संस्करण: 29 अगस्त- 2011

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क्या उमा भारती पुनर्मूशको

भव गति को प्राप्त हो गयी हैं?

            पंचतंत्र की एक कहानी है जिसे अटल बिहारी बाजपेयी अक्सर चुनावों के समय सुना कर जनता का आवाहन करते थे कि आप लोगों ने ही कांग्रेस को शेर बनाया है और अब आप लोग ही उसे फिर से चूहा बना दीजिए। कहानी यह है कि एक बाबाजी को दिव्य शक्तियां प्राप्त थीं। एक दिन उनके आश्रम में एक बीमार चूहा आकर गिरा तो उन्होंने उसे उठाकर पानी पिलाया और कुछ दाने दिये।

  ? वीरेन्द्र जैन


बाबूलाल गौर कहते हैं कि मध्यप्रदेश भी भ्रष्ट राज्यों की सूची में है!

     पिछले कुछ दिनों में मध्यप्रदेश में कुछ ऐसी घटनायें हुई हैं जिनसे प्रदेश की राजनैतिक, कानून-व्यवस्था और परिवहन के क्षेत्रों से संबंधित अनेक प्रश्न खड़े हो गए हैं। राजनैतिक क्षेत्र में प्रदेश में दो घटनायें हुर्इं। इनमें से पहली घटना का संबंध प्रदेश की भाजपा मंत्रिपरिषद के दो वरिष्ठ सदस्यों द्वारा की गई टिप्पणियां हैं।

? एल.एस.हरदेनिया


सरकारी बेबसी का भयावह दुष्परिणाम

      ध्यप्रदेश में परिवहन सेवा की बदहाली का भयावह दुष्परिणाम सामने आया है। सेंधवा के पास सवारी बैठाने के विवाद में एक बस के चालक-परिचालक ने दूसरी बस पर पेट्रोल डाल कर आग लगा दी। आग लगाने से पहले उक्त बस के दरवाजे बंद कर दिए गए थे। इस कारण बस यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई और उपयात्री घायल हो गए,जिनमें से कुछ की हालत गंभीर है। इस कांड ने प्रदेश की परिवहन व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

? महेश बागी


जन लोकपाल विधेयक

लोकपाल (भ्रष्टाचार) से ज्यादा जरूरी राष्ट्रवाद

    लोकपाल बिल आना चाहिए, इससे किसी को इनकार नहीं है। लेकिन इससे पहले हमें यह देखना होगा कि देश की संप्रभुता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए सबसे बड़ा मुद्दा कौन सा है। सरकार की तानाशाही,भ्रष्टाचार और इसी तरह की शासकीय स्तर पर होने वाली अवांछनीय गतिविधियों को रोकने के लिए तो देश में ढेर सारे कानून मौजूदा है,इनमें कई की शक्तियां राज्यों के पास है और कई एजेंसियां केन्द्र सरकार के अधीन कार्य कर रही हैं।

? विभा पटेल


गुजरात में नियम-कानून का

राज या दहशत का

    मारे मुल्क में पुलिस प्रशासन और पुलिसवाले अक्सर नकारात्मक वजहों से चर्चा में रहते हैं। मीडिया में आए-दिन ऐसी खबरें आती रहती हैं,जिसमें पुलिस का असंवेदनशील और बर्बरतापूर्ण चेहरा ही सामने आता है। ऐसी घटनाएं विरले ही होती हैं,जब पुलिस सकारात्मक वजहों से चर्चा में हो। सूबा गुजरात के तीन पुलिस अफसर आज-कल अलग-अलग वजह से चर्चा में हैं।

 

? जाहिद खान


एक चिट्ठी मुख्यमंत्री के नाम....

   मुख्यमंत्री जी,

               सड़कें विकास की पहचान होती है। देश ही नहीं, राज्य का विकास भी सड़कों के माध्यम से आता है। सड़कें राज्य की भाग्यविधाता होती हैं। सड़कों पर चलकर ही नागरिक विकास की दिशा प्राप्त करते हैं। आज राज्य की सड़कों की हालत देखकर यह कहा जा सकता है कि राज्य विकास नहीं कर रहा है,बल्कि वह अधोगामी हो गया है। राज्य में सड़कें हैं या नहीं,यह एक शोध का विषय हो सकता है।

 

? डॉ. महेश परिमल


भोपाल में आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद की हत्या :-

जान जोखिम में डालती जानकारी

       भ्रष्टाचार की भंडाफोड़ कोशिशें जानलेवा साबित हो रही हैं। भोपाल की आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद की हत्या से पूरे देश में सूचना के अधिकार के तहत जानकारियां लेने की जोखिम उठा रहे कार्यकर्ता हैरान हैं। इस कानून के लागू होने से लेकर अब तक 17आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या की जा चुकी है। बीते छह माह में ही छह कार्यकर्ताओं को मौत की नींद सुला दिया गया। मसलन प्रत्येक माह एक कार्यकर्ता को मौत के घाट उतारा गया।

? प्रमोद भार्गव


सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों और केन्द्र से जवाब मांगा !

अ.जा. ज.जा. के क्रीमी लेयर को आरक्षण क्यों ?

    भारत के सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति और जनजाति के आरक्षण के मामले में केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों से जवाब मांगा है कि क्यों न इन वर्गों के 'क्रीमी लेयर' (सम्पन्न तबके) को इन वर्गों के लिए घोषित आरक्षण के दायरे से बाहर रखा जाय। अनेक उदाहरण ऐसे सामने आये हैं कि इन वर्गों के निचले वर्ग के लोगों के लिए घोषित सुविधाओं का फायदा उस वर्ग के लोगों के बजाय संपन्न तबके के लोगों को अधिक मिल रहा है।

? राजेन्द्र जोशी


इस सरकारी झूठ का क्या उपाय है?  

     त्तर प्रदेश की सड़कों से आप गुजरिये तो बहुत से स्थानों पर प्रदेश के सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा लगाये गये बोर्ड आपको दिख जाएगें जिन पर लिखा हुआ है-''यह मार्ग भारत सरकार का है। इसके मद में भारत सरकार धन नहीं दे रही है जिससे लोगों को आवागमन में असुविधा हो रही है।''यह बोर्ड राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगाये गये हैं जिनके रख-रखाव के लिए केन्द्र सरकार प्रदेश सरकार को धन देती है।

? सुनील अमर


कृषि विकास से मँहगाई और
कुपोषण से छुटकारा   

    देश का हर आदमी बढ़ती मॅहगाई से त्रस्त है। खाद्यान्न और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्वि हो रही है। जिससे भुखमरी और कुपोषण का दावानल लगातार बढ़ रहा है,आम और मध्यमवर्गीय नागरिक रोटी की जद्दोजहद में घनचक्कर बन गया है लेकिन रोटी लगातार उसके पहुॅच से बाहर होती जा रही है। सुपोषण की बात भी हवा सी हो गई है,क्योंकि विटामिन देने वाली हरी सब्जी और फल अब मध्यमवर्ग के बटुए की क्षमता की बाहर की बात है। 

? डॉ. सुनील शर्मा



5 सितम्बर  शिक्षक दिवस पर विशेष

दूसरा सर्वपल्ली राधाकृष्णन क्यों नहीं ?

     वेद के शिक्षानुसार माता-पिता और आचार्य देवतातुल्य माने जाते हैं। भारत में अनेक प्रसिध्द आचार्य हुए, जिनकी ख्याति समूचे विश्व में फैली। सर्वपल्ली राधाकृष्णन उनमें से एक हैं। दर्शनशास्त्र के एक महान शिक्षक के रूप में अन्तरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त करने वाले राधाकृष्णन की प्रतिभा ने उन्हें राष्ट्रपति के रूप में भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर सुशोभित होने का सौभाग्य प्रदान किया।

? डॉ. गीता गुप्त



  29 अगस्त-2011

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