कमलाप्रसाद के समकालीनों, प्रशसंकों और देश के प्रमुख साहित्यकारों ने उन्हें खूब याद किया उनकी पहली बरसी पर

     रदिल अजीज ''कमांडर'' डॉ. कमला प्रसाद को हम सबसे विदा हुए एक वर्ष हो गया। सहसा विश्वास नहीं होता है कि उनकी मृत्यु हुए एक साल का समय गुजर गया। उनकी पहली बरसी (25 मार्च, 2012) को वे सबको बहुत याद आए। इस दिन उन्हें एक मर्मस्पर्श  कार्यक्रम आयोजित कर सतना में याद किया गया। उनका जन्म सतना जिले के एक गाँव में हुआ था इसलिए उनके प्रशंसकों, साथियों, सहयोगियों और सहकर्मियों ने 25 मार्च को एक भव्य आयोजन कर उन्हें याद किया। मैंने अपने जीवनकाल में शायद कभी इतना अद्भुत कार्यक्रम किसी की मृत्यु का पहली बरसी पर आयोजित होते नहीं देखा। श्रध्दांजलि कार्यक्रम से ज्यादा वह देश के अनेक मूर्धान्य साहित्यकारों का सम्मलेन था।

? एल.एस.हरदेनिया


  2 अप्रेल2012

Designed by-PS Associates
Copyright 2007 PS Associates All Rights Reserved