संस्करण: 29 अक्टूबर-2012

गडकरी के आचरण से

भाजपा और संघ परिवार की छवि धूमिल

? एल.एस.हरदेनिया

                  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का जन्म सन् 1925 में हुआ था और जनसंघ (भारतीय जनता पार्टी का पूर्व अवतार) का सन् 1950 में। इन दोनों की प्रतिष्ठा को इतनी करारी चोट कभी नहीं लगी होगी जितनी हाल में लगी है।  हमारे देश में दो ऐसे संगठन हैं जिनसे आपके वैचारिक मतभेद हो सकते हैं परंतु जिनके बारे में सामान्यत:उनके सख्त से सख्त आलोचक भी यह मानते हैं कि उनके सदस्य भ्रष्ट आचरण नहीं करते।ये दो संगठन हैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और साम्यवादी दल। यह पहली बार है कि आरएसएस की राजनैतिक ब्रांच भारतीय जनता पार्टी के शीर्षतम नेता पर इतने गंभीर आरोप लगे हैं जिनकी कल्पना स्वप्न में भी नहीं की जा सकती। ये नेता हैं देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी- भाजपा-के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी। यह सर्वज्ञात है कि नितिन गडकरी को इस पद पर स्थापित करने का पूरा श्रेय आरएसएस के वर्तमान सरसंघ चालक मोहनराव भागवत को है। भागवत नागपुर में रहते हैं और नागपुर में ही नितिन गडकरी भी रहते हैं। स्पष्ट है कि भागवत गडकरी को अच्छी तरह जानते होंगे। शायद इसलिए ही उन्होंने गडकरी को भाजपा का अध्यक्ष बनवाया। गडकरी के जो घपले हाल में उजागर हुए हैं वे हाल के नहीं हैं वरन् वर्षों पुराने हैं। क्या भागवत को इनकी जानकारी लंबे समय से नहीं थी? यदि नहीं थी तो इसका अर्थ यह है कि गडकरी के दुर्गुण उनसे छिपे थे। और यदि उन्हें जानकारी थी तो इस नतीजे पर पहुंचा जा सकता है कि इसके बावजूद भागवत ने गडकरी को भाजपा का नेतृत्व सौंपा। अर्थात, भागवत ने गडकरी के इन गुणों(?) की जानकारी होते हुए भी भाजपा का अध्यक्ष बनवाया। इससे यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि संघ को चरित्रवान व्यक्ति नहीं वरन् धनवान बिजनेसमेन अच्छे लगते हैं। चूंकि संघ की पसंद ऐसे व्यक्ति हो गए हैं इसका ही नतीजा है कि भाजपा शासित राज्यों के अनेक मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों के विरूध्द भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। भाजपा के ऐसे मुख्यमंत्रियों के चैम्पियन निकले कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा। यहां यह स्मरण दिलाना प्रासंगिक होगा कि जब येदियुरप्पा के विरूध्द भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे तब गडकरी ने उनका बचाव किया था। गडकरी पर लगे आरोपों के चलते भाजपा से कांग्रेस के भ्रष्टाचार के विरूध्द अभियान चलाने का नैतिक अधिकार छिन गया है। गडकरी के विरूध्द लगाए गए आरोप सही हैं या गलत यह तभी ज्ञात हो सकेगा जब पूरे मामले की बारीकी से उच्चस्तरीय जांच होगी परंतु नैतिक आधार पर संघ और भाजपा को गडकरी से कहना चाहिए कि वे अध्यक्ष पद छोड़ दें। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो इससे संघ परिवार की प्रतिष्ठा पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। भाजपा के एक पूर्व अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण पर भी भ्रष्ट आचरण के आरोप लगे थे परंतु बिना किसी जांच का इंतजार किए लक्ष्मण को अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। यदि गडकरी के मामले में ऐसा नहीं किया जाता तो लोगों को यह कहने से नहीं रोका जा सकेगा कि लक्ष्मण को तुरत-फुरत इसलिए हटा दिया गया था क्योंकि वे दलित थे और गडकरी को इसलिए नहीं हटाया जा रहा है क्योंकि वे उच्च जाति के हैं। लोगों को यह कहने से भी नहीं रोका जा सकेगा कि गडकरी को इसलिए नहीं हटाया जा रहा क्योंकि वे संघ प्रमुख भागवत के लाडले सेवक हैं।

                 यहां यह जानना आवश्यक है कि आखिर गड़बड़ी है क्या? एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गडकरी की कंपनी 'पूर्ति पॉवर एंड शुगर' ने कई घपले किए। इनमें गलत तरीके से पैसे जमा करने से लेकर कंपनी के बारे में दी गई जानकारी फर्जी होना तक शामिल है।

               पूर्ति में सोलह कपंनियों की हिस्सेदारी है। इनके शुरूआती डायरेक्ट गडकरी के ड्राइवर मनोहर पानसे, मुनीम पांडुरंग झंडे पूर्ति के कर्मचारी रहे है। गडकरी के बेटे के दोस्त श्रीपाद कोतवाल और निशांत विजय अग्निहोत्री को भी डायरेक्टर बनाया गया। कंपनियों के दतर का पता फर्जी है। कॉरपोरेट मामलों के मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा है कि इस मामले की जांच कराई जाएगी। खुलासे के बाद भाजपा सांसद राम जेठमलानी ने गडकरी से इस्तीफे की मांग की है। उधर पूर्ति पावर एंड शुगर मिल के एमडी सुधीर दिवे ने माना कि आईआरबी के प्रमोटर डी पी म्हस्कर ने उन्हें 164 करोड़ रूपये का लोन ग्लोबल सेटी विजन के जरिये दिलाया था। उन्होंने कहा कि 'पूर्ति ने 62 करोड़ रूपये लौटा भी दिए हैं। लेन-देन के नियमों की अनदेखी नहीं हुई।'

                 रिपोर्ट में प्रमुख आरोप:

                 n        आइडियल रोड बिल्डर्स (आईआरबी) ग्रुप की कंपनी ग्लोबल सेटी विजन ने गडकरी की कंपनी पूर्ति पावर एंड शुगर को सन् 2010में 164करोड़ रूपये का कर्ज दिया। महाराष्ट्र के पीडब्लूडी मंत्री रहते हुए गडकरी ने आईआरबी को कई ठेके दिलाए थे।

              जब कर्ज दिया गया तब ग्लोबल सेटी विजन का कुल कारोबार ही 145 करोड़ रूपये का था। 49 करोड़ रूपये का घाटा भी था। कंपनी के पास पूर्ति के बिजली के प्लांट, चीनी मिल और जमीन गिरवी हैं। आईआरबी के मालिक डीपी म्हस्कर के पास पूर्ति के 68.40 लाख शेयर हैं।

               n        पांच कंपनियों का पता मुंबई में दुबे की चाल बताया गया है। एक टीवी चैनल के प्रतिनिधिा उस चाल मेें गए। चैनल का प्रतिनिधि चाल के मालिक से मिला। उसने बताया कि जिन कंपनियों के नाम वे ले रहे हैं उन नामों की किसी कंपनी का कार्यालय कभी उस चाल में नहीं रहा। नौ अन्य कंपनियों के पते भी गलत पाए गए। सभी कंपनियों के ई-मेल आईडी एक ही मिला है।

               नितिन गडकरी के पूर्ति ग्रुप में पूर्ति पावर एंड शुगर मिल, पूर्ति एग्रोटेक, महात्मा शुगर एंड पावर लिमिटेड, बेनगंगा शुगर एंड पावर लिमिटेड, और पूर्ति कोआपरेटिव सुपर बाजार शामिल हैं। इस सुपर बाजार द्वारा विदर्भ क्षेत्र में अनेक सुपर मार्केट संचालित किए जा रहे हैं। इन सभी फर्मों में कुल मिलाकर लगभग 1500 लोगों को सीधो रोजगार मिला हुआ है और इतने ही लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से।

               जो व्यक्ति इतनी कंपनियों का मालिक हो वह एक बड़ा उद्योगपति कहलाएगा। इससे क्या यह नहीं कहा जा सकता है संघ प्रमुख भागवत ने एक राजनैतिक कार्यकर्ता के नहीं वरन् एक उद्योगपति को भाजपा का अधयक्ष बनवाया था?

                अब इस उद्योगपति को एक और कार्यकाल देने की तैयारी है। प्रश्न यह है कि इन घपलों के उजागर होने के बाद भी क्या गडकरी को भाजपा अधयक्ष पद का एक और कार्यकाल मिलेगा? क्या संघ और भाजपा को गडकरी कितने धानवान हैं यह उस समय पता नही लगा जब उन्होंने अपने पुत्र के विवाह के स्वागत समारोह में करोड़ों रूपये खर्च किए? इस समारोह में कई हजार लोगों को आमंत्रित किया गया था। देश के कोने-कोने से मेहमान आए थे। दर्जनों विशेष विमान नागपुर विमानतल पर उतरे थे। मेहमानों में राजनीतिज्ञ, उद्योगपति, फिल्मी दुनिया के दिग्गज आदि आए थे।

                  अनेक समाचारपत्रों में छपा है कि भाजपा और संघ में इस बात पर पुनर्विचार हो रहा है कि क्या गडकरी को दूसरा कार्यकाल दिया जाए। वैसे ऊपरी तौर पर भाजपा और संघ की ओर से यह कहा जा रहा है कि गडकरी के विरूध्द लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। परंतु भीतर कुछ और ही हो रहा है। वैसे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और जाने-माने अधिवक्ता राम जेठमलानी ने सार्वजनिक रूप से गडकरी को इस्तीफा देने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि यदि वे ऐसा नहीं करते तो इससे पार्टी की छवि धूमिल होगी।

                 इस दरम्यान कांग्रेस के महासचिव तथा मधयप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने गडकरी पर कारपोरेट फ्राड का आरोप लगया है। सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर यह सुझाव दिया है कि पूरे मामले की जांच कारपोरेट अपराधों की जांच के लिए गठित सीरियस फ्राड इन्वेस्टिगेशन संस्था से कराई जानी चाहिए। सिंह ने अरविन्द केजरीवाल पर भी यह आरोप लगाया है कि वे गडकरी के खिलाफ हल्के-फुल्के आरोप लगाते हैं परंतु उनकी कंपनियों से संबंधित गंभीर आरोपों का उन्होंने कभी जिक्र तक नहीं किया। संघ प्रमुख भागवत से जब गडकरी पर लगाए गए आरोपों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने मात्र यह कहा कि यह सब भाजपा का आंतरिक मामला है। यह अजीब बात है कि भागवत भाजपा के आंतरिक मामलों पर तो चुप्पी साधना बेहतर समझते हैं परंतु कांग्रेस के आंतरिक मामलों पर खूब बोलते हैं। संघ परिवर की आदत है कि स्वयं के लिए उसके मानदंड और हैं तथा दूसरे के लिए कुछ और।                        

? एल.एस.हरदेनिया