संस्करण: 02मार्च-2009

केंद्र सरकार की अनूठी पहल
हर भारतीय नागरिक को मिलेगा पहचान-पत्र


 

डॉ. गीता गुप्त

                   दुनिया में अपनी तरह का एक अनूठा किंतु महत्वपूर्ण और सबसे बड़ा प्रोजेक्ट केंद्र सरकार द्वारा योजना आयोग को सौंपा गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा हेतु गठित एक उच्च स्तरीय समिति की सिफारिश के बाद सरकार प्रत्येक भारतीय नागरिक को विशेष पहचान क्रमांक देने की तैयारी कर रही है। अब सभी नागरिकों के पहचान पत्र जारी किये जाएँगे, जिनमें उनकी समस्त व्यक्तिगत जानकारियों का विवरण होगा। हर नागरिक को अलग-अलग नंबर आवंटित किया जाएगा। ये पहचान पत्र नागरिकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होंगे। यदि सरकार इस व्यवस्था को अमली जामा पहनाने में सफल होती है तो इसके दूरगामी सकारात्मक परिणाम दृष्टिगोचर होंगे। अभी अमेरिका में ऐसी व्यवस्था लागू है।
यह सर्वविदित है कि भारत में अवैधा रूप से रह रहे लोगों की तादाद करोड़ों में है। इसके अलावा प्रतिदिन घुसपैठ करने वालों की संख्या भी कम नहीं है। ऐसे लोगों की मौजूदगी सुरक्षा ही नहीं, अन्य दृष्टियों से भी अनेक समस्याओं को जन्म देने वाली है। सरकार भी इस बात को स्वीकार करती है। अवैधा आव्रजन के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा के बढ़ते खतरे को नज़रअंदाज किया जाना घातक होगा। इसलिए विलंब से ही सही, प्रत्येक नागरिक को पहचान-पत्र उपलब्धा करवाने का सरकार का क़दम बहुत उपयोगी सिध्द होगा। हर भारतीय नागरिक को एक ख़ास परिचय क्रमांक सुलभ कराने से सुरक्षा-एजेंसियों का कार्य आसान हो जाएगा। इससे पहचान की धोखाधाड़ी को पकड़ने के अलावा अवैधा आव्रजन को रोकने में भी सहायता मिलेगी। अभी विकास-योजनाओं सहित कई प्रकरणों में फर्जीवाड़े के कारण सही व्यक्ति के लाभ से वंचित होने की घटनाएँ अक्सर उजागर होती हैं। ऐसी स्थितियों से निपटने में पहचान-पत्र सहायक होगा और तमाम योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति को उपलब्धा कराया जाना संभव हो सकेगा।
नागरिकों को उपलब्धा कराया जाने वाला पहचान-पत्र वस्तुत: स्मार्ट कार्ड जैसा होगा। जब इसे पंचित मशीन में डाला जाएगा तो संबंधित व्यक्ति की सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त हो जाएगी। अभी देश के बारह राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के तेरह ज़िलों में ऐसे पहचानपत्र की व्यवस्था लागू की गयी है। शीघ्र ही समूचे देश में यह योजना लागू की जाएगी। दरअसल अटलबिहारी वाजपेयी की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधान सरकार के कार्यकाल में ही यह योजना प्रकाश में आयी और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधान सरकार ने सत्ता में आने के बाद भी इसे जारी रखा।
गत वर्ष तेरह जिलों में बहुउद्देशीय पहचान पत्र की एक पायलट योजना लागू तो की गयी किंतु यह 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए ही है। इसलिए इसपर विचार-विमर्श चल रहा हैं। आख़िर कम उम्र के लोगों को भी तो अपनी नागरिकता की पहचान के प्रतीकात्मक रूप की आवश्यकता है। कहा जा रहा है कि अमेरिका की तर्ज़ पर यू आई डी सिस्टम 'नागरिकता कानून' संशोधान (सन् 2003) के तहत जन्म के बाद ही जारी किया जाएगा। अर्थात कार्ड जारी होते ही प्रत्येक नागरिक का एक सामाजिक सुरक्षा नंबर निधर्रित होगा जिसकी जानकारी सभी सुरक्षा एजेंसियों को होगी। पहचान संबंधाी धाोखाधाड़ी और घुसपैठियों को रोकने में यह व्यवस्था कारगर सिध्द होगी। निश्चित रूप से योजना आयोग के अंतर्गत चलने वाली यह डाटाबेस विशाल परियोजना बहुत महत्वपूर्ण है। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर अधिकारी नियुक्त किये जाएंगे।परियोजना का कार्यालय केंद्र शासित प्रदेशों और सभी राज्यों में स्थापित होगा। नवंबर 2008 में विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी की अधयक्षता में कैबिनेट कमेटी इस योजना को स्वीकृति दे चुकी है।
यू.आई.डी. सिस्टम में हर नागरिक को एक यूनिक आई.डी. नंबर आबंटित किया जाएगा। यह नागरिक का पहचान पत्र होगा। इसमें जन्म तिथि, जन्म-स्थान एवं माता-पिता का नामोल्लेख होगा। इसके अलावा निवास, शैक्षणिक ब्यौरा और आय संबंधाी जानकारी भी अंकित रहेगी। अनुमान है कि सन् 2011 की जनगणना के बाद इस परियोजना के कार्य में तेज़ी आएगी।योजना आयोग यू आई डी अथॉरिटी का गठन करेगा और इस कार्य के लिए अलग से धान की व्यवस्था की जाएगी।
नि:संदेह इस योजना पर अमल से समस्त देशवासी लाभान्वित होंगे। सुरक्षा-व्यवस्था की दृष्टि से यह अत्यंत महत्वपूर्ण क़दम साबित होगा। यह पहचान संबंधाी फर्ज़ीवाडे को नियंत्रित करने में तो सहायक होगा ही, इससे अपराधिायों और घुसपैठियों की पहचान भी आसानी से हो सकेगी और उन्हें भारत में खदेड़ा जा सकेगा। इससे देश के विकास कार्यों की गति तीव्र होगी और उनका लाभ सही लोगों को मिल सकेगा। बहरहाल चुनाव आयोग द्वारा जारी मतदाता पहचान-पत्र और आयकर विभाग द्वारा जारी पैन कार्ड (PAN-CARD) का उपयोग पहचान-पत्र के रूप में किया जाता है परंतु इसका क्षेत्र अत्यंत सीमित है। मतदाता पहचान-पत्र 18 वर्ष तथा इससे अधिाक उम्र के लोगों को ही दिया जाता है और पैन कार्ड केवल आयकरदाताओं को ही जारी किया जाता है। तो जो व्यक्ति न मतदाता हैं, न ही आयकर के दायरे में आते हैं उनकी पहचान की व्यवस्था कैसे होगी ? यह भी सच है कि इस विशाल देश में लाखों ऐसे लोग होंगे जिन्होंने पात्रता के बावजूद मतदाता पहचान-पत्र भारतीय नागरिकता के प्रमाण नहीं हो सकते। अत: एक ऐसा विकल्प तलाशा जाना चाहिए जो सभी उम्र के लोगों पर लागू हो सके। अभी इस विषय पर मंथन जारी है।
समूचे देश में आतंकवाद तेज़ी से फैल रहा है। हिंसा और अपराधा में निरंतर वृध्दि हो रही है। हमारे घरों में अवांछनीय तत्व आसानी से प्रवेश करके तांडव मचा रहे हैं। हालात बिगड़ते ही जा रहे हैं। हमारी पुलिस व्यवस्था नागरिकों की सुरक्षा करने में नाकाम है। हम स्वयं अपने आसपास से बेख़बर रहने के आदी हैं। कोई भी षडयंत्रकारी किसी भी देश से कभी भी आकर कितने भी समय तक हमारे देश में रह सकता है क्योंकि हम एक ज़िम्मेदार जागरूक नागरिक की भांति बर्ताव नहीं करते। अंजान संदिग्धा व्यक्ति को देखकर हम ठिठकते नहीं, कोई पड़ताल भी नहीं करते। हम किसी को पहचानते नहीं, अपनी पहचान मुट्ठी भर लोगों तक सीमित रखते हैं। ऐसे में देश की शांति और सुरक्षा के उद्देश्य से सरकार नागरिकों के लिए पहचान-पत्र जारी करने की दिशा में प्रयत्नशील है तो यह स्वागतयोग्य है। यह तय है कि प्रत्येक अच्छी योजना तभी सफल हो सकती है जब सरकार को जनता का भरपूर प्रयोग प्राप्त हो। आखिर जनता की भलाई का नैतिक दायित्व है कि देश की शांति, उन्नति और रक्षा के लिए सरकार द्वारा उठाये जा रहे क़दम के साथ अपने क़दम मिलाकर उसकी योजना को सफल बनाने में योगदान करे।

 


डॉ. गीता गुप्त