संस्करण: 29 जुलाई -2013

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घर में बगावत परदेश में किरकिरी

सत्ता की लालच में छोड़ा आत्मसम्मान

       पिछले दिनों भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह अमेरिका में थे। जब वे अमेरिका जा रहे थे उसके एक दो दिन पहले ही उन्होंने अंग्रेजी भाषा को जमकर कोसा था। उन्होंने अंग्रेजी भाषा पर देश का बेड़ागर्क करने तक का आरोप जड़ दिया। अगर राजनाथ अपनी बात पर कायम रहते तो देश की भाषा के प्रति उनके सम्मान को सलाम भी किया जाता,लेकिन अमेरिका जाकर उन्होंने सबसे पहला समझौता किया और मीडिया के मत्थे नासमझी का दोष मढ़ते हुए कहा कि उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया गया। दूसरी बात गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिका का वीजा न मिलने को लेकर अब तक भाजपा का रवैया रहा है कि मोदी को अमेरिका के सर्टिफिकेट की आवश्यता नहीं है। 

? विवेकानंद


नरेन्द्र मोदी के नाम खुला खत

        प्रिय मोदीजी,

                भाजपा की सर्वोच्च कार्यकारिणी ने आपको चुनाव प्रचार समिति का चेयरमैन चुना है। मैं मानता हूं कि कार्यकारिणी ने उक्त पद के लिए सही चुनाव किया है क्योंकि प्रचार या दुष्प्रचार के लिए आप भाजपा में सर्वोत्तम व्यक्तियों में से एक हैं। पिछले दिनों आप जिस तरह से असली नकली समर्थन और विरोध के सहारे भाजपा और देश की राजनीति के केन्द्र में आये हैं यह लगभग उसी तरह से है जिस तरह कि निरंतर सुर्खियों में बनी रहने वाली राखी सावंत ने तत्कालीन लोकप्रिय बाबा रामदेव से विवाह का प्रस्ताव रख कर उनकी लोकप्रियता में से भी अपनी चर्चा का कुछ हिस्सा चुरा लिया था।

? वीरेन्द्र जैन


मोदी की स्वीकार्यता से भाजपा में बगावत

      गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति का मुखिया बनाकर संघ ने परोक्ष रूप से पार्टी में यह संकेत देने की कोशिश की थी कि अब मोदी ही संघ का एजेंडा पार्टी के मार्फत देशभर में लागू करेंगे। हालांकि संघ की इस मंशा पर पहले तो पार्टी के ही वयोवृध्द नेता लालकृष्ण आडवाणी ने पलीता लगाने की कोशिश की जिन्हें काफी मान-मनव्वल के बाद मनाया गया। संसदीय बोर्ड की बैठक में पार्टी के सभी क्षत्रपों के एक मंच पर आने से भी यह दृष्टिगत हुआ मानो स्थिति अब संघ के हाथों में है। पर क्या वाकई भाजपा में सब ठीक है? 

 ? सिध्दार्थ शंकर गौतम


भ्रष्टाचार के सवाल पर भाजपा को जवाब देना होगा

      सा मालूम होता है कि भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व किसी भी तरह से गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को केन्द्र की सत्ता में पहुंचाने और उन्हे प्रधानमंत्री बनाने के लिए एक हड़बड़ी में जाता हुआ दिख रहा है। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में फंसे कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस युदियुरप्पा को भाजपा में शामिल करने को लेकर जिस तरह से केन्द्रीय नेतृत्व आमादा है वह यह साबित करता है कि आज भी भाजपा के लिए भ्रष्टाचार कोई बड़ा राजनैतिक सवाल नही है।वह भले ही सड़क पर भ्रष्टाचार के सवाल पर बड़ी बड़ी बातें करें लेकिन वह ईमानदारी से इसे दूर करने को प्रतिबध्द कतई नही दिखती है।

? हरे राम मिश्र


भाजपा की छद्म नैतिकता का अनावरण

         ध्यप्रदेश में आगामी नवंबर 2013 में विधानसभा चुनाव के लिये दस वर्षों से राज्य में सत्ता से बाहर कांग्रेस जहाँ अपनी ताकत और जनसमर्थन का प्रदर्शन करने मे एकजुट हो गई है,वही सत्तारूढ़ भाजपा अपनी तीसरी पारी के लिये अपने कथित सिध्दान्तों और मूल्यों की भी बलि चढ़ाने में कोई परहेज नही कर रही है। प्रदेश मे कांग्रेस के पास खोने को कुछ नही है और यही भाजपा की सबसे बड़ी मुश्किल है।  

 

 ?   जे.पी. शर्मा


सत्ताधारी पार्टी की कमजोरी के कारण उत्तर प्रदेश में चुनाव की दिशा का कोई पता नहीं

           त्तर प्रदेश में लोकसभा के चुनाव अगले साल होने वाले हैं लेकिन माहौल में बदलाव की हवा अभी से दिख रही है। अभी यह तो अंदाज नहीं है कि जनता के बीच कौन सबसे ज्यादा लोकप्रिय है लेकिन यह साफ है कि 2012के विधान सभा चुनाव में जिस पार्टी की तरफ जाति बिरादरी का बंधन छोड़कर बड़ी संख्या में लोग थे ,वह पार्टी अब लोकप्रियता के पायदान पर बहुत नीचे है,समाजवादी पार्टी को अपनी जीत को दोहराने के लिए बहुत कुछ करना पडेगा। बीजेपी की हालत वैसी ही  है जैसी पहले थी यानी बीजेपी के साथ बहुत लोग नहीं नजर आते ।  

? शेष नारायण सिंह


मोहन भागवत जी बांटने वाले नारों को उछालने से बाज आएं

      राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी की ओर से फिर देश को बांटने वाले नारे दिये जाने लगे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी प्राय:चुनाव के पूर्व ही इस तरह के नारे देती हैं। शायद उनकी सोच है कि इस तरह के नारों से मतदाताओं का धुव्रीकरण होगा और फिर उसका लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिलेगा। अभी हाल में संघ ने जो नारे दिये हैं उनमें उनने कहा है कि हिन्दुत्व से ही भारत का उध्दार होगा। हिन्दुत्व से ही देश की समस्याओं का हल होगा। पटना में दिये गये एक भाषण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि साधारणत:एकता का आधार एकरूपता (यूनिफारमिटी)होता है। 

? एल.एस.हरदेनिया


दक्षिण एशिया में एक नज़ीर

बांगलादेश : इन्सानियत के खिलाफ

अपराधों के लिए दण्ड

      हा जाता है कि अपने आप को अजेय माननेवाले महारथी अनपेक्षित ढंग से शिकस्त पाते हैं।

              इन दिनों बांगलादेश की राजधानी ढाका के जेल में अपनी एकांत कोठडी में बैठे बांगलादेश की जमाते इस्लामी के शीर्षस्थ नेता रहे गुलाम आज़म यही बात सोच रहे होंगे। नब्बे की उम्र पार कर चुके गुलाम आज़म को इन्सानियत के खिलाफ अपराधों के लिए 90 साल का दण्ड दिया गया है। मालूम हो कि 1971में जब तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान की जनता पाकिस्तानी शासकों के खिलाफ आजादी की मांग के साथ उठ खड़ी हुई थी , तब गुलाम आज़म ने जनता का नहीं बल्कि पाकिस्तान की फौज का साथ दिया था।

? सुभाष गाताड़े


अपराधों पर नियंत्रण नहीं, दिन दहाड़े टूट रहे ताले

बालकवि बैरागी को भी नहीं बख्शा

        म्राट अशोक के साम्राज्य में चोरी, चबाड़ी, लूट, डकैती जैसे क्राइम्स की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। कहा जाता है कि अशोक के साम्राज्य में अपना सूना घर छोड़कर लोग जब कभी भी बाहर जाया करते थे तो उन्हें अपने घर में ताला डालने की जरूरत नहीं पड़ती थी। लोगों को अपने समाज पर इतना अधिक भरोसा और विश्वास था कि उन्हें समाज के लोगों से किसी तरह के अपराध की उम्मीद नहीं हुआ करती थी। जो भारत उस दौर में था वही भारत आज भी है। किंतु भारत के सामाजिक परिदृश्य में इस कदर गिरावट आ जायगी इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता। 

? राजेन्द्र जोशी


कम होगा अब तेजाब का अज़ाब

       हिलाओं पर तेजाबी हमलों के बढ़ते मामलों को हमारे देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। हाल ही में एक मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने इन हमलों को रोकने और तेजाब की बिक्री के लिए सरकार को नए दिशा-निर्देश जारी किए है। इन दिशा-निर्देशों के मुताबिक अब तेजाबी हमला गैर जमानती अपराध माना जाएगा। तेजाबी हमला करने वालों पर प्वाइजन एक्ट, 1919 के मुताबिक तब तक मुकदमा चलाया जाएगा, जब तक कि उसे कड़ी सजा न मिल जाए। यही नहीं सरकार को पीड़िता को तीन लाख रुपये की राशि बतौर मुआवजा देना होगी। तीन लाख रुपए की मुआवजा राशि में से एक लाख रुपए का भुगतान हमले को राज्य सरकार के संज्ञान में लाए जाने के पन्द्रह दिनों के भीतर देना होगा।    

 

? जाहिद खान


तम्बाकू कम्पनियों पर लगाम बहुत ज़रूरी

        म्बाकू का जहर तकरीबन पूरे भारत में फैला हुआ है और इसका इस्तेमाल करने वालों की तादाद बढ़ रही है। दुनिया भर के छियासठ प्रतिशत पुरुष और चालीस प्रतिशत महिलाएं किसी न किसी रूप में तम्बाकू का प्रयोग करते हैं। तम्बाकू का जहरीला नाग हर रोज भारत में सताईस सौ जिंदगियां डस लेता है। पूरी दुनिया में साल भर में चौवन लाख और भारत में नौ लाख लोग तम्बाकू के कारण समय से पहले चल बसते हैं। तम्बाकू के कारण विश्व भर में सबसे यादा मौतें भारत में होती हैं। मुंह के कैंसर के सबसे यादा मामले भी भारत में ही पाए जाते हैं।

? राखी रघुवंशी

संदर्भ :- शीर्ष न्यायालय द्वारा नीट को असंवैधानिक ठहराना

प्रवेश में रुकावट

      खिर सर्वोच्च न्यायालय ने चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश के लिए शुरु हुई साझा तथा एकल परीक्षा को असंवैधानिक ठहरा दिया। शिक्षा कारोबारियों के कुचक्र से मुक्ति के उपाय के रुप में एनइइटी (नीट)यानी राष्टीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा को वजूद में भारतीय चिकित्सा परिषद् एमसीआई लाई थी। परीक्षा की जवाबदेही भी इसी संस्था ने संभाली थी। इस एकल परीक्षा के परिप्रेक्ष्य में परिषद का उद्देश्य था कि छात्र विभिन्न राज्यों एवं महाविद्यालयों की कई-कई परीक्षा देने से बच जाएं। चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रवेश के एक समान मानदण्ड निर्धारित हो जाएं।

? प्रमोद भार्गव


आम आदमी के सशक्तिकरण की राह-रोजगार गारण्टी से भोजन का अधिकार

        केन्द्र की यूपीए सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कानून द्वारा महात्मा गॉधी रोजगार गारण्टी योजना लागू देश भर में मजदूरों के सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की क्रांतिकारी शुरूआत की थी,इसके जरिए वंचित और शोषित वर्ग के ऐसे लोगों को काम मिला जो गॉव में सिर्फ एक वक्त की रोटी मिलने पर सारा दिन मुफ्त में काम करते थे,गरीब महिलाएॅ मात्र एक पुरानी साड़ी या फिर बच्चों को पुराने कपड़े और रोजाना चार रोटी  के नास्ते में महिने भर जमींदारों के घरों में जानवरों का गोबर साफ करती थीं।रोजगार की गारण्टी ने काम के अभाव में पलायन की स्थिति को भी कम किया है अब लोगों को घर के आसपास ही काम मिलने से शहर की गंदी खोल और हर समय असुरक्षा के बोध से छुटकारा मिला है।

? डॉ. सुनील शर्मा


ग्लोबल हुई भगवद् गीता

       श्चिम के देशों में आज मैनेजमेंट की पुस्तकों और वेबसाइट्स पर भगवद् गीता के श्लोकों को समावेश करने का एक नया ही फैशन चल पड़ा है। अमेरिका की सभी उच्च बिजनेस स्कूलों के मैनेजर अपनी नेतृत्व क्षमता के विकास के लिए और काम के दबाव के बीच अपनी आत्मिक शक्ति के संचरण के लिए गीता का सहारा ले रहे हैं। इसके लिए कई लोग क्लासेस भी चला रहे हैं। कई भारतीय विद्वान अब इसी काम में लग गए हैं। भारत के सी.के. प्रह्लाद, रामचरण और विजय गोविंदराज जैसे बिजनेस गुरु आज अनेक मल्टीनेशनल कंपनियों के कंसल्टेंट हैं। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल, केलोग्स स्कूल ऑफ बिजनेस, मिशीगन यूनिवर्सिटी की रोस स्कूल ऑफ बिजनेस आदि के भारतीय मूल के प्रोफेसरों की काफी संख्या में नियुक्ति की गई है। ये सभी भगवद् गीता के तत्वज्ञान के आधार पर शिक्षा दे रहे हैँ। यह सच्चई ही साबित कर रही है कि गीता का तत्वज्ञान आज भी प्रासंगिक है।   

 

? डॉ. महेश परिमल


  29 जुलाई -2013

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