संस्करण: 29 अक्टूबर-2012

अवैध खनन से खोखला होता मप्र

? महेश बाग़ी

                 ध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रकृति से सोना, कोयला, बॉक्साइट का अवैध खनन किया जा रहा है और पर्वत काटे जा रहे हैं,जिससे पारिस्थितिकी असंतुलन का खतरा बढ़ गया है। विधानसभा में धर्म धम्म सम्मेलन में मुख्यमंत्री की यह पीड़ा सामने आई है। इस संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि प्रदेश में अवैध खनन किसकी शह पर हो रहा है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने में सरकार बेबस नजर क्यों आ रही है?

                जिस प्रदेश का मुख्यमंत्री अवैध खनन के मामले में इतना बेबस नजर आता हो, क्या उसे सत्ता में बने रहने का अधिकार है? जिस समय शिवराज सिंह अवैध खनन को लेकर चिंता जाहिर कर रहे थे, लगभग उसी समय प्रदेश के अलग-अलग अंचलों में अवैध खनन रोकने गए सरकारी अमलों पर हमले की घटनाएं भी सामने आईं। राजधानी से सटे रायसेन जिले के उदयपुरा में बोरास नदी पर हो रहे अवैध रेत खनन को रोकने जब तहसीलदार जीपी भट्ट पहुंचे तो ट्रैक्टर चालक ने उन्हें ट्रैक्टर से कुचलने की कोशिश की। तहसीलदार तो बाल-बाल बच गए, लेकिन उनके ड्राइवर को मामूली चोटें आईं और जीप क्षतिग्रस्त हो गई। लगभग इसी समय जबलपुर के शहपुरा वन रेंज में एसडीओ के नेतृत्व में गए वन अमले पर खनन माफिया ने हमला किया। खनन माफिया के हौंसले कितने बुलंद हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एसडीओ के नेतृत्व में गए वन अमले को माफिया के गुंडों के सामने गिड़गिड़ा कर जान की भीख मांगनी पड़ी। इसी तरह मुरैना के सबलगढ़ क्षेत्र में एसडीएम अभिषेक सिंह के नेतृत्व में अवैध खनन रोकने गए सरकारी अमले पर भी हमला किया गया। इस हमले में एसडीएम तो बच गए लेकिन उनका वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। खनन माफिया गुर्गों ने उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी। इसके पूर्व खनन माफिया आईपीएस अफसर नरेंद्र कुमार की जान ले चुके हैं। ग्वालियर-चंबल संभाग में हो रहे अवैध खनन को सत्तारूढ़ दल के कतिपय नेताओं का संरक्षण प्राप्त है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में कलेक्टर और एसपी तक पर जानलेवा हमले करने की कोशिश की गई और इसके बावजूद शासन द्वारा कोई कठोर कार्रवाई नहीं की गई। इसी तरह विंध्यांचल के सतना जिले में भी अवैध खनन के मामले सामने आ चुके हैं। दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य यह है कि शिवराज सरकार एक ओर भगवान राम के पदचिन्ह खोजने के काम में जुटी है, वहीं दूसरी ओर इसी सरकार के नुमाइंदे सतना जिले में राम पदचिन्हों को मिटाने में जुटे हुए हैं। यहां सरभंगा आश्रम में भगवान राम के पदचिन्ह सुरक्षित बताए जाते हैं। इसी पहाड़ी की खनिज संपदा पर खनन माफिया की कुदृष्टि पड़ी हुई है और वे इसे दिन-रात खोखला करने में जुटे हुए हैं। धार्मिक दृष्टि से भी यह पहाड़ी आस्था का केंद्र है। इस पर हो रहे अवैध खनन के खिलाफ स्थानीय रहवासियों ने आवाज भी बुलंद की है, किंतु सरकारी संरक्षण के चलते माफियाओं के खिलाफ आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। कभी राम नाम का सहारा लेकर केंद्र की सत्ता पर काबिज होने वाली भाजपा की मध्यप्रदेश सरकार इन माफियाओं के आगे हथियार डाल चुकी है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि अवैध खनन में सत्तारूढ़ दल से जुडे हुए लोग ही शामिल हैं। राजधानी से सटे होशंगाबाद जिले में नर्मदा नदी पर हो रहे अवैध खनन के मामले में तो मुख्यमंत्री के परिजनों के नाम भी सामने आ चुके हैं और मीडिया ने इस संबंध में सप्रमाण समाचार भी दिए हैं। इसके बावजूद सरकार का खामोश रहना इस बात का संकेत है कि अवैध खनन उसकी शह पर हो रहा है। राजधानी से ही सटे विदिशा जिले में अवैध खनन करते हुए मुख्यमंत्री के भाई की जेसीबी मशीन भी जप्त की गई थी।

                 इस मामले में सरकार का रुख क्या रहा, यह इससे समझा जा सकता है कि उक्त कार्रवाई करने वाले अधिकारी का रातोंरात तबादला कर दिया गया। खुद सरकार की नाक के नीचे राजधानी में ही अवैध खनन के मामले सामने आए हैं। राजधानी के प्रमुख अयोध्या नगर में खनिज विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पाया कि जिस ठेकेदार को जिस क्षेत्र में खनन की अनुमति दी गई थी, उस ठेकेदार ने अनुमति के विरुध्द तीन गुना अधिक क्षेत्र में खनन कर डाला। ठेकेदार पर जुर्माने की कार्रवाई भी की गई। इस घटना का शर्मनाक पहलू यह है कि सरकारी सजगता के बावजूद उक्त ठेकेदार आज भी खुलेआम अवैध खनन करने में जुटा है और समूचा शासन-प्रशासन उसके आगे हथियार डाल चुका है। देवास से इंदौर की ओर जाने वाले बायपास मार्ग से सटी विशाल पहाड़ी भी खनन माफिया के हाथों अपना अस्तित्व खो चुकी है। माना जा रहा है कि सत्ता-साकेत में बैठे लोगों के संरक्षण में यह सब हो रहा है। मध्यप्रदेश में अपार खनिज संपदा है, जो सरकारी राजस्व की आय का बड़ा स्रोत भी है। सरकारी संरक्षण में राजस्व की हानि पहुंचाकर अवैध खनन का यह सिलसिला बदस्तूर जारी है। यदि सरकार में जरा सी भी नैतिकता होती, तो ऐसे मामलों को गंभीरता से लेकर खनन माफियाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई करती, किंतु इसे सरकार की नपुंसकता ही कहा जाएगा कि वह ऐसा करने में नाकाम रही है। इसके विपरीत कई मामले ऐसे भी सामने आए हैं, जब सरकार की ओर से खनन माफियाओं का बचाव किया गया। जाहिर है कि सत्ता के संरक्षण में मध्यप्रदेश अवैध खनन करने वालों के लिए स्वर्णभूमि बन गया है।

   ? महेश बाग़ी