संस्करण: 29 सितम्बर- 2014

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परिणाम देने में अक्षम क्यों है मोदी मंत्रिमण्डल

     कुछ राज्यों में हुये विधानसभा के उपचुनावों से यह साफ संकेत मिलता है कि गत लोकसभा चुनावों के दौरान सृजित भ्रम टूटता जा रहा है क्योंकि मोदी सरकार उन वादों की पूर्ति की ओर बढती नजर नहीं आ रही जिन से आकर्षित हुये सक्रिय मतों के सहारे उन्होंने अपनी बढत बनायी थी और  स्पष्ट बहुमत तक पहुँचने में सफल हुये थे। हमारे देश में सभी नागरिकों को समान रूप से मत देने का अधिकार है किंतु सभी मतदाताओं की चेतना का स्तर एक जैसा नहीं है। 

? वीरेन्द्र जैन


मोदी मीठे और घर-घर नफरत का बीज बोने का इंतजाम

        प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एक चैनल को इंटरव्यू दिया। सबसे पहले तो यही चौंकाने वाला है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद देश के मीडिया को छोड़कर किसी विदेशी चैनल को इंटरव्यू क्यों? खैर! शायद यह सोचा हो कि भारतीय मीडिया तो यूं ही गुण गाने में लगा है, इसलिए इसे इंटरव्यू देने की जरूरत नहीं है। इस इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो कहा वह काबिल-ए-तारीफ तो है, लेकिन आगे-पीछे चल रहे घटनाक्रमों, बीजेपी और उसको पैदा करने वाले से लेकर हरवक्त मदद वाले संगठनों तक के क्रियाकलापों यह कहते हैं कि ....... 

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विवेकानंद


सेक्युलर आवाजों के लिए खुशखबरी धर्म बताने की मजबूरी अब नहीं !

     मुंबई उच्च अदालत के हालिया फैसले की अनुगूंज, जिसमें एक जनहितयाचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अभय ओक और ए एस चांदुरकर की द्विसदस्यीय पीठ ने केन्द्र और राज्य सरकार को जो आदेश दिया कि वह किसी भी व्यक्ति को अपना धर्म बताने के लिए किसी भी सरकारी फाॅर्म या घोषणापत्र में मजबूर नहीं कर सकते लम्बे समय तक सुनाई देगी। अदालत का कहना था कि हर व्यक्ति को यह दावा करने का अधिकार है कि वह किसी भी धर्म से सम्बधित नहीं है और वह कोई भी धर्म पर आचरण नहीं करता और न ही उसको प्रचारित करता है।

 ? सुभाष गाताड़े


फैसले से कुछ खास उम्मीद नहीं

      पुलिस मुठभेड़ों की असलियत पर लगातार उठते सवालों को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में पीयूसीएल की एक याचिका पर राज्यों को कुछ दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। सर्वोच्च अदालत ने अपने निर्देशों में कहा है कि मुठभेड़ों से होने वाली मौतों पर एफआईआर दर्ज कर उसकी पूरी जांच की जाए। अदालत ने कहा है कि पुलिस मुठभेड़ में मौत की मजिस्ट्रेट स्तर से जांच होनी चाहिए तथा मुठभेड़ में इस्तेमाल हथियार की फोरेंसिक जांच भी हो।

? हरे राम मिश्र


उपचुनावों में मतदाताओं ने भाजपा की सांप्रदायिक अपील को नकारा है

           सितंबर (2014) माह में हुये उपचुनावों के नतीजों से भारतीय जनता पार्टी को न सिर्फ झटका लगा है वरन् यह भी स्पष्ट संकेत मिले हैं कि चुनाव प्रचार के साम्प्रदायिककरण से विजय हासिल नहीं होती है। भाजपा को लगता था कि चूंकि हमने उत्तरप्रदेश की 73लोकसभा सीटों में अपनी विजय पताका फहरा दी है इसलिए अब हमें बड़ी से बड़ी ताकत शिकस्त नहीं दे सकती। वह अपने आप को अजेय समझने लगी थी। इसलिये भाजपा ने उत्तरप्रदेश के उपचुनाव के लिये प्रचार का उत्तरदायित्व घनघोर साम्प्रदायिक नेताओं को सौंप दिया था। ये नेता ऐसे हैं जब भी मुंह खोलते हैं जहर उगलते हैं। इस तरह के नेताओं की सूची में सबसे ऊपर थे महंत आदित्यनाथ।

  ?  एल.एस.हरदेनिया


लौहपुरुष के प्रशंसक का मुलायम चेहरा

         गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी देश के पहले गृहमंत्री लौह पुरुष सरदार पटेल की जमकर सराहना की थी और उनकी स्मृति में देश की विशालतम प्रतिमा लगाने की घोषणा भी की थी। इससे जनसमुदाय में यह संदेश गया था कि मोदी भी सरदार पटेल की तरह समस्याओं के सीधे-सटीक समाधान के पक्षधर हैं। हैदराबाद को भारतीय संघ में समाहित करने और सोमनाथ की मुक्ति में सरदार पटेल की अहम भूमिका थी। संभवतः उनकी इसी छवि को भुनाने के उद्देश्य से मोदी ने पटेल राग अलापा था।

? महेश बागी


समाज में निहित है हेट स्पीच

      त्तर प्रदेश के कानपुर जिले में स्थित भितरगांव कस्बे के बारे में 24 अगस्त 2014 के पहले शायद ही कोई जानता था। प्रदेश में स्थित अन्य कस्बों की तरह यह कस्बा भी एक सामान्य कस्बे जैसा ही था,जहां हिंदुओं और मुसलमानों की आबादी साथ-साथ बेहद हंसी-खुशी के माहौल में रहती थी। लेकिन,24अगस्त को चोरी की एक मामूली सी घटना के बाद,पूरे इलाके का वातावरण अचानक गर्म हो गया और फिर प्रायोजित तरीके से कस्बे के मुसलमानों के खिलाफ जबरजस्त हिंसा भड़क गई।

? राजीव यादव


अमेरिका की आतंकवाद के खिलाफ दोहरी नीति

     हज शब्दों में यदि कहा जाये तो हिंसात्मक घटनाओं के माध्यम से लोगों में भय पैदा करना,आतंकित करना कहलाता है और यह कार्य आतंक कहलाता है। जब यह आतंक भयानक रूप से सब ओर फैल जाता है तो इसे आतंकवादकहते हैं। आज इसने संपूर्ण विश्व को अपनी चपेट में ले रखा है। इसका प्रमुख कारण यह है कि विश्व का कोई भी राष्ट्र बहुत गंभीरता साथ इसे खत्म करने का प्रयास नही कर रहा है। खास तौर से वे बलशाली देश जो महाशक्ति कहे जाते हैं।

? शैलेन्द्र चैहान


सीमा विवाद पर चीन ने दिखाया ठेंगा

        श्चिम एशिया ,खासकर इराक और सीरिया में अमरीकी विदेशनीति को बहुत ही कठिन दौर से गुजरना पड़ रहा है। अभी कुछ अरसा पहले  इराक के युद्ध से अपने देश को अलग कर चुके अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को फिर इराक में सैनिक कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कई साल पहले अमरीकी शहरों पर 11 सितम्बर को आतंकवादी हमले के बाद से सभी अमरीकी राष्ट्रपतियों ने इराक पर हमले किये हैं।    

? शेष नारायण सिंह


कैसे पूरा होगा डिजिटल इंडिया का सपना

      पिछले दिनों केंद्र सरकार ने देश को डिजिटल रूप में सशक्त बनाने और एक ज्ञान अर्थव्यवस्था में तब्दील करने के लिए लगभग एक लाख करोड़ रुपये मूल्य की विभिन्न परियोजनाओं वाले डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है। अब देश का हर गांव इंटरनेट से जुड़ेगा और सरकारी काम भी अॉनलाइन होंगे। इस कार्यक्रम में शामिल परियोजना का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सेवाएं नागरिकों को इलेक्ट्रानिक माध्यम से उपलब्ध हों और लोगों को नवीनतम सूचना व संचार प्रौद्योगिकी का लाभ मिले।

? शशांक द्विवेदी


कितना जानते हैं हम बापू को

        गांधी जयंती पर लोग बापू को बहुत याद करते हैं। उनके नाम पर देश भर में वैसे भी अवकाश घोषित कर दिया गया है। दूसरी ओर उन पर केंद्रित अनेक कार्यक्रम होंगे, जिसमें उनकी वाणी, उनके उपदेश आदि को जीवन में उतारने का संकल्प लिया जाएगा। पर गांधी के सिद्धांतों पर चर्चा कर उसकी गहराई को समझने का प्रयास शायद ही कोई कर पाएंगे। गांधी केवल एक नाम ही नहीं, बल्कि एक विचार है। जो साधारण से विचार से शुरू होकर एक क्रांति पर जाकर खत्म होती है।                    

? डा. महेश परिमल


पर्यावरण के लिए खतरा, अस्पताल का कचरा

      स्पताल का काम बीमारों का उपचार और बीमारी को खत्म करने का है लेकिन यदि अस्पताल ही बीमारी बढाने, प्रदूषण फेलाने पर्यावरण को बिगाडने का काम करने लगे तो फिर नई नई बीमारियों का बढना और इनसे लोगों को पीडित होने से कौन रोक सकता है? हाल ही में प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट एक रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है कि भोपाल के लगभग 67 अस्पतालों में  पर्यावरण को बेहतर बनाये रखने के लिए निर्धारित मापदण्डों का पालन नहीं हो रहा है।

? अमिताभ पाण्डेय


1 अक्तूबर : अन्तराष्ट्रीय वृद्ध दिवस पर विशेष आलेख

एक अहम मुद्दा बुजुर्गों के संरक्षण का

        वृद्धावस्था सभी देहधारियों की स्वाभाविक नियति है। जन्म के बाद क्रमशः बाल्यावस्था, किशोरावस्था, युवावस्था, प्रौढ़ावस्था और फिर वृद्धावस्था के सोपान पर पहुंचकर मृत्यु को प्राप्त होना अवश्यम्भावी है। इसे टाला नहीं जा सकता। लेकिन वृद्धावस्था मनुष्य के लिए कष्टप्रद एवं अभिशाप न बने, इसके लिए युवावस्था से ही शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजगता अनिवार्य है।                   

? डॉ. गीता गुप्त


  29 सितम्बर- 2014

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