संस्करण: 29 अक्टूबर-2012

CLICK HERE TO DOWNLOAD HINDI FONT


गडकरी की पूर्ति में गड़बड़ी

फिर खंड-खंड पाखंड

           बसे अलग पार्टी होने का दावा करने वाली भाजपा का पाखंड पर्वत एक बार फिर चूर-चूर हो गया और सबसे शर्मनाक बात रही कि भाजपा के लगातार दूसरे राष्ट्रीय अध्यक्ष पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने के आरोप लगे हैं। पहले थे बंगारू लक्ष्मण जिन्हें अदालत सजा सुना चुकी है और दूसरे नितिन गडकरी,जिन्हें संघ ने विशेष रूप से भाजपा का दायित्व सौंपा था। इसे यह कहना चाहिए कि पार्टी पर थोपा था,क्योंकि पार्टी में कई लोग न तो पहले कार्यकाल में गडकरी को पसंद करते थे और जब दूसरा कार्यकाल सौंपने की बात आई तब भी कई नेताओं ने सवाल खड़े किए थे। लेकिन संघ की धौंस के आगे भला किसी भाजपा नेता की क्या बिसात।

? विवेकानंद


भाजपा पर सवार मोदी मॉडल

        भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने दूसरे भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को 2008 के विधानसभा चुनाव मोदी मॉडल के अनुरूप लड़ने की सलाह दे कर मोदी को पार्टी से ऊपर एक विशेष व्यक्तित्व के रूप में मान्यता दी थी, जो बाद में एक बड़ी भूल साबित हुयी। आखिर ये मोदी मॉडल क्या है!

   

? वीरेन्द्र जैन


गडकरी के आचरण से

भाजपा और संघ परिवार की छवि धूमिल

   राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का जन्म सन् 1925 में हुआ था और जनसंघ (भारतीय जनता पार्टी का पूर्व अवतार) का सन् 1950 में। इन दोनों की प्रतिष्ठा को इतनी करारी चोट कभी नहीं लगी होगी जितनी हाल में लगी है।  हमारे देश में दो ऐसे संगठन हैं जिनसे आपके वैचारिक मतभेद हो सकते हैं परंतु जिनके बारे में सामान्यत:उनके सख्त से सख्त आलोचक भी यह मानते हैं कि उनके सदस्य भ्रष्ट आचरण नहीं करते।ये दो संगठन हैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और साम्यवादी दल। यह पहली बार है कि आरएसएस की राजनैतिक ब्रांच भारतीय जनता पार्टी के शीर्षतम नेता पर इतने गंभीर आरोप लगे हैं जिनकी कल्पना स्वप्न में भी नहीं की जा सकती।

? एल.एस.हरदेनिया


दक्षिण का 'गुजरात'

कर्नाटक में हिन्दुत्व के फैलते डैनों की तरफ एक नज़र  

            र्नाटक भाजपा में व्याप्त आपसी गुटबाजी, एक दूसरे की टांग खींचने में मुब्तिला नेतागण, यहां तक कि पूर्वमुख्यमंत्री येदियुरप्पा द्वारा आनेवाले दिनों में अलग पार्टी बनाने का ऐलान आदि ख़बरों के बीच वहां के सामाजिक जीवन के तानेबाने में पैदा किए जा रहे तनावों या पहले से व्याप्त विषमताओं के अधिक घनीभूत होने की तरफ अधिक ध्यान नहीं दिया जा सका है।  

? सुभाष गाताड़े


बाबा के खिलाफ जांच पर आपत्ति क्यों

       जब से बाबा रामदेव के गुरु को तलाशने का काम सीबीआई को सौंपा गया है, तब से बाबा और उनके सर्मथकों की आवाज कहीं गुम हो गई है। बाबा सर्मथक तो इसे सरकार की साजिश का नाम देने लगे हैं। भाजपा इस वक्त अपने घोटालों को ढंकने में लगी हुई है, वरना उसने भी बाबा राग अलापना शुरू कर दिया होता। रामदेव लंबे वक्त से सरकार के खिलाफ बयानबाजी करते आ रहे हैं, लिहाजा उनके विरुध्द उठाया गया एक कदम भी साजिश नजर आता है। भले ही उसके पीछे र्पयाप्त आद्यार हों। रामदेव के गुरु के अचानक गायब होने की कहानी कोई नई नहीं है, साद्यू मंडली काफी समय से जांच की मांग कर रही है।

 ?   नीरज नैयर


अवैध खनन से खोखला होता मप्र

                  ध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रकृति से सोना, कोयला, बॉक्साइट का अवैध खनन किया जा रहा है और पर्वत काटे जा रहे हैं,जिससे पारिस्थितिकी असंतुलन का खतरा बढ़ गया है। विधानसभा में धर्म धम्म सम्मेलन में मुख्यमंत्री की यह पीड़ा सामने आई है। इस संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि प्रदेश में अवैध खनन किसकी शह पर हो रहा है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने में सरकार बेबस नजर क्यों आ रही है?

? महेश बाग़ी


भून डाला कागज के खोके को

कहते हैं- रावण को मार डाला !

      क प्रश्न अक्सर हवा में गूंजता रहता है कि क्या सचमुच रावण मर गया ? एक उत्तर तो यह निकलता है कि हां भगवान राम के बाण से, सचमुच का रावण जलकर खाक हो गया है। किंतु एक दूसरा प्रश्न ऐसा खड़ा है जिसके उत्तर में हर साल रावण के प्रतीक के रूप में कागज के दस मुखौटे वाला रावण सार्वजनिक रूप से जश्न के साथ जलाया जाता है। इसका मतलब यह हुआ कि जिस रावण के स्वरूप को हर साल बाणों से छन्नी कर दिया जाता है वह देहधारी रावण नहीं है, बल्कि हम उस प्रवृत्ति से आज भी युध्द करते रहते हैं जो दशासन के मरणोपरांत भी चिता से निकल रहे धुआं की तरह ऐसी फैल गई है कि समाज का दम घुटने लगता है।

? राजेन्द्र जोशी


कौन करे पुलिस का सुधार

      पुलिस-सुधार सम्बन्धी अपने आदेश पर छह साल में भी राज्य सरकारों द्वारा अमल न किये जाने की शिकायत से नाराज सर्वोच्च न्यायालय ने आगामी चार दिसम्बर को सभी राज्यों से रपट तलब की है कि इस अवधि में उन्होंने न्यायालय के आदेश का कितना पालन किया।  पुलिस-व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन को लेकर दिये गये इन दिशा निर्देशों का पालन अगर किया गया होता तो निश्चित ही देश की पुलिस की कार्यप्रणाली में अब तक बदलाव आया होता। अफसोस यह है कि साढ़े तीन दशक की अवधि तथा बार-बार न्यायालय के आदेश के बावजूद इस दिशा मे राज्य सरकारों ने कुछ भी नहीं किया।

? सुनील अमर


और कितनी हेमाश्री !

क्या इस सिलसिले का कभी अन्त होगा ?

        र्नाटक फिल्म की चरित्र अभिनेत्री हेमाश्री गत 9 अक्टूबर को सन्दिग्ध हालत में मृत पायी गयी। तीस वर्षीय हेमा का विवाह 51 वर्षीय आर सुरेन्द्र बाबू से 2011 में हुआ था। बताया गया है कि यह विवाह हेमाश्री के परिवारवालों के दबाव में हुआ था। यह बात भी चर्चा में थी कि सुरेन्द्र ने हेमाश्री के माता पिता को काफी पैसे दिए थे, उनकी इस रिश्ते की मंजूरी पाने के लिए। सुरेन्द्र अमीर व्यवसायी था तथा उसकी पृष्ठभूमि आपराधिक थी। वह जनता दल (एस) एच डी देवेगौडा की पार्टी से जुड़ा था। 2009 के संसद के चुनाव में वह उम्मीदवार भी था लेकिन हार गया था।

? अंजलि सिन्हा


आधार तकनीक से

रूकेगा भ्रष्टाचार ?

       संप्रग की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 21 करोड़वां आधार कार्ड उदयपुर जिले के दूदु कस्बे की कालीबाई को सौंप दिया। देश के नागरिकों के लिए अब विशेष व बहूउद्देशीय पहचान पत्र 'आधार' बुनियादी जन सुविधाओं एवं उपभोक्ता को नकद छूट ;सब्सिडीध्द का आधार भी बनता दिखाई दे रहा है। इस कार्ड के मार्फत राजस्थान में सरकारी अनुदान और योजनाओं का लाभ जनता को सीधो देने की शुभ शुरूआत कर दी गई। जाहिर है, यदि इस कार्ड से बिना किसी बाधा के नकद छुट उपभोक्ता के सीधो बैंक खाते में जमा होती है तो भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और सार्वजानिक वितरण प्रणाली के दुरूस्त हो जाने की उम्मीद बढ़ेगी।

    

? प्रमोद भार्गव


खेती में देशी गाय की उपयोगिता

        कृषि पर जलवायु परिवर्तन के संभावित दुष्प्रभावों पर विश्व बैंक द्वारा जारी रिपोर्ट में चेतावनी देते हुए बताया है कि वैश्विक तापमान में हो रही वृद्वि का खामियाजा दक्षिण एशियाई देशों में भारत को सर्वाधिक भुगतना पड़ सकता है यहाँ की कृषि पर इसका बुरा असर पड़ेगा। विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से आंधा्रप्रदेश के किसानों की आय बीस फीसदी तक घट जाएगी, महाराष्ट्र में गन्ना उत्पादन में पच्चीस से तीस फीसदी की गिरावट संभव है तथा उड़ीसा में चावल उत्पादन में बारह फीसदी की गिरावट आएगी।फसल उत्पादन में गिरावट का सीधा असर निश्चित रूप से हमारी अर्थ व्यवस्था पर होगा जिससे देश में गरीबी बढ़ेगी।

? डॉ. सुनील शर्मा


कितना प्रासंगिक है फेलिक्स का पराक्रम?

       जिंदगी और मौत के बीच का फासला कितना कम होता है, यह तो उनसे पूछो, जो मौत सेखेलते हैं। वास्तव में इंसान मौत से जितना ही डरता है, मौत उसके उतने ही करीब आती है, और जितना उससे भिडने के लिए तैयार रहता है, मौत उससे उतनी ही दूर भागती है। 39 किलोमीटर की ऊंचाई से मौत की छलांग लगाना कोई आसान काम नहीं है। लेकिन फेलिक्स ने यह कर दिखाया। इसके पीछे उनका उद्देश्य लोकप्रियता हासिल करना कतई नहीं था। मौत के साथ इस तरह से लडने वालों को दुनिया हमेशा से ही सलाम करती रही है। ऐसे लोग ही इतिहास में अपना नाम और स्थान तय कर लेते हैं। फेलिक्स का यह प्रदर्शन हमेशा याद रखा जाएगा। अपने प्रदर्शन से उन्होंने अपना नाम इतिहास में दर्ज करवा लिया है।

    

? डॉ. महेश परिमल


1 नवंबर को मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर विशेष

मध्यप्रदेश कब उन्नत और खुशहाल होगा ?

        ध्यप्रदेश भारत का 'हृदय प्रदेश' है। जब वर्ष 2000 में विकास के नाम पर वस्तुत: राजनीतिज्ञों की महत्वकांक्षा की पूर्ति हेतु इस प्रदेश को छत्तीसगढ़ से पृथक कर एक अलग राज्य घोषित कर दिया गया तो वह क्षण बहुत पीड़ादायक था। भले ही विभाजन के बाद इस प्रदेश ने 'बीमारू राज्य'  की संज्ञा से मुक्ति तो पा ली परंतु आज भी विकास की दृष्टि से यह अपार संभावनाओं वाला राज्य ही बना हुआ है। इसमें वांछनीय प्रगति नहीं हो पायी है। सरकारी आंकड़े तो विकास दर्शाते हैं परं ज़मीनी हक़ीकत कुछ और है। किसी प्रदेश की प्रगति वहां की शिक्षा-व्यवस्था, सामाजिक और आर्थिक स्थिति, औद्योगिक विकास, स्त्रियों की दशा, कानून-व्यवस्था और सांस्कृतिक चेतना जैसे पैमानों पर आंकी जाती है।

? डॉ. गीता गुप्त


  29 अक्टूबर-2012

Designed by-PS Associates
Copyright 2007 PS Associates All Rights Reserved